मासूम ने मंगलवार को पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत में आरोपितों आसिफ पिता जुल्फिकार और इरफान पिता जहीर खां को पहचान लिया।

मंदसौर। मंदसौर में 26 जून को दरिंदगी का शिकार आठ साल की मासूम ने मंगलवार को पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत में आरोपितों आसिफ पिता जुल्फिकार और इरफान पिता जहीर खां को पहचान लिया। दोनों को देखते ही उसकी आंखों में गुस्सा उतर आया।

बिना किसी डर के उसने एक की तरफ अंगुली दिखाते हुए कहा कि 'इन अंकल ने मुझे बुलाया था, दूसरे की तरफ देख कर बोली- 'यह अंकल मुझे साथ लेकर गए थे। बाद में झाड़ियों में दोनों अंकल फिर मिल गए।" उसके इतना कहते ही दोनों आरोपितों के पसीने छूटने लगे।

कोर्ट रूम का यह दृश्य वहां से छन कर निकली खबरों में सामने आया है। इंदौर से डीएसपी लक्ष्मी सेतिया मासूम के साथ कार से दोपहर में यहां पहुंची। विशेष कोर्ट में न्यायाधीश निशा गुप्ता के सामने बंद कमरे में सुबह सबसे पहले पीड़ित मासूम के बयान हुए।

घटना के बाद पहली बार दोनों आरोपितों आसिफ पिता जुल्फिकार और इरफान पिता जहीर खां को देखते ही उसका चेहरा तमतमा गया। आंखों में गुस्सा नजर आने लगा। आरोपितों की पहचान के बाद बचाव पक्ष के वकीलों ने भी मासूम से सवाल-जवाब किए, लेकिन उसने पूरे आत्मविश्वास से जवाब दिए।

मंगलवार को ही कोर्ट में माता-पिता, दादी और ताऊ सहित अन्य के बयान भी हुए। जब ये बयान चल रहे रहे थे उस दौरान पूरे समय दोनों आरोपित कोर्ट में ही मौजूद थे। कोर्ट के बाहर तीन टीआई और पुलिस बल किसी भी विवाद को टालने के लिए तैनात था। शाम को दोनों आरोपितों को जेेल भेज दिया गया।

बालिका के बयान ठीक होनेे और पीड़िता द्वारा आरोपितों को पहचान लेने के बाद पुलिस अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली। पुलिस अधिकारियों की सबूत एकत्र करने और केस डायरी तैयार करने के लिए की गई मेहनत मासूम के बयान से पूरी होती दिख रही है।


एक बार तो पुलिस अफसरों के भी उड़ गए होश

बालिका के बयान के दौरान एक बार तो पुलिस अधिकारियों के होश उड़ गए और उन्हें लगा कि सारी मेहनत बेकार न चली जाए। दरअसल, बयान के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने बालिका से पूछा था कि इंदौर के अस्पताल में पुलिस बयान लेने आई थी, तब बालिका ने स्पष्ट मना कर दिया कि पुलिस अंकल बयान लेेने नहीं आए। हालांकि बाद में वह बोली के एक गोरे से लंबे से अंकल आए थे और उन्होंने पूछताछ की थी। बाद में यह साफ हुआ कि सीएसपी सादी वर्दी में उसकेे बयान लेने गए थे इसलिए गफलत हो गई थी। अब 1 अगस्त को सात स्वतंत्र साक्षियों के लिए बयान होंगे।

इनका कहना है

मंगलवार को पॉक्सो एक्ट की विशेष कोर्ट में पीड़ित बालिका के अच्छे बयान हुए हैं। दोनों आरोपितों को भी कोर्ट में लाया गया था। इसके अलावा बालिका के परिजनों के भी बयान हुए।


