कई सीटों पर जिलाध्यक्ष और स्थानीय नेता तक सांसदों के खिलाफ...

भाजपा में नए चेहरों की तलाश, इनके कटने वाले हैं टिकट!


भोपाल। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से कमजोर पड़ने के बाद अब भाजपा लोकसभा चुनाव में गलती नहीं दोहराएगी। बताया जाता है कि मप्र में लोकसभा चुनाव प्रभारी स्वतंत्र देव सिंह की ओर से पिछले हफ्ते हाईकमान को मौजूदा सांसदों से जुड़ी भेजी गई रिपोर्ट ने भाजपा में हडकंप मचा दिया है।

जिसके बाद अब पार्टी ने खराब परफॉर्मेस, क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों के आधार पर लगभग एक दर्जन सीटों पर मौजूदा सांसदों के टिकट काटने, सीट बदलने की तैयारी कर ली है।

भले ही अभी इन सीटों पर नए चेहरों को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। लेकिन चर्चा है कि पार्टी अभी स्थानीय नेताओं से फीडबैक लेकर दावेदारों की सूची तैयार कर रही है। जिसे हाईकमान के पास भेजा जाएगा। इसके बाद टिकट चयन होगा।

दरअसल मप्र में लोकसभा चुनाव प्रभारी स्वतंत्र देव सिंह ने पिछले हफ्ते हाईकमान को भेजी मौजूदा सांसदों से जुड़ी रिपोर्ट में करीब एक दर्जन सीटों पर चेहरा बदलने की सिफारिश की। लेकिन उन्होंने रिपोर्ट में संभावित दावेदारों के नाम नहीं भेजे।

इसमें हाईकमान की ओर से कहा गया है कि जिन सीटों पर टिकट काटा जाना है,उन सीटों पर दावेदारों के नाम तय करें। वहीं पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे की रिपोर्ट से भी इस रिपोर्ट का मिलान होना है।

ऐसे में माना जा रहा है अगले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि भाजपा कितने सांसदों का टिकट काटेगी। वहीं जिन सीटों पर चेहरा नहीं बदलना है, वहां जल्द ही प्रत्याशी घोषित किए जा सकते हैं।

 

 

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इन सीटों पर चेहरा बदलना तय!...
विदिशा, बैतूल, खजुराहो और देवास में नया उम्मीदवार उतारना तकरीबन तय माना जा रहा है। क्योंकि विदिशा सांसद सुषमा स्वराज चुनाव लडऩे से इंकार करा चुकी है। बैतूल सांसद का जाति प्रमाण पत्र अमान्य हो चुका है। देवास और खजुराहो सांसद विधायक बन चुके हैं।

इनके भी काटे जा सकते हैं टिकट...
इंदौर सांसद सुमित्रा महाजन का इस बार टिकट काटा जा सकता है। चर्चा है कि उन्हें केंद्र में सरकार आने पर राज्यपाल बनाने का भरोसा देकर मनाने की तैयारी है। वहीं वर्तमान में ग्वालियर के सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर मुरैना से चुनाव लड़ सकते हैं। इसके अलावा सागर, बालाघाट, सतना, शहडोल, उज्जैन, राजगढ़, मंदसौर, धार, सीधी, भिंड सांसदों के टिकट काटे जा सकते हैं।

15 सांसदों का विरोध, शाह को जाएगी रिपोर्ट...
राजधानी भोपाल में शुक्रवार को हुई प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में जमकर खींचतान हुई। कई सीटों पर जिलाध्यक्ष और स्थानीय नेता तक सांसदों के खिलाफ दिखे। करीब 15 सीटों पर नेता वापस सासंद दोहराने के मूड में नही दिखे।

बैठक में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, गणेश सिंह समेत कई बड़े नेता का विरोध रहा।पार्टी ने इस पर रिपोर्ट तैयार कर ली है जो आज केंद्रीय नेतृत्व में होने वाले चुनाव समिति की बैठक के समक्ष रखी जाएगी।

