भोपाल। प्रदेश के 29 हजार सहायक शिक्षकों को राज्य सरकार जल्द ही पदोन्नत कर शिक्षक और व्याख्याता बनाने की तैयारी कर रही है। ये शिक्षक पहले से क्रमोन्नत वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए इस फैसले से सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा।

प्रदेश में 42 हजार सहायक शिक्षक हैं, जिनमें से 29 हजार पद उन्न्त होने की पात्रता रखते हैं। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय शासन को प्रस्ताव भेज चुका है। मंत्रालय स्तर पर फैसला लेने में देरी हो रही है।

अध्यापकों के संविलियन को लेकर कैबिनेट के फैसले के बाद सहायक शिक्षक नाराज हैं। इन शिक्षकों ने प्रदेशभर में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। 29 मई को पांच सैकड़ा से ज्यादा शिक्षक स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी के बंगले पर पहुंच गए थे। राज्यमंत्री ने शिक्षकों को भरोसा दिलाकर लौटाया था कि सरकार उनके बारे में भी विचार कर रही है।

सूत्र बताते हैं कि लोक शिक्षण संचालनालय दो माह पहले सहायक शिक्षकों का पद उन्नत करने का प्रस्ताव भेज चुका है। पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने की वजह से सरकार इन शिक्षकों को सीधे तौर पर पदोन्न्त नहीं कर सकती है, लेकिन जिस पद का वे वेतनमान ले रहे हैं, उसका पदनाम दे सकती है। सरकार भी यही करने जा रही है।

पात्रता के अनुसार उन्नत होगा पद

जो सहायक शिक्षक स्नातक होने के साथ डीएड-बीएड की योग्यता रखते हैं, उन्हें शिक्षक (उच्च श्रेणी शिक्षक) पदनाम दिया जाएगा। जबकि पोस्ट ग्रेजुएट के साथ बीएड योग्यताधारी सहायक शिक्षक व्याख्याता की पात्रता रखते हैं। इन्हें सरकार व्याख्याता का पदनाम दे सकती है।

नाराजगी को कम करने की कोशिश

सहायक शिक्षकों की नाराजगी सामने आने के बाद सरकार इसे कम करने की कोशिश कर रही है। इसी कारण दो महीने से मंत्रालय में पड़े इस प्रस्ताव पर एक बार फिर चर्चा शुरू हुई है। हालांकि सारा दारोमदार सहायक शिक्षकों के संगठित रहने पर रहेगा। जानकार बताते हैं कि अध्यापकों को भी संगठित होने की वजह से ही संविलियन का तोहफा मिल पाया है।

विचार चल रहा है

मुख्यमंत्री सभी संवर्ग के कर्मचारियों की मांगों को पूरा कर रहे हैं। सभी को बेहतर से बेहतर देने की कोशिश की जा रही है। सहायक शिक्षकों ने अपनी मांग रखी है। इसे लेकर भी जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। सरकार स्तर पर इस संबंध में विचार कर रहे हैं। 

- दीपक जोशी, राज्यमंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग

इंदौर। पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि को लेकर सरकार चिंतित है और बुधवार को मंत्री समूह की बैठक भी हो चुकी है। कीमत कैसे कम हो और उस पर नियंत्रण रहे, इस पर दूरदर्शी नीति तैयार हो रही है। जल्द ही उसकी घोषणा होगी। सरकार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना चाहती है। इस बार होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस बारे में चर्चा होगी। पेट्रोलियम मंत्री की मंशा है कि आम सहमति बनाकर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल किया जाए।

यह बात रेल एवं वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को मीडिया से कही। शहर आए गोयल ने केंद्र सरकार की योजनाएं गिनाई और मूल्य वृद्धि, महंगाई और कृषि के विषय पर बोले। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह कभी नहीं कहा कि 70 सालों से देश में कुछ भी काम नहीं हुआ। वे अकसर यह कहते हैं कि कामों की गति धीमी रही। कांग्रेस सरकार ने सिर्फ पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया है।

