शिवपुरी की  साक्षी सहगल ने दिल्ली में बीते रोज आयोजित मिस कैपिटल ऑफ इंडिया 2019 प्रतियोगिता में जगह बनाकर जिले का नाम रोशन कर दिया है। दिव्या जैन और करण द्वारा फेशन मेराकी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमे देश भर के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
इसी प्रतियोगिता में शिवपुरी निवासी और जाने माने टेंट व्यवसाई विक्की सहगल % विनीशा सहगल की सुपुत्री साक्षी ने प्रतियोगिता के फाइनल जगह बनाई। साक्षी का चयन होने पर शिवपुरी शहर  के अनेक लोगों ने साक्षी के उज्वल भविष्य की कामना की है।


मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने मंत्रिमंडल का नए सिरे से गठन कर सकते हैं।

भोपाल (मंथन न्यूज)। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार अब निर्दलीय विधायकों को साधने की कोशिश में मंत्रिमंडल विस्तार कर सकती है। कांग्रेस के जिम्मेदार पदाधिकारी बताते हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार संभवत: विधानसभा के बजट सत्र के पहले जून में होने की संभावना है।

वहीं, पार्टी के कुछ असंतुष्ट विधायकों को हाईकमान ने लोकसभा चुनाव में संतुष्ट भी किया है, लेकिन अभी भी ऐसे कुछ विधायक मंत्री पद की बाट जोह रहे हैं। इधर, चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने मंत्रिमंडल का नए सिरे से गठन कर सकते हैं। इसके लिए लोकसभा चुनाव परिणामों में मंत्रियों के क्षेत्र में पार्टी के प्रदर्शन को मापदंड बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।

प्रदेश की कमलनाथ सरकार को बहुजन समाज पार्टी के दो और समाजवादी पार्टी के एक, कुल तीन और चार निर्दलीय विधायकों ने समर्थन दिया है। चार निर्दलीय विधायकों में से प्रदीप जायसवाल को मंत्री बना दिए जाने से सरकार 118 विधायकों की संख्या के साथ बहुमत में है। सूत्र बताते हैं कि लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद कमलनाथ अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दो और निर्दलीयों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हंै। इनमें बुरहानपुर के ठाकुर सुरेंद्र सिंह शेरा भैया और सुसनेर के विक्रम सिंह राणा के नाम हैं।

गौरतलब है कि सुरेंद्र सिंह को लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी अरुण यादव के खिलाफ पत्नी के निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर खड़ा करने पर मनाया गया था। नाम वापसी के दिन सुरेंद्र सिंह की पत्नी ने नामांकन पर्चा वापस लिया था। सूत्रों का कहना है कि उस समय सुरेंद्र सिंह को मंत्री बनाए जाने का ऑफर दिया गया था। दूसरी तरफ सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक विक्रम सिंह राणा मंत्री नहीं बनाए जाने के कारण मंत्रिमंडल के गठन के पहले दिन से ही नाराज हैं। उन्हें भी कमलनाथ संतुष्ट करने के लिए मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं। तीसरे निर्दलीय केदार डाबर ही बचेंगे। कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों में राजनगर विधायक विक्रम सिंह नातीराजा और बदनावर विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव को पार्टी ने लोकसभा चुनाव में उनके मुताबिक टिकट देकर संतुष्ट किया है। नातीराजा की पत्नी कविता सिंह को खजुराहो से तो राजवर्धन सिंह समर्थक दिनेश गिरवाल को धार से टिकट दिया गया है। अब असंतुष्ट विधायकों में अनुपपुर के बिसाहूलाल सिंह और पिछोर के केपी सिंह ही बचे हैं।