खबर है कि बैठक में नाम फायनल होने पर एक दो दिन में बीजेपी एमपी समेत देश भर में करीब 150 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की जा सकती है। बताया जाता है कि बैठक में करीब 15 सीटों पर निगेटिव फीडबैक मिला है, जिसमें स्थानीय नेता सांसदों के खिलाफ दिखे।

इस बैठक में मिले फीडबैक की रिपोर्ट अमित शाह को दी जाएगी। आज दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक बुलाई गई है।

बैठक में इस तमाम बातों को रखा जाएगा और फिर केंद्रीय चुनाव समिति इस पर अंतिम फैसला लेगी।बैठक में लोकसभा वार एक-एक सीट को लेकर रणनीति बनायी जाएगी।

भाजपा कार्यालय में हुआ मंथन... 
लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन और चुनावी रणनीति को लेकर प्रदेश भाजपा कार्यालय में शुक्रवार को दिन भर मंथन चला। भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर,नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और संगठन महामंत्री सुहास भगत ने अलग-अलग समय में अलग-अलग संसदीय क्षेत्र के पार्टी नेता व दावेदारों से चर्चा की। वहीं यहां दिन भर दावेदारों का मेला लगा रहा।

भोपाल लोकसभा सीट के कई दावेदार...
बैठक में भोपाल को लेकर भी चर्चा हुई। आलोक संजर का कई नेताओं द्वारा विरोध किया गया। जिसके चलते पार्टी द्वारा यहां से प्रत्याशी को बदलने की कवायद तेज है।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता पहले ही यहां से दावेदारी ठोक चुके हैं। वहीं बताया जाता है कि महापौर आलोक शर्मा और प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा भी जोर लगा रहे हैं। शुक्रवार को पूर्व विधायक रमेश शर्मा, ध्रुवनारायण सिंह, शैलेंद्र प्रधान और जितेंद्र डागा ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर दी।



   


भोपाल-इंदौर-जबलपुर में से एक सीट चुनने का फैसला, सिंधिया और दिग्विजय की सीट पर एक राय नहीं

हरीश दिवेकर, भोपाल. प्रदेश में लोकसभा चुनाव के टिकट के लिए शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 15 सीटों के नामों को हरी झंडी दे दी है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की सीट को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। टिकटों के बारे में मुख्यमंत्री कमलनाथ की राय को प्रमुखता दी जा रही है। सिंधिया अपनी परंपरागत सीट गुना को छोडकऱ ग्वालियर जाना चाहते हैं, जबकि दिग्विजय सिंह की दिलचस्पी राजगढ़ सीट पर बनी हुई है।


सिंधिया समर्थक रामनिवास रावत को मुरैना सीट से उतारने पर सहमति बनी है। दिग्गिज नेताओं में कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव, अजय सिंह, राजेंद्र सिंह और मीनाक्षी नटराजन की सीटों पर भी मुहर लग गई है। छिंदवाड़ा से नकुल नाथ का नाम तय है। होली से पहले कांग्रेस पहली सूची जारी कर सकती है।

अजय सिंह सीधी, प्रमिला सिंह शहडोल और सुंदरलाल के बेटे सिद्धार्थ तिवारी रीवा सीट से होंगे उम्मीदवार
ऐसे चलती रही सीटों पर चर्चा प्रदेश की 29 सीटों पर टिकट तय करने के लिए दोपहर में पहले स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में नामों पर करीब तीन घंटे चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ दौरे से लौटने के बाद देर शाम राहुल गांधी ने केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक ली। यह बैठक 25 मिनट चली।

इसमें 15 सीटों पर सहमति दिखी। दिग्विजय सिंह और सिंधिया की सीट को लेकर ज्यादा देर तक चर्चा हुई। सिंधिया ग्वालियर चाहते थे, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ इसके पक्ष में नहीं दिखे। सीएम का कहना था कि ग्वालियर सीट दी जाती है तो गुना सीट हाथ से निकल सकती है। दिग्विजय के बारे में कमलनाथ ने राय दी कि इंदौर, जबलपुर और भोपाल जैसी सीटों को दिग्विजय ही जिता सकते हैं। सीट तय करने का फैसला उन पर ही छोड़ दिया गया। उधर, सुंदर लाल तिवारी के निधन के चलते रीवा से उनके बेटे सिद्धार्थ तिवारी के नाम पर सहमति बनी।

