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शिवराज सिंह चौहान बोले- एमपी में सरकार गिरी तो कांग्रेस जिम्मेदार, हम नहीं

कर्नाटक के सियासी ड्रामे के समापन के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के एक बयान ने यहां सियासी हलचल बढ़ा दी है। मंगलवार को चौहान ने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार में भी काफी आंतरिक मतभेद हैं। ऐसे में अगर सरकार गिरती है तो इसके लिए कांग्रेस खुद जिम्मेदार होगी।

हाइलाइट्स
शिवराज सिंह चौहान के एक बयान से मध्य प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है

चौहान ने कहा कि अगर प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिरती है तो इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं होंगे

मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि इस सरकार में बीजेपी को हॉर्स ट्रेडिंग करने के लिए सात जन्‍म लेना पड़ेगा

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन वाली सरकार के गिरने के बाद मंगलवार को शिवराज सिंह चौहान  के एक बयान से मध्य प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौहान ने कहा कि अगर प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिरती है तो इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि  कमलनाथ सरकार में काफी आंतरिक मतभेद हैं और ऐसे में अगर सरकार गिरती है तो इसके लिए कांग्रेस खुद जिम्मेदार होगी। 
कांग्रेस ने किया पलटवार 
शिवराज ने कहा कि अगर प्रदेश में ऐसा कुछ होता है तो वह कुछ नहीं कर पाएंगे। पूर्व सीएम के इस बयान के बाद से प्रदेश में कर्नाटक जैसी सियासी स्थिति के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी नेता के बयान पर पलटवार करते हुए कमलनाथ सरकार के मंत्री  जीतू पटवारी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार में परेशानियां पैदा करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। उन्होंने बीजेपी को चेताते हुए कहा कि यह कमलनाथ सरकार है, कुमारस्वामी नहीं और इस सरकार में उन्हें (बीजेपी को) हॉर्स ट्रेडिंग करने के लिए सात जन्‍म लेना पड़ेगा। 
एमपी में बनेंगे कर्नाटक जैसे हालात? 
बता दें कि मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव के लिए वोटिंग हुई, जिसमें कुमारस्वामी सरकार को 99 विधायकों का समर्थन मिला जबकि बीजेपी के पक्ष में 105 वोट पड़े। इसके बाद से यह आशंका जताई जा रही है कि मध्य प्रदेश में भी कर्नाटक जैसे हालात बन सकते हैं। इन आशंकाओं को उस समय और बल मिला जब प्रदेश के पूर्व सीएम चौहान ने कांग्रेस सरकार के आंतरिक मतभेदों पर टिप्पणी की। शिवराज ने कहा कि कांग्रेस और बीएसपी-एसपी के विधायकों में काफी आंतरिक मतभेद हैं। ऐसे में अगर कमलनाथ सरकार के साथ कुछ भी होता है तो वह कुछ नहीं कर पाएंगे। 

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