मंथन ऩ्यूज दतिया आज दिनांक 30.06.2017 को डॉ. नरोत्तम मिश्र द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल द्वारा की गई। भारत निर्वाचन आयोग के अभिभाषक श्री डी.के. कटारे एवं शिकायतकर्ता श्री राजेन्द्र भारती के अभिभाषक श्री प्रदीप विसोरिया द्वारा जबाव हेतु समय चाहा गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री ध्रुव मेहता, श्री एम.पी.एस.रघुवंशी एवं श्री भारत सिंह उपस्थित हुए। माननीय न्यायालय द्वारा चुनाव आयोग को सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए, स्थगन पर सुनवाई हेतु प्रकरण आगामी दिनांक 05.07.2017 को नियत किया गया है। उपरोक्त परिस्थितियों में प्रकरण की सुनवाई दिनांक 05.07.2017 के लिए नियत की गई है।
उल्लेखनीय है कि दतिया सहित पूरे प्रदेश में डॉ नरोत्तम जी के लिए  शुभकामनाएं व्यक्त की जा रही,दुआएं की जा रही हैं कि उनको न्याय मिल जाये।दुर्लभ होते हैं ऐसे समर्पित परिश्रमी जन प्रतिनिधि।
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मंथन ऩ्यूज दिल्ली ,1000 रुपये का नोट बंद करने के सरकार के फैसले से लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए 200 रुपये का नया नोट मार्केट में लाने की तैयारी है. रिजर्व बैंक ने 200 रुपये के नोटों की छपाई भी शुरू कर दी है.

200 के नए नोट को पहले जुलाई में जारी करने की बात की जा रही थी. लेकिन अब इसमें कुछ देरी हो सकती है. भारतीय रिजर्व बैंक ने एक अखबार को बताया कि कुछ सप्ताह पहले ही नए नोटों की छपाई शुरू करने के आदेश दे दिए गए हैं. इसके बाद सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में इन नोटों की छपाई शुरू कर दी गई है.

500 रुपए के 1,650 करोड़ नोट हटाए जाने के बाद बड़ा अंतर

बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल 8 नवंबर को नोटबंदी का ऐलान किया था. जिसके तहत 500 रुपये के पुराने नोट को बंद कर के 500 और 2000 के नए नोट लाए गए थे. वहीं 1000 रुपये के नोट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च के मुताबिक 8 नवंबर को नोटबंदी के वक्त देश में 500 रुपये के नोटों की संख्या 1,650 करोड़ थी. इन नोटों को हटाए जाने के बाद मार्केट में सर्कुलेट नोटों की संख्या में बड़ा अंतर आ गया था.

200 रुपए के नोट से छोटी करंसी के संकट से मिलेगी राहत

एसबीआई में ग्रुप चीफ इकॉनमिस्ट के तौर पर काम करने वाले सौम्या कांति घोष ने कहा कि 'दैनिक लेन-देन के मकसद से 200 रुपये के नोट लाए जाने से कामकाज में आसानी होगी.' उन्होंने कहा- 'नोटबंदी में हटाए गए नोटों के एक हिस्से की भरपाई 2,000 रुपये के नोटों के जरिए हुई है. जबकि 500 रुपये के नोटों ने काफी हद तक इस कमी को पूरा करने का काम किया है. लेकिन यह काफी नहीं था.' उन्होंने कहा कि 200 रुपये के नोटों को जारी किए जाने के बाद छोटी करंसी के संकट से राहत मिल सकेगी. जिसकी कमी लोग 500 रुपये के पुराने नोटों को बंद किए जाने के बाद से ही महसूस कर रहे हैं.

