नई दिल्ली: देश के दो सूबों कर्नाटक( Karnataka) और मध्यप्रदेश( Madhya pradesh) में राजनीतिक हलचल है। कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की मिलीजुली सरकार है,तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बैसाखी पर चल रही है। कर्नाटक में बीजेपी का दावा है कि गठबंधन की सरकार अल्पमत में है और कांग्रेस-जेडीएस नेता लोकतंत्र के नाम पर मजाक कर रहे हैं। इसके साथ ही बीजेपी का कहना है कि मध्यप्रदेश में भी लोगों का विश्वास कांग्रेस में नहीं है। ये बात अलग है कि बीजेपी की तरफ से इस तरह के बयान के बाद कांग्रेस से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार गिराने की साजिश की जा रही है। सीएम कमलनाथ(CM Kamalnath)  का भी कहना है कि बीजेपी पहले अपना घर सहेजे उसे मध्य प्रदेश सरकार के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। 

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री पी सी शर्मा ने तीन राज्यों में मिली करारी हार के बाद बीजेपी परेशान हो चुकी है। आम चुनाव 2019 करीब आ रहा है, बीजेपी को लगता है कि अगर केंद्र की सत्ता हाथ से चली गई तो लंबे समय तक इंतजार करना होगा। कर्नाटक के साथ साथ बीजेपी अब मध्य प्रदेश में भी खरीदफरोख्त पर उतर आई है। लेकिन कांग्रेस के साथ बीएसपी, एसपी और निर्दलीय विधायक मजबूती के साथ खड़े हैं।

मध्य प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर 


मध्य प्रदेश में कुल विधायकों की संख्या 230 है।


कांग्रेस के पाले में कुल 114 विधायक हैं।


बीजेपी के पास कुल 109 विधायक।


बीएसपी, एसपी के पास 2 और एक विधायक हैं।


निर्दलीय विघधायकों की संख्या 4 है।


सरकार में बने रहने के लिए कुल 116 विधायकों का समर्थन जरूरी है।


सक्रिय करने के लिए सभी प्रमुख पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर निगरानी कर रही है। इस आशय का आदेश पार्टी के प्रदेश मुख्यालय की ओर से सेल के संभागीय समन्वयक, जिला अध्यक्ष, विधानसभा समन्वयक के साथ ही प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि कांग्रेस के आफिशियल ट्वीटर अकाउंट एवं फेसबुक पेज से पोस्ट की जाने वाली हर सूचना को अधिक से अधिक शेयर कराना है। पूर्व में भी इस आशय के निर्देश दिए गए थे लेकिन सोशल मीडिया एवं आइटी सेल के पदाधिकारियों ने इसे नजरंदाज कर दिया। पत्र में कहा गया है कि प्रदेश कार्यालय में एक टीम गठित की गई है जो प्रदेश भर के पदाधिकारियों के सोशल मीडिया के अकाउंट पर नजर रख रही है। सेल के जो पदाधिकारी निष्क्रिय पाए जाएंगे उन्हें अयोग्य मानते हुए उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। कांग्रेस सोशल मीडिया एवं आइटी सेल के प्रदेश अध्यक्ष ने पदाधिकारियों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। जिसमें वह किसी भी समस्या का समाधान पूछ सकेंगे।
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रीवा में लोकसभा चुनाव जीतने की कांग्रेस ने बनाई यह रणनीति
प्रदेश में 15 वर्षों के बाद सत्ता में वापसी कांग्रेस पार्टी की जरूरी हुई है, लेकिन जिस तरह से रीवा सहित पूरे विंध्य में परिणाम आए हैं, उससे साफ जाहिर हो रहा है कि वर्तमान नेतृत्व जनता को नहीं जोड़ पा रहा है। चुनाव बाद प्रदेश में सरकार गठित हो गई और अब लोकसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। पार्टी ने जिस तरह से विधानसभा का चुनाव लड़ा था, उसी तरह के प्रबंधन पर आगे भी लडऩा चाह रही है। इसके लिए कार्यकर्ताओं के बीच रायशुमारी कर नाम तय करने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। एआइसीसी के पर्यवेक्षक पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं से राय लेंगे कि लोकसभा चुनाव किस तरह से लड़ा जाए और हर विधानसभा क्षेत्र से कितने नेता दावेदार हैं। 
यहां से प्रारंभिक रिपोर्ट लेने के बाद समीक्षा की जाएगी और फिर दावेदारों से भी चर्चा कर पूछा जाएगा कि आखिर वह किस वजह से सबसे मजबूत दावेदार हो सकते हैं। गुटों में बंटी कांग्रेस अब सरकार आने के बाद भी उसी राह पर है। विधानसभा चुनाव के दौरान व्यापक रूप से आंतरिक कलह का सामना पार्टी के प्रत्याशियों को करना पड़ा था। इस पर भी रायशुमारी के दौरान फोकस किया जा सकता है। पार्टी के पास रीवा जिले में कोई जादुई चेहरा नहीं है, जिसके दम पर भाजपा और बसपा को मात दी जा सके। बीते कई चुनावों से त्रिकोणीय मुकाबला होता आ रहा है। कुछ नए चेहरों को पार्टी ने जोड़ा है लेकिन उनके प्रति कार्यकर्ताओं की स्वीकार्यता कितनी होगी यह कुछ दिनों के बाद स्पष्ट हो पाएगा।


