मध्यप्रदेश मे कमिश्नर सिस्टम को लेकर अफसर आए आमने-सामने

   पुलिस मुख्यालय ने बुधवार को पुलिस कमिश्नर सिस्टम का ड्राफ्ट तैयार कर गृह विभाग को भेज दिया। इसके तहत नया सेटअप बनाया जाएगा। लेकिन ड्राफ्ट में यह उल्लेख नहीं किया गया है कि आईजी रैंक के अफसर पुलिस कमिश्नर बनेंगे या एडीजी रैंक के अफसर? इसमें भोपाल और इंदौर का मेट्रो पोलिटन एरिया नोटिफाइड करने का प्रस्ताव भी है। इधर, बुधवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में कार्यक्रम के दौरान कहा कि भोपाल और इंदौर में जल्द ही पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किया जाएगा। इस बीच, नए सिस्टम को लेकर आईपीएस और एसएएस (राज्य प्रशासनिक सेवा) अफसर आमने-सामने आ गए हैं।




आईएएस अफसर अभी चुप हैं। लेकिन एसएएस इस मामले में उनके निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लागू करने के लिए मंगलवार को हाई पावर कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री की सैद्घांतिक सहमति मिली। इसके बाद पीएचक्यू ड्राफ्ट तैयार कर गृह विभाग को भेजा है। ड्राफ्ट में मुख्य रूप से अपराधियों को जमानत देते समय बॉन्ड भरवाने का अधिकार पुलिस ने मांगा है। मप्र में यह अधिकार फिलहाल कलेक्टर के पास बतौर जिला दंडाधिकारी के पास है। इसी तरह प्रतिबंधात्मक धारा 144 लागू करने के अधिकार भी पुलिस के हाथों में दिए जाना भी प्रस्तावित किया गया है। नया सिस्टम अस्तित्व में आता है तो डीआईजी कार्यालय का नाम बदलकर पुलिस कमिश्नर आॅफिस कर दिया जाएगा। इसी तरह पुलिसिंग के लिए जिले को दो भागों शहर और ग्रामीण में बांटा जाएगा। मुख्य रूप से पुलिस कमिश्नर सिस्टम का दायरा तय करने के लिए मेट्रोपोलिटन एरिया अधिसूचित करने का प्रस्ताव भी राज्य शासन को भेजा गया है। पीएचक्यू के एक सीनियर अफसर ने दावा किया है कि कानून व्यवस्था मजबूत करने और अपराधों को नियंत्रित करने की दृष्टि से ही पुलिस कमिश्नर सिस्टम में अधिकार देना प्रस्तावित किया गया है। 



...राप्रसे अफसर बोले- डीआईजी प्रणाली भी फेल हुई 

बुधवार को राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों ने बैठक कर कहा कि इससे पहले डीआईजी प्रणाली लागू की गई थी। ये भी असफल साबित हुई। केवल नई व्यवस्था लागू होने से अपराधों को रोका नहीं जा सकता है। मुख्यमंत्री की मंशा से यदि सारे अफसर काम करें तो अपराधों पर नियंत्रण लगाया जा सकता है। राज्य प्रशासनिक सेवा संघ के अध्यक्ष जीपी माली ने कहा कि सिस्टम के विरोध की बात नहीं की जा रही है। आईएएस संघ जैसा चाहेगा आगे की रणनीति वैसे तैयार करेंगे। 



व्यवस्था में बदलाव आएगा: 

देश के हिंदी बेल्ट में इस तंत्र की अहमियत नहीं समझी जा रही। इस बात को समझा जाना चाहिए कि शहरों का अपराध प्रबंधन ग्रामीण क्षेत्रों से इतर होता है। इसी को समझते हुए यह तंत्र लागू किया गया था। ऐसा नहीं है कि इस तंत्र से बहुत फायदा हो जाएगा, लेकिन इससे व्यवस्था में निश्चित तौर पर बदलाव आएगा। -एसके राउत, पूर्व डीजीपी मप्र 

अहमदाबाद और जयपुर में एडीजी रैंक के अफसर हैं पुलिस कमिश्नर 

अहमदाबाद- आबादी 60 लाख, पुलिसकर्मी- 17 हजार 

1 पुलिस कमिश्नर 

2 ज्वाइंट कमिश्नर (सेक्टर 1 व 2) 

7 डिप्टी कमिश्नर (7 जोन) 

15 असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (6 जोन में दो व 1 जोन में तीन ) 

जयपुर- आबादी 50 लाख, पुलिसकर्मी 12 हजार 

1 पुलिस कमिश्नर 

2 एडिश्नल कमिश्नर (1 कानून व्यवस्था व 1 क्राइम) 

4 डिप्टी कमिश्नर (क्राइम, हेडक्वार्टर, कानून व्यवस्था व जोन) 

8 असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (चार डिप्टी कमिश्नर के अधीन 2-2) 





कांग्रेस ने कहा- सिर्फ पुलिस मजबूत होगी, भाजपा बोली- समाज का फायदा 

समाज को फायदा होगा 

अगर किसी नए तंत्र से पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित होती है और इसका समाज को फायदा मिलता है, तो इसका स्वागत किया ही जाना चाहिए। - रजनीश अग्रवाल, प्रवक्ता बीजेपी 

सिर्फ पुलिस पावरफुल होगी 

प्रदेश सरकार लोगों को गुमराह कर रही है। यह सिर्फ पुलिस काे पावर देने की कवायद है। इसमें अपराध पर नियंत्रण की बात कहीं नहीं है।- जे पी धनोपिया प्रवक्ता कांग्रेस 

राज्य प्रशासनिक सेवा अफसर बोले- केवल व्यवस्था बदलने से अपराध नहीं रुकेंगे 

इंदौर-भोपाल में जल्द लागू होगी व्यवस्था : सीएम 

आईपीएस ने बताई जरूरत, आईएएस बोले-शोध हो 

स्मार्ट पुलिस के बिना स्मार्ट शहर की कल्पना करना बेमानी है। नए पुलिस सिस्टम की जरूरत है। कानून व्यवस्था बहाल रखना पुलिस की जवाबदेही है, लेकिन इसके लिए मौजूदा समय के हिसाब से अधिकार भी मिलने चाहिए। -संजय राणा, अध्यक्ष आईपीएस एसोसिएशन 

इस सिस्टम को लागू करने से पहले व्यापक शोध की जरूरत है। बिना उचित नियंत्रण व्यवस्था के इतने अधिकार दिया जाना अनुचित है। जहां यह प्रणाली पहले से है, वहां अपराधों की स्थिति में क्या अंतर आया इस पर शोध होना चाहिए। -अशोक विजयवर्गीय, पूर्व मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़