मंथन ऩ्यूज दतिया ।बसई ब्रेकिंग-- बसई मण्डल के ग्राम बरधुवॉ में बीजेपी  युवा मोर्चा के कार्यकर्ता धर्मेन्द्र  तिवारी ने ग्रामीणो के साथ मिलकर मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र के लिए मंगलकामना को लेकर सुन्दर काण्ड पाठ का आयोजन किया ,जिसमें भारी संख्या में ग्रामीण शामिल हुये,
सुन्दर काण्ड में एक ही सम्पुट रखा गया
   दीनदयाल बिरध संभारी ,हरहु नाथ मम् संकट भारी
इसी संपुट के साथ सभी ने मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की मंगलकामनाओ की प्रार्थना की ,यह सुन्दर काण्ड बरधुवॉ के तुलसीघाट हनुमान मंदिर पर किया गया,

नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। पीएम मोदी ने कहा गौरक्षा के नाम परु हो रही हिंसा को बर्दाश्त ना होनेवाली घटना बताते हुए कहा कि किसी भी शख्स को कानून अपने हाथों में लेने का हक़ नहीं है। साबरमती आश्रम की सौवीं वर्षगांठ के मौके पर कार्यक्रम में शरीक होने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि देश में इस तरह की हिंसा बंद होनी चाहिए। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 के मई में जब से प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है उसके बाद से वह अब तक 13 बार दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा, इस साल फिर ये गुजरात का यह प्रधानमंत्री मोदी का यह चौथा दौरा है, जहां वे साबरमती आश्रम की 100वीं वर्षगांठ के मौके पर कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हैं। ऐसे में यह बहुत ही स्वभाविक सा सवाल मन में उठता है कि क्या है साबरमती आश्रम का इतिहास और पीएम लगातार गुजरात का क्यों इतना दौरा करते हैं? आइये हम आपको इसका कारण और इस बारे में क्या सोचते हैं राजनीतिक जानकार वह आपको बताते हैं।

साबरमती आश्रम का गांधी से रिश्ता

साबरमती आश्रम अहमदाबाद के निकट साबरमती नदी के किनारे पर स्थित है। गांधीजी ने स्वतंत्रता और साथ ही समाज के उत्थान की सभी प्रमुख गतिविधियों का संचालन इसी आश्रम से किया, जो कि विख्यात रूप से साबरमती आश्रम के रूप में जाना जाता था। साबरमती आश्रम की स्थापना महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से आने के बाद साल 1917 में अहमदाबार के कोचरब में की गई थी। इतिहासकारों का यह मानना है कि पौराणिक दधीचि ऋषि का आश्रम भी यहीं पर था। गांधीजी ने स्वतंत्रता और साथ ही साथ समाज के उत्थान की सभी प्रमुख गतिविधियों का संचालन इसी आश्रम से किया, जो कि विख्यात रूप से साबरमती आश्रम के रूप में जाना जाता था। अंत में, 12 मार्च 1930 को नमक कानून को तोड़ने के लिए दांडी यात्रा के लिए रवाना होने से पहले वह इस आश्रम में कई वर्षों तक रहे। दांडी से यात्रा शुरू करने से पहले गांधी जी ने घोषणा की थी कि वे इस आश्रम में देश की स्वतंत्रता से पहले नहीं लोटेंगे।

प्रधानमंत्री का गृह क्षेत्र है गुजरात
दरअसल, प्रधानमंत्री बनने से पहले तक नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे जो सीधा गुजरात से लोकसभा में भारी जीत के बाद 2014 में देश की कमान संभाली थी। उसके बाद से लगातार वह देश की सेवा में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वह दुनिया के चाहे भले ही किसी भी कोने में हों लेकिन गुजरात उनकी प्राथमिकताओं में रहता है। Jagran.com से खास बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह ने बताया कि सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ही नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह भी लगातार गुजरात को तवज्जो देकर वहां का दौरा कर रहे हैं। उसकी वजह है वहां के लोगों को अहमियत देना। उनका मानना है कि गुजरात के लोगों में ऐसा संदेश ना जाएं कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने गुजरात को पहले के मुकाबले अब तवज्जो देने कम कर दिया है।