गाेयल ने कहा कि मनमाने तरीके से कोल ब्लॉक, टू-जी स्पेक्ट्रम कांग्रेस के समय बांटे गए। 48 महीनों में केंद्र सरकार ने कई बड़े बदलाव किए हैं। भ्रष्टाचार पर सख्ती से अंकुश लगा है। इसका असर देश में दिखाई दे रहा है। 25 शहरों में चार साल में नए विमानतल बने हैं। हजारों किलोमीटर पुरानी रेल लाइन बदली गई। यही कारण है कि इस साल देश में सबसे कम रेल हादसे हुए। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सरकार आयुष्मान योजना शुरू करने जा रही है, जिसमें 50 करोड़ लोगों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कराया जाएगा।

सफल साबित हुई भावांतर योजना

प्रदेश में किसान आंदोलन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए कई सफल योजनाएं चलाई हैं। इस कारण पैदावार बढ़ गई है। असल परेशानी किसानों को उपज के सही दाम न मिलना है। इसके लिए सरकार ने भावांतर योजना लागू की, जो सफल साबित हुई है।

उपचुनावों में भाजपा उम्मीदवार के हार जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसे नहीं है कि ज्यादातर उपचुनाव भाजपा ने जीते हैं। देश के 14 राज्यों में भाजपा की सरकार बनी है। इस साल मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव हैं और प्रदेश की जनता सही पार्टी और उम्मीदवार को चुनेगी।

श्योपुर। श्योपुर जिले में एक से डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद ही कलेक्टर-एसपी जैसे अफसर बदले जा रहे हैं । भले ही सरकार दावा करे कि अफसरों की अदला-बदली व्यवस्थाओं को कसने के लिए होती है,लेकिन इसकी दूसरी सच्चाई यह भी है कि, अफसरों के तबादले के साथ 'भ्रष्टाचार" के मामलों की जांच और उन पर कार्रवाई भी बंद कर दी जाती है।

यानी अफसरों का तबादला भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने की पक्की गारंटी है। श्योपुर जिले में ऐसे एक नहीं दर्जनों उदाहरण हैं जिनमें नई पदस्थापना के बाद आए कलेक्टर, एसपी, जिपं सीईओ या डीएफओ ने पुराने भ्रष्टाचार के मामलों की फाइलों को बंद करवा दिया। नए अफसर पुराने भ्रष्टाचार पर कोई एक्शन ले नहीं पाए और उन्हीं के कार्यकाल में फिर नया घोटाला हो गया।

कन्यादान योजना घोटाला भी ठंडे बस्ते में

बीते साल मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत होेने वाली शादियों के लिए सामाजिक न्याय विभाग ने जो खरीदी की उसमें जमकर घपला किया गया। 240 रुपए के कुकर को 700 रुपए में खरीदा गया। आईएसआई मार्का की वजाय ऐसी कंपनियों के कुकर खरीदे गए जो कंपनियां कुकर बनाती ही नहीं।

इसके अलावा चांदी के जेवरात भी नकली खरीदे गए। तत्कालीन कलेक्टर ने जांच बैठाई। जांच में खरीदी के लिए बनाई गई समिति के काम-काज को गलत बताया लेकिन, कार्रवाई से पहले कलेक्टर अग्रवाल का तबादला हो गया और यह घोटाला ऐसा दबा कि आज तक किसी ने नाम तक नहीं लिया।

जिला अस्पताल का खरीदी घोटाला भी दफन

करीब 10 महीने पहले जिला अस्पताल प्रबंधन ने रोगी कल्याण समिति आरकेएस मद से 10 लाख रुपए की खरीदी की गई। इस खरीदी में घपला ऐसा हुआ कि 2000 रुपए की स्ट्रीट लाइट को 5600 रुपए में और 540 रुपए के पंखे को 1300 रुपए में खरीदा गया था।

ऐसे ही अन्य सामान दो से तीन गुने दामों पर खरीदा गया। तत्कालीन कलेक्टर पीएल सोलंकी ने इस मामले की जांच के आदेश एसडीएम को दिए,लेकिन कुछ महीने बाद कलेक्टर पीएल सोलंकी रिटायर हो गए और अस्पताल का यह खरीदी घोटाला अन्य घोटालों की तरह दफन हो गया।

जंगल में भ्रष्टाचार का मंगल, भूले अफसर

जंगलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने दो साल पहले वन विभाग ने कई जगह पर बाउण्ड्री बनवाने के लिए लाखों रुपए का बजट दिया। इसमें जमकर घोटाला हुआ। वन अफसरों ने पुरानी बाउंड्री केे पत्थरों ने कुछ दूरी पर नई बाउंड्री बना दी और लाखों का भुगतान ले लिया।

