शिवपुरी। शिवपुरी सिटी कोतवाली ने एक गुमशुदगी के मामले पर जांच करते हुए हत्या की गुत्थी को सुलझा लिया है। इस मामले परिजनो के कथन पर पुलिस का शक हुआ कि यह गुमशुदगी का नही हत्या का मामला है और सिटी कोतवाली टीआई संजय मिश्रा की सधी हुई जांच में इस मामले को सुलझाते हुए मृतक लाश को 16 दिन बार जंगल से बरामद कर दोनो आरोपियो को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें अपने प्यार को पाने की चाह में आरोपी ने हत्या की है। जानकारी के अनुसार जयेन्द्र धाकड़ पुत्र भोटूराम धाकड़ उम्र 32 वर्ष निवासी मरौरा खालसा अपने घर से 13 जून को अपने बेटे की स्कूल की फीस जमा करने अपने गांव से निकला था। लेकिन वह शाम तक अपने घर नही पहुंचा। जयेन्द्र के भाई ने बताया कि जब जयेन्द्र घर नही पहुंचा तो हमने अपने स्तर पर उसे तलाशना शुरू किया। 

जब हमे जयेन्द्र नही मिला जो हमने सिटी कोतवाली पुलिस को 20 जून को जयेन्द्र की गुमशुदगी की रिर्पोट दर्ज कराई। सिटी कोतवाली पुलिस ने जब इतनी लेट रिर्र्र्पोट करने का कारण पूछा तो परिजनो ने बताया कि गायब हुए जयेन्द्र की पत्नि कहती थी कि वे आ जाऐगें। 

सिटी कोतवाली को परिजनो के इस कथन से शक हुआ और इस गुमशुदगी की जांच को आगे बढाया गया। इस मामले में जयेन्द्र की मोबाईल की छानबीन की गई तो पाया गया कि उक्त मोबाईल 13 तारिख से बंद है और इसकी लास्ट लोकेशन 18वीं बटानियन क्षेत्र मेे थी। पुलिस ने इस क्षेत्र की सीसीटीव्ही कैमरो की रिकार्डिंग तलाशना शुरू किया तो पुलिस को इस केस का एक छोर मिल गया। सीसीटीव्ही फुटेज में जयेन्द्र 2 व्यक्तियो के साथ घुमता दिखा। इन 2 व्यक्तियो की पहचान बीलवारा गांव  के निवासी महेश धाकड़ और नोहरी के रहने वाले गोविंद उर्फ विक्रम सिंह गुर्जर निवासी डोंगर के रूप में हुई। 

पुलिस ने जयेन्द्र के मोबाईल की पूरी कॉल डिटेल निकाली तो जयेन्द्र और महेश धाकड की बातचीत 13 जून को सबसे लास्ट बॉत हुई। पुलिस ने पूरी जांच पडताल के बाद महेश धाकड ओर गोविंद को उठा लिया और इनसे सख्ती से पूछताछ शुरू की। 

इस पूछताछ में  दोनों ने जयेन्द्र की हत्या करना स्वीकार लिया। दोनों आरोपी जयेन्द्र को 18वीं बटालियन से बाइक पर बिठाकर ले गए और तौलिया से गला दबाकर मार दिया। सतनवाड़ा के जंगल में ले जाकर लाश फेंक दी। सूत्रो के अनुसार आरोपी महेश धाकड और मृतक जयेन्द्र की दोस्ती काफी पुरानी थी। 

आरोपी का मृतक के घर आना जाना था इस कारण मृतक की पत्नि के साथ उसके अवैध संबंधं बन गए। अपने प्यार को पाने की खातिर महेश ने जयेन्द्र की हत्या की। आरोपियो की निशानदेही पर पुलिस ने जयेन्द्र की लाश की सर्चिंग शुरू की लेकिन जब इन आरोपियो ने मृतक ही हत्या की थी जब पानी नही गिरा था। बरसात होने के कारण उस क्षेत्र में हरियाली होने के कारण पुलिस  3 दिन तक लाश की सर्चिंग करनी पड़ी और 16 दिन बाद सडी गली हालात में मिली।

भोपाल-मध्यप्रदेश गृह विभाग ने आज जारी एक लिस्ट में 14 जिलों के एसपी बदल दिए हैं। इसके साथ ही भारतीय पुलिस सेवा के कुल 23 अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। इसके अलावा कुछ आईपीएस अधिकारियों को प्रमोशन भी दिया गया है। दोनों लिस्ट एक साथ इस प्रकार हैं:  

