भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। विधानसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद भारतीय जनता पार्टी को एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन किए जाने से अगड़ी जातियों के नाराज होने का अहसास हो गया है। इस वजह से भाजपा का एक वर्ग पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाना चाहता है।

भाजपा संगठन की मानें तो वह ब्राह्मण वर्ग से किसी नेता को नेता प्रतिपक्ष की कमान सौंपना चाहता है। इस वर्ग में नरोत्तम मिश्रा और गोपाल भार्गव दो बड़े नाम हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भी यही सोच है कि नेता प्रतिपक्ष की कमान अगड़ी जाति को सौंपी जाए।

भाजपा में इन दिनों तूफान के पहले शांति जैसा माहौल है। इसकी वजह है सत्ता से 15 साल बाद हुई विदाई।विधानसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद से भाजपा में कोई हलचल नहीं है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी भाजपा

विधायक दल की बैठक बुलाए जाने पर कोई चर्चा तक नहीं हुई है। पार्टी सूत्रों की मानें तो नेता प्रतिपक्ष के चयन

में एकमत नहीं होने के कारण विधायक दल की बैठक नहीं बुलाई जा रही है।

पूर्व कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कुछ दिनों पहले ये बयान दिया था कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए। बिसेन के बयान पर चौहान ने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन ये इशारा जरूर कर दिया कि वे केंद्र की राजनीति नहीं करना चाहते हैं। आशय साफ है कि वे प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहने के लिए नेता प्रतिपक्ष का पद चाहते हैं।
इधर, पार्टी सूत्रों का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा या गोपाल भार्गव में से किसी एक के नाम पर नेता प्रतिपक्ष के लिए मुहर लग सकती है। इसका कारण एट्रोसिटी एक्टको माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि अब तक शहरी और अगड़ी जातियों के वोट भाजपा को मिला करते थे, लेकिन इस चुनाव में वे पार्टी से दूर हो गए। पार्टी सूत्रों की मानें तो चुनावी हार को लेकर अगले महीने 11 जनवरी से होने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में चर्चा होगी। बीते सप्ताह शिवराज ने आभार यात्रा निकालने का एलान किया था। इसे लेकर भी सियासत गर्माई हुई है। संगठन ने अभी इसकी मंजूरी नहीं दी है।

पदाधिकारियों की बैठक आज
भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों और मोर्चाप्रकोष्ठ के प्रमुखों की बैठक मंगलवार को होगी। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिह भी इसमें शामिल होंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में उन सीटों पर भी चर्चा किए जाने की संभावना है, जहां पार्टी के प्रत्याशी बहुत कम वोट से हारे हैं।

सशक्त विपक्ष रहेंगे
भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व इस संबंध में प्रदेश के नेतृत्व से परामर्श कर उचित फैसला करेगा। सभी मिलकर सशक्त

विपक्ष की भूमिका निभाएंगे- डॉ. दीपक विजयवर्गीय, मुख्य प्रवक्ता, भाजपा

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी एक इतिहास रचा है। वे संभवत: पहली राज्यपाल बनी हैं, जिसने एक ही दिन में दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पद की शपथ दिलाई। ...

भोपाल (मप्र)। शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से कराई।

बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने गौर से कहा कि आप हमारी पार्टी में आ जाओ। वहीं, बाबूलाल गौर और सिंधिया के बीच भी दिलचस्प संवाद हुआ। मुलाकात के दौरान गौर ने सिंधिया से कहा कि आप तो अर्जुन हो गए हो, सिंधिया ने भी जवाब देते हुए कहा, आप के रास्ते पर चल रहा हूं।

राज्यपाल ने रचा इतिहास

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी आज एक इतिहास रचा है। वे संभवत: पहली राज्यपाल बनी हैं, जिसने एक ही दिन में दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पद की शपथ दिलाई। पहले उन्होंने भोपाल में कमलनाथ को मप्र के मुख्यमंत्री पद की और शाम को रायपुर में भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।

जब बाबूलाल ने कहा था बनेगी कांग्रेस की सरकार

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में अकसर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने चुनाव के बाद और मतगणना से पहले एक बड़ा बयान दिया था। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी।