भोपाल-इंदौर-जबलपुर और ग्वालियर होल्ड
कांग्रेस ने फिलहाल 14 सीटें होल्ड की हैं। इनमें राजगढ़, भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर सीट भी शामिल हैं। शुक्रवार को इन चारों सीटों के अन्य नामों पर कोई चर्चा नहीं हुई।

बैठक में इन नामों पर हरी झंडी
खंडवा अरुण यादव
सीधी अजय सिंह
छिंदवाड़ा नकुल नाथ 
सतना राजेंद्र सिंह
रीवा सिद्धार्थ तिवारी

मंडला कमल मरावी
देवास प्रहलाद टिपानिया
मुरैना रामनिवास रावत
खजुराहो कविता सिंह
सागर प्रभु सिंह ठाकुर

बालाघाट मधु भगत
बैतूल रामु टेकाम
शहडोल प्रमिला सिंह
झाबुआ कांतिलाल भूरिया
मंदसौर मीनाक्षी नटराजन

भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला मीडिया प्रभारी संजय शर्मा ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी  जिला अध्यक्ष श्री सुशील रघुवंशी जीके निर्देशानुसार भारतीय जनता पार्टी     जिला उपाध्यक्ष एवं युवा मोर्चा प्रभारी श्री हेमंत ओझा जी के मार्गदर्शन में एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा जिलाअध्यक्ष मुकेश सिंह चौहान जी के नेतृत्व में भारतीय जनता युवा मोर्चा की जिला बैठक कल 17 मार्च 2019 को समय दोपहर 12:00 बजे स्थान ग्वालियर बायपास ऑफ़िस पर किया जा रहा है इस बैठक में जिला के समस्त पदाधिकारी एवं मण्डल के अध्यक्ष एवं महामंत्री अनिवार्य रुप से उपस्थित रहे बैठक का उद्देश्य हर बूथ पर दस युवा सक्रियता से कार्य करेंगे भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष श्री मुकेश सिंह चौहान जी के नेतृत्व में हम प्रत्येक बूथ पर प्रत्येक मतदान केन्द्र पर हम ऐसे युवा तैयार करेंगे जो देश की सुरक्षा, संस्कृति, सभ्यता अमन शान्ति के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को पुनः भारत का प्रधानमंत्री बनाने के लिये युवाओ में हुंकार भरेन्गे और प्रत्येक मण्डल में युवा हुंकार सम्मेलन का आयोजन करेंगे|युवाओ ने ठाना है, मोदी जी को पुनः लाना है | मोदी है तो मुमकिन है | देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश का मान, देश का गौरव, युवाओ की शान को बढ़ाया है|ऐसे भारत माता के सच्चे सपूत श्री नरेन्द्र मोदी जी को में बारम्बार प्रणाम करता हूँ| भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय अभिलाष पांडेय जी दिन-रात युवाओ के बीच सोशल मीडिया के माध्यम से एवं युवाओ के चहुंमुखी विकास के लिये निरंतर प्रयासरत हैं प्रदेश में 18मार्च को होने वाली प्रदेश बैठक में आने वाले विषयो पर 17 मार्च को जिला बैठक में बिन्दुवार युवा संवाद किया जायेगा|

खजुराहो सीट से दावेदारी कर रही ललिता यादव नरेंद्र सिंह तोमर से मिली और हाथ जोड़कर टिकट मांगा।


 

 

केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार, गणेश सिंह समेत कई बड़े नेता लपेटे में