मुकेश कुमार जैन: अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल से विकअ/अमनि मध्यप्रदेश भवन ​नई दिल्ली। 

राजेश गुप्ता: अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशेष अभियान पुलिस मुख्यालय वर्तमान के साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल

राजा बाबू सिंह: पुलिस महानिरीक्षक सुरक्षा एवं समन्वय मप्र भवन नई दिल्ली से पुलिस महानिरीक्षक विसबल जबलपुर। 

जीजी पांडे: पुलिस उप निरीक्षक शिकायत पुमु भोपाल से पुलिस उप निरीक्षक विसबल इंदौर। 

राजेश कुमार हिंगणकर: पुलिस अधीक्षक सतना से पुलिस अधीक्षक शिवपुरी। 

अंशुमान सिंह: एसपी देवास से एसपी रतलाम। 

मिथलेश शुक्ला: सेनानी 13वीं वाहिनी ग्वालियर से एसपी कटनी। 

तिलक सिंह: एसपी अशोकनगर से अनूपपुर। 

अमित सिंह: एसपी रतलाम से जबलपुर। 

शशिकांत शुक्ला: एसपी जबलपुर से सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुमु भोपाल। 

संतोष सिंह: सेनानी 25वीं वाहिनी भोपाल से एसपी सतना। 

मोनिका शुक्ला: एसपी नरसिंहपुर से नारकोटिक्स ट्रांसफर रद्द करते हुए सेनानी 25वीं वाहिनी, भोपाल। 

सुनील कुमार पांडे: एसपी शिवपुरी से सेनानी 13वीं वाहिनी ग्वालियर। 

सुनील कुमार जैन: एसपी अनूपपुर से एसपी अशोकनगर। 

गौरव कुमार तिवारी: एसपी छिंदवाड़ा से एसपी देवास। 

सिद्धार्थ बहुगुणा: सहायक पुलिस महानिरीक्षक भोपाल से एसपी इंदौर। 

अतुल सिंह: एसपी कटनी से छिंदवाड़ा। 

रियाज इकबाल: एसपी पन्ना से एसपी सिंगरौली। 

विवेक सिंह: एसपी इंदौर से एसपी पन्ना। 

विनायक वर्मा: राजभवन भोपाल से 8वीं वाहिनी छिंदवाड़ा। 

मनोज कुमार श्रीवास्तव: एसपी सीधी से 8वीं वाहिनी का तबदला संशोधित कर पीटीएस उज्जैन। 

विनीत कुमार जैन: एसपी सिंगरौली से एसपी रेल जबलपुर। 

शशीन्द्र चौहान: सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुमनि इंदौर से 18वीं वाहिन शिवपुरी। 

PROMOTION LIST OF MP IPS

एसपी सिंह उप पुलिस महानिरीक्षक अपराध अनुसंधान भोपाल। 

संजय राणा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक/ प्रबंध संचालक मप्र पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन भोपाल। 

जी अखेतो सेमा पुलिस महानिरीक्षक सुरक्षा मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी जबलपुर। 

गौरव राजपूत: प्रभारी उमनि महिला अपराध इंदौर। 

आरएस डेहरिया एसपी रेल जबलपुर। 

संजय तिवारी सहायक पुलिस महानिरीक्षक विशा भोपाल।

भोपाल@अंकित राज पुरोहित की रिपोर्ट...


सरकार ने विधानसभा चुनाव के पांच महीने पहले भू-राजस्व संहिता के 100 साल पुराने नियमों को बदला है। चुनावी फायदे के मद्देनजर जनता को बड़ी राहत दी है। इसके बावजूद सत्तारूढ़ भाजना ने इसे विधानसभा में चर्चा की बजाए शोरगुल के बीच पास कराया। इसका एक कारण राजस्व मंडल के घोटालों से किनारा करना रहा।


भू-राजस्व संहिता विधेयक 2018 में 122 धाराओं को बदला गया है। राजस्व मंडल के अधिकारों को कम किया है। सीमांकन के प्रकरण निपटाने के अधिकार निजी एजेंसी को दे दिए हैं। निजी एजेंसी से सही निराकरण नहीं करती है तो अनुविभागीय अधिकारी से अपील की जा सकती है। फिर भी मामला नहीं सुलझेगा तो सीधे शासन को जाएगा। जबकि, पूर्व में राजस्व मंडल ही निर्णायक था।