 बीएस ठाकुर, उप संचालक, अभियोजन

यह है मामला

26 जून की शाम को हाफिज कॉलोनी स्थित एक स्कूल से बालिका का अपहरण कर आरोपित इरफान और आसिफ ने लक्ष्मण शाह दरवाजे के पास झाड़ियों में सामूहिक दुष्कर्म किया था। बाद में उसके गले पर गहरा घाव कर भाग गए थे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखकर 27 जून को इरफान व 29 जून को आसिफ को गिरफ्तार किया था। इसे लेकर शहर भर के लोगों ने आक्रोश जताया था और एक दिन जिले भर मंे बंद भी रहा था। वकीलों ने आरोपितों की पैरवी नहीं करने की घोषणा की थी तो मुस्लिम समाज ने कबिस्तान में दो गज जमीन भी नहीं देने को कहा था। 10 जुलाई को चालान पेश हुआ था, पर न्यायालय में कोई भी वकील आरोपितों की पैरवी करने को तैयार नहीं होने से सुनवाई शुरू नहीं हो पा रही थी। विधिक सहायता ने दो वकीलों दीनदयाल भावसार और राजेंद्रसिंह पंवार का नाम पैरवी के लिए तय किया। उनकी सहमति के बाद कोर्ट में 18 जुलाई को आरोप पत्र तय हुआ है। इसमें आरोपितों को पहली बार कोर्ट में पेश किया गया। आरोपित आसिफ की तरफ सीहोर के अधिवक्ता राजकुमार मालवीय भी कोर्ट में आए हैं। 19 जुलाई को अभियोजन ने ट्रायल प्रोग्राम पेश कर दिया था। उसके बाद सोमवार से ट्रायल प्रारंभ हुआ।

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में चौथी बार भाजपा की सरकार बन सकती है। हालांकि कांग्रेस और बसपा राज्य में मिलकर चुनाव लड़ती हैं तो भाजपा के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है। 


 


यह सर्वे रिपोर्ट नेशनल हेराल्ड इंडिया डॉट कॉम में प्रकाशित हुई है। इस सर्वे से भाजपा इसलिए खुश हो सकती है क्योंकि नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना ही पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। नेशनल हेराल्ड कांग्रेस का ही मुखपत्र है। यह चुनावी सर्वे स्पीक मीडिया नेटवर्क ने किया है। हालांकि हेराल्ड ने यह सर्वे कांग्रेस के लिए चेतावनी के रूप में जारी किया है। 

 


इस सर्वे के अनुसार यदि राज्य में कांग्रेस और बसपा अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। इस स्थिति में भाजपा को 147 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 73 सीटें जा सकती हैं। बसपा को 10 सीटें मिल सकती हैं। दोनों पार्टियां 83 सीटें जीत सकती हैं। इसका सीधा सीधा अर्थ है कि कांग्रेस एक बार फिर सत्ता से दूर रह सकती है। 



इसके उलट यदि कांग्रेस और बसपा राज्य में मिलकर चुनाव लड़ते हैं उन्हें संयुक्त रूप से 103 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भाजपा 20 सीटों के नुकसान के साथ 126 के आसपास आ सकती है। हालांकि इस स्थिति में भी राज्य में भाजपा की ही सरकार बनेगी। क्योंकि 230 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 116 सीटों की दरकार होती है। 

उल्लेखनीय है कि 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 165 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस 58 सीटों पर सिमट गई थी। बसपा को 4 और अन्य को 3 सीटें मिली थीं। हालांकि यह तय है कि यदि कांग्रेस और बसपा का गठजोड़ होता है तो निश्चित ही दोनों ही दलों को फायदा होगा।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी की खबरों को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गंभीरता से लिया.

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी की खबरों को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गंभीरता से लिया. आगामी विधानसभा चुनाव और पार्टी के भीतर गुटबाजी जैसी स्थिति को भांपते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के पार्टी नेताओं से मुलाकात की है. इस बैठक में दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दूसरे नेता मौजूद थे. ख़बरों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा बीजेपी को हराने के लिए एकजुट होकर काम करना ज़रूरी है. 


बता दें कि बीमार चल रहे द्रमुक नेता एम करुणानिधि को देखने के लिए चेन्नई रवाना होने से पहले गांधी ने मंगलावर की सुबह मध्य प्रदेश से जुड़े कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ राज्य में पार्टी की वर्तमान स्थिति और चुनाव तैयारी की समीक्षा की. इस बैठक में कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया, प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ, चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह मौजूद रहे. 

हाल के दिनों में मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें आई हैं. हाल ही में रीवा में बाबरिया के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर धक्का-मुक्की की थी. खबरों के मुताबिक बाबरिया ने बयान दिया था कि राज्य में कमल नाथ और सिंधिया ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं जिससे प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह के समर्थक नाराज हो गए और उनके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की. दूसरी तरफ बाबरिया के करीबी ऐसी किसी भी घटना से इनकार कर रहे हैं.