इतना ही नहीं जंगल की जुताई और रक्षा श्रमिकों के नाम पर भी जमकर फर्जीवाड़ा हुआ। 8 और 10वीं में पढ़ रहे नाबालिग बच्चों को मजदूर बनाकर उनके खाते में मजदूरी का पैसा जमा कराया बाद में वन अफसरों ने यह पैसा बच्चों के माता-पिता से यह कहकर वापस ले लिया कि, गलती से खाते में आ गया। वन विभाग के डीएफओ बदले तो यह घोटाला भी दब गया।

भोपाल के अफसरों पर भारी श्योपुर के अधिकारी

विपणन संघ श्योपुर के गोदामों से 35 लाख रुपए का 183 टन खाद गायब कर दिया गया। यह खाद किसको दिया गया? कब दिया गया? इसका हिसाब किसी के पास नहीं। खाद का यह घपला गोदामा के इंजार्च सहित कई कर्मचारी व अधिकारियों ने मिलकर किया।

चौंकने वाली बात यह है कि, खाद का यह घोटाला 13 महीने पहले पकड़ में आ चुका है और विपणन संघ के एमडी ज्ञानेश्वर बी पाटील ने दोषियों पर एफआईआर के लिए छह महीने पहले श्योपुर कलेक्टर व एसपी को पत्र भेजा लेकिन, किसानों के खाद की कालाबाजारी करने वालों पर एफआईआर नहीं हुई, सभी भ्रष्ट आज भी उसी दफ्तर में काम कर रहे हैं।

इनका कहना है

-भाजपा की सरकार में विकास पर तो सिर्फ बातें होती हैं। काम तो भ्रष्टाचार पर ही हुआ है। ऐसा कौन सा विभाग है जहां भ्रष्टाचार नहीं हो रहा। अधिकारियों का व्यवहार भी भाजपा प्रवक्ताओं जैसा हो चुका है, वह भ्रष्टाचार के मामलों पर गोलमोल जबाव देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

रामनिवास रावत विधायक, विजयपुर

-मुझे अभी श्योपुर का प्रभार मिला है। मेेरे सामने फिलहाल ऐसा कोई प्रकरण नहीं आया ,लेकिन ऐसा है तो बहुत गंभीर बात है और इस पर चिंतन होना चाहिए। मैं इस बात को माननीय मुख्यमंत्री के सामने रखूंगा। 

नारायण सिंह कुशवाह प्रभारी मंत्री, श्योपुर

भोपाल। मप्र शासन द्वारा कक्षा 12वी के ऐसे विद्यार्थियों को लैपटॉप देने की योजना थी जो विभिन्न वर्गों के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को दिया जाता था। इस योजना में सामान्य/ पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जहां न्यूनतम 85 प्रतिशत अंक की सीमा निर्धारित थी वहीं अनुसूचित जाति/ जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक लाना होते थे। दिनांक 21 मई 2018 को आयोजित छू लें आसमां कार्यक्रम में मान मुख्यमंत्री से पिछड़ा वर्ग के छात्र विक्की शर्मा ने इस जातिगत भेदभाव के संबंध में प्रश्न पूछा था और इसे दूर करने की मांग की थी। इसके बाद प्रदेश के सभी वर्गों के छात्रों में उम्मीद जगी थी कि उनके साथ अब भेदभाव नहीं होगा। संभवत: इसी के दृष्टिगत शासन ने दिनांक 28 मई 2018 को निर्धारित लैपटॉप वितरण कार्यक्रम स्थगित किया था

शासन ने अब लैपटॉप वितरण की जो नई नीति तय की है उससे एक बार फिर यह स्थापित हो गया है कि शासन की योजनाओं में तुष्टिकरण खत्म नहीं होगा। नए आदेश के अनुसार अब दिनांक 9 जून 2018 को लैपटॉप वितरण कार्यक्रम संपन्न होना है, जिसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए निर्धारित सीमा यथावत 85 प्रतिशत रखी गई है जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए इसे घटाकर अनुसूचित जाति/ जनजाति वर्ग के समकक्ष 75 प्रतिशत कर दिया गया है।

