कांग्रेस को झटका, अकेले दम पर मध्य प्रदेश विधानसभा विधानसभा चुनाव लड़ेगी सपा

वाराणसी. क्या अखिलेश और राहुल गांधी की दोस्ती में खटास आ गई है या ये गठबंधन की नई रणनीति है। सपा सुप्रीमों का नया दांव चौंकाने वाला है। कम से कम मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर तो ऐसा ही नजर आ रहा है। सपा सुप्रीमों की इस रणनीति से सभी चकित हैं कि आखिर वो करने क्या जा रहे हैं, चाहते क्या हैं वह। लेकिन उनकी इस नई रणनीति ने राज्नीतिक हलके में सभी को हैरान कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक भी नहीं समझ पा रहे हैं उनकी यह चाल।


बता दें कि यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान सपा सुप्रीमों और पूर्व सीएम अखिलेश यादव और कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्याक्ष अब अध्यक्ष की दोस्ती के डंके बजने लगे थे। पंजे ने साइकिल की हैंडिल थाम ली थी। हालांकि वह गठबंधन कामयाब नहीं हुआ लेकिन उसके बाद अखिलेश बार-बार यह कहते रहे हैं कि दोस्ती कायम रहेगी। लेकिन जिस तरह से अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू की है उससे इस दोस्ती को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।


बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर उनकी पूरी टीम, यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया, नव नियुक्त अध्यक्ष कमलनाथ हों या पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सभी ने विधानसभा चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि अब मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उनकी सरकार बनेगी।


लेकिन इस बीच सपा ने भी उसी अंदाज में अपनी तैयारी शुरू कर दी है। सपा सूत्रों का कहना है कि इस साल के अन्त में होने वाले विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से लड़ेगी। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव मध्यप्रदेश में संगठन को और धार देने में जुट गए है। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की दृष्टि से उन्होंने वहां अपने पर्यवेक्षक भेज दिए हैं। अब उन पर्यवेक्षकों की टीम ने उनको प्रारंभिक रिपोर्ट भी दे दी है। पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर मथन भी शुरू कर दिया है अखिलेश यादव ने


मंगलवार को सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में भेजे गये पार्टी पर्यवेक्षकों से उनकी रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग विचार-विमर्श किया। वाराणसी से जुड़े अखिलेश के एक नजदीकी युवा सपा नेता ने पत्रिका को बताया कि पार्टी मध्यप्रदेश में संगठन को बहुत तेजी के साथ मजबूती दे रही है। पार्टी वहां से भाजपा का डेरा तम्बू उखाड़ने के लिए हर विकल्प पर काम करेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पर्यवेक्षकों के साथ आज हुई बैठक में यह कह कर अपना इरादा साफ कर दिया कि मध्यप्रदेश में संगठन को चुनाव से इतना मजबूत कर देना है कि अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता से बाहर हो जाए। ऐसा होने से ही भाजपा का 2019 में पुनः दिल्ली पर कब्जे की मंशा अधूरी रह जाएगी। उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट का अध्ययन कर उसी के अनुरूप मध्यप्रदेश में संगठन का ढ़ाचा खड़ा किया जाएगा।