बसपा-सपा विधायकों पर असमंजस
वहीं, कमलनाथ सरकार को बनाने में विस परिणामों की घोषणा के बाद सबसे पहले लिखित में समर्थन देने वाली बसपा और सपा को लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति है। लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद इस बारे में तस्वीर साफ होगी। उत्तरप्रदेश में महागठबंधन के दौरान कांग्रेस से बसपा-सपा ने जो दूरी बनाई थी, उससे अभी रिश्ते सामान्य नजर नहीं आ रहे हैं। 23 मई को लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद इनकी स्थिति स्पष्ट होगी। मगर, प्रदेश सपा विधायक राजेश शुक्ला कांग्रेस पृष्ठभूमि से हैं तो सपा से कांग्रेस को विशेष परेशानी नहीं आएगी। बसपा की विधायक रामबाई की पहले दिन से ही कमलनाथ सरकार से अनबन चलती रही है। मंत्री बनाए जाने के लिए वे लगातार अड़ी हुई हैं, लेकिन कुछ महीने से उनकी आवाज दब गई है। उनके पति एक आपराधिक मामले में फंस गए हैं, जिससे रामबाई शांत बैठ गई हैं। बसपा के दूसरे विधायक संजीव कुशवाह मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी बताए जाते हैं और कुछ एक मर्तबा रामबाई को उन्होंने मध्यस्थता कर शांत किया था।
अभी 6 मंत्री पद रिक्त
प्रदेश मंत्रिमंडल में अभी मुख्यमंत्री सहित 29 सदस्य हैं। छह मंत्री पद रिक्त हैं। कमलनाथ सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार 28 कैबिनेट मंत्रियों को शामिल किए जाने के साथ हुआ था। अगर दो निर्दलीय और बसपा-सपा के तीनों विधायकों को मंत्री बना भी दिया जाता है, तब भी मंत्रिमंडल में एक पद रिक्त रहेगा।



   


संगठन के पास पहुंची शिकायतें

भोपाल. लोकसभा चुनाव में कांगे्रस और भाजपा के कुछ प्रत्याशियों की राह में अपनों ने ही कांटे बिछा दिए थे। उन्हें चुनाव में प्रतिद्वंद्वी के अलावा अपनों की पैदा की गई मुश्किलों से भी जूझना पड़ा। चुनाव के वक्त किसी पर भी कार्रवाई करना नई मुश्किल खड़ी कर सकता था। अब मतदान पूर्ण होते ही दोनों दल भितरघातियों और चुनाव में निष्क्रिय रहने वालों का रेकॉर्ड तैयार कर रहे हैं। चुनाव परिणाम के बाद कार्रवाई भी शुरू हो जाएगी।
भाजपा : दस सीटों से पहुंची शिकायत
भाजपा के कई प्रत्याशियों, चुनाव संयोजकों और जिला अध्यक्षों ने स्थानीय नेताओं-पदाधिकारियों के सहयोग नहीं करने की शिकायतें प्रदेश संगठन के पास भेजी हैं। पार्टी चुनाव परिणाम के बाद कुछ जिलों और मंडल के अध्यक्षों के साथ ही मोर्चा के भी कई पदाधिकारियों की छुट्टी करने जा रही है।
- इन सीटों से आई शिकायतें
सीधी- कई बूथों पर पार्टी के प्रतिनिधियों की तैनाती ही नहीं हो सकी। पूर्व सांसद और एक विधायक के खिलाफ भी असहयोग और निष्क्रिय रहने का फीडबैक।
खजुराहो- यहां बाहरी प्रत्याशी वीडी शर्मा को स्थानीय कार्यकर्ताओं का पूरा सहयोग नहीं मिला। कुछ लोगों ने बागी उतरे गिरीराज पोद्दार के समर्थन में काम किया है उनकी शिकायतें पहुंची है।
सागर- यहां राजबहादुर सिंह के टिकट से नाराज गई स्थानीय नेताओं के असहयोग और विरोध मेंं काम करने की शिकायत पहुंची है।
सतना- सतना में पूर्व विधायक सहित कुछ नेताओं के असहयोग की शिकायत है।
शहडोल- सांसद ज्ञान सिंह और उनके विधायक पुत्र शिवनारायण सिंह के निष्क्रिय रहने की शिकायत पहुंची है।
भोपाल- कई स्थानीय नेताओं के असहयोग की शिकायत की गई, जिसके चलते केंद्रीय संगठन को बड़े नेताओं की ड्यूटी लगाना पड़ी।
राजगढ़- स्थानीय स्तर पर नेताओं के असहयोग और चुनाव में कार्य नहीं करने की रिपोर्ट संगठन के पास पहुंची है।
बालाघाट- सांसद बोधङ्क्षसह भगत के बागी होकर चुनाव मैदान में उतरने के बाद उनके समर्थन में कई नेताओं-पदाधिकारियों के काम करने की शिकायत की गई।
इंदौर - यहां प्रत्याशी शंकर लालवानी का कई स्थानीय नेताओं ने असहयोग किया। हालात इतने बिगड़े की प्रदेश संगठन मंत्री रामलाल ने नेताओं की क्लास लगाई। इस बैठक में जिला अध्यक्ष गोपीकृष्ण को कड़ी फटकार भी मिली।
मंदसौर - यहां संगठन महामंत्री सुहास भगत और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को अंतिम वक्त पहुंचकर भाजपा नेताओं को सक्रिय करना पड़ा। यहां की कई शिकायतें पहुुचीं।
चुनाव लडऩे की इच्छा कई लोगों की होती है, लेकिन टिकट एक को ही मिलता है। ऐसे में असंतोष उपजना स्वाभाविक है। आवश्यकता पडऩे पर कार्रवाई भी की जाएगी।
- विजेश लुनावत, उपाध्यक्ष, प्रदेश भाजपा