मंथन न्युज , नई दिल्ली। असम में एनआरसी के मसौदा रिपोर्ट पर जारी विवाद के बीच लोकसभा में रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर हंगामा हुआ। विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रोहिंग्या की पहचान की जा रही है और अंतत: उन्हें वापस भेजने की भी व्यवस्था की जाएगी। वहीं राजनाथ सिंह के जूनियर राज्यमंत्री किरण रिजिजु ने साफ कर दिया कि रोहिंग्या शरणार्थी नहीं हैं, बल्कि अवैध घुसपैठिये हैं, उन्हें शरणार्थियों की सुविधाएं नहीं दी जा सकती है।


लोकसभा में रोहिंग्या के मुद्दे पर हुआ हंगामा


लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान अरविंद सावंत, रामस्वरूप शर्मा और सुगत बोस के पूरक प्रश्नों के उत्तर में राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल और असम राइफल्स को सजग किया गया है ताकि म्यांमार से लगी सीमा से रोहिंग्या भारत में प्रवेश नहीं कर सकें। इसके साथ ही देश में रह रहे रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान की जा रही है और इस संबंध में राज्य सरकारों को एडवाइजरी भेजी जा चुकी है।


एडवाइजरी में राज्य सरकारों को रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान सुनिश्चित करने के साथ ही उनकी गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है। राजनाथ सिंह के अनुसार पहचान हो जाने के बाद गृहमंत्रालय विदेश मंत्रालय के साथ संपर्क कर रोहिंग्या को म्यांमार वापस भेजने के रास्ते पर विचार करेगा।


वहीं किरण रिजिजु ने सदन को बताया कि रोहिंग्या घुसपैठियों के अवैध गतिविधियों में शामिल होने की भी जानकारी मिली है। रिजिजू ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि रोहिंग्या भारत में शरणार्थी नहीं हैं, बल्कि अवैध घुसपैठिये हैं।


रिजिजू के अनुसार राज्यों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि रोहिंग्या घुसपैठिये किसी तरह का सरकारी दस्तावेज हासिल नहीं कर सकें। उनके अनुसार सबसे अधिक रोहिंग्या जम्मू-कश्मीर में हैं। इसके अलावा तेलंगाना, दिल्ली और हरियाणा में भी रोहिंग्या हैं।




असम के मोरी गांव के बाशिंदे अपने दस्तावेज़ दिखा रहे हैं।


असम में 40 लाख से भी ज्यादा लोग वहाँ एक तरह से शरणार्थी बनने की राह पर हैं। इनमें से ज्यादातर लोग बंगाली बोलने वाले मुसलमान हैं। इन लोगों को ये साबित करना था कि साल 1971 में बांग्लादेश के गठन के समय वे भारत में रह रहे थे। असम के जिस एनआरसी (नेशनल रजिस्टर और सिटिज़ंस) में इन 40 लाख लोगों को बाहर कर दिया गया है, उसकी पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। एनआरसी पर विवाद होना तो तय था। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि हड़बड़ाहट और जल्दबाजी की गुंजाइश पहले से ही देखी जा रही थी।

जब सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया कि ये कार्रवाई होनी है, तो असम की राज्य सरकार की तरफ से बार-बार ये कहा गया कि हमें थोड़ा वक़्त और दीजिए। इसी सिलसिले में एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने राज्य सरकार से कहा कि आपका काम असंभव को संभव बनाना है। चूंकि राज्य सरकार पंचायत चुनाव और दूसरे प्रशासनिक मुद्दों के नाम पर अपनी दलील दे रही थी। राज्य सरकार के लिए भी इतनी जल्दी इस कार्रवाई को अंजाम देना एक मुश्किल काम था।

सुप्रीम कोर्ट का दबाव
लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से राज्य सरकार पर बहुत ज्यादा दबाव था कि इसे जल्द से जल्द पूरा करना है। पहले इसकी डेडलाइन जून में थी लेकिन असम के कई जिले बाढ़ प्रभावित रहते हैं, इसलिए राज्य सरकार को एक महीने की मोहलत दी गई। असम में जिस हड़बड़ी और जल्दबाजी में इतनी बड़ी कार्रवाई हुई। करोड़ों लोग असम के नागरिक हैं या नहीं, उनके दस्तावेजों की जांच की गई। कानूनी रूप से इतने बड़े पैमाने पर की जा रही कवायद के लिए थोड़ा और वक्त दिया जाना चाहिए था। इसके चलते कई गलतियां सामने आ रही हैं। जिनके नाम इस लिस्ट में आ गए हैं, उनमें से कई लोगों को तो सिर्फ स्पेलिंग मिस्टेक की वजह से ही परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं और इस लिस्ट से बाहर रखे गए 40 लाख लोगों का आंकड़ा बहुत बड़ा है।