विधानसभा चुनाव है महत्वपूर्ण फैक्टर
इस साल के आखिर में गुजरात का विधानसभा चुनाव होना है। जहां एक तरफ भाजपा वहां पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है तो वहीं दूसरी तरफ ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री के दौरे से पार्टी को एक नई ऊर्जा देने की कोशिश की जा रही है। प्रदीप सिंह का मानना है कि पीएम मोदी के गुजरात छोड़ने के बाद भाजपा के लिए जो पिछले दिनों जिस तरह की कठिन परिस्थिति बनी वह चाहे बात आनंदी बेन पटेल को मुख्यमंत्री के पद से हटाना हो या फिर हार्दिक पटेल का मामला उसके बाद पार्टी अब किसी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि पार्टी लगातार अपने तेवर को धार देने में लगी है।

भाजपा का 150 सीटें जीतने का लक्ष्य
भारतीय जनता पार्टी ने मोदी की अगुवाई में लड़े पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में 128 सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी। लेकिन, इस बार भाजपा ने छह महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में 182 में से 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। अमित शाह अपने हर कार्यक्रम में गुजरात दौरे में यही बात कहते है कि मोदी जब मुख्यमंत्री थे तो 128 सीट दिलाई थीं। अब जब वे देश के प्रधानमंत्री बन गए हैं तो उनको 150 सीट का तोहफा देकर उनका मान बढ़ाना चाहिए।

नई दिल्ली: वर्तमान में हामिद अंसारी देश के उपराष्ट्रपति हैं. वह पहले ऐसे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने लगातार दो कार्यकाल पूरे किए हैं. उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2017 को खत्म हो रहा है. ऐसे में देश के 15 वें राष्ट्रपति के रूप में जो भी व्यक्ति चुना जाएगा वो 11 अगस्त 2017 को शपथ लेगा. उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच साल का होता है, लेकिन वह इस कार्यकाल के पूरे हो जाने पर भी अपने उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक पद पर बने रह सकते हैं.

उपराष्ट्रपति का चुनाव महत्वपूर्ण क्यों ?

देश में उपराष्ट्रपति का पद राष्ट्रपति के बाद दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद होता है. उपराष्ट्रपति संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा का सभापति भी होता है. इसके साथ ही उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग, या बर्खास्तगी या अन्य कारणों से खाली हुए राष्ट्रपति पद पर अगले राष्ट्रपति के चुनाव होने तक एक्टिंग राष्ट्रपति के रूप में काम करता है.

राष्ट्रपति का पद किसी भी स्थिति में छह महीने से ज्यादा खाली नहीं रह सकता. इसके अलावा अगर राष्ट्रपति अनुपस्थिति, स्वास्थ्य या किन्हीं कारणों से अपने कार्य को करने में असमर्थ हैं तब वे अपना पदभार उपराष्ट्रपति को सौंप सकते हैं. उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के दोबारा पद ग्रहण करने तक राष्ट्रपति के तौर पर कार्य करता है.

कैसे होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव ?

उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के इलेक्टेड (जनता के द्वारा चुने गए) सासंद वोट देते हैं. सासंदों का एक वोट ही जोड़ा जाता है. इस चुनाव में राष्ट्रपति चुनाव की तरह विधानसभा के सदस्य शामिल नहीं होते हैं.

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचन मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) की कुल सख्या 790 है. जिसमें राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य 233 हैं और नामित सदस्य 12 हैं. इसी तरह लोकसभा में निर्वाचित सदस्य 543 और नामित सदस्य 2 हैं. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 785 वोट हैं जिसमें से ये चुनाव जीतने के लिए 393 वोटों की जरूरत पड़ती है.

कौन लड़ सकता है राष्ट्रपति पद का चुनाव?

कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति तभी निर्वाचित हो सकता है जब वह-

भारत का नागरिक है.35 साल की आयु पूरी कर चुका है, औरराज्य सभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो.चुनाव लड़ने वाला व्यक्ति,जो केंद्र सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अंतर्गत किसी लाभ के पद पर कार्य  ना करता हो.-उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को कम से कम 20 सांसदों के प्रस्तावक और 20 सांसदों प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर जरूरी हैं.उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र के साथ 15000 रुपये जमानत राशि के तौर पर जमा करनी होती है.