विवादों के निपटारों के अधिकार प्रमुख सचिव स्तर पर दे दिए गए हैं। यदि इन नियमों पर चर्चा होती तो कांग्रेस जमीन घोटालों पर प्रहार करती। राजस्व मंडल के तहत सरकारी जमीनों को कौडि़यों के मोल बेचने के प्रकरण सामने आ चुके हैं। इसके बाद से ही राजस्व मंडल को समाप्त करने की कवायद शुरू हुई, जिसमें राजस्व मंडल के अधिकार कम कर दिए।


 


अभी तक 58 बार संशोधन
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता-1959 में अब तक 58 संशोधन हुए हैं। प्रदेश सरकार ने इस बार भूमि सुधार आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही 122 धाराओं में संशोधन किया है।


 


ये हुए प्रमुख बदलाव 
-डायवर्सन के लिए अनुविभागीय अधिकारी की मंजूरी जरूरी नहीं। ऑनलाइन शुल्क की रसीद ही प्रमाण।
-नामांतरण की प्रति मुफ्त मिलेगी। सीमांकन निजी एजेंसी से होगा। पहले राजस्व मंडल करता था।
-भूमि स्वामी मनमाफिक जमीन रख बाकी का बंटवारा कर सकेगा।
-राजस्व सर्वेक्षण के लिए पूरे जिले को अधिसूचित नहीं करना होगा।
-पटवारी हलके के स्थान पर सेक्टर का नाम होगा।
-रजिस्ट्रार सत्यापन के बाद ही करेंगे रजिस्ट्री। नामांतरण प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी।
-कृषि भूमि के कुछ हिस्सों को अन्य कार्य में डायवर्सन होने पर अलग-अलग भूखंड दर्शाए जाएंगे।
-निजी जमीन के अतिक्रमण पर 50 हजार व सरकारी जमीन के अतिक्रमण पर एक लाख जुर्माना।


 


बदलाव से जनता को लाभ होगा। कई नियम बहुत पुराने और अव्यवहारिक थे। इनसे आमजन को असुविधा होती थी, इसीलिए भू-राजस्व संहिता में संशोधन किया गया है। अब जनता को प्रमाण पत्रों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। 
-उमाशंकर गुप्ता, राजस्व मंत्री


सरकार को १५ साल बाद इन नियमों में संशोधन करने की याद आई। यह संशोधन पहले ही होने थे, लेकिन पहले तो जमीनों की बंदरबांट की गई। नियम बदले हैं तो भू-माफिया पर अंकुश भी होना चाहिए।
-गोविंद सिंह, कांग्रेस विधायक


भू-राजस्व संहिता में संशोधन समय के हिसाब से होते हैं। जिन नियमों को बदलकर सरल किया वह बेहतर है। अब ऑनलाइन व टेक्नोलॉजी पर जोर देने की जरूरत है। जहां तक बाद सदन में चर्चा की है तो हर विधेयक पर चर्चा होनी चाहिए।
-डॉ. रणधीर वर्मा, सिविल इंजीनियर व जमीन मामलों के विशेषज्ञ


भोपालः विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट निर्माण के लिए बड़ा फैसला लेते हुए इस बाध्यता को खत्म कर दिया है कि, अब आपको अपने शहर से ही पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन करना होगा। या अपने व्यस्ततम शहर के पासपोर्ट ऑफिस की लंबी कतार में खड़े होकर ही पासपोर्ट बनावाना होगा। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया को आसान करते हुए उसे किसी भी शहर से बनवा लेने का प्रावधान जारी कर दिया है। इस हिसाब से अब पासपोर्ट बनवाने के इच्छुक व्यक्ति भारत के सभी शहरों के पासपोर्ट कार्यालयों में आवेदन कर सकते हैं।


लाखों युवाओं के हित का फैसला


मंत्रालय द्वारा लिए गए फैसले के बाद अब आवेदक देश के किसी भी शहर से आवेदन जमा कर सकता है। राजधानी भोपाल की पासपोर्ट अधिकारी रश्मि बघेल ने हिदेश मंत्रालय केआदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि, हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुई विदेश मंत्रालय की बैठक में इस बात पर फैसला लिया गया कि, इस परिवर्तन से देश के उन लाखों युवाओं की परेशानी दूर होगी जो पढ़ाई के लिए अपने घरों से दूर किसी शहर में रह रहे हैं और आसानी से एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा सकते ऐसे लोग पढ़ाई और काम के चलते विदेश भी जाते है। सरकार ने उन्हें केन्द्रित करते हुए यह फैसला जारी किया है।