कांग्रेस : असहयोगियों की कुंडली तैयार
कांग्रेस भी भितरघात की कुंडली तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ऐसे नेताओं की सूची तैयार करने के लिए कहा हैं। जिन सीटों से भितरघात की शिकायतें आई थीं, वहां संबंधित नेताओं को सरकार में कोई पद नहीं दिया जाएगा। साथ ही उन पर कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।
- चुनिंदा सीटों की स्थिति

भोपाल : दिग्विजय सिंह के चुनाव लडऩे के कारण अधिकतर गुट काम करने को मजबूर हो गए थे, लेकिन शिकायतों की भी भरमार रही है। दिग्विजय ने भी अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
शहडोल : दल-बदल करके आईं प्रमिला सिंह को टिकट देने से स्थानीय नेता नाराज रहे थे। खुलकर विरोध नहीं किया गया, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ताओं ने असहयोग किया।
खंडवा : निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने प्रत्याशी अरुण यादव को मुश्किल में डाल दिया। कुछ दिन पूर्व ही सीएम के मनाने पर शेरा माने थे, लेकिन उनकी भूमिका ठीक नहीं रही। यादव ने इस पर ऐतराज जताया है।
रतलाम : यहां कांतिलाल भूरिया की चुनौती बागी होने के बाद वापस पार्टी में आए जेवियर मेढ़ा के कारण बढ़ी है। मेढ़ा ने भूरिया खेमे को नुकसान पहुंचाया है।
सीधी : यहां पूर्व नेता-प्रतिपक्ष अजय सिंह को भीतरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। यहां पटेल खेमा उनसे पूरी तरह अलग-थलग रहा। मंत्री कमलेश्वर पटेल के पिता स्व. इंद्रजीत पटेल के समय से उनकी खेमेबाजी है।
खजुराहो : यहां कविता सिंह के टिकट से बाकी नेता नाराज थे। पूर्व राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी व पूर्व मंत्री राजा पटैरिया का खेमा यहां अलग रहा। कविता के पति विधायक विक्रमय सिंह नातीराजा ही पूरा मोर्चा संभाले रहे।

चुनाव खत्म होने के बाद यह देखा ही जाता है कि किन नेताओं से सहयोग किया और किसने नहीं। इसकी पूरी जानकारी लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के सामने रखी जाएगी।
- चंद्रप्रभाष शेखर, संगठन प्रभारी, प्रदेश कांग्रेस

एग्जिट पोल के मुताबिक मध्य प्रदेश की कुल 29 में से बीजेपी को 26 से 28 और कांग्रेस को 1 से 3 सीटें मिलती हुई दिख रही है. अगर यही आंकड़े नतीजे में दब्दील होते हैं तो कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी कर्नाटक में सरकार बनाने की एक बार फिर से कोशिश कर सकती है.