भोपाल मेंसांसद आलोक संजर भी झेल रहे हैं विरोध, कई दावेदार सामने आए


भोपाल.लोकसभा सीटों पर हार-जीत का आंकलन करने के लिए पहली बार भाजपा ने पांच टीमें बनाकर 29 सीटों की रिपोर्ट ली। इसमें विधायकों और जिलाध्यक्षों के साथ स्थानीय नेताओं ने मौजूदा सांसदों का जमकर विरोध किया। इसमें केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, गणेश सिंह समेत कई बड़े नेता लपेटे में आ गए। भाजपा के खाते में मप्र की 29 में से 26 सीटें हैं। इसमें से 16 सीटों पर मुखालफत सामने आई है। पार्टी यह रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष भेजेगी।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश चुनाव समिति के सदस्यों को मौके पर यानी लोकसभा सीटों पर भेजकर राय-मशविरा किया था, लेकिन इस बार इसके लिए लोकसभा सीटों से जुड़े नेताओं को भोपाल बुला लिया गया। बहरहाल, सीट-वार फीडबैक लेने वाली पांच टीमों में एक प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, दूसरी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, तीसरी केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, चौथी संगठन महामंत्री सुहास भगत व नरोत्तम मिश्रा तथा पांचवी टीम राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की रही।

19 मार्च को प्रदेश चुनाव समिति की बैठक होगी, लिहाजा इससे पहले ही सभी 29 सीटों का फीडबैक राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेजा जाएगा। शाम को राष्ट्रीय महासचिव अनिल जैन ने लोकसभा चुनाव प्रबंध समिति की टीम के साथ अलग से बैठक की। 22 मार्च काे केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में मप्र के कुछ नाम तय हो जाएंगे।

सांसद आलोक संजर का विरोध :

सांसद आलोक संजर भी विरोध झेल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता पहले ही दावेदारी ठोक चुके हैं। महापौर आलोक शर्मा और प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा भी जोर लगा रहे हैं। शुक्रवार को पूर्व विधायक रमेश शर्मा, ध्रुवनारायण सिंह, शैलेंद्र प्रधान और जितेंद्र डागा ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर दी। भोपाल के नेता आरएसएस के समिधा कार्यालय से लेकर राजनाथ सिंह, एम वैंकेया नायडू और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल तक बात रख चुके हैं।

ये 4 सवाल पूछे.- कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी की छवि कैसी

1. मौजूदा सांसद के बारे में क्षेत्र में माहौल कैसा है?

2. यदि हार रहा है तो अपना नाम छोड़कर बताओ कि दमदार विकल्प कौन होगा और उसकी स्थिति कैसी रहेगी?

3. जातिगत समीकरण, युवाओं और किसानों के बीच असरदार कौन रहेगा? बसपा से प्रत्याशी कौन हो सकता है?

4. कांग्रेस का नाम कौन सा है, जो प्रत्याशी हो सकता है, उसकी छवि और पकड़ कैसी है?

Surgical Strike 3: अब म्यांमार सीमा पर आतंकी ठिकाने ध्वस्त


राजनाथ ने कहा था तीन सर्जिकल स्ट्राइक हुए हैं, तीसरे का नाम नहीं बताया था

नई दिल्ली : भारतीय सेना ने म्यांमार सीमा पर मौजूद आतंकियों के ठिकाने ध्वस्त किए हैं। जिस समय देश और दुनिया का ध्यान पुलवामा आतंकी हमला और उसके जवाब में भारतीय वायुसेना की पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित जैश-ए-मुहम्मद के ठिकानों पर किए गए हवाई हमले पर टिका है उसी समय भारतीय सेना ने पूर्वी सीमा पर भी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर अपने अदम्य साहस का परिचय दिया है। बालाकोट में हुई कार्रवाई के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह एक रैली में कह चुके हैं कि तीन सर्जिकल स्ट्राइक हुए हैं। उन्होंने कहा था कि तीसरा कौन है यह वह नहीं बताएंगे।

भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना के साथ मिलकर आतंकी ठिकानों के खिलाफ अभियान को अंजाम दिया है। दोनों देशों की सेनाओं ने 17 फरवरी से दो मार्च के बीच पूर्वोत्तर के लिए महत्वपूर्ण मेगा बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए खतरा बन रहे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की। परियोजनाओं को म्यांमार में सक्रिय उग्रवादी समूह से खतरा था।