ऐसे होगा सत्यापन


उन्होंने नोकरी पैशा लोगों का उदाहरण देते हुए बताया कि, मान लीजिए भोपाल का कोई आवेदक अस्थायी रूप से मुंबई में रह रहा है तो वह मुंबई से ही पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकता है। उसके मौजूदा पते पर ही पासपोर्ट जारी हो जाएगा। आवेदक किसी भी शहर से आवेदन करने के बाद पासपोर्ट कार्यालय खुद आवेदक के गृह जिले से दस्तावेजों का सत्यापन कराकर आवेदक को पासपोर्ट जारी कराने की प्रक्रिया को पूरा करेगा। हालांकि, इसमें जिन जिन जरूरी दस्तावेजों की मांग की जाएगी, उसे आनेदक को स्पष्ट रूप से जमा करना होगा।


भोपाल। जमीन पर अवैध अतिक्रमण किए जाने के प्रभात झा के आरोपों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रभात जी शिवपुरी की जिस जमीन की बात कर रहे हैं उसमें 100 साल से मेरे पूर्वजों की अस्थियां हैं। यदि उन्हें सवाल पूछना ही था तो वे मेरी दादी से पूछ लेते, अभी भी समय हैं। मेरी एक बुआ राजस्थान की मुख्यमंत्री हैं और दूसरी मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री हैं। उनसे यही सवाल पूछ लें, उन्हें जवाब मिल जाएगा। सिंधिया ने शनिवार को यहां मीडिया से चर्चा करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में हर वर्ग परेशान है। प्रदेश में एक के बाद एक घोटाला उजागर हो रहा है। अब इ-टेंडर गड़बड़ी सामने आई है। कांगे्रस सरकार बनी तो एक-एक मामले की जांच की जाएगी। दस दिन में किसानों का कर्ज माफ होगा।

वर्तमान व्यवस्था समाप्त कर मण्डी में किसानों को नगद राशि का भुगतान होगा। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान गोली चली, आधा दर्जन किसानों की मौत हुई लेकिन जांच में सभी को क्लीनचिट मिल गई। तो फिर जिम्मेदार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही हैं।

बसपा और सपा से गठबंधन की चर्चाओं पर कहा कि गठबंधन सिर्फ चुनाव जीतने के लिए नहीं होना चाहिए। बल्कि चुनाव के बाद भी साथ रहें, उन्हीं से गठबंधन होगा। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि अफसरों को विधायकों की बैठक में बुलाया जा रहा है। अफसर विधानसभा में बुलाए जाएं तो सभी दलों की विधायक प्रजेंटेशन देख सकें, तो बेहतर होगा।

अब नहीं चलेगी जुमलेबाजी -
उन्होंने कहा कि अब जुमलेबाजी नहीं चलेगी। सरकार युवाओं को नहीं दे पा रही है प्रधानमंत्री पकौड़े तलने की बात करतते हैं। इनवेस्टर समिट में खाओ खिलाओ की बात होती है, अनाब-शनाब खर्च हो रहा है लेकिन उद्योग नहीं आ रहे हैं। यह सरकारी धन की बर्वादी है। उन्होंने कहा कि पहली बार देखा है कि सत्तापक्ष सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है। अब तो नरेन्द्र मोदी और शिवराज तय करेंगे कि सदन की कार्यवाही कितने समय चले।

मंदसौर में मासूम के साथ बलात्कार करने वाले इरफान को लेकर आक्रोश जोरों पर है। मंदसौर समेत आसपास के क्षेत्र में धरनों और प्रदर्शनों का दौर लगातार जारी है। मंदसौर सहित आसपास के अन्य कस्बों में भी बाजार नहीं खुले हैं। मंदसौर के शहर काजी ने फतवा जारी कर फरमान दिया है आरोपी को फांसी दी जाए। यही नहीं उन्होंने एलान कर दिया है कि ऐसे दरिंदे को कब्रिस्तान में भी जगह नहीं दी जाएगी और उसके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। 