कहीं खतरे में तो नहीं इन दो राज्यों की सरकारें? Exit Poll के बाद बढ़ी हलचल
मुख्यमंत्री कमलनाथ

लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई को देश के सामने आएंगे, लेकिन उससे पहले आए आजतक-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के आंकड़ो के मुताबिक नरेंद्र मोदी की सरकार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में एक बार फिर वापसी करती हुई नजर आ रही है. जबकि कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का पूरी तरह से सफाया होता दिख रहा है. अगर एग्जिट पोल के आंकड़े नतीजों में तब्दील होते हैं और मोदी सरकार 2014 से ज्यादा ताकतवर बनकर उभरेगी. ऐसे में मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार और कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार पर संकट के बादल गहरा सकते हैं.

कमलनाथ सरकार पर खतरा?

बता दें कि पिछले साल मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. राज्य की 231 सीटों में से कांग्रेस को 113, बीजेपी को 109, बसपा को दो, सपा को एक और निर्दलीय चार जीतने में कामयाब रहे हैं. इस तरह से देखें तो कांग्रेस और बीजेपी के बीच महज चार सीट का फर्क है. कांग्रेस की सबसे ज्यादा सीटें होने के कारण कमलनाथ ने चार निर्दलीय, दो बसपा के और एक सपा के विधायक के समर्थन से सत्ता पर विराजमान हैं.

हालांकि बीजेपी बहुमत के आंकड़े के बहुत ज्यादा दूर नहीं है. ऐसे में केंद्र में मोदी सरकार वापसी होती है तो कमलनाथ सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. बीजेपी केंद्र के बाद राज्य की सत्ता पर काबिज होने का दांव चल सकती है. कांग्रेस कई बार मध्य प्रदेश में अपने विधायकों के खरीद-फरोख्त का आरोप बीजेपी पर लगाते हुए आशंका जाहिर कर चुकी है. यही वजह है कि अगर केंद्र में मोदी सरकार की वापसी प्रचंड बहुमत के साथ वापसी होती है तो कमलनाथ सरकार के लिए संकट खड़े हो सकते हैं.

बीजेपी के महासचिव और मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कमलनाथ 22 दिन रहेंगे इस पर भी सवाल है. इससे साफ जाहिर है कि बीजेपी कहीं न कहीं मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के मंसूबे अपने दिल में पाल रखी है.

कर्नाटक में कुमारस्वामी पर संकट?

दरअसल कर्नाटक की 225 विधानसभा सीटों में बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78, जेडीएस को 37, बसपा को 1, केपीजेपी को 1 और अन्य को 2 सीटों पर जीत मिली थी. इस तरह से किसी भी पार्टी को बहुमत का आंकड़ा नहीं मिला था.बीजेपी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री की शपथ ली. लेकिन कांग्रेस-जेडीएस के एक साथ आने से वह बहुमत साबित नहीं कर पाए. इसके बाद कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन के साथ राज्य में कुमारस्वामी की सरकार बनाई.

कर्नाटक में लगातार कुमारस्वामी की सरकार पर संकट के बादल छाए हुए हैं. यह बात कुमारस्वामी खुद भी कई बार कह चुके हैं. इसके अलावा कांग्रेस के कई विधायकों की नाराजगी की बातें सामने आती रही है. यही नहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम सिद्धारमैया और कुमारस्वामी के बीच भी मतभेद की बात कई बार आ चुकी है. ऐसे में लोकसभा चुनाव के लिए कर्नाटक में जिस तरह से एग्जिट पोल आए हैं, उस लिहाज से बीजेपी 2014 से ज्यादा सीटें जीतती हुई नजर आ रही है.

आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक मध्य प्रदेश की कुल 29 में से बीजेपी को 26 से 28 और कांग्रेस को 1 से 3 सीटें मिलती हुई दिख रही है. अगर यही आंकड़े नतीजे में दब्दील होते हैं तो कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी कर्नाटक में सरकार बनाने की एक बार फिर से कोशिश कर सकती है.


नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर विधानसभा का सत्र बुलाने की मांग की है. इसके बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है.
लोकसभा चुनाव 2019 के एग्जिट पोल के नतीजों ने नरेंद्र मोदी के एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की है. इस बीच बीजेपी ने मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के अल्पमत में होने के आरोप लगाए हैं. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने राराज्यपाल को चिट्ठी लिखकर सत्र बुलाने की मांग की है. इसके बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है.
दरअसल, लोकसभा चुनावों से पहले भी बीजेपी नेताओं द्वारा लगातार यह बयान दिया जा रहा था कि अगर बीजेपी की सरकार दोबारा बनती है तो मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार संकट में आ जाएगी. इसी बीच समझते हैं कि मध्य प्रदेश विधानसभा का गणित दरअसल क्या है और इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बीजेपी को कितनी सीटें मिली थीं.
कुल 230 विधानसभा सीटों वाले मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, उसे 114 सीटें मिली थीं, हालांकि बहुमत के आंकड़े से वो दो सीटें दूर रह गई थी. बहुमत के लिए 116 सीटें चाहिए थीं, वहीं बीजेपी को 109 सीटें मिली थीं. इसके अलावा निर्दलीय को चार, बसपा को दो सीटें और सपा को एक सीट मिली थी.
हालांकि सरकार बनने के बाद ही सपा और बसपा के विधायक कांग्रेस से नाराज नजर आ रहे थे, लेकिन उन्हें बार-बार कमलनाथ द्वारा शांत करवाया जा रहा था. इसी दौरान बीजेपी के बड़े नेता भी आए दिन कमलनाथ सरकार को गिराने का दावा करते नजर आ रहे थे.  कैलाश विजयवर्गीय  ने लोकसभा चुनाव से पहले तो यहां तक कह दिया था कि जिस दिन ऊपर से आदेश होगा उसी दिन सरकार गिरा देंगे.
और अब नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की चिट्ठी से राजनीति फिर गर्म है. गोपाल भार्गव ने कहा कि जिस तरह से केंद्र और राज्य में बीजेपी को अपार जनसमर्थन मिल रहा है. कई कांग्रेस के विधायक कमलनाथ सरकार से परेशान हो चुके हैं और बीजेपी के साथ आना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी खरीद-फरोख्त नहीं करेगी, लेकिन कांग्रेस के ही विधायक अब उनकी सरकार के साथ नहीं हैं.

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Exit Poll Results 2019 : एग्जिट पोल के नतीजों से उत्साहित बीजेपी ने मध्य प्रदेश विधानसभा में की 'शक्ति परीक्षण' की मांग

मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 

Exit Poll Results 2019 : लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) के  सातवें चरण का मतदान खत्म होने के साथ ही विभिन्न न्यूज चैनल द्वारा एग्जिट पोल जारी करने का सिलसिला शुरू हो गया है. इसी क्रम में  NDTV के पोल ऑफ एग्जिट पोल्स (Poll of Exit Poll 2019) के अनुसार पार्टी को एनडीए को मध्य प्रदेश फायदा होने जा रहा है. एग्जिट पोल के अनुसार एमपी में एनडीए को 24 सीटें मिल सकती हैं. जबकि कांग्रेस महज पांच सीटों पर समिट सकती है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव को लेकर विभिन्न समाचार माध्यमों के एग्जिट पोल व सर्वे में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलने के आसार के बीच मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विधानसभा का सत्र बुलाए जाने की मांग की है. नेता प्रतिपक्ष भार्गव ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि एग्जिट पोल के अनुसार एक बार फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस को दो से तीन सीटें मिलने वाली हैं, यह इस बात का संकेत है कि वर्तमान सरकार ने जनता का भरोसा खो दिया है. इसलिए उनकी मांग है कि राज्य विधानसभा का सत्र बुलाया जाए.  इसके लिए वे राज्यपाल को पत्र लिखने वाले हैं.  भार्गव ने आगे कहा, "विधानसभा सत्र में सत्ताधारी दल की शक्ति का भी परीक्षण हो जाएगा. कांग्रेस के पास दूसरों के सहयोग से बहुमत है, भाजपा चाहती तो वह भी जोड़-तोड़ करके सरकार बना सकती थी, मगर भाजपा ने ऐसा नहीं किया."  ज्ञात हो कि, राज्य की विधानसभा में 230 विधायक हैं, जिसमें कांग्रेस के 114 और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 109 विधायक है. कांग्रेस सरकार बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही है. लोकसभा चुनाव को लेकर समाचार माध्यमों के सर्वे में राज्य की 29 सीटों में से कांग्रेस को अधिकतम पांच सीटें मिलने की बात कही गई है.