बैलेट पेपर और विशेष पेन के जरिए पड़ेंगे वोट

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए बैलेट पेपर के जरिए वोटिंग की जाती है. चुनाव आयोग के मुताबिक उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने के लिए आयोग विशेष पेन जारी करेगा. यह पेन निर्वाचन आयोग के अधिकारी द्वारा वोट डालने वाले को दिया जाएगा. सिर्फ इसी पेन से डाले गए वोट को माना जाएगा. इसके अलावा किसी और पेन से डाले गए वोट मान्य नहीं होंगे.

आयोग के मुताबिक, उपराष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय है. किसी भी स्थिति में मतपत्र किसी और को दिखाना संविधान के विरुद्ध है.

कहां और कब होगी वोटिंग?

उपराष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग संसद भवन में होगी और जिस दिन वोटिंग होगी उस दिन वोटों की गिनती भी की जाएगी. चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए केंद्र सरकार के परामर्श से राज्यसभा के सचिव शमशेर सिंह को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया है.

भारत के भूतपूर्व उप-राष्ट्रपति

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्ण- मई 13, 1952 से मई 12, 1962डॉ जाकिर हुसैन- मई 13, 1962 से मई 12, 1967वी.वी. गिरि- मई 13, 1967 से मई 3, 1969गोपाल स्वरूप पाठक- अगस्त 31, 1969 से अगस्त 30, 1974श्री बी डी ज़त्ति- अगस्त 31, 1974 से अगस्त 30, 1979श्री एम हिदायतुल्ला- अगस्त 31, 1979 से अगस्त 30, 1984श्री आर वेंकटरमन- अगस्त 31, 1984 से जुलाई 24, 1987डा शंकर दयाल शर्मा- सितम्बर 3, 1987 से जुलाई 24, 1992के.आर. नारायणन- अगस्त 21, 1992 से जुलाई 24, 1997कृष्णकांत- अगस्त 21, 1997 से जुलाई 27, 2002भैरों सिंह शेखावत- अगस्त 19, 2002 से जुलाई 21, 2007वर्तमान में हामिद अंसारी- अगस्त 11, 2007 से अभी तक

मंथन ऩ्यूज अमरोहा। अमरोहा में बेखोफ हो चुके चोरो ने एक ही गांव के चार घरो को निशाना बनाया और चारो घरो से नकदी और जेवरात सहित लगभग 50 लाख की चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। 

 मामला अमरोहा जिले की डिडौली कोतवाली इलाके के गाँव दीपपुर का है जहां बीती रात बेखोफ हो चुके चोरो ने गांव के ही चार बड़े घरो को निशाना बना दिया और सोने चांदी के जेवरात सहित नकदी समेत लगभग 50 लाख रुपये की कीमत का माल चुराकर फरार हो गुए । चोरो ने चोरी की इस वारदात को उस समय अंजाम दिया जब चारो घरो के लोग गर्मी के चलते अपनी छतों पर सो रहे थे और इसी बात का फायदा उठाकर चोर घरो में दाखिल हो गए और चोरी करके फरार हो गए । 

घर से लाखों की रुपये की चोरी हो जाने के बाद गुस्साए परिजनों का कहना है कि ऐसा तो सपा की सरकार में भी नही हुआ 5 साल सपा की सरकार रह गयी एक कील तक चोरी नही हुई । और आज भाजपा की सरकार में देखो क्या हो रहा है । इस मामले में पुलिस का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जल्द ही गैंग का खुलासा किया जाएगा।