भोपाल उत्तर से कांग्रेस उम्मीदवार और वर्तमान में कांग्रेस विधायक आरिफ अकील बाबूलाल गौर से मिलने पहुंचे तो उन्होंने ने आरिफ अकील को बधाई देते हुए कहा 'सरकार बन रही है..आप कैबिनेट मंत्री बन रहे हो...बधाई हो।' दोनों ही नेताओं के बीच काफी देर तक चर्चा चलती रही। आरिफ अकील ने कहा कि वे बाबूलाल से आशीर्वाद लेने आए थे।

गौर के इस बयान के बाद सियासत भी गर्म हो गई थी। कांग्रेस ने बाबूलाल गौर के बयान का स्वागत करते हुए कहा था कि उन्होंने सही बोला है। 



संघ के मुखपत्र ने कहा- एंटी मोदी माहौल नहीं, चुनावों में हार की वजह भी बताई

लेख में मोदी ब्रांड पर लिखा गया कि मोदी ब्रांड की चमक फीकी नहीं पड़ी। इसके अलावा लिखा गया कि चुनाव बाद कहा जा रहा है कि किसानों का वोट कांग्रेस जुड़ गया। यह भी कहा जा रहा है कि चुनाव में कांग्रेस का हर दांव सफल रहा। जबकि यह कोरा झूठ है।

संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

हाल में पांच राज्यों में भाजपा की हार के बाद संघ के मुखपत्र पांचजन्य में पार्टी के हार पर विवेचना की गई है। मुखपत्र में लिखा गया है, ‘पांचों राज्यों के विधानसभा नतीजे आ चुके हैं मीडिया, सोशल मीडिया सब भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ हमलावर हैं। हालांकि जैसा रिजल्ट आया उसके उलट भाजपा पर आक्रोश कहीं अधिक नजर आता है। ऐसा होना ही था। इसलिए लोकसभा चुनाव के एक-एक दिन जैसे-जैसे नजदीक आएंगे भाजपा के खिलाफ राजनीतिक माहौल में और ज्यादा तीखा पन पैदा होगा।’ मुखपत्र में लिखा गया कि घोटालों और हेराफेरी को यथासंभव थामे भाजपा सरकारें जिस तरह से काम कर रही हैं उससे ये विरोधी पार्टियों में चुभने लगी। इन पार्टियों का मकसद लाभ है।

लेख में मिशेल-माल्या और हेराल्ड का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा गया। गेस्ट हाउस कांड के बाद सपा-बसपा के साथ आने पर बात कही गई। पीएम मोदी के विकास की बात करते हुए इसमें लिखा गया, ‘विकास अच्छी बात है। मगर हर समय विकास की बात करना देश की सबसे बड़ी पार्टी के संवेदनशील जनाधार को कहीं ना कहीं खलने लगा। भाजपा सरकार में विकास दिखा भी, मगर इससे बात नहीं बनती। तर्कशीलता की बजाय भावनात्मकता भाजपा के जनाधार का स्वाभाव है, क्योंकि उसके मतदाता वो हैं, जिनकी आस्था और श्रद्धा का बिंदु स्पष्ट हैं। भाजपा को यह समझना होगा।’

मुखपत्र में भाजपा के घोषणा पत्र पर बात करते हुए लिखा गया, ‘राम मंदिर, गोवंश, धारा 370 और 35A विकास के मुद्दे भले ना हों मगर यह भाजपा के घोषणापत्र के अभिन्न हिस्से हैं। इनसे भाजपा समर्थकों की गहरी भावनाएं जुड़ी हुई हैं और इनकी उपेक्षा करते हुए हाल में आए चुनाव परिणाम का विश्लेषण नहीं किया जा सकता।’ लेख में मोदी ब्रांड पर लिखा गया कि मोदी ब्रांड की चमक फीकी नहीं पड़ी। इसके अलावा लिखा गया कि चुनाव बाद कहा जा रहा है कि किसानों का वोट कांग्रेस जुड़ गया। यह भी कहा जा रहा है कि चुनाव में कांग्रेस का हर दांव सफल रहा। जबकि यह कोरा झूठ है।



