हाईकोर्ट ने MPPSC परीक्षा के रिजल्ट पर लगाई रोक, अगली सुनवाई 5 अप्रैल को

भोपाल/जबलपुर. हाईकोर्ट ने 18 फरवरी को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2018 के परीक्षा परिणामों पर रोक लगा दी है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 5 अप्रैल को होगी। छात्रों का कहना था कि परीक्षा में 10 सवाल ऐसे  पूछे गए, जो मॉडल आंसर शीट में गलत थे। सुनवाई में सरकार को इस मामले में जवाब देना होगा।


-बता दें कि इस परीक्षा से डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार सहित विभन्न प्रशासनिक पदों के लिए भर्ती होनी है। मामले में अभ्यर्थियों ने एमपीपीएससी को भी शिकायत की थी, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके पहले  भोपाल से लेकर इंदौर तक जमकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। 


-परीक्षार्थियों के अनुसार भारत छोड़ो आंदोलन का नारा यूसुफ मेहरअली ने दिया था। पीएससी ने मॉडल आंसरशीट में इसका उत्तर पंडित जवाहरलाल नेहरू बताया गया था। बाद में फाइनल आंसरशीट में सुधार कर मेहरअली को ही सही माना गया। मॉडल आंसरशीट में करीब 9 प्रश्नों पर आपत्तियां लगाई थीं। पीएससी ने फाइनल आंसरशीट में 10 सवालों के जवाब बदले। गलत मानकर 5 सवाल विलोपित भी कर दिए।


1)ये हैं अभ्यर्थियों का तर्क 


-रि-एग्जाम कराने की मांग का महत्वपूर्ण तर्क रखते हुए छात्रों ने कहा था कि पांच प्रश्न विलोपित करने के पहले जिन छात्रों के अंक 70 तक हो रहे थे वह अब 65 से कम अंकों पर आ गए हैं। एमपीएससी परीक्षा में करीब 2.84 लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं, एक-एक अंक पर हजारों अंदर-बाहर हो सकते हैं, ऐसी स्थिति में पांच-पांच प्रश्नों को हटा देने से अभ्यर्थियों के भविष्य चौपट हो जाएगा।


2) 10 सवालों पर आपत्ति


-संशोधित आंसरसीट आने के बाद भी पांच प्रश्नों पर आपत्ति हैं, इस तरह कुल 10 प्रश्न हैं, जो विवादास्पद श्रेणी में हैं। छात्रों का कहना है कि इन सभी मांगों के संदर्भ में छात्रों ने हजारों की संख्या में मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम से ज्ञापन देकर सरकार रि-एग्जाम की मांग रखी है थी। 


3)परीक्षा होने तक बढ़ाए जाते हैं पद 


-MPPSC ने जब पहली बार विज्ञापन जारी किया था तो कुल पदों की संख्या 202 थी। कुछ दिन बाद आयोग ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग और वाणिज्यिक कर विभाग में 32 नए पद जोड़ दिए। इससे पदों की संख्या बढ़कर 234 हो गई है। आयोग के परीक्षा बीच पद बढ़ाने का परीक्षार्थियों ने कड़ा विरोध किया था। उनका कहना है कि आयोग द्वारा पहले विज्ञापन में कम पद जारी करने के कारण कई आवेदकों ने आवेदन ही नहीं किया। इस साल परीक्षा के लिए करीब 2.84 लाख आवेदन आए थे। 
4)सवालों को डिलीट कर जारी होता है रिजल्ट


-वर्ष 2014 से लेकर 2017 तक आयोग को हर प्रत्येक वर्ष प्रारंभिक परीक्षा के पेपर से सवालों को डिलीट कर रिजल्ट तैयार करना पड़ा है। आयोग ने वर्ष 2014 में तीन, 2015 में पांच और 2016 में एक प्रश्न डिलीट कर रिजल्ट घोषित किए थे। इस साल आयोजित परीक्षा में पूछे गए सवालों में से चार को डिलीट करने की नौबत बन गई है। परीक्षार्थियों का अारोप है कि आयोग का फार्मेट ही गलत है। आयोग अनुमान आधारित सवाल पूछ रहा है। 
5)इस कारण देना पड़ा हाईकोर्ट को स्टे


1. छात्रों की मांग 2018 MPPSC एग्जाम निरस्त कर फिर से परीक्षा कराई जाए।
2. प्रश्न 100% सही हो तथा मॉडल आंसर शीट भी शत प्रतिशत सही हो। 
3. प्रारंभिक परीक्षा में मानइस मार्किंग शुरू की जाए। 
4. गलत आंसर शीट के विरुद्ध अभ्यावेदन हेतु प्रमाण प्रस्तुत करने की फ्री सुविधा दी जाए। 
5. इंटरव्यू वीडियोग्राफी कराई जाए, जिससे पता चले कि कैसे एक छात्र को 60 से बढ़कर अगले ही साल 160 मार्क्स मिल जाते हैं।  
6. चयन प्रक्रिया को आरटीआई के दायरे में रखा जाए। 
7. मुख्य परीक्षा की कॉपी पहले की तरह मांगने पर डाक द्वारा भेजी जाए।