सिकुड़ती सड़कें वाहनो का बढ़ता कारवां खतरनाक- व्ही.एस.भुल्ले


विलेज टाइम्स समाचार सेवा।          6 जून 2018
ऐश्वर्य आराम सहूलियत की सवारी बने वाहन भले ही सत्तालोलुप नीतियों के चलते बेकाबू अंदाज मैं हमारे गांव, गली, सड़क से लेकर हाईवेयों पर फर्राटे भर रहे हो। भले ही सहूलियत के साथ, वह अकाल मौत और अपंगता का कारण बन रहे हो। मगर फुरसत किसे जो सत्ता सुख और निहित स्वार्थ छोड़, सड़कों पर दम तोड़ते लोगों के बारे में सोच सके।
       ऐसा नहीं कि वाहन सुख उठाने और बेखौफअंदाज में मौत के ताबूत साबित होते इन वाहनों का शिकार आम गांव, गली, गरीब ही हो रहा हो। इसके शिकार तो जब तब, क्या आम क्या खास हमारे माननीय, श्रीमान भी होते रहे हैं।  मगर रातों-रात दौलत और शौहरत पा अपने और अपने वालो का भविष्य अकूत दौलत से सुरक्षित तथा सुनहरा बना, हवाई हेलीकॉप्टरों का सफर जनधन से करने वालो को क्या पता कि एक न एक दिन उन्हें भी और उनकी आने वाली नस्लों को भी, वाहनो से पटी इन सड़कों से ही गुजरना होगा और अनियंत्रित अंदाज में सड़कों पर दौड़ते इन वाहनों से ही दो चार होना पड़ेगा है।
       देखा जाये तो इस दुव्र्यव्यवस्था के मूल में बगैर डिजाइन, डिटेल, डीपीआर के चलते तैयार होने वाली नीतियां और स्वयं कल्याण की स्वार्थवत सोच है। जो कुछ करना ही नहीं चाहती। जबकि सब जानते हैं कि अनियंत्रित वाहन हमारी नस्लो का भविष्य ही नहीं, राष्ट्रीय राजस्व का भी बड़े पैमाने पर नुकसान कर रही है।
      खासकर तब की स्थिति में जबकि प्रशिक्षण हेतु पर्याप्त प्रशिक्षिण केन्द्र है , न ही  पूर्ण रुप से प्रशिक्षित वाहन चालक है। मनचाहे अंदाज में वाहन उड़ाने वालों को भी नहीं पता कि वह किस मुसीबत के साथ सफर कर रहे हैं। जबकि होना यह है चाहिए कि सतत सत्ता सुख को मोह छोड़ सताए अपने राजधर्म का पालन करते हुए गांव, गली, नगर, शहर की आवश्यकता अनुसार मांग पूर्ति की नीति आवश्यकता अनुसार बनाएं। गांव, गली, नगर, शहरों में ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र खुलवाए नैतिकता अनुसार वाहन की आवश्यकता उसके दुष्परिणामों और सावधानियों का पाठ पढ़ाया जाए।
     वरना ऐसे ही वाहनों की खरीदी बिक्री का रेलम रेल चलता रहा और नीति निर्धारकों का सफर हवाई हेलीकॉप्टरों में चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब लोगों को वाहन दौड़ाने सड़कें बचेेंगी न ही सड़कों पर चलने वाले सुरक्षित होगें।
जय स्वराज