सवाल ये भी उठता है कि इन 40 लाख लोगों का क्या होगा। इनका सरकार क्या करेगी। अब तक ये एक अंदाजा ही था कि असम में घुसपैठ हुई, उस पार से लोग आए हैं। लेकिन अब कुछ लाख लोग भारत की अपनी नागरिकता साबित करने में नाकाम रहे हैं तो सरकार इनका क्या करेगी। क्या इन्हें जेल में रखा जाएगा, इन्हें कहां छोड़ा जाएगा, इनके साथ गाय-बैल जैसा सुलूक नहीं किया जा सकता है। न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार के पास इस सिलसिले में कोई स्पष्ट नीति है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ये रिपोर्ट अंतिम नहीं है। ये बात सही है। अभी अपील होगी, 40 लाख लोग सरकारी बाबुओं के आगे-पीछे अपने जूते घिसेंगे।

अंतिम एनआरसी कब पब्लिश होगी, ये कितने दिनों तक चलता रहेगा, इसे लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। इन 40 लाख लोगों का क्या होगा, इनमें से जो कोई भी आख़िर में अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाएगा, उनके साथ सरकार क्या करेगी। बांग्लादेश इन्हें किसी भी हाल में नहीं अपनाएगा. ढाका में चाहे जिसकी भी सरकार हो, अगर भारत उन्हें भेजने की जिद करेगा, तो बांग्लादेश के साथ रिश्ते बिगड़ेंगे।

1August18- 2.5 लाख अध्यापक बने सरकारी शिक्षक! कहीं आप भी तो नहीं हैं इनमें शा​मिल :


भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकार के वादे के चलते करीब ढाई लाख अध्यापकों के संविलियन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी के साथ स्कूल शिक्षा विभाग ने संविलियन के लिए राज्य शिक्षा सेवा के तहत शिक्षकों के भर्ती नियम जारी कर दिए हैं।


वहीं कहा जा रहा है कि संविलियन आदेश एक से दो दिन में अलग से जारी किए जाएंगे। वहीं सामने यह बात भी आई है कि नियमों के तहत भले अध्यापकों का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में होगा, लेकिन उनके लिए अलग कैडर बना दिया गया है।


दरअसल अध्यापक संवर्ग का संविलियन शिक्षा और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में करने का फैसला लिया गया था। ऐसे अब यह लोग पंचायत नगरीय निकाय के कर्मचारी नहीं शासकीय सेवक कहलाएंगे।


नए कैडर के बनने से संविलियन के बाद वरिष्ठ अध्यापक अब उच्चतर माध्यमिक शिक्षक, अध्यापक अब माध्यमिक शिक्षक और सहायक अध्यापक अब प्राथमिक शिक्षक कहलाएंगे।


इसके अलावा सहायक अध्यापक (प्रयोगशाला) को प्रयोगशाला शिक्षक, सहायक अध्यापक (व्यायाम) को खेलकूद शिक्षक और सहायक अध्यापक (गायन/वादन) को गायद/वादन शिक्षक श्रेणी-अ बनाया जाएगा।


अध्यापक फिलहाल पंचायत, नगरीय निकाय और आदिवासी विभाग के तहत आते हैं, अब वे स्कूल शिक्षा विभाग के तहत काम करेंगे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन करने की घोषणा की थी।


इस संबंध में आदेश राज्यपाल के नाम से अपर सचिव अजय कुमार शर्मा के हस्ताक्षर से जारी हुए हैं। वहीं काफी समय से संविलियन का इंतजार कर रहे इन शिक्षकों का संविलियन कर सरकार ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। सरकार के नोटिफिकेशन के साथ ही अब इन अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन हो गया है।


नई भर्ती में भी यही नियम...
वहीं सामने आ रही जानकारी के अनुसार शिक्षकों की नई भर्ती के लिए भी यही नियम लागू होंगे। शिक्षक पात्रता परीक्षा के तहत नई भर्ती होगी।


एससी, एसटी, ओबीसी व दिव्यांगों को 50 प्रतिशत और अनारक्षित वर्ग के लोगों को परीक्षा में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक लाना होगा।


अभी भी असंतुष्ट कई अध्यापक...
आदेशों के संबंध में जानकारी समाने आने के बाद कुछ अध्यापक संघों ने इस नियम को अध्यापकों के साथ धोखा बताया है। मप्र शासकीय अध्यापक संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक नए कैडर पर अध्यापकों को जुलाई 2018 से नियुक्ति दी जाएगी। इससे 1998 में नियुक्त शिक्षाकर्मी से अध्यापक तक की सेवा अवधि शून्य हो जाएगी और प्रमोशन के लिए फिर से ग्रामीण क्षेत्रों में 3 साल सेवा देना जरूरी होगा। इसके साथ ही नए संवर्ग में इ-अटेंडेस और ड्रेस कोड भी अनिवार्य कर दिए गए हैं। ऐसे में नया कैडर बनने से अध्यापक कभी भी शिक्षकों की बराबरी पर नहीं आ सकेंगे।