म्यांमार का विद्रोही समूह अराकान आर्मी ने मिजोरम सीमा पर नए ठिकाने बनाए थे। यह संगठन कलादान परियोजना को निशाना बना रहा था। अराकान आर्मी को काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी द्वारा नॉर्थ बॉर्डर चीन तक ट्रेनिंग दी गई थी। सूत्रों के अनुसार, विद्रोहियों ने अरुणाचल से सटे क्षेत्रों से मिजोरम सीमा तक की 1000 किमी की यात्रा की।

पहले चरण में मिजोरम सीमा पर नवनिर्मित शिविरों को ध्वस्त करने के लिए बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान शुरू किया गया था, जबकि ऑपरेशन के दूसरे भाग में टागा में एनएससीएन (के) के मुख्यालय को निशाना बनाया गया और कई शिविरों को नष्ट कर दिया गया।

सूत्रों ने बताया कि रोहिंग्या आतंकी समूह अराकान आर्मी और नागा आतंकी समूह एनएससीएन (के) के खिलाफ दो सप्ताह लंबा संयुक्त भारत-म्यांमार अभियान चला। आतंकी समूहों ने कलादान मल्टी मॉडल प्रोजेक्ट की तरह भारत की कनेक्टिविटी परियोजनाओं के खिलाफ हमले की योजना बनाई थी।




   


अरुण तिवारी, भोपाल. कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रिय्रदर्शनीराजे ग्वालियर और गुना लोकसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे अपने पति की जगह जनसंपर्क कर रही हैं। उनके चुनाव लडऩे की भी चर्चा है। प्रियदर्शनी ने ‘पत्रिका’ से खास बातचीत में चुनाव लडऩे से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि वे अपने पति के अधूरे कामों को पूरा कर रही हैं।


लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी आमने-सामने हैं, कौन आगे निकलेगा?
जवाब : मैं राजनीतिक नहीं हूं, इसलिए इन सब बातों से मेरा ज्यादा सरोकार नहीं है, फिर भी जो परिदृश्य सामने है, उससे जाहिर है कि राहुल गांधी आगे निकलने वाले हैं। हाल ही में तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी है।

आपकी सक्रियता को उम्मीदवारी माना जा सकता है?
जवाब : मैं उनकी मदद कर रही हूं, चुनाव तो वही लड़ेंगे। उनको पार्टी ने उत्तर प्रदेश की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है तो उनकी मदद के लिए हम हैं, पूरा परिवार है और यहां के लोग हैं, वह भी हमारा ही परिवार है।

क्या महिलाओं की भागीदारी राजनीति में बढऩी चाहिए?
जवाब : हम इसीलिए महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं, वे अपने वोट का अधिकार समझेंगी तो आगे रास्ते भी बनेंगे।

ये धारणा है कि ज्योतिरादित्य लोगों से हाथ भी नहीं मिलाते और आप महिलाओं से गले मिल रही हैं, क्या संदेश है जनता के लिए?
जवाब : ये झूठ है कि वे हाथ नहीं मिलाते, ये बात आप जनता से ही पूछ लीजिए। उनका पहला लक्ष्य है इन लोगों के लिए काम करना। जनता को भी यही पसंद आता है कि पहले काम हो फिर गले मिला जाए।

पत्नी के रूप में क्या शिकायत नहीं रहती कि ज्योतिरादित्य वक्त नहीं दे पाते, वे कैसे मैनेज करते हैं परिवार और राजनीति?
जवाब : मैं भी नहीं समझ पाती कि वे कैसे मैनेज कर पाते हैं, लगता है उनके पास जादू की छड़ी है। उनके पास सबके लिए पर्याप्त समय है मेरे लिए, बच्चों के लिए, मां के लिए। उनका टाइम मैनेजमेंट कमाल का है।

ज्योतिरादित्य से ज्यादा ऊर्जा तो आपमें दिखती है, लगातार महिला सम्मेलन कर रही हैं?
जवाब : नहीं ऐसा नहीं है, उनमें बहुत एनर्जी है। उनका काम अलग है, मेरा काम अलग है। उन्होंने मुझे उनसे मिलने भेजा है, जिनसे वे नहीं मिल पाए। उनकी व्यस्तता के चलते कई जगह छूट जाती हैं। मैं ये देखने आई हूं कि क्या काम हो रहा है, क्या नहीं हो रहा, हम और क्या कर सकते हैं।