 एक इंच भी जगह नहीं दे जाएगी कब्रिस्तान में

मन्दसौर का मुस्लिम समाज शहर काजी आसिफ उल्लाह और अंजुमन सदर यूनुस शेख के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक मनोजसिंह से मिला। शहर काज़ी ने कहा कि कहा कि दुष्कर्मी को फांसी दी जाए। इस्लामिक कानून भी यही कहता है। अंजुमन सदर शेख ने समाज द्वारा लिये गए फैसले को सुनाते हुए कहा कि इस दरिंदे इरफ़ान को कब्रिस्तान में एक इंच जगह नहीं दी जाएगी व इसके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा


बाप भी था दंगाई

मंदसौर की 7 वर्षीय मासूम को स्कूल से अपहरण कर उसके साथ चाकू की नोक पर बलात्कार करने वाले इरफ़ान का पिता जमील मेव रतलाम के जिले रिंगनोद का रहने वाला है। वह ट्रक चलाता है। जमील पर बरसों पहले रिंगनोद में दंगों का आरोप है। दंगों के बाद पूरा परिवार भागकर मंदसौर आ गया था।

इरफान के साथ एक और भी है आरोपी

बच्ची के परिजनों के अनुसार दुष्कर्म के इस मामले में इरफ़ान के अलावा एक और शख्स भी है। बच्ची ने खुद होश में आने पर अपनी को उसके बारे में बताया था। हालांकि स्थानीय पुलिस ने अभी इस बारे में कोई खुलासा नहीं किया है।


मंदसौर सहित आसपास के कई शहर हैं बंद

मासूम के साथ दरिंदगी के बाद मंदसौर सहित पड़ोसी जिले नीमच शहर सहित कई कस्बे आज भी बन्द हैं। मंदसौर जिले के सीतामऊ, सुवासरा सहित कई कस्बे घिनौने कृत्य के विरोध में बन्द है। इसके अलावा ज्ञापन देने और प्रदर्शन करने का दौर लगातार जारी है।

दरिंदगी का शिकार मासूम की सेहत में सुधार।

इंदौर एमवायएच के बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख ब्रजेश लाहोटी ने बताया कि बच्ची की कल रात सर्जरी की गई है। अब उसकी सेहत में सुधार है। डॉक्टर बच्ची की सेहत पर लगातार नजर रख रहे हैं। उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। उसकी सेहत में सुधार हो रहा है। फिलहाल बच्ची को तरल पदार्थ दिए जा रहे हैं उसे ठोस आहार नहीं दिया जा रहा है।

वकीलों ने पैरवी से किया मना

मंदसौर अधिवक्ता संघ में साधारण सभा की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि आरोपीओ की और से कोई भी वकील पैरवी नहीं करेगा। इस संबंध में जिला जज को भी एक ज्ञापन दिया गया है कि जैसे ही मामला न्यायालय में आए फास्ट ट्रेक कोर्ट में सुनवाई कर जल्द से जल्द मासूम को इंसाफ दिलाया जाए।



सपा नेता आजम खान

नई दिल्ली:  

समाजवादी पार्टी (एसपी) के नेता आजम खान ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यानाथ पर तंज कसते हुए कहा है कि अगर मुख्यमंत्री गुलामी के प्रतीक ताजमहल को तोड़ने जाएं तो वो भी उनका साथ देंगे। 

पूर्व मंत्री आजम खान ने कहा , वो गुलामी की निशानी 'ताजमहल' को तोड़ने में सीएम योगी की मदद करेंगे।

गुरुवार को योगी सरकार पर हमला बोलते हुए आजम खान ने कहा ताजमहल भगवान शिव का मंदिर है यह बात मुझे योगी आदित्यनाथ ने बताई है।

आजम खान ने कहा,'शिव जी का मंदिर है ताजमहल मुझे ये योगी जी ने बताया। इसलिए शिज

व जी का मंदिर बने इसके लिए एक ऐसा मुसलमान कह रहा है जो अपने साथ 10-20 हजार मुसलमानों को लेकर योगी जी के साथ चलेगा।'

उन्होंने कहा, 'ताजमहल को तोड़ने के लिए पहला हथौड़ा योगी जी को मारना होगा उसके बाद ही दूसरा मैं मारूंगा। मैं अपने 10-20 हजार मुस्लिम समर्थकों को लेकर उनका साथ दूंगा।'

गौरतलब है कि योगी सरकार ने हाल ही में जारी की गई टूरिज्म लिस्ट से ताजमहल को बाहर कर दिया था, जिसके बाद काफी बवाल मचा और सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना भी की गई।

मजार की देखभाल करने वाले खादिम हुसैन ने जब योगी आदित्यनाथ को टोपी पहनाने की कोशिश की तो उन्होंने उसका हाथ पकड़कर बोला 'रुको-रुको... हो गया.'

