अगले चुनावों में मायावती को साथ लाने के लिए कांग्रेस को देनी होगी बड़ी कुर्बानी

कर्नाटक के नतीजों से मायावती उत्साहित हैं. कर्नाटक में जेडीएस के साथ गठबंधन के बावजूद बीएसपी का एक ही विधायक जीत पाया है. लेकिन कांग्रेस को दूसरी नंबर की पार्टी बनाने में मायावती का अहम योगदान है. यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के साथ बेंगलुरु में मायावती की तस्वीर नए राजनीतिक समीकरण की तरफ इशारा करती है.


बज़ाहिर सब कुछ ठीक नज़र आ रहा है. लेकिन मायावती अपनी अहमियत समझ गई हैं. बीएसपी का वोट जिता ना पाए लेकिन हरा ज़रूर सकता है. इसलिए कांग्रेस भी मायावती की तरफ उम्मीद से निगाह गड़ाए हुए है. राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीएसपी के साथ कांग्रेस चुनावी समर में उतरना चाहती है. कांग्रेस के नेता इस को लेकर आपस में बातचीत कर रहे हैं.

हालांकि बीएसपी को कांग्रेस के साथ लाना आसान नहीं है. मायावती ने पार्टी की बैठक में कहा कि बीएसपी गठबंधन के लिए तैयार है. लेकिन जब बीएसपी को सम्मानजनक सीटें दी जाएंगी. बीएसपी अध्यक्ष के इस पैंतरेबाजी से कांग्रेस के माथे पर बल पड़ गए हैं. बीएसपी का राजस्थान के कुछ इलाके में और मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से में खासा-असर है. बीएसपी-कांग्रेस का गठबंधन बीजेपी के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है.

बीएसपी-कांग्रेस सीटों के लिए जद्दोजहद

कर्नाटक में बीएसपी 18 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. इस लिहाज़ से बीएसपी 10 फीसदी सीटों पर अपना दावा ठोंकने का मन बना रही है. बीएसपी को लग रहा है कि इससे उसकी सत्ता में भागीदारी बढ़ेगी. पार्टी का वजूद भी बढ़ेगा. मध्य प्रदेश में बीएसपी का वजूद कई दशकों से है. राजस्थान में भी बीएसपी कमतर नहीं है. 2008 से 2013 तक अशोक गहलोत की सरकार बीएसपी के बाग़ी विधायकों के बल पर चलती रही है. हालांकि चुनाव के बाद भी बीएसपी का सहयोग लिया जा सकता है. लेकिन कर्नाटक के चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती है. मध्य प्रदेश में बीएसपी 35 सीटों के लिए दबाव बना सकती है. वहीं राजस्थान में 25 सीट और छत्तीसगढ़ में तकरीबन दस सीट बीएसपी लड़ना चाहती है. हालांकि कांग्रेस को इतनी सीटें ज्यादा लग रही हैं.