नई दिल्ली -मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का एक काम पहले दिन से ही विवादों की भेट चढ़ता नजर आ रहा है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने पहले दिन उद्योगों के लिए नई छूट नीति का ऐलान किया है। इस नीति के तहत प्रदेश के उद्योगों में 70 फ़ीसद रोजगार मध्य प्रदेश के युवाओं को दिए जाएंगे। यानि मध्यप्रदेश में अब ऐसे ही उद्योगों को छूट मिलेगी जो कि 70 फीसद रोजगार स्थानीय लोगों को देंगे

कमलनाथ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, 'हमारी छूट देने वाली नीति उन उद्योगों के लिए होगी, जहां 70 फ़ीसदी रोज़गार मध्य प्रदेश के युवाओं को दिया जाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से लोग मध्य प्रदेश आते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को नौकरी नहीं मिल पाती है। मैंने इसी से संबंधित फाइल को मंज़ूरी दे दी है।' 

कमलनाथ ने कहा कि यह कदम उठाने के पीछे वजह है स्थानीय लोगों के लिए नौकरी के मौके को ध्यान में रखना। गौरतलब है कि कमलनाथ का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। 

कर्जमाफी का वादा पूरा, चार गारमेंट पार्क बनाने को मंजूरी
सीएम की कुर्सी संभालने के कुछ ही समय बाद ही कमलनाथ ने किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। चुनाव के दौरान सभा में राहुल गांधी ने यह वादा किया था कि मप्र में कांग्रेस का सीएम बनते ही 10 दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाएगा।

किसानों का राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैकों द्वारा दिया गया 2 लाख रुपए तक का अल्पकालीन फसल ऋण माफ हो गया है। इसके साथ ही कन्या विवाह योजना के तहत दी जाने वाली राशि को बढ़ाकर 51 हजार कर दिया है। मप्र में चार गारमेंट पार्क बनाने को भी दी मंजूरी।

सिख विरोधी दंगों में भूमिका पर दिया ये जवाब
वहीं, सिख विरोधी दंगों में भूमिका के आरोपों पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, 'मेरे खिलाफ न कोई एफआईआर है और न ही कोई चार्जशीट दायर है। आज वे (भाजपा-अकाली) इस मुद्दे को तूल दे रहे हैं तो आप इसके पीछे राजनीति को समझ सकते हैं। 

संरक्षणवाद की राजनीति
देखने में आ रहा है कि इन दिनों प्रदेशों ही नहीं बड़े-बड़े देशों के बीच संरक्षणवाद का सिद्धांत पैर पसार रहा है। चाहे बात अमेरिका का स्थानीय उद्योगों और युवाओं को बढ़ावा देने की बात हो या फिर हाल ही भारत के गुजरात में हुए विवाद की बात हो। जिसमें यूपी-बिहार के लोगों को प्रदेश से खदेड़ा गया। हरेक राज्य अपने स्थानीय युवाओं और संसाधनों को संरक्षित करने पर जोर दे रहा है। कमलनाथ का ये फैसला भी उसी संरक्षणवाद के सिद्धांत पर आधारित है। 

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भोपाल। कांग्रेस नेता कमलनाथ सोमवार को सूबे के नए नाथ बन गए। भोपाल के जंबूरी मैदान में कांग्रेस के आला नेताओं, विपक्ष के बड़े चेहरों के बीच उन्होंने प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। ये शपथ ग्रहण कई मायनों में खास रहा। लंबे वक्त बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में विपक्षी एकता की तस्वीर देखने को मिली तो वहीं एक तस्वीर ऐसी भी सामने आई, जो सियासत के मौजूदा दौर में कम ही देखने को मिलती है

दरअसल शपथ ग्रहण से ठीक पहले मंच पर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सिंह का हाथ थामकर ये संकेत दे दिया कि वो हर कदम पर विपक्ष को साथ लेकर चलेंगे। इस तस्वीर में सिंधिया का भी वो हाथ थामे नजर आए और उन तमाम अटकलों को खत्म कर दिया कि सिंधिया हाशिये पर हैं। 