मंथन ।कोई भी स्मृति आयोजन एक कालखण्ड को सामने लाता है। इसलिए इतिहास का अध्ययन महत्वपूर्ण होता है। नई पीढ़ी को इसकी जानकारी दी जाना आवश्यक है। देश में आपातकाल का दौर इतिहास का वो काला अध्याय है जिसे आज भी याद कर उस समय की गई प्रजातंत्र विरोधी गतिविधियों के सच की जानकारी आज की पीढ़ी को मिलती है। संस्कृति विभाग और भारत  भवन द्वारा बुधवार को भोपाल में  माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता तथा संचार विश्वविद्यालय के सभागार में हुए 'प्रसंग आपातकाल'' में विभिन्न वक्ताओं ने इस
आशय के  विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा ने जानकारी दी कि देश में आपातकाल की अवधि में 253 पत्रकार को नजरबंद अथवा गिरफ्तार किया गया। इनमें मध्यप्रदेश के सर्वाधिक 59 पत्रकार शामिल थे। पत्रकार वर्ग ने आपातकाल की अवधि में पूरे साहस का परिचय दिया और उस कठिन दौर में जनता का मनोबल बनाए रखा। श्री आहूजा ने आपातकाल के दौरान प्रेस सेंसरशिप के अंतर्गत लिए गए मामलों की जानकारी भी दी।

जून 1975 में लगाए गए आपातकाल के संबंध में वक्ताओं ने कहा कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन और प्रेस सेंसरशिप के उस दौर की आज भी भर्त्सना की जाती है।

कार्यक्रम में विमर्श सत्र 'आपातकाल और साहित्य'' में श्री तपन भौमिक, मध्यप्रदेश अध्यक्ष पर्यटन विकास निगम के विशेष आतिथ्य में  दिल्ली से आयेश्री अरूण कुमार भगत, कर्नल नारायण पारवानी,भोपाल और उर्दु के  वरिष्ठ पत्रकार श्री आरिफ अज़ीज़ ने हिस्सा लिया। श्री भगत ने बताया कि आपातकाल पर रचे गए कथा और काव्य साहित्य का संकलन उनके द्वारा किया गया है।यह देखने अनेक मीसाबंदी आते भी हैं।जल्द ही आपातकाल पर लिखी कहानियों का एक संग्रह छपने वाला है।निराला सृजनपीठ के निदेशक डॉ. देवेन्द्र दीपक ने कार्यक्रम में बताया कि मध्यप्रदेश में भी आपातकाल पर केन्द्रित साहित्यिक पत्रिकाओं के अंक आये हैं।उन्होंने खुद एक काव्य संग्रह प्रकाशित करवाया  है। इस विषय पर उनके द्वारा लिखा गया नाटक 'भूगोल राजा का : खगोल राजा का'' भी आपातकाल के हालातों को सामने लाता है।

कार्यक्रम में काफी संख्या में प्रबुद्धजन, पत्रकार और पत्रकारिता के विद्यार्थी उपस्थित थे

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 दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका, पुर्तगाल और नीदरलैंड की यात्रा कर बुधवार को भारत लौट आए हैं। दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनका स्वागत किया। अपनी विदेश यात्रा के अंतिम पढ़ाव में पीएम मोदी ने नीदरलैंड में वहां के प्रधानमंत्री मार्क रुत्ते से मुलाकात के अलावा भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्विटर पर लिखा, 'तीन देशों - पुर्तगाल, अमेरिका और नीदरलैंड में कई कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के लिए रवाना हुए।' इससे पहले मोदी ने कहा कि भारत जल्द ही नीदरलैंड के पासपोर्ट धारकों को पांच साल का व्यापार एवं पर्यटक वीजा देने पर फैसला करेगा।

उन्होंने नीदरलैंड की एक दिन की अपनी यात्रा पूरी करने से ठीक पहले यहां भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। नीदरलैंड में ब्रिटेन के बाद भारतीय मूल के लोगों की सबसे बड़ी आबादी है।

प्रधानमंत्री ने 'मोदी मोदी ' के नारे के बीच करीब 3,000 लोगों की सभा को संबोधित करते हुए अपने घंटे भर के भाषण में बैंकिंग, उर्जा, डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में अपनी सरकार द्वारा की गयी पहलों का उल्लेख किया और अंतरिक्ष, स्वास्थ्य सेवा तथा स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में की गयी प्रगति के बारे में बात की।

केन्द्र सरकार ने 1 जुलाई को देशभर में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है. इसके लिए 30 जून जहां संसद के केन्द्रीय हॉल में जीएसटी लॉन्च का कार्यक्रम रखा गया है वहीं केन्द्र सरकार बुधवार को लॉन्च की तैयारी का मॉक ड्रिल या रिहर्सल करने जा रही है.