अब सवाल यह है कि क्या ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि प्रश्न पूछने वाला छात्र ओबीसी था। क्या सामान्य वर्ग के छात्रों को इसलिए वंचित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने शिवराज सिंह की काउंसलिग में सवाल नहीं उठाया बल्कि सीएम का स्वागत किया। 



मंदसौर [ मंथन न्युज] । अंत्योदय मेले में पहुंचे मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह ने कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया। उन्‍होंने किसान आंदोलन का नाम लिए बिना ही कहा कि कांग्रेस प्रदेश में सत्ता में वापसी के लिए तड़प रही है। इसके लिए वह प्रदेश में अराजकता व हिंसा फैलाना चाहती हैं। खून-खराबा कराना चाहती है। बता दें कि सूबे में एक जून यानी कल से किसानों का आंदोलन शुरू हो रहा है। इसको लेकर प्रदेश में जबरदस्‍त तनाव व्‍याप्‍त है। 

मंदसौर में महू-नीमच राजमार्ग पर राजीव गांधी क्रीड़ा परिसर में मंदसौर-नीमच जिले के संयुक्त असंगठित श्रमिक, तेंदू पत्ता संग्राहक सम्मेलन एवं अंत्योदय मेले में मुख्‍यमंत्री ने कहा कि मध्‍यप्रदेश शांति का टापू है। उन्‍होंने कहा कि मंदसौर-नीमच भी इसके अभिन्न हिस्से हैं, इसलिए कांग्रेस की ऐसी कोशिशों को विफलकर हमें इस राज्‍य को हर हाल में बचाना है। उन्होंने जनता के साथ मिलकर हिंसा व अराजकता फैलाने की हर कोशिश को विफल करने की बात दोहराई।

गेहूं बेच चुके किसानों को 65 रुपए क्विंटल अलग से देंगे

इसी बीच किसानों को खुश करने के लिए शिवराज ने कहा कि समर्थन मूल्य पर गेहूं बेच चुके किसानों को एक बार फिर 65 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से अलग से देंगे। दोनों जिलों के 70 हजार किसानों को भावांतर योजना का लाभ दिया है।  

याद दिलाया कांग्रेस का चड्डी बनियान युग

मुख्यमंत्री ने मंच से प्रदेश में कांग्रेस की तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार के समय के चड्डी बनियान युग की याद भी दिलाई। बिजली की आपूर्ति की स्थिति की तब और अब की स्थिति के अंतर को बताया। साथ ही उन्होंने किसानों की समस्याओं व मांगों की अनदेखी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय की कार्यशैली पर तंज भी कसा।

1846 करोड़ की सिंचाई परियोजना का किया ऐलान

मुख्‍यमंत्री ने मल्हारगढ़ क्षेत्र के लिए 1846 करोड़ की सिंचाई परियोजना की घोषणा की। इस सिंचाई परियोजना के क्रियान्वित होने से क्षेत्र की करीब दो लाख एकड़ भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य है।

हर बार से ज्यादा सीएम की सुरक्षा

सभा में किसान संगठनों द्वारा किसी तरह के विरोध प्रदर्शनों की आशंका को देखते हुए इस बार पुलिस प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी। एसपी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि वह किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लेते हुए सीएम की सुरक्षा के लिए 1200 पुलिसकर्मी लगाए थे, जो हवाई पट्टी से लेकर सभा स्थल व फिर यहां से पशुपतिनाथ मंदिर व सर्किट हाउस तक पूरे रास्ते पर तैनात रहे। चौहान ने यहां रात्रि विश्राम कर आंदोलन से संबंधित सभी से फीडबैक लिया।

ये की विशेष घोषणाएं

- शिवना नदी शुद्धिकरण योजना के लिए 12 करोड़ की स्वीकृति की घोषणा।  

- ऑनलाइन परीक्षा केंद्र के संबंध में सकारात्मक प्रयास का भरोसा दिया।

- मंदसौर जिले में सड़कों के निर्माण के लिए उचित प्रयास करने का विश्वास दिलाया।  

देर रात किसान संगठनों के पदाधिकारियों से मुलाकात

भारत किसान यूनियन सहित कुछ किसान संगठनों के पदाधिकारियों से बुधवार रात करीब 10.30 बजे मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से मिले। इस दौरान संगठनों के पदाधिकारियों ने फसलों का वाजिब दाम, किसान को अपनी फसल की कीमत तय करने का अधिकार मिले आदि मांगी रखीं। इस पर मुख्यमंत्री ने मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री चौहान ने कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव और एसपी मनोज कुमार सिंह से भी किसान आंदोलन को लेकर चर्चा की।