- 17 को रीवा में होगी रायशुमारी
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव सुधांशु त्रिपाठी संभागीय दौरे पर आ रहे हैं। १५ जनवरी को सतना, १६ को सीधी एवं १७ को रीवा में पार्टी के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों के साथ ही पूर्व सांसद, विधायक एवं अन्य प्रकोष्ठ-विभाग के पदाधिकारियों को बुलाया गया है। रीवा में विधानसभा चुनाव के दौरान रायशुमारी में हंगामा हुआ था, इस कारण इस बार वीडियोग्राफी कराने की भी तैयारी की जा रही है। यहां पर एआइसीसी पर्यवेक्षकों के साथ ही प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के साथ झूमा झटकी हुई थी।


- पूर्व में धरी रह गई थी रायशुमारी 
विधानसभा चुनाव के दौरान करीब चार महीने पहले से ही रायशुमारी शुरू की गई थी लेकिन जब टिकट वितरण की बारी आई तो केवल जीत को टारगेट में रखा गया। रीवा में ही राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कहकर गए थे कि पैराशूट मॉडल पर टिकट वितरण नहीं होगा। देवतालाब में चार दिन पहले बसपा छोड़कर आई विद्यावती पटेल को मैदान में उतारा तो रीवा और मनगवां से भी दूसरे दलों से आए नेताओं को प्रत्याशी बनाया गया। इतना ही नहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी के घर से गुढ़ और सिरमौर के लिए टिकट दी गई। चुनाव परिणाम में इसका असर देखा गया।


इन नेताओं के बीच नाम चयन होने की चर्चा
रीवा लोकसभा सीट के लिए जिन प्रमुख नामों पर इनदिनों चर्चा चल रही है, उसमें प्रमुख रूप से पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पराज सिंह, पूर्व सांसद सुंदरलाल तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा, पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह, पूर्व विधायक राजेन्द्र मिश्रा, उदयप्रकाश मिश्रा सहित अन्य कई नाम शामिल हैं। इसमें सभी को हार का सामना करना पड़ा है। पुष्पराज सिंह पूर्व में विधानसभा और लोकसभा की सीट हार चुके हैं तो सुंदरलाल हाल ही में विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर थे। उन्हें पार्टी पांच बार लगातार पार्टी ने लोकसभा लड़ा चुकी है जिसमें एक बार जीते थे। इसी तरह सुखेन्द्र और अभय भी हाल में विधानसभा चुनाव हारे हैं, राजेन्द्र मिश्रा और उदयप्रकाश भी हार का सामना कर चुके हैं। इन्हीं में से पार्टी को तय करना है कि सबसे बेहतर विकल्प कौन होगा। दावेदारों में पिछड़ा वर्ग से रमाशंकर सिंह पटेल और विद्यावती के समर्थक भी नाम प्रस्तावित करेंगे।