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) के  सातवें चरण का मतदान खत्म होने के साथ ही विभिन्न न्यूज चैनल द्वारा एग्जिट पोल जारी करने का सिलसिला शुरू हो गया है. इसी क्रम में  NDTV के पोल ऑफ एग्जिट पोल्स (Poll of Exit Poll 2019) के अनुसार पार्टी को एनडीए को मध्य प्रदेश फायदा होने जा रहा है. एग्जिट पोल के अनुसार एमपी में एनडीए को 24 सीटें मिल सकती हैं. जबकि कांग्रेस महज पांच सीटों पर समिट सकती है. 2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर अपनी सरकार बनाने वाली कांग्रेस के लिए एग्जिट पोल का यह परिणाम एक बड़े झटके की तरह हैं. बता दें कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बसपा के साथ मिलकर सरकार में है.  

भार्गव ने कहा, 'कई कांग्रेस के विधायक कमलनाथ सरकारसे परेशान हो चुके हैं और बीजेपी के साथ आना चाहते हैं. ऐसे में सरकार ने उन्होंने कहा कि बीजेपी खरीद फरोख्त नहीं करेगी, लेकिन कांग्रेस के ही विधायक अब उनकी सरकार के साथ नहीं हैं. इसलिए उनकी मांग है कि राज्य विधानसभा का सत्र बुलाया जाए.'

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को इस सत्र में अपना बहुमत साबित करना होगा. क्योंकि जनता उन्हें अब पूरी तरह से नकार रही है. ये सरकार अपने ही बोझ से गिर जाएगी.

‘22 दिन भी सीएम नहीं बने रहेंगे कमलनाथ’

इससे पहले इंदौर में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम कमलनाथ पर लोकसभा चुनाव में 22 सीट जीतने के दावे पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि 23 मई को नतीजों के बाद देखने होगा कि कमलनाथ 22 दिन मुख्यमंत्री रहेंगे या नहीं, इस पर भी प्रश्नचिन्ह है.

सात चरण में संपन्न हुए चुनाव
इस बार 11 अप्रैल से 19 मई के बीच 7 चरणों में लोकसभा चुनाव हुआ. पहले चरण में 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीटों पर मतदान हुआ, वहीं, दूसरे चरण में 18 अप्रैल को 13 राज्यों की 97 सीटों पर वोट डाले गए. तीसरे चरण में 23 अप्रैल को 14 राज्यों की 115 सीटों, चौथे चरण 29 अप्रैल को 9 राज्यों की 71 सीटों, पांचवें चरण में 6 मई को 7 राज्यों की 51 सीटों, छठे चरण में 12 मई को 7 राज्यों की 59 सीटों और सातवें व आखिरी चरण में 19 मई को 59 सीटों पर वोटिंग हुई.


इंदौर। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की 22 सीटों का ख्वाब देखने वाले कमलनाथ अगले 22 दिन तक मुख्यमंत्री रहेंगे भी या नहीं, अभी इस बात पर प्रश्नचिन्ह है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार बनने के 10 दिन बाद कर्ज माफ नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री बदल देंगे। राहुल तो ऐसा नहीं कर पाए लेकिन कांग्रेस विधायक ऐसा कर देंगे, क्योंकि लोगों ने विधायकों को गांवों में घुसने नहीं दिया।

यह बात भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने रविवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि महागठबंधन को लेकर जनता में कोई भरोसा नहीं है। जो दल 15-20 सीटों पर लड़ रहे हैं, उनके मुखिया प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। दूसरे किसी दल में प्रधानमंत्री के राजनीतिक कद वाला नेता नहीं है। इस बार भी मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में संस्कृति और संस्कार बचाना जरूरी है, क्योंकि ममता बनर्जी का लोकतंत्र में नहीं, तानाशाही में भरोसा है। गोड़से को लेकर दिए गए साध्वी प्रज्ञा के बयान पर विजयवर्गीय ने कहा कि वे भाजपा में नई हैं। उन्हें पार्टी की विचारधारा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। उन्होंने जो कहा, उसके लिए माफी भी मांग ली है।

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