इधर, जनप्रतिनिधि व नेताओं का जमावड़ा देर रात तक लगा रहा। प्रशासनिक मशीनरी भी रात तक सर्किट हाउस पर ही जमी रही। इससे पहले सीएम ने सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों व मंदसौर-नीमच जिले के भाजपा पदाधिकारियों से भी चर्चा की।


भोपाल। मतदाता सूची में गड़बड़ी सामने आने पर कलेक्टर सीधे जिम्मेदार होंगे। उनपर गाज भी गिर सकती है। चुनाव आयोग जवाबदेही तय करने के लिए कलेक्टरों से घोषणा-पत्र भरवाएगा। साथ ही उन्हें यह रिपोर्ट देनी होगी कि कितने मतदान केंद्रों की मतदाता सूची की रेंडम चेकिंग की गई है।


उधर, इंदौर, रायसेन, भोपाल और अशोकनगर जिले की मतदाता सूची में जोड़े गए बोगस नामों के ‘पत्रिका’ के खुलासे पर कलेक्टरों से रिपोर्ट मांगी गई है। चुनाव आयोग ने यह कदम मतदाता सूची में लगातार गड़बडिय़ां सामने आने के बाद उठाया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) सलीना सिंह ने प्रदेश के जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर को पत्र भेजकर सूची की सामने आ रही कमियों को गंभीरता से लेने को कहा है।


उन्होंने निर्देश दिए कि पुनरीक्षण अभियान को केवल बीएलओ और एआरओ के भरोसे नहीं छोड़ें। खुद भी निगरानी कर अवगत कराएं। मतदाता सूची से जुड़ी जिम्मेदारी लेने संबंधी घोषणा-पत्र इसी महीने भरकर भेजने के निर्देश भी उन्होंने दिए। सीईओ ने साफ कहा है कि गड़बड़ी सामने आने के बाद छोटे कर्मचारियों पर थोपने से काम नहीं चलेगा।


तबादलों की कॉपी मांगी


चुनाव आयोग ने प्रदेश में तबादलों को लेकर निर्देश जारी किए हैं। 31 जनवरी 2019 को एक ही स्थान पर तीन साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अफसर 30 जून तक हटाए जाएंगे। आयोग ने यह भी कहा कि 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान अफसर जिस जिले में पदस्थ थे, उन्हें कार्यकाल पूरा करने की बाध्यता को देखे बिना स्थानांतरित करें। निर्देशों के पालन में जो भी आदेश सरकार जारी करेगी, उसकी कॉपी हर हाल में आयोग को भेजी जाए।


संविदा अफसरों की नहीं लगेगी ड्यूटी


सरकार से सेवावृद्धि या संविदा में पुनर्नियुक्ति पाने वाले अफसर चुनाव कार्य में नहीं लगाए जाएंगे। चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में भी तैनात ऐसे अफसरों से चुनाव से जुड़ी सेवाएं लेने पर रोक लगा दी है। छह माह में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी आयोग की स्वीकृति के बिना नहीं लगेगी।


मतदाता सूची में गड़बड़ी मिलने के बाद कलेक्टरों से रिपोर्ट मांगी है। अब त्रुटियों के लिए कलेक्टर सीधे जिम्मेदार होंगे। इस बारे में घोषणा-पत्र भी भरवाया जाएगा।
-सलीना सिंह, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी


भोपाल. विधानसभा का 25 जून से शुरू हो रहा मानसून सत्र हंगामेदार होने के आसार हैं। इस सरकार का अंतिम विधानसभा सत्र होने के कारण कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। करीब 92 पेज के इस अविश्वास प्रस्ताव को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ अंतिम रूप देंगे।


चुनावी साल में कांगे्रस पूरी रणनीति के साथ काम कर रही है। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर नेता प्रतिपक्ष, विधायकों सहित पार्टी ने काम शुरू कर दिया है। जिलेवार जानकारी जुटाई जा रही है। कांग्रेस ने सरकार के १५० से अधिक घोटालों को चिह्नित किया है।