केन्द्र सरकार की सूचना के मुताबिक सुबह 10 बजे पार्लियामेंट के सेंट्रल हॉल में यह रिहर्सल किया जाएगा. इस रिहर्सल की जिम्मेदारी संसदीय मामलों के मंत्री अन्नत कुमार समेत मुख्तार अब्बास नकवी और एसएस अहलूवालिया करेंगे

सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय से जीएसटी से संबंधिक अधिकारी भी संसद में इस रिहर्सल के दौरान मौजूद रहेंगे. गौरतलब है कि सेंट्रल हॉल में 30 जून की रात राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली समेत पक्ष और विपक्ष के सभी बड़े नेता मौजूद रहेंगे.

गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुखर्जी ने 2011 में बतौर वित्त मंत्री जीएसटी के लिए पहला संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था. वहीं संसद के इसी सेंट्रल हॉल में 14 अगस्त 1947 की रात देश के आजादी की घोषणा भी की गई थी. लिहाजा, केन्द्र सरकार अब देश के सबसे बड़े टैक्स रिफॉर्म को लॉन्च करने के लिए जहां इसी सेंट्रल हॉल को केन्द्र में रख रही है, इस रिहर्सल से उसकी कोशिश है कि 30 जून की रात जीएसटी की लॉन्च में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े.

केन्द्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक 30 जून की रात 11 बजे संसद में जीएसटी लॉन्च का कार्यक्रम शुरू होगा और मध्यरात्रि 12 बजे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी घंटा बजाकर जीएसटी का अगाज करेंगे. इस कार्यक्रम के लिए सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों को निमंत्रण के साथ-साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को भी निमंत्रण दिया है.

 

मंथन ऩ्यूज दिल्ली पिछले काफी लंबे से भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना में चल रही तू-तू, मैं-मैं की लड़ाई लगता है अब खत्म हो गई है. शिवसेना ने एक बार फिर अपने मुख्यपत्र सामना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है. सामना में लिखा गया कि पीएम ने जिस तरह अमेरिका में पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक का हवाला देकर कड़ा संदेश दिया, उसके लिए जितनी तारीफ की जाए वो कम है. यह हाल ही में दूसरी बार है जब शिवसेना ने बीजेपी या मोदी की तारीफ की हो. अभी महाराष्ट्र में किसानों का ऋण माफ करने पर भी उन्होंने तारीफ और धन्यवाद किया था.

अभी भी कई सवाल
संपादकीय में लिखा गया है कि मोदी को शाबाशी देनी ही होगी, उनके शब्दों में निश्चित ही दम है. हालांकि कहा गया है कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी कश्मीर में पाकिस्तान के हमले और जवानों की शहादत और चीनी घुसपैठ के लिए सिक्किम का रास्ता रोकने के लिए यह सारे सवाल हल करने होंगे.शिवसेना ने कहा कि विदेशों में मोदी का स्वागत देखकर सभी देशवासियों का सीना गर्व से तन जाता है, मोदी ने दुनिया में हिन्दुस्तान की तस्वीर बदलने की कोशिश की है. सामना ने कश्मीर में जारी हिंसा पर भी चिंता जताई है, कहा है कि मोदी को अमेरिका से सख्त सन्देश देना चाहिए. आतंकवाद पर अमेरिका के दोहरी नीति को लेकर भी हमला बोला गया है. शिवसेना ने कहा कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ भारत का साथ देने की बात करता है, लेकिन अमेरिका ने भारत का कितना साथ दिया हर कोई जानता है. 