इस शपथ ग्रहण समारोह में ये साफ भी हो गया, जब उन्होंने राजनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को उचित सम्मान दिया। इस एक तस्वीर के जरिए कमलनाथ ने ये संदेश दे दिया कि एक तरफ तो प्रदेश को विकास की पटरी पर दौड़ाने के लिए वो विपक्ष के साथ कदमताल करेंगे, तो वहीं पार्टी के भीतर भी बगावत और गुटबाजी को किनारे पर रखेंगे। 

ये तस्वीर प्रदेश की सियासत का नया मिजाज बताने के लिए काफी है। जहां धुर विरोधी भी एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत करते दिखे और मंच पर बैठे कांग्रेस और विपक्षी दलों के दिग्गज नेताओं ने भी इसे हाथों-हाथ लिया और पूरा जंबूरी मैदान तालियों से गूंज उठा। 

संजय गांधी की राजनीति के मिजाज से जुड़े कमलनाथ को सियासी मैनेजमेंट में माहिर माना जाता है। वो गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी के साथ काम कर रहे हैं। वो केंद्र की सरकारों में अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं। ऐसे में प्रदेश की बागडोर संभालने से पहले उन्होंने जो संकेत दिए हैं। वो ये बताने के लिए काफी हैं कि वो किस मिजाज से सरकार चलाएंगे। 

प्रदेश में बदली हुई इस सियासत की बुनियाद उसी दिन पड़ गई थी। जब प्रदेश में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। नतीजे आने के बाद कमलनाथ खुद कार्यवाहक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मिलने सीएम हाउस पहुंचे थे। इस मुलाकात के दौरान शिवराज सिंह ने भी बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें जीत की बधाई दी थी और प्रदेश के विकास के मुद्दे पर पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया था।

उस मुलाकात के बाद शिवराज सिंह का जो बयान सामने आया था, वो भी कई मायने में खास था। क्योंकि उन्होंने प्रदेश के विकास के मुद्दे पर साफ कहा था कि, कांग्रेस प्रदेश का विकास करे, हम पूरा सहयोग करेंगे, पहले दिन से गालियां भी नहीं देंगे। लेकिन शुभमकामना देने के साथ ही उन्होंने ये भी ताकीद कर दी थी कि अगर कांग्रेस वचन-पत्र में किए वादे नहीं निभाएगी तो भाजपा सड़कों पर ही उतरने से गुरेज नहीं करेगी।  

इतना ही नहीं पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरने की चेतावनी दे दी थी। साथ ही ये कहा था कि कमलनाथ के शपथ लेने के बाद वो उनसे मिलेंगे और धान खरीदी में किसानों को हो रही परेशानी दूर करने के अलावा भाजपा सरकार की जनहितैषी योजनाएं जारी रखने का आग्रह भी करेंगे।

जंबूरी मैदान में बदली हुई सियासत की जो तस्वीर सामने आई है। उसका क्या असर होगा, इसके लिए इंतजार करना होगा। लेकिन एक बात तो साफ हो गई कि सियासत में चार दशक गुजार चुके कमलनाथ न सिर्फ पार्टी के बाहर अपने विरोधियों को साधना जानते हैं, बल्कि पार्टी के अंदर भी विरोध के सुर थामने में उनका कोई सानी नहीं है।  

भोपाल। नई सरकार फिलहाल बड़े पैमाने पर तबादले नहीं कर पाएगी। लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची तैयार करने के चलते चुनाव आयोग ने कमिश्नर, कलेक्टर से लेकर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के 26 दिसंबर के बाद बिना पूछे तबादले करने पर रोक लगा दी है। दरअसल, 26 दिसंबर को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन होगा। इसके साथ ही नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के दावे-आपत्ति लेने का काम शुरू हो जाएगा।

अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संदीप यादव ने बताया कि लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण होना है। 26 दिसंबर को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन होगा। इसके साथ ही नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के दावे-आपत्ति होने लगेंगे।