बधाई

शिवपुरी
कोलारस में एसडीओपी के रूप में शानदार सेवायें देकर थाना प्रभारी से लेकर जनता का विश्वास जीतने बाले एसडीओपी सुजीत सिंह भदौरिया का स्थानांतरण कोलारस से दमोह जिले की पथरिया विधानसभा में हो गया था। कोलारस की तरह दमोह जिले की पथरिया में भी जनता के बीच पुलिस का विश्वास जीतने के बाद सुजीत सिंह भदौरिया को शिवपुरी जिले के पिछोर परगना मुख्यालय पर पदस्थ करने के आदेश राज्य शासन पुलिस शाखा भोपाल द्वारा बीते रोज जारी किये गये जिसमें पिछोर में पदस्थ एसडीओपी मिश्रा का स्थानंातरण भोपाल किये जाने तथा उनके स्थान पर सु जीत सिंह सुजीत सिंह भदौरिया को पदस्थ किया गया है। 

बेंगलुरु। कर्नाटक में जारी सियासी नाटक के बीच कांग्रेस ने 18 जनवरी को अपने विधायक दल की बैठक बुलाई है। वहीं कांग्रेस सांसद मुनियप्पा ने कहा है कि अगले कैबिनेट विस्तार में सभी को मौका मिलेगा इसलिए जो विधायक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं वो डरें नहीं और लौट आएं।

वहीं राज्य के मंत्री जमीर अहमद ने कहा है कि यह हम नहीं बल्कि भाजपा डरी हुई है। अगर हम डरे हुए होते तो अभी रिसॉर्ट में बैठे होते लेकिन ऐसा नहीं है, रिसॉर्ट में तो भाजपा अपने विधायकों के साथ बैठी है। हमारे दो-तीन विधायक मुंबई में हैं और जल्द लौट आएंगे।
बता दें कि मंगलवार को दो विधायकों ने एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडीएस सरकार से समर्थन वापस ले लिया। दोनों विधायकों एच. नागेश (निर्दलीय) और आर. शंकर (केपीजेपी) ने राज्यपाल वजुभाई वाला को पत्र लिखकर उन्हें अपने फैसले से अवगत करा दिया है। फिलहाल उनके इस कदम से प्रदेश सरकार को कोई खतरा नहीं है। वहीं, केंद्रीय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा का कहना है कि अगर कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरी तो भाजपा राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी।

इसी बीच, कर्नाटक के मंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि एक या दो को छोड़कर सभी विधायक हमारे संपर्क में हैं। सभी विधायक कांग्रेस की बैठक में हिस्सा लेने जा रहे हैं। एक अकेला विधायक भी इस्तीफा देने नहीं जा रहा है। हमारी ताकत का एहसास सबको हो जाएगा।
वहीं, भाजपा नेता वमन आचार्य ने दावा किया है कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने पार्टी नेता सीएन अश्वथनारायण से संपर्क किया है। यदी सरकार गिरती है तो जनादेश के मुताबिक, हम सरकार बनाएंगे।

हालांकि, मुख्यमंत्री कुमारस्वामी और कांग्रेस ऐसी किसी भी संभावना से लगातार इनकार कर रहे हैं। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार एक या दो दिन में कांग्रेस के और कुछ विधायक इस्तीफा दे सकते हैं। इन खबरों का पूरी तरह से खंडन करते हुए मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा है कि राज्य में सरकार को कोई खतरा नहीं है।
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि मुंबई की होटल में रुके विधायक मीडिया से दूर हैं लेकिन मेरे संपर्क में हैं। मैं हर किसी से जुड़ा हुआ हूं और सभी से बात हो रही है। वो लोग लौट आएंगे, हमारा गठबंधन आराम से चल रहा है और मैं पूरी तरह रिलेक्स हूं।