मजार पर योगी आदित्यनाथ ने किया टोपी पहनने से इनकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले बुधवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संत कबीर की मजार पर जायजा लेने पहुंचे. यहां जब उन्हें एक मौलवी ने टोपी पहनाने की कोशिश की तो उन्होंने उसका हाथ पकड़कर पीछे कर दिया.

जब वह कबीर की समाधि पर पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री मोदी कबीर 500वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे. यहां मजार की देखरेख करने वाले खादिम हुसैन ने योगी को टोपी पहनने की पेशकश की तो योगी ने उनका हाथ पकड़कर पीछे कर दिया.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, जब मजार की देखभाल करने वाले खादिम हुसैन ने जब योगी आदित्यनाथ को टोपी पहनाने की कोशिश की तो उन्होंने उसका हाथ पकड़कर बोला 'रुको-रुको... हो गया.' इसके बाद खादिम ने उन्हें इस टोपी को अपने हाथ में पकड़ने की गुजारिश की जिसके बाद उन्होंने टोपी अपने हाथ में पकड़कर फोटो खिंचवाई.

खादिम ने कहा 'योगी आदित्यनाथ ने बहुत आराम से मुझे टोपी पहनने से इनकार किया. उन्होंने जब मना किया तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी.'

इस पर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह टोपी किसी धर्म की प्रतीक नहीं है. यह सम्मान की भी प्रतीक है. मुख्यमंत्री को सबको साथ लेकर चलना चाहिए. यदि आपको कोई टोपी पहनाने की पेशकश करता है तो उन्हें इसका सम्मान करना चाहिए था.

जबकि यूपी के अकेले मुस्लिम मंत्री मोहसिन रजा ने योगी आदित्यनाथ का बचाव किया है. उन्होंने कहा धार्मिक गुरुओं को इस प्रकार से प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए. उन्होंने टोपी पहनाने के पीछे की भावनाओं पर भी सवाल उठाए हैं.

इससे पहले 2011 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने भी अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार कर दिया था.

भोपाल। MP के सरकारी कॉलेजों में सेवारत अतिथि विद्वानों के लिए एक अच्छी खबर आई है। जिसके बाद अब हर महीने उन्हें 30 हजार रुपए वेतन मिलेगा। उन्हें यह वेतन प्रतिदिन 7 घंटे महाविद्यालय में बिताने और प्राचार्य द्वारा सौंपे गए समस्त शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कार्य का संतोषजनक जवाब देने पर दिया जाएगा। इस संबंध में बुधवार को उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव वीरन सिह भलावी ने आदेश जारी कर दिए हैं।

पिछले लंबे समय से अतिथि विद्वान अपनी कई मांगों को लेकर आंदोलन भी कर रहे हैं। जानकारों की माने तो सरकार की ओर से दिए गए इस तोहफे से अतिथि विद्वान अब काफी संतुष्ट महसूस करेंगे।

जानकारी के अनुसार प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में स्वीकृत एवं रिक्त पदों के विरूद्ध प्रति अवधि या कालखंड मानदेय के आधार पर राज्य शासन ने प्रतिवर्ष अतिथि विद्वानों को 11 माह के लिए आमंत्रण देने की नीति के अंतर्गत वर्तमान में प्रचलित व्यवस्था में परिवर्तन करते हुए यह निर्णय दिया है। जिसके बाद संपूर्ण शैक्षणिक वर्ष की कलावधि के लिए प्रति कालखंड के स्थान पर दैनिक मानदेय का निर्धारण करते हुए न्यूनतम निश्चित मानदेय दिया जाएगा।

ज्ञात हो कि मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त कर अपने नियमितिकरण की मांग को लेकर प्रदेश भर के अतिथि विद्वान लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे।

