मोदी का मिशन: खुद गए किंगदाओ, सेना प्रमुख को भेजा सीमा पर



पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग


कूटनीति के माहिर खिलाड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने के मिशन में जुटे हुए हैं. इसके लिए वो हर कूटनीतिक और राजनीतिक दांव आजमा रहे हैं. डोकलाम पर चीन को कदम पीछे खींचने के लिए मजबूर करने के बाद अब पीएम मोदी सीमा विवाद को पूरी तरह से खत्म करना चाहते हैं.


इसी कड़ी में शनिवार को एक ओर पीएम मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन के किंगदाओ शहर को रवाना हुए, तो दूसरी ओर सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत चीन बॉर्डर से सटे अरुणाचल के ताक्सिंग इलाके का दौरा करने निकल पड़े. शनिवार को सेना प्रमुख ताक्सिंग पहुंचे और अग्रिम चौकियों का दौरा किया. साथ ही सैन्य ऑपरेशन की तैयारियों का जायजा लिया.

इस दौरान जनरल रावत ने सैनिकों से सीमा पर शांति सुनिश्चित करने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बेहतर करने को लेकर कदम उठाने को कहा. माना जा रहा है कि सेना प्रमुख रावत का चीन सीमा से सटे इलाकों का यह दौरा कूटनीति का हिस्सा था. पीएम मोदी इस बात को भलीभांति जानते है कि सीमा पर शांति स्थापित किए बिना दोनों देशों के बीच रिश्तों को बेहतर कर पाना संभव नहीं है.

यही वजह है कि सीमा विवाद पर चीन को राह में लाने के लिए पीएम मोदी पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, जिसमें वो कामयाब होते भी दिख रहे हैं. उनका पिछले महीने चीन के वुहान का अनौपचारिक दौरा भी इसी कूटनीति का हिस्सा था. पीएम मोदी ने वुहान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अनौपचारिक वार्ता की थी. यह पहली बार था, जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने चीन का अनौपचारिक दौरा किया था

इस दौरान उनका फोकस भारत-चीन सीमा पर तनाव खत्म करने और शांति स्थापित करने पर था. लिहाजा उन्होंने इस मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति से खुशमिजाज माहौल में अनौपचारिक वार्ता की. पीएम मोदी की यह कोशिश रंग भी लाई और सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर हुए. मोदी के वुहान दौरे के बाद चीनी सेना ने भारत का दौरा करने का भी ऐलान किया. डोकलाम विवाद के बाद यह पहली बार होगा, जब चीनी सेना भारत का दौरा करेगी.

अब चीनी राष्ट्रपति भी करेंगे भारत का अनौपचारिक दौरा

पीएम मोदी के बाद अब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी भारत का अनौपचारिक दौरा करेंगे. उन्होंने पीएम मोदी का न्योता स्वीकार कर लिया है. शनिवार को विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि पीएम मोदी के न्योते को स्वीकार करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले साल भारत में अनौपचारिक वार्ता करने को राजी हो गए हैं. हालांकि इस अनौपचारिक बैठक की अभी तक तारीख तय नहीं हुई है.

OBOR पर चीन को फिर दिखाया आइना

चीन काफी समय से अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना 'वन बेल्ट वन रोड' (OBOR) पर भारत को साधने का प्रयास कर रहा है, लेकिन उसको बार-बार विफलता का मुंह देखना पड़ता है. इस बार भी ऐसा ही हुआ और रविवार को SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना का समर्थन करने से इनकार कर दिया. साथ ही चीन को पारदर्शिता बरतने और संप्रभुता का सम्मान करने की नसीहत भी दी.