इनमें अवैध रेत खनन, प्याज खरीदी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, शौचालय निर्माण, इंदिरा आवास, मनरेगा, बिजली खरीदी, बुंदेलखंड पैकेज, बांध निर्माण, पेंशन, डम्पर, फसल बीमा और भावांतर योजना, मिड-डे मील घोटाला, पौधरोपण घोटाला, यूनिफार्म खरीदी घोटाला, साइकिल घोटाला इत्यादि प्रमुख हैं।


- ये बिंदू भी होंगे शामिल
5000 करोड़ के सिंहस्थ आयोजन में करीब 3000 करोड़ का घोटाले का हुआ है। इसमें ज्यादातर सामग्री दो-तीन गुने दाम पर खरीदी गई। किसानों के नाम पर बनी सरकार में सबसे ज्यादा किसान ही परेशान है। खेती को लाभ का धंधा बनाए जाने का दावा किया गया, लेकिन यह लाभ का धंधा बनना तो दूर किसान फसल के उचित दाम के लिए आंदोलन कर रहे हैं।


आंदोलनरत किसानों पर बल प्रयोग किया। गोलीचालन में छह किसानों की मौत हुई, लेकिन दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हर साल दो लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया, लेकिन रोजगार के बजाय बेरोजगारों की संख्या में इजाफा हुआ। राज्य में बढ़ते अपराध, महिला अत्याचार, दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं पर भी सरकार को घेरने की तैयारी है।


सरकार के वैचारिक कुंभ में 127 करोड़ खर्च कर दिए गए। इस महाकुंभ के बहाने सरकार ने अपने बदनुमा दाग को धोने का प्रयास किया।


सरकार के काम-काज से हर वर्ग खफा है। आमजन से लगातार वादा खिलाफी की। अब यह सरकार विश्वास करने लायक भी नहीं रह गई है। जून माह में शुरू हो रहे मानसून सत्र में सरकार के खिलाफ अविश्वास लाया जाएगा।
- अजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष विधानसभा


शिवपुरी। अपनी ही पार्टी से नाराज चलने की खबरों के बीच मुरैना के सांसद और पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने कहा है कि वे पार्टी छोड़कर कहीं नही जाने वाले, उनकी अंतिम सांस भी पार्टी में निकलेगी औऱ अंतिम संस्कार तक पार्टी के झंडे में लिपटकर ही होगा।गुना जाते वक्त शिवपुरी सर्किट हाउस में अल्प प्रवास पर रूके सांसद अनूप मिश्रा ने कुछ पत्रकारों से चर्चा में साफ कहा कि वे बीजेपी के निष्ठावान कार्यकर्ता है। 1980 से लेकर अब तक पार्टी ने उन्हें सब कुछ दिया है। उन्हें 7 चुनाव लड़ाएं हंै विधायक, मंत्री, सांसद सब कुछ बनाया मेरी निजी हैसियत पार्टी की दी हुई है , इसलिए पार्टी से अलगाव का प्रश्न स्वप्न में भी संभव नहीं है। अलबत्ता कुछ लोगो से मतभेद हो सकते है लेकिन मनभेद किसी के साथ नही है। श्री मिश्रा ने कहा कि चुनाव लड़ना न लड़ना पार्टी तय करती है। आगामी चुनाव में वे लड़ेंगे,या कहां से लड़ेंगे ये भी तय पार्टी ही करेगी,अगर पार्टी चुनाव नही भी लड़ाएगी तो एक कार्यकर्ता के रूप में पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी पूरी तन्मयता औऱ समर्पण से करूंगा। श्री मिश्रा ने कहा कि वे अपनी बात डंके की चोट पर कहते है और अपने कहे का कभी खण्डन भी नही करते है इसलिए अक्सर उनकी बातों का अर्थ बगाबत से लगा लिया जाता है जबकि ये मेरी स्वाभगत आदत है। उन्होंने कहा की वे किसी से नाराज नही है और न उनकी नाराजगी स्थायी होती है। श्री मिश्रा ने कहाकि प्रदेश में अगली सरकार भी बीजेपी की बनेगी वह चुनाव विजयपुर से लड़ेंगे? या नही ये निर्णय पार्टी करेगी अलबत्ता उन्होंने जोड़ा की उन्हें निवाड़ी, टीकमगढ से भी लड़ने की पेशकश वहाँ के विधायकों ने की है। श्री मिश्रा ने कहाकि वे मुख्यमंत्री के कहने पर ही गुना, अशोकनगर जिलों के दौरे पर निकले है वहाँ जाकर कार्यकर्ताओं के साथ किसान, मजदूर, गरीब, तबके के लोगों के साथ बैठकर सरकार की योजनाओं की जानकारी देंगे और जनसमस्याओं को सुनेंगे। शिवपुरी पहुचने पर बीजेपी नेता भरत अग्रवाल, विनोद शर्मा, डॉ अजय खेमरिया आदि ने उनका स्वागत किया। 