भोपाल। मध्यप्रदेश के सवा दो लाख से अधिक अध्यापकों के लिए मंगलवार को बड़ी खबर आई है। काफी समय से संविलियन का इंतजार कर रहे इन शिक्षकों का संविलियन कर सरकार ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। सरकार के नोटिफिकेशन के साथ ही अब इन अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन हो गया है।


मध्यप्रदेश सरकार ने मंगलवार को नोटिफिकेशन जारी कर दो लाख 38 हजार अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन कर दिया है। अब सभी अध्यापक सरकारी शिक्षक कहलाएंगे। सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक इन शिक्षकों को उच्च माध्यमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक और प्राथमिक शिक्षक के नाम मिल गया है।


 


मुख्यमंत्री ने की थी संविलियन की घोषणा
कुछ माह पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन अध्यापकों का संविलियन शिक्षा विभाग में करने की घोषणा की थी। इससे पहले मई माह में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग में संविलियन करने का फैसला कर लिया गया था। 
-अध्यापक संवर्ग का संविलियन शिक्षा और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में करने का फैसला लिया गया था। अब यह लोग पंचायत नगरीय निकाय के कर्मचारी नहीं शासकीय सेवक कहलाएंगे।
-यह आदेश राज्यपाल के नाम से अपर सचिव अजय कुमार शर्मा के हस्ताक्षर से जारी हुए हैं।


 


यह भी है खास
-प्राथमिक शिक्षक का जिला स्तरीय संवर्ग होगा।
-माध्यमिक शिक्षक का संवर्ग संभागीय स्तर होगा।
-उच्च माध्यमिक शिक्षक का संवर्ग राज्य स्तरीय होगा।


भोपाल। मध्‍यप्रदेश्‍ा सरकार ने राज्‍य शिक्षा सेवा के तहत शिक्षकों के सेवा भर्ती नियम जारी कर दिए। इसी के साथ अध्‍यापकों का स्‍कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग में संविलियन का रास्‍ता साफ हो गया है।

इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके तहत उच्‍चतर माध्‍यमिक, माध्‍यमिक और प्राथमिक शिक्षक तीन संवर्ग रहेंगे। इससे करीब 2 लाख 35 हजार अध्‍यापकों को फायदा होगा

कांग्रेस अभी भी क्षत्रपों में बंटी हुई है और मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसे लेकर अंदरूनी घमासान मचा हुआ है. ऐसा लग रहा है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस में अभी कुछ ठीक नहीं चल रहा है