ये भी मिलेंगे लाभ...
इतना ही नहीं अतिथि विद्वानों की यह नियुक्ति तीन साल के लिए होगी। गर्मियों के अवकाश के दौरान भी इन्हें वेतन दिया जाएगा। साथ ही छुट्टियों का भी लाभ दिया जाएगा।

पहले 25 हजार रुपए फिक्स करने की थी तैयारी!...
इससे पहले सूत्रों से सामने आ रही खबरों में बताया जा रहा था कि मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने अतिथि विद्वानों का मानदेय प्रतिमाह 25 हजार रुपए फिक्स करने की तैयारी कर ली है। विभाग ने इस प्रस्ताव को वित्त विभाग की राय जानने के लिए भी भेजा है। इसके अलावा वित्त विभाग से जवाब के बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा।

यह भी है खास
-प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में 4200 से अधिक अतिथि विद्वान पढ़ाते हैं। इन विद्वानों को 200 रुपए प्रति लेक्चर के हिसाब से पैसा दिया जाता है। जबकि एक विद्वान अधिक से अधिक तीन लेक्चर ही रोज ले सकता था।
-खेल शिक्षक और लाइब्रेरियन को 580 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। उच्च शिक्षा विभाग का नया प्रस्ताव सभी विद्वानों को 25 हजार रुपए प्रतिमाह तय करवा देगा। हालांकि यह वेतन नहीं मानदेय ही कहलाएगा।

नियमितीकरण की मांग
वहीं इस दौरान अतिथि विद्वान महासंघ के अध्यक्ष देवराज सिंह का कहना था कि हालांकि प्रदेश सरकार का यह कदम अस्थाई ही है। सरकार संविदा पर ही रखना चाहती है। अतिथि विद्वानों के संगठन की मांग है कि 15 से 20 वर्षों से काम कर रहे अतिथि विद्वानों को नियमित करना चाहिए।

इंफाल। भारतीय सेना ने एक बार फिर से घर में घुसकर वार किया है। इस बार उसने म्यांमार में जाकर आतंकी संगठन एनएससीएन-के (नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल ऑफ नगालैंड-खापलांग) की चेकपोस्ट पर हमला किया है। 12 पैरा कमांडो की इस कार्रवाई में चार से पांच आतंकियों के मारे जाने की खबर है।

कमांडो की टीम सुरक्षित भारतीय सीमा में लौट आई है। एनएससीएन-के ने कार्रवाई की पुष्टि की है। हालांकि भारतीय सेना की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

इससे पहले जून 2015 में भारतीय सेना ने म्यांमार सीमा पार करके एनएससीएन पर कार्रवाई की थी और डेढ़ सौ से ज्यादा आतंकी मारे थे।

सितंबर 2016 में सेना ने पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। सेना की ओर से बताया गया है कि ताजा कार्रवाई बुधवार को हुई। इसमें म्यांमार सीमा के भीतर आतंकी संगठन के श्वेलो कैंप को निशाना बनाया गया। यह कैंप म्यांमार के तीन किलोमीटर भीतर स्थित है।

कमांडो और आतंकियों का आमना-सामना होने पर वहां करीब आधा घंटे तक फायरिग हुई। इसमें चार-पांच आतंकी मारे गए और कई अन्य घायल हुए। दोपहर दो बजे शुरू हुई कार्रवाई करीब दो घंटे चली।

कार्रवाई में कमांडो की ओर से राइफल के अतिरिक्त रॉकेट लांचर, मोर्टार और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लांचर का इस्तेमाल किया गया। म्यांमार के जिस इलाके में कार्रवाई हुई, वह नगालैंड के मोन जिले के नजदीक है।

बीते 18 जून को मोन जिले में आतंकियों के घात लगाकर हमले असम राइफल्स के तीन जवान और तीन अन्य घायल हुए थे। बुधवार की कार्रवाई को आतंकियों के उक्त हमले का जवाब माना जा रहा है।

आतंकी संगठन ने की कार्रवाई की पुष्टि

एनएससीएन-के के स्वयंभू उप मंत्री कर्नल इसाक सुमी ने भारतीय सेना की म्यांमार में की गई कार्रवाई की पुष्टि की है। कहा है कि सैन्य टुकड़ी जैसे ही एनएससीएन के की फारवर्ड पोस्ट के करीब पहुंची, उसे देख लिया गया।

इसके बाद दोनों तरफ से फायरिग हुई। सुमी ने कार्रवाई में अपने किसी साथी के मारे जाने की पुष्टि नहीं की है।