 

- *नगर पालिका में चल रहे भ्रष्टाचार के लिए जरूरी है यह कार्रवाई *

- *पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष का बड़ा बयान*       

*शिवपुरी*। 

शिवपुरी जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और दो बार के नपाध्यक्ष रहे गणेशीलाल जैन ने कांग्रेस पार्टी के ही मौजूदा नपाध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुऐ उन्हें अब तक सबसे नकारा और भ्रष्टतम अध्यक्ष बताया है। अपने आधिकारिक बयान में श्री जैन ने सरकार से मांग की है कि मुन्नालाल के अब तक के कार्यकाल का स्पेशल ऑडिट (एजी ऑफिस) के अफसरों से कराया जाए, क्योंकि उन्होंने जनता के धन की अभूतपूर्व लूट की है और यदि ये ऑडिट किया जाता है तो करीब 60-70 करोड़ का घोटाला निकलेगा औऱ मुन्नालाल को जेल जाने से कोई नही बचा पाएगा। अपने जमाने के धाकड़ कांग्रेसी रहे श्री जैन ने साफगोई से कहा है कि मुन्नालाल के भ्रष्टाचार का खामियाजा नबम्बर 2018 में होने वाले काँग्रेज़ उम्मीदवार को शिवपुरी से उठाना ही पड़ेगा। लोकसभा चुनाव में जिस तरह शहरी वार्डों से ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव में हार का सामना पड़ा था कमोबेश यही हालत विधानसभा चुनाव में मुन्नालाल के कर्मों से बन गए है। श्री जैन ने क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया औऱ स्थानीय खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया से भी इस दिशा में आवश्यक पहल करने की इच्छा व्यक्त की। 

*शहर बर्बाद हो रहा है और लूट का अड्डा बन गई नपा*

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि वर्तमान में नपा मुन्नालाल की लूट का अड्डा बन गई है और इस शहर की बर्बादी के लिये दोषी मुन्नालाल को हटाकर तत्काल प्रशासक नियुक्त किए जाने की दशा में ही शहर के हालात पटरी पर आ पाएंगे। 

*विधानसभा में कांटे की टक्कर*

कांग्रेस नेता ने कहा कि आगामी चुनाव में बहुत ही कांटे की लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस में देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि इतना आसान भी नही की प्रदेश में कांग्रेस सरकार बिन मेहनत के बनी ही जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले 10 वर्षों में भाजपा की सरकार ने योजनाएं तो अच्छी जारी की बेहिसाब पैसा भी जारी किया लेकिन इनका क्रियान्वयन  जमीन पर बहुत ही खराब तरीके से हुआ है इसलिए जनता परिवर्तन के मूड में है। 

*राजा-महाराजा का एक होना अच्छा संकेत*

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कल्चर में जनता के लिए संघर्ष है ही नहीं। इसलिए वह 15 साल से सत्ता के वनवास को भोग रही है। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेसियों को समझ आ रहा है कि इस बार एकजुट नही हुए तो कोई इज्जत नही बचनी इसलिए सब एकजुट हो रहे है। राजा और महाराजा आपस मे मिल रहे है इससे वर्कर्स में अच्छा सन्देश गया है। उन्होंने संभावना व्यक्त की की जिले की 5 में से 3 सीटें इस बार उनकी पार्टी जीत सकती है। अपने जमाने मे घुर दिग्गी राजा विरोधी रहे गणेशीलाल ने साफ कहा कि शिवपुरी सीट पर यदि मौजूद मंत्री यशोधरा राजे उम्मीदवार होंगी तो उनकी जीत पक्की है।

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