मध्य प्रदेश में कांग्रेस अध्य्क्ष कमलनाथ की तीन   महीने की  लंबी कवायद  सैकड़ों की तादाद में कमेटियों की जमावट, पांच हजार से ज्यादा छोटे बड़े नेताओं को काम पर लगाने के बावजूद ऐसा लग रहा है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस में अभी कुछ ठीक नहीं चल रहा है. कांग्रेस अभी भी क्षत्रपों में बंटी हुई है और मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसे लेकर अंदरूनी घमासान मचा हुआ है.कमलनाथ और सिंधिया समर्थक मुख्य मंत्री को लेकर पोस्टर वार चला रहे हैं. वहीं अजयसिंह समर्थकों ने तो प्रभारी महासचिव के साथ धक्का मुकी कर उनका कुर्ता तक फाड़ दिया है. सभी गुटों के बीच समन्वय के लिए निकले दिग्विजय सिंह के प्रयास धाराशाही होते दिख रहे हैं.रेस से बाहर बता रहे
पार्टी हाईकमान मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं करने की अपनी परंपरा दुहाई दे रहा है. कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, सिंधिया खुद को इस रेस से बाहर बताते हुए नही थक रहे हैं, लेकिन पार्टी नेता समर्थक आपस में भिड़ रहे हैं. मध्यप्रदेश में पिछले 15 साल से कांग्रेस सत्ता से बेदखल है. सिर्फ 57 सीटें विधानसभा की और मात्र तीन सीटें लोकसभा की इस रेकार्ड पर कांग्रेस चुनाव मैदान में है. यानि चुनाव जीतने का कोई ठोस पता ठिकाना अभी नदारद है, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसे लेकर संघर्ष चरम पर है.पहली लड़ाई भाजपा को हराना
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि जो भी घटनाक्रम चल रहा है वह कांग्रेस को एक सूत्र में नहीं बांध सकता. पहली लड़ाई भाजपा को हराने की है. लेकिन देखने में आ रहा है कि जहां-जहां पार्टी नेता दौरे कर रहे हैं, वहां-वहां समर्थकों का हुजूम मुख्यमंत्री को लेकर नारेबाजी कर रहा है.देखने में आ रहा है कि जहां-जहां पार्टी नेता दौरे कर रहे हैं, वहां-वहां समर्थकों का हुजूम मुख्यमंत्री को लेकर नारेबाजी कर रहा हैसारा खेल टिकटों का
दरअसल सारा खेल टिकटों को लेकर है. हर गुट हर नेता अपने समर्थक को टिकट का भरोसा दे रहा है. दिग्विजय सिंह समन्वय के लिए जहां भी बैठकें कर रहे हैं, वहां उन्हें चुनावी टिकट के दावेदारों से जूझ रहे हैं. वे समन्वय के लिए किसी को क्षेत्र बदलने की बात कह रहे हैं, तो किसी को दूसरी जगह से टिकट लेने के बात कह रहे हैं.सिंधिया चुनाव अभियान समिति की बैठकों के लिए दौरे कर रहे हैं. वे जहां भी जा रहे हैं वहां आसपास के क्षेत्र के नेता टिकटों के लिए भीड़ लगा रहे हैं. कमलनाथ नेताओं को आगाह कर रहे हैं कि वे टिकट की दौड़ में भोपाल तक नहीं आए. बावजूद इसके सिंह, सिंधिया और कमलनाथ समर्थकों को उम्मीद है कि टिकट तो उनकी झोली में ही होगा.कमलनाथ नेताओं को आगाह कर रहे हैं कि वे टिकट की दौड़ में भोपाल तक नहीं आए. बावजूद इसके सिंह, सिंधिया और कमलनाथ समर्थकों को उम्मीद है कि टिकट तो उनकी झोली में ही होगादो सर्वे टीम मैदान में
हालांकि मध्यप्रदेश में दो सर्वे टीम मैदान पकड़ चुकी हैं. गुजरात और कर्नाटक के नेताओं को काम पर लगाया गया है. वे एक-एक विधानसभा का सर्वे कर सीधे हाइकमान को रिपोर्ट कर रहे हैं. करीब 80 सीटों पर कांग्रेस के पास जीतने वाले उम्मीदवारी का टोटा है. पिछले पांच चुनाव से यह हारी हुई सीटे हैं.कोषाध्यक्ष के साथ भी झूमा–झटकी
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि पार्टी अध्यक्ष कमलनाथ किसी कार्पोरेट कंपनी के सीइओ की तरह संगठन को मुस्तैद कर रहे हैं. कई कमेटियां, प्रकोष्ठों की लंबी चौड़ी फौज उन्होंने खड़ी कर संगठन में जान फूंक दी है. लेकिन कांग्रेस के अनुशासन का वे कोई तोड़ नहीं ढूंढ़ पा रहे हैं. खेमे में बंटे कांग्रेसी भिड़ रहे हैं.पार्टी के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ही नहीं, पार्टी के कोषाध्यक्ष, समेत कई नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं की भिडंत हो रही है. लेकिन किसी पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. वजह साफ है कांग्रेस इस दौर में है कि वह अपने कार्यकर्ताओं को खोना नहीं चाह