वहीं कांग्रेस के प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि मैं सभी विधायकों के संपंर्क में हूं, यह ड्रामा एक या दो दिन में खत्म हो जाएगा। हम सब साथ हैं और कांग्रेस में कोई भी अंदरुनी विवाद नहीं है।

जहां कांग्रेस और जदयू अपने दावे कर रही है वहीं भाजपा के भी अपने दावे हैं। कर्नाटक में जारी घमासान के बीच महाराष्ट्र के मंत्री राम शिंदे ने दावा किया है कि अगले दो या तीन दिनों में कर्नाटक में भाजपा की सरकार बन जाएगी।
हरियाणा में डेरा डाले हैं भाजपा विधायक

उधर, कांग्रेस-जेडीएस सरकार द्वारा लुभाए जाने के डर से भाजपा ने अपने विधायकों को हरियाणा में नूंह जिले के आइटीसी ग्रांड भारत रिसॉर्ट में ठहराया हुआ है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येद्दयुरप्पा, पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और शोभा करंदलाजे जैसे अन्य वरिष्ठ नेता भी विधायकों के साथ हैं। शेट्टार ने बताया, "हमें नहीं पता कि हम कब तक यहां रहेंगे।"

शिक्षकों को फायदा देने के अलावा, केंद्र सरकार ने उन संस्थानों को भी राहत दी है, जो कर्मचारियों को एरियर देंगे. सरकार ने एरियर पर होने वाले खर्च का 50 फीसदी भी वहन करने का ऐलान किया है.

केंद्र की मोदी सरकार ने सभी तकनीकी संस्थानों के कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी दी है. इन संस्थानों के कर्मचारियों को अब 7वें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मिलेगा. केंद्र सरकार ने सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त डिग्री स्तर के तकनीकी संस्थानों के कर्मचारियों को लिए सातवां वेतन आयोग लागू करने की मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के बाद सरकार पर 1242 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ बढ़ेगा.केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि इस फैसले से सरकार द्वारा वित्तपोषित संस्थानों के कुल 29,264 शिक्षकों तथा अन्य शैक्षणिक कर्मियों को सीधे लाभ होगा. इसके अलावा, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के दायरे में आने वाले निजी कॉलेज या संस्थानों के करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों एवं  कर्मियों को इस मंजूरी से लाभ मिलेगा."शिक्षकों को फायदा देने के अलावा, केंद्र सरकार  ने उन संस्थानों को भी राहत दी है, जो कर्मचारियों को एरियर देंगे. सरकार ने एरियर पर होने वाले खर्च का 50 फीसदी भी वहन करने का ऐलान किया है. 1.1.2016 से 31.3.2019 के बीच एरियर पर जो खर्च होगा, सरकार उसका 50 फीसदी संस्थानों को लौटाएगी. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सरकार के इस कदम से तकनीकी संस्थानों को उच्च शैक्षणिक मानकों के शिक्षकों को लुभाने और उन्हें बनाए रखने में मदद मिलेगी.बताया जा रहा है कि 1 फरवरी 2019 से कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन मिलना शुरू हो जाएगा. यहीं नहीं पिछले तीन सालों का पीएफ भी उनके खाते में जमा कर दिया जाएगा