25 जनवरी तक दावे-आपत्ति लिए जाएंगे और 11 फरवरी के पहले इनका निराकरण किया जाएगा। 18 फरवरी तक मतदाता सूची की तैयारी कर 22 फरवरी को अंतिम प्रकाशन कराया जाएगा। इसी सूची के आधार पर लोकसभा चुनाव होंगे। बताया जा रहा है कि मार्च के पहले पखवाड़े में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग सकती है।

इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के काम से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को बिना अनुमति हटाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि मतदाता सूची के काम में कमिश्नर, कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी व शिक्षक मिलकर 70 हजार से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है।
बड़े बदलाव की तैयारी

उधर, कांग्रेस सरकार प्रशासन स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इसमें अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, उप सचिव, एडीजी, आईजी, एसपी, कमिश्नर, कलेक्टर सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। दरअसल, कुछ मैदानी और कुछ मंत्रालय के अफसर कांग्रेस के निशाने पर लंबे समय से हैं। इन अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।

भोपाल। मध्य प्रदेश के किसानों को कर्जमाफी का तोहफा नए साल में मिल सकता है। कमलनाथ द्वारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही अधिकारियों ने कर्जमाफी का रोडमैप बना लिया है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अधिकारी उन्हें कर्जमाफी के लिए बनाए गए प्लान का प्रजेंटेशन देंगे। कमलनाथ सरकार अपने वादे के मुताबिक वचन पत्र में दिए गए आश्वासन के तहत सहकारी और व्यावसायिक बैंकों से ऋण पाए किसानों के कर्ज माफ कर सकती है।

अधिकारियों ने दिए निर्देश


सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव केसी गुप्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिला सहकारी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे रविवार की देर शाम तक सभी किसानों की सूची भेजें, जिन्होंने सहकारी बैंकों से कर्ज लिया है। इसके साथ ही व्यवसायिक बैंकों को भी सोमवार की शाम तक सभी किसानों की सूची भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार कर्ज माफी के लिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक के मॉडलों का अध्ययन कर रही है और इनके आधार पर ही मध्य प्रदेश में किसानों की कर्ज माफी की जाएगी।

इन अफसरों को भेजा गया पंजाब-महाराष्ट्र

पंजाब और महाराष्ट्र मॉडल का अध्ययन करने के लिए मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक फैज अहमद किदवई चंडीगढ़ और एडीशनल डायरेक्टर बीएम सहारे महाराष्ट्र गए हैं। मैप आईटी की टीम को भी चंडीगढ़ भेजा गया है, क्योंकि पंजाब सरकार ने किसानों की तमाम जानकारी, आधार लिंक, अलग-अलग कैटेगरी के कर्ज के साथ डिफॉल्टर किसानों की अलग-अलग श्रेणियों को लेकर एक पोर्टल तैयार किया है। टीम इसका अध्ययन करेगी, ताकि मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही पोर्टल तैयार हो जाए। बताया जा रहा है कि कांग्रेस की नई सरकार को कर्जमाफी के लिए कम से कम 18 से 20 हजार करोड़ रुपए की जरूरत होगी। किसानों पर जो कर्ज है वह सहकारी बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण विकास बैंक और निजी बैंकों का है। वहीं, प्रदेश के 21 लाख किसानों पर करीब 20 हजार करोड़ का कर्जा है, लेकिन इसे अदा नहीं किया है। कर्जे में डूबते किसानों के कर्ज को माफ करने के साथ नियमित कर्ज पर लगभग 25 हजार रुपए प्रोत्साहन दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश के किसानों को नए साल में मिल सकता है कर्जमाफी का तोहफा, बनाया गया रोडमैप

2 लाख तक का कर्जा होगा माफ

कर्जमाफी के ब्लूप्रिंट में 2 लाख तक का कर्जा माफ करने की योजना है। कर्जमाफी के दायरे में सहकारी और राष्ट्रीयकृत बैंक दोनों आएंगे। कर्जमाफी का फायदा ओवरड्यू और समय पर लेनदेन करने वाले किसानों को कर्ज खाते में वर्तमान कर्जराशि के आधार पर माफी मिलेगी। कर्जमाफी से राज्य पर करीब 60 हजार करोड़ रुपए का वित्तीय भर आएगा।

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