वहीं अमेरिका में ट्रंप सरकार की "अमेरिकी फर्स्ट" की नीति के चलते जिन 5 लाख भारतीयों के बेरोजगार होने का खतरा मंडरा रहा है, इसका समाधान ट्रंप-मोदी की मुलाकात से निकलेगा और ट्रंप अपनी दोस्ती निभाएंगे यह उम्मीद है. चीन की घुसपैठ को लेकर और मानसरोवर यात्रा रोके जाने पर चिंता भी जताई. लेख में कहा गया है कि चीनी पहले अरुणाचल प्रदेश, लेह, लद्दाख से घुसपैठ होती थी. अब सिक्किम का प्रवेश का लिए इस्तेमाल चिंता की बात है.

जम्मू, ब्यूरो। कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच बाबा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा के लिए बुधवार सुबह श्रद्धालुओं का पहला जत्था जम्मू से पहलगाम व बालटाल के लिए रवाना हुआ। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने जम्मू बेस शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले बैच को करीब सुबह साढ़े चार बजे  झंडी दिखाई।

बता दें कि पवित्र गुफा में शिवलिंग के पहले दर्शन 29 जून को होंगे। पहले दिन राज्यपाल एनएन वोहरा, अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीईओ उमंग नरूला व अन्य अधिकारियों के साथ पवित्र गुफा में पूजा-अर्चना करेंगे। जम्मू में यात्रा के आधार शिविर यात्री निवास भगवती नगर में देशभर से श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है।

मंगलवार देर शाम तक बारह सौ से अधिक श्रद्धालु यात्री निवास में प्रवेश कर चुके थे। श्रद्धालुओं के जम्मू पहुंचने का सिलसिला जारी है। जम्मू से रवाना होने वाले पहले जत्थे में दो हजार से अधिक श्रद्धालु  रवाना हुए। इसके अलावा हजारों श्रद्धालु जम्मू में रुके बिना सीधे भी पहलगाम व बालटाल जाएंगे। उधर, पहलगाम व बालटाल में भी करीब पांच सौ श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

कश्मीर में मौजूदा हालात को देखते हुए यात्रा के लिए सुरक्षा प्रबंध काफी पुख्ता किए गए हैं। दोपहर साढ़े तीन बजे तक यात्रियों के वाहनों को हर हाल में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जवाहर टनल को पार करना होगा। यात्री वाहनों के साथ सीआरपीएफ व पुलिस के दस्ते चलेंगे। हाईवे पर भी चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रहेंगे। बाबा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा चालीस दिन की है। यात्रा रक्षा बंधन वाले दिन सात अगस्त को संपन्न होगी।

बालटाल, पहलगाम मार्ग पर सुरक्षा बल सतर्क

बाबा अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकी हमले और प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए पुलिस, अ‌र्द्ध सैनिक बल और सेना ने सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं। बालटाल व पहलगाम मार्गो पर कंट्रोल रूप स्थापित किए गए हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए बने शिविरों के चारों ओर कंटीले तार लगाकर किलाबंदी की गई हैं, ताकि कोई शिविर के भीतर प्रवेश नहीं कर पाए। श्रद्धालुओं के शिविरों के आसपास चौबीसों घंटे शार्प शूटर तैनात किए गए हैं।

वहां वाच टावर स्थापित किए गए हैं। यात्रा मार्ग के दोनों रूटों में डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते की मदद से सुबह और शाम में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। यात्रा मार्ग पर राज्य पुलिस के अलावा सेंट्रल आ‌र्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस, सशस्त्र सीमा बल की विशेष कंपनियों को तैनात किया गया है।

अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सैटेलाइट से रहेगी नजर

सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी एसएन श्रीवास्तव ने बुधवार से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा में शामिल होने वाले हरेक श्रद्धालु को पूरी सुरक्षा देने का दावा किया। उन्होंने कहा कि इस बार यात्रा मार्ग पर सैटेलाइट से नजर रखी जा रही है। सुरक्षा में कहीं कोई चूक न रहे इसके लिए ड्रोन कैमरे, आधार शिविरों में सीसीटीवी लगाने के साथ विशेष बुलेट प्रूफ बंकर की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि सुरक्षाबल आतंकी गतिविधियों को लेकर खुफिया सूचनाओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हरेक श्रद्धालु यात्रा मार्ग पर खुद को सुरक्षित महसूस करेगा।

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