वो चाहते हैं कि महिलाएं जागरूक हों, अपनी बात कहें, अपने वोट का अधिकार समझें, अपनी मांगें आगे रखें कि उनको नौकरी चाहिए, घर चाहिए। पुरुष आगे निकल जाते हैं और उनको लगता है कि महिला घर में खुश है, इसलिए उन्होंने मुझे महिलाओं के बीच भेजा है।

आगे चुनाव लडऩे की कोई योजना है?
जवाब : मैंने पहले ही कहा कि चुनाव वही लड़ेंगे। यदि वे यहां से नहीं लड़ेंगे तो नुकसान जनता का ही होगा, क्योंकि वे इन लोगों के लिए जितना सोचते हैं, जितना काम करते हैं और कोई नहीं कर सकता।

क्या महाआर्यमन राजनीति में आएंगे?
जवाब : हम राजनीति नहीं समाजसेवा करते हैं। हमें पद की कोई चिंता नहीं। हमारा पूरा परिवार सेवा में लगा रहता है। पूरी जनता हमारा परिवार है और हम सब ये करते रहेंगे।



   


दिग्विजय को भोपाल से उतारकर भाजपा को चुनौती देगी कांग्रेस

 

ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ माने जाने वाले गुना—शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में इस बार अंदरुनी खींचतान जोरो पर है। मंत्री न बनने से नाराज कांग्रेस विधायक केपी सिंह ने सिंधिया का खुलकर विरोध करने की तैयारी कर रखी है। इसके अलावा क्षेत्र में सिंधिया की लोकप्रियता का ग्राफ भी तेजी से कम हुआ है। पार्टी के एक सर्वे में यह बात सामने आई है। अब तक सिंधिया गुना को सुरक्षित सीट मानते हुए तैयारी कर रहे थे। उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया ने गुना संसदीय क्षेत्र में जनसंपर्क करना भी शुरु कर दिया था। इसी बीच आई सर्वे रिपोर्ट ने सिंधिया को ग्वालियर से चुनाव लड़ने के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया है। हालांकि इसका अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से चर्चा के बाद ही हो पाएगा।


इधर, राजगढ़ से दावेदारी कर रहे दिग्विजय सिंह को पार्टी भोपाल से चुनाव लड़ाना चाहती है। इसके पीछे मुख्य वजह है कि पार्टी मानती है कि राजगढ़ दिग्विजय सिंह का गढ़ है, ऐसे में उनका समर्थक भी वहां से चुनाव जीत सकता है, इस सीट पर प्रमुखता से नारायण सिंह आमलावे का नाम बताया जा रहा है।

पार्टी का मानना है कि दिग्विजय सिंह भोपाल से चुनाव लड़ते हैं तो ये भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी। हालांकि इसका अंतिम फैसला दिल्ली दरबार से ही होगा।

ग्वालियर में आज भी सिंधया राजघराने का प्रभाव

ग्वालियर में आज भी सिंधिया राजघराने का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। सिंधिया यहां से चुनाव लड़कर इसका फायदा उठाना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपना मन बनाया है।

सबसे पहले राजमाता विजयाराजे सिंधिया 1962 में जनसंघ से चुनाव जीतकर संसद पहुंची थीं, उनके बाद 1984 में माधवराव सिंधिया ने अटल बिहारी वाजपेयी को मात दी थी। 1991, 1996 में भी माधवराव सिंधिया कांग्रेस से जीते थे। इसके बाद माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर मध्यप्रदेश विकास कांग्रेस बनाकर 1998 में चुनाव लड़ा था और जीते थे। वर्ष 2007 एवं 2009 में हुए चुनाव में भाजपा ने यशोधरा राजे को मैदान में उतारा तो, वह भी जीतने में कामयाब रही थीं। कांग्रेस की तरफ से अगर सिंधिया परिवार को छोड़कर देखा जाएं तो, 16 बार हुए चुनाव में सिर्फ दो बार अन्य प्रत्याशी जीत सके हैं।

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