एनएससीएन-के ने भारत सरकार के साथ 2001 में संघर्षविराम पर दस्तखत किए थे लेकिन संगठन का एक धड़ा विद्रोही हो गया और उसने हिसा का रास्ता न छोड़ने की घोषणा की। इस संगठन का कार्यस्थल नगालैंड और मणिपुर है।

2015 में भी म्यांमार में घुसी थी सेना

मणिपुर के चांडेल जिले में चार जून, 2015 को संगठन ने घात लगाकर हमले में सेना के 18 जवानों की हत्या कर दी थी।

छह दिन बाद दस जून को भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स ने पहली बार म्यांमार में घुसकर एनएससीएन-के के खिलाफ कार्रवाई की थी। कार्रवाई में आतंकियों के दो कैंपों को भारी नुकसान पहुंचा था और 150 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे।

भोपाल. मध्यप्रदेश में अयोध्या से पहले राम मंदिर का निर्माण होगा। उत्तरप्रदेश में सीएम आदित्यनाथ योगी ने 2019 में मंदिर निर्माण की बात कही है। इससे पहले मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के चलते राम मंदिर के भव्य निर्माण के लिए कदम उठाए गए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा चुनावों को देखते हुए हिन्दुत्व की राह पर यह मंदिर बनाना चाहती है। इसके लिए सरकार ने 40 लाख रुपए देगी।


वहीं, 20 लाख रुपए जनता से चंदा लेकर जुटाए जाएंगे। दरअसल, इंदौर के समीप सांवेर में राम मंदिर है। यह जीर्ण-शीर्ण हालत में है, जिसे अब भव्य स्वरूप देना तय किया गया है। इसे चुनाव पहले भव्य रूप में बनाकर बड़ा आयोजन भी किया जाएगा। दरअसल, यह परिक्षेत्र आरएसएस का गढ़ माना जाता है। यहां समीप ही उज्जैन में महाकाल मंदिर है। जबकि, इंदौर आवागमन की दृष्टि से सबसे सुविधाजनक शहर है, इसलिए सांवेर को चुना गया है। यहां जिला पंचायत के स्तर पर मंदिर की रूपरेखा तैयार की गई है।


 


हाउसिंग बोर्ड बनाएगा मंदिर
मंदिर का निर्माण कार्य हाउसिंग बोर्ड जल्द ही शुरू करेगा। भव्य जीर्णोद्धार के लिए ६३ लाख रुपए का बजट तय किया गया है। धर्मस्व विभाग ने प्रदेश के मंदिरों के लिए 20 लाख़ रुपए दिए हैं। इसके बाद २० लाख रुपए और दिए जाएंगे। बाकी बीस लाख रुपए स्थानीय स्तर पर चंदे के जरिए जुटाए जाएंगे।


 


सियासी फायदे-नुकसान का गणित
सत्ता-संगठन की मंशा है कि राम मंदिर को लेकर प्रदेश में माहौल बनाया जाए, ताकि यह संदेश जाए कि प्रदेश सरकार हिन्दुत्व के प्रति सकारात्मक है। चुनाव के समय मंदिर के नाम पर चंदा मांगने की रणनीति इसी का हिस्सा है। जनता के बीच चंदा मांगकर हिन्दू वोटरों को लुभाने की कोशिश होगी।


 


इधर चुनावी साल में घटा मंदिरों का बजट
दू सरी ओर चुनावी साल होने के बावजूद सरकार ने मंदिरों का बजट घटा दिया है। पिछले साल ३९ करोड़ रुपए का बजट मंदिरों के लिए था, लेकिन इस साल महज १८ करोड़ रुपए का बजट है। इसमें से भी अभी तक महज दो करोड़ रुपए मिले हैं। इस राशि से प्रदेशभर के मंदिरों को जीर्णोद्धार के लिए बजट दिया जा रहा है।


 


राम मंदिर को जीर्णोद्धार के जरिए भव्य स्वरूप दिया जाएगा। जल्द ही यह मंदिर बन जाएगा। इसके लिए निर्माण एजेंसी भी तय कर देंगे। सरकार से राशि मिली है, बाकी स्थानीय स्तर पर चंदे से भी जुटाई जा रही है। 
-कृष्णमुरारी मोघे, अध्यक्ष, मप्र हाउसिंग बोर्ड


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