मध्यप्रदेश सरकार ने वरिष्ठ एवं बुजुर्ग पत्रकारों को दी जाने वाली श्रद्धानिधि 6,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रतिमाह करने तथा इसके लिये आयु सीमा 62 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही प्रदेश के गैर अधिमान्य पत्रकारों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल कर इनकी प्रीमियम राशि का 50 प्रतिशत शासन द्वारा दिये जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रि-परिषद की बैठक में ये निर्णय लिये गये।  जनसम्पर्क मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद यहां संवाददाताओं को देते हुए बताया, ‘‘मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के वरिष्ठ एवं बुजुर्ग पत्रकारों की श्रद्धा-निधि 6,000 रूपये प्रति-माह से बढ़ाकर 7,000 रूपये प्रति माह करने का निर्णय लिया गया है।   इसके साथ ही श्रद्धा-निधि के लिये आयु सीमा 62 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष करने का तथा प्रदेश के गैर अधिमान्य पत्रकारों को बीमा योजना में शामिल कर प्रीमियम राशि का 50 प्रतिशत शासन द्वारा दिये जाने का भी निर्णय लिया गया है।' ये भी पढ़ें: नैनीताल HC ने बीजेपी MLA के खिलाफ दायर याचिका को किया खारिज, याचिकाकर्ता पर लगाया 1 लाख का जुर्माना   उन्होने बताया कि मंत्रि-परिषद ने प्याज और लहसुन की फसल के लिये उद्यानिकी प्रोत्साहन योजना लागू करने का निर्णय लिया है। योजना के अंतर्गत प्याज के लिये 400 रुपये प्रति क्विंटल तथा लहसुन के लिये 800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि बोनी के सत्यापित रकबे तथा निर्धारित औसत उत्पादकता की सीमा को ध्यान में रखते हुए किसान के खाते में सीधे जमा करवायी जाएगी।    मिश्रा ने बताया कि मंत्रि-परिषद ने प्राईस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत रबी वर्ष 2017-18 में चना, मसूर और सरसों की खरीदी के लिये म.प्र राज्य सहकारी विपणन संघ और नागरिक आपूर्ति निगम को राज्य शासन द्वारा स्वीकृत नि:शुल्क बैंक गारंटी की अवधि 2 माह से बढ़ाकर 6 माह करने का निर्णय लिया है।    उन्होने बताया कि इसके साथ ही बैठक में सागर जिले की तहसील खुरई में कृषि महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत आरंभ होने वाले इस महाविद्यालय में वर्ष 2018-19 के शैक्षणिक सत्र में 60 छात्र-छात्राओं के अध्ययन की सुविधा रहेगी।    उन्होने बताया कि सागर जिले की रहली तहसील में उद्यानिकी महाविद्यालय खोलने के निर्णय को भी मंत्रि-परिषद ने अनुमोदित किया। 

मध्यप्रदेश सरकार ने वरिष्ठ एवं बुजुर्ग पत्रकारों को दी जाने वाली श्रद्धानिधि 6,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रतिमाह करने तथा इसके लिये आयु सीमा 62 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष करने का निर्णय लिया है।

इसके साथ ही प्रदेश के गैर अधिमान्य पत्रकारों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल कर इनकी प्रीमियम राशि का 50 प्रतिशत शासन द्वारा दिये जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रि-परिषद की बैठक में ये निर्णय लिये गये। 

जनसंपर्क मंत्री  डॉ  नरोत्तम मिश्रा  ने मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद यहां संवाददाताओं को देते हुए बताया, ‘‘मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के वरिष्ठ एवं बुजुर्ग पत्रकारों की श्रद्धा-निधि 6,000 रूपये प्रति-माह से बढ़ाकर 7,000 रूपये प्रति माह करने का निर्णय लिया गया है।

 

इसके साथ ही श्रद्धा-निधि के लिये आयु सीमा 62 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष करने का तथा प्रदेश के गैर अधिमान्य पत्रकारों को बीमा योजना में शामिल कर प्रीमियम राशि का 50 प्रतिशत शासन द्वारा दिये जाने का भी निर्णय लिया गया है।'

भोपाल। इस चुनावी साल में पक्ष और विपक्ष जनता के सामने खुद को बेहतर साबित करने के लिए संपूर्ण प्रयास कर रही है। इसके चलते लगातार एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर भी बढ़ता जा रहा है। चुनावी साल में जनता को प्रभावित करने शिवराज सिंह चौहान द्वारा जनआर्शीवाद यात्रा निकाली जा रही है। जिस पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने विवादास्पद बयान दिया है।


कमलनाथ ने कहा कि हम शिवराज की तरह करोड़ों ख़र्च कर कोई भी यात्रा या आशीर्वाद यात्रा नहीं निकालना चाहते है... शिवराज सिंह ने चुनावी वर्ष में यात्राओं के ज़रिये प्रदेश के सरकारी ख़ज़ाने को जमकर लुटा, प्रदेश को क़र्ज़ के दलदल में धकेलते जा रहे है...
हमें जनता पर विश्वास है, वो चुनावी वर्ष में इस तरह गुमराह करने वाली भाजपा की यात्राओं से प्रभावित होने वाली नहीं है और वेसे भी जिन्हें जनता का आशीर्वाद प्राप्त होता है, उन्हें आशीर्वाद यात्रा निकालने की आवश्यकता नहीं।


उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि इस बार जनता का आशीर्वाद हमारे साथ है, इसलिये हमें शिवराज की तरह यात्रा निकालने की आवश्यकता नहीं... जनता का निरंतर प्रेम-स्नेह हमें मिल रहा है, कुशासन से त्रस्त जनता ख़ुद हमें समर्थन देकर इस भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेकने के लिये समर्थन दे रही है, उनका पूरा आशीर्वाद हमारे साथ है।


हम अपनी बात जनता के बीच साधारण तरीक़े से जाकर पहुँचायेगें न शिवराज की तरह करोड़ों का रथ बनवाकर और ना करोड़ों ख़र्च कर।


इसके पहले भी कमलनाथ ने सीएम शिवराज सिंह को नसीहत दी थी। क्योंकि चुनावी तैयारियों को लेकर जहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद प्रदेश का मर्चा संभालने के लिए राजधानी भोपाल में वॉर रूम तैयार करने में जुट गए हैं, वहीं इस पर तंज कसते हुए प्रदेश के विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष कमल नाथ ने शाह की सक्रीयता पर बयान देते हुए कहा है कि, विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लिए सीएम शिवराज को राजभवन में घर बनाकर दे देना चाहिए, ताकि शाह आसानी से प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन और मुख्यमंत्री को बीजेपी की रणनीति से अवगत करा सकें।


भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 से पहले सोमवार को सीएम शिवराज की कैबिनेट बैठक हुई। बैठक में सीएम शिवराज ने पत्रकारों की श्रद्धानिधि और कई अन्य प्रस्तावों पर चर्चा की। इस दौरान सीएम शिवराज ने 14 अगस्त से शहीदों के सम्मान का भी निर्णय लिया। इसमें 350 गांवों के शहीदों को सम्मानित किया जाएगा।


ये हैं कैबिनेट के अहम फैसले :
- पत्रकारों की श्रद्धानिधि बढ़ाने और आयु सीमा 60 वर्ष करने का निर्णय
- अब 7 हजार रुपये मिलेगी श्रद्धनिधि
- गैर अधिमान्य पत्रकारों का भी स्वास्थ्य बीमा करायेगी सरकार
- 50 प्रतिशत प्रीमियम सरकार जमा करेगी 
- 4 अगस्त को पूरे प्रदेश में स्व रोजगार मेले में 280000 युवाओं को दिया जाएगा रोजगार
- चना मसूर और सरसों की खरीदी के समय पर भुगतान के लिए गारंटी देने का निर्णय
- किशोरी बालिका योजना सभी 51 जिलों में
- सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल नियम 2018 को केबिनेट की मंजूरी
- 14 augast को शहीद सम्मान करने cm मुरैना जाएंगे
- 350 गावों में शहीदों का मंत्री करेंगे सम्मान
- शहीदों के परिवारों से मिलेंगे
- दाडिक अधिकारी की नियुक्ति का प्रस्ताव CM ने रोका


-नगरीय विकास की TOD पॉलिसी को मंजूरी
- शिवपुरी की पंचायत मगरोनी को नगर परिषद का दर्जा दिया गया
- किशोरी बालिका योजना पूरे प्रदेश में लागू होगी, 209 करोड़ होंगे खर्च
- सागर के रहली में उद्यानिकी कॉलेज व खुरई में कृषि कॉलेज खुलेगा
- अन्य पिछड़ा वर्ग में सोंधिया राजपूत जाति को दिया नया क्रमांक
- खेरवा जाति को सूची से विलोपित कर अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया
- जिलों में दांडिक कार्यालय की स्थापना का प्रस्ताव रद्द
- भोपाल की सीबीडी परियोजना को लेकर मंत्री समिति की अनुशंसा को भी नहीं मिल पाई मंजूरी


4 अगस्त को प्रदेशभर में स्वरोजगार मेला


जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुएबताया कि सरकार 4 अगस्त को प्रदेशभर में स्वरोजगार मेलों का आयोजन करेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहन खुद बुधनी में होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान 1 दिन में 2 लाख 80 हजार युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। सरकार ने लहसुन और प्याज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का फैसला किया है। इसके अलावा सरकार प्याज, लहसुन उत्पादक किसानों को 800 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि बांटेगी।


9 अगस्त को आदिवासी दिवस


केबिनेट बैठक में सरकार ने 9 अगस्त को आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय लिया है। 9 अगस्त को 22 जिलों में अवकाश रहेगा। इसके अलावा 14 अगस्त को शहीदों की शहादत के सम्मान में पूरे प्रदेश में यात्रा निकाली जाएगी। मीटिंग के दौरान नगरीय विकास मंत्री माया सिंह और प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पुरस्कार दिए।


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