शिवराज ने लिटिल-लिटिल दिग्गी-कमल को झटका दिया, टोटल कांग्रेस के 10 लाख वोट चुराए


अंकित पुरोहित/भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज हुई कैबिनेट मीटिंग में अध्यापकों के संविलियन से संबंधित जो फैसला लिया गया है, चुनावी राजनीति के हिसाब से यह एक फैसला है जिसने दिग्विजय सिंह और कमलनाथ को एक साथ झटका दिया और अब तक कांग्रेस के खाते में दर्ज 10 लाख वोट चुरा लिए। 2.37 लाख अध्यापक और उनके परिवार इस बार गंगाजल उठाकर शिवराज सिंह विरोधी हो गए थे। आज शिवराज सिंह की जय-जयकार करते नजर आ रहे हैं

पूरे प्रदेश याद किए गए दिग्विजय सिंह के जुल्म

कैबिनेट मीटिंग में इस फैसले की खबर जैसे ही बाहर आई, सोशल मीडिया पर मप्र की टॉप ट्रेंडिंग बन गई। मध्यप्रदेश के हर गांव-शहर से 23 साल के संघर्ष ​को याद किया गया। बता दें कि ये वही संवर्ग है जिसे दिग्विजय सिंह सरकार ने शिक्षाकर्मी नाम दिया था। वेतन के नाम पर 500 रुपए प्रतिमाह तय किया गया था। 2003 में आत्मविश्वास से लवरेज दिग्विजय सिंह की शर्मनाक हार के प्रमुख कारणों में यह भी एक था। 

शिवराज सिंह ने कमलनाथ की खिचड़ी लूट ली

2003 में भाजपा ने शिक्षाकर्मियों ने वादा किया था कि उनकी मांगें पूरी की जाएंगी। तब से लगातार यह संवर्ग भाजपा से वादा पूरा करने की गुहार लगा रहा था। शिवराज सिंह ने शिक्षाकर्मियों का पदनाम बदलकर अध्यापक किया तो सम्मान लौटा। वेतन बढ़ा तो राहत मिली लेकिन हक की मांग जारी थी। 2013 के चुनाव के बाद जो जैसे अध्यापकों के सब्र का बांध ही टूट गया था। पिछले 5 साल में अध्यापक एक भी एतिहासिक आंदोलन नहीं कर पाए लेकिन आक्रोशित थे। गुस्सा बढ़ता जा रहा था। कमलनाथ ने मौके का पूरा फायदा उठाया। कई गुटों में बंट गए अध्यापकों को छिंदवाड़ा बुलाया। सम्मेलन किए। वादा किया कि सरकार बनते ही उन्हे नियमित कर दिया जाएगा। वो बड़ी शिद्दत से खिचड़ी पका रहे थे। 2.37 लाख अध्यापक परिवार के 10 लाख वोट कमलनाथ अपनी जेब में मानकर चल रहे थे। आज शिवराज सिंह, कमलनाथ की खिचड़ी लूट ले गए 

कांग्रेस को 10 लाख वोटों का नुक्सान

इस फैसले से कांग्रेस को सीधे 10 लाख वोटों का नुक्सान हुआ है। 2008 के चुनाव से पहले जब शिवराज सिंह ने अध्यापक नेता मुरलीधर पाटीदार को विधानसभा का टिकट देकर भाजपा में शामिल कर लिया तो अध्यापकों ने खुद को ठगा हुआ सा महसूस किया। इसके बाद जो वादे और आदेशों की लापरवाहियां हुईं। उसने शिवराज सिंह को अध्यापकों का दुश्मन नंबर 1 बना दिया था। बताने की जरूरत नहीं कि ये 2.37 लाख अध्यापक कम से कम 10 लाख वोट प्रभावित करते हैं। यह पूरी तरह से कांग्रेस में आ गया था परंतु अब शायद ही कांग्रेस के साथ रहे। इसका एक बड़ा कारण मप्र में दिग्विजय सिंह का फ्रंट लाइन में आ जाना भी है। कम से कम अध्यापक संवर्ग अब शिवराज सिंह की तुलना में दिग्विजय सिंह वाली कांग्रेस को तो कतई नहीं चुनेगा।