भोपाल, - मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को कहा कि सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के बारे में उनकी सरकार सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निर्णय करेगी। जब उनसे यह पूछा गया कि उनकी सरकार सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण कब से देगी, तो इस पर कमलनाथ ने यहां संवाददाताओं को बताया कि इस मुद्दे पर कोई फैसला लेने से पहले मध्य प्रदेश सरकार समाज के सभी तबकों के हितों पर विचार करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस पर विचार कर रहे हैं कि कैसे लागू करें……समाज के सभी तबकों के हितों पर विचार करेंगे। हमें यह देखना है कि किसी के हितों को नुकसान न हो।’’ कमलनाथ ने कहा, ‘‘ओबीसी का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में मुझसे मिलने आया था और कह रहा था कि उनके लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के हिसाब से बहुत कम है।’’ इससे पहले कमलनाथ ने प्रदेश के 55 लाख किसानों की दो लाख रूपये तक की अपनी सरकार की 50,000 करोड़ रूपये के फसल ऋण माफ करने वाली ‘जय किसान ऋण मुक्ति योजना’ में आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘‘निवेश आने से रोजगार का निर्माण होता है और विश्वास से ही निवेश आता है । निवेश आए बिना रोजगार के अवसर पैदा करना संभव नहीं है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जल्दी ही प्रदेश में निवेश आने का सिलसिला शुरू होगा।’ उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश लाने के बारे में देश के उद्योगपतियों से उनकी बात चल रही है और एक महीने में बताऊंगा की कितना निवेश मध्य प्रदेश में आया है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी सरकार के परफार्मेंस के बारे में भी मीडिया से हर महीने जानकारी साझा करूंगा।’’

भोपाल. नई सरकार में स्कूल शिक्षा विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों पर ठोस कार्रवाई करने की योजना बनाना शुरु कर दिया। २०१४ से अब तक अनुकंपा नियुक्तियों से संबंधित जितने भी प्रकरण लंबित पड़े हैं, इनके समाधान के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। जनवरी आखिरी तक सभी जिलों से डाटा एकत्र करने के बाद इसे एक अभियान का रुप दिया जाएगा। विभाग में भोपाल सहित प्रदेशभर के शिक्षकों, गैर शिक्षकों के २०१४ से ३१ दिसंबर, २०१८ की स्थिति के हजारों प्रकरणों प्रकरणों का आगामी एक महीने में निराकरण किया जाएगा। सभी पात्र उम्मीदवारों को एक महीने में नियुक्तियां देने का प्रावधान है, लेकिन किन्हीं कारणों से इस पर अब तक विभाग में पालन नहीं हो पा रहा था। अब जैसे ही नई सरकार का गठन हुआ तो इस दिशा में भी अफसरों ने तुरंत निर्णय लेने के आदेश जारी कर दिए। ३१ दिसंबर तक जितने भी प्रकरण लंबित है, सभी को प्राथमिकता और योग्यता के आधार पर एक महीने में हल करने की योजना बनाई जा रही है। विभाग के इस निर्णय से सालों से जिन प्रकरणों की फाइलें अफसरों-बाबूओं की टेबलों पर धूल खा रही थी, उन्हें भी कुछ आस बंधी हैं।


 


इन्हें मिलेगा फायदा, भरेंगे खाली पद
विभाग के अधीन सभी कार्यालयों में खाली पड़े पदों के लिए योग्यता रखने वाले अनुकंपा नियुक्ति के उम्मीदवारों को मौका मिलेगा। जिला स्तर के कार्यालयों में भी खाली पदों पर नियुक्तियां की जाएगी। इससे कई स्कूलों में शिक्षकों के पद भी भरे जाएंगे। जो शिक्षक पद की योग्यता रखने वाले हैं, उन्हें इस पद पर नियुक्तियां दी जाएगी। हालांकि इस अभियान में भी प्राथमिकताएं तय की गई है, लेकिन योग्य और पूराने प्रकरणों को पहले हल किया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय के संयुक्त संचालाक धीरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि अभियान में अपात्रों की भी सूची तैयार की जाएगी, ताकि उन्हें भी संतोषजनक जवाब दिया जा सके। एेसे कई प्रकरण हैं जो अयोग्य है, लेकिन अनुकंपा के लिए कतार में लगे हुए हैं। एेसे प्रकरणों को भी इस अभियान में सुलझाया जाएगा।


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