दूषित पानी से आधा दर्जन आदिवासी आईसीयू में,लगभग पूरी बस्ती अस्पताल में
पीएचई और स्वास्थ्य अमला बेपरवाह
शिवपुरी
इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण  क्या होगा कि तमाम दावों के बाद आज भी आदिवासियों को पीने का स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा जी हां गिरमोरा की सहरिया  बस्ती में हैण्डपम्प के दूषित पानी से आंत्रशोथ फैल जाने के चलते आधा सैंकड़ा से अधिक आदिवासी परिवार प्रभावित हुए हैं। उल्टी और दस्त की शिकायत के चलते इन आदिवासियों को गम्भीर हालत में अल सुबह तक  अस्पताल लाया जाता रहा मगर यहाँ भी हालात काबू में नहीं हैं। आधा दर्जन आदिवासियों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इस पूरे मामले में पीएचई और स्वास्थ्य विभाग की अतिशय लापरवाही सामने आ रही है। उल्टी दस्त की शिकायत तीन दिन पूर्व से शुरू हो गई थी तब से अब स्वास्थ्य विभाग यदि संजीदा होता तो हालात इस हद तक न बिगड़ते। सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन एवं उनकी युवाओं की पूरी टीम रात भर सहायता में लगे रहे 
ग्राम गिरमौरा के रामदास आदिवासी ने बताया कि आदिवासी बस्ती में जो हैण्डपम्प लगा हुआ है उस हैण्डपम्प के इर्द गिर्द कच्ची भूमि होने और प्लेटफॉर्म टूटा होने के चलते गंदगी युक्त बारिश का पानी पेयजल के रूप में हैण्डपम्प निकल रहा था जिसकी शिकायत पिछले 4-5 दिन से आदिवासी परिवारों द्वारा की जा रही थी मगर पीएचई द्वारा इस ओर कोई ध्यान न दिया जाने के चलते बीती रात आदिवासी बस्ती के तमाम परिवार उल्टी दस्त के प्रकोप की जकड़ में आ गए। दूषित पानी से आंत्रशोथ फैल गया और इस बस्ती में अफरा तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। कल रात हालात ये बने कि आदिवासी परिवारों के इन सदस्यों को जैसे तैसे आदिवासी समुदाय के लोग ही जिला अस्पताल और आसपास के प्राइवेट अस्पतालों में लेकर पहुंचे। उल्टी दस्त से परेशान इन आदिवासियों में कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिला अस्पताल में जिन आदिवासियों को भर्ती कराया गया, उनमें कुपाती पत्नि रामकिशन उम्र 40 वर्ष, शनि पुत्र रामकिशन उम्र 10 वर्ष, रामेती पत्नि लाखन 25 वर्ष, शकुन पत्नि हरिओम आदिवासी, अंगूरी पत्नि अमरसिंह 25 साल और राधा पत्नि रामहेत उम्र 30 साल की हालत गम्भीर होने के चलते इन सभी 6 लोगों को आईसीयू में भर्ती कराए गए हैं। इनके अलावा जो अन्य आदिवासी आंत्रशोथ की जकड़ में आकर अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं उनमें वती आदिवासी पत्नि रामदयाल उम्र 50 साल लता पुत्री केशव उम्र 19 साल बाबू आदिवासी पुत्र अमरचंद्र उम्र 40 साल, लाखन पुत्र हल्के आदिवासी उम्र 20 साल, देवसिंह पुत्र जीवनलाल उम्र 15 साल, नखराली पुत्री किशन 5 साल, रानी पुत्र किशन 10 साल, रामकुंवर पत्नि विशुनलाल 60 साल, रणवीर पुत्र संजय आदिवासी 10 साल, मीना 16 साल, फूलसिंह पुत्र बलवीर 12 वर्ष, अजय पुत्र मस्तराम 17 साल जिला अस्पताल में उपचाररत हैं इसके अलावा कई आदिवासी परिवार प्राइवेट चिकित्सकों से भी उपचार ले रहे हैं। इस गांव में आंत्रशोथ की जानकारी मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और पीएचई द्वारा कोई एहतियाती उपाय तत्काल नहीं किए जाने की जानकारी जब प्रशासन को लगी तो प्रशासन के आला अधिकारियों के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की एक टीम आज टोंगरा के ग्राम गिरमौरा में स्वास्थ्य कैम्प के लिए पहुंची और वहाँ मौजूद अन्य पीडि़तों का उपचार शुरू किया गया, ग्रामीणों का कहना है कि उल्टी दस्त की शुरूआत तीन दिन पहले से से ही हो गई थी मगर सामूहिक रूप से आंत्रशोथ कल रात से फैला और देखते ही देखते दर्जनों परिवार इसकी चपेट में आते चले गए। गाँव में अभी भी पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था पीएचई द्वारा नहीं की जा सकी है। आज जिला अस्पताल में पीएचई के अधिकारी भी आदिवासियों से चर्चारत देखे गए। सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन ने मुख्यमंत्री से मांग कि है कि सरकारी अमले को गांवों में तैनात करें और संक्रामक बीमारियों से बचाब के लिए इंतजामात करें

जबलपुर. देश में नौकरियों का जैसे अकाल पड़ गया है। करोड़ों युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। नौकरियों की कितनी कमी है और युवाओं को इसकी कितनी जरूरत है, हाल ही एक नियुक्ति के लिए यह तथ्य सामने भी आ गया। चपरासी के पद के लिए हो रही इस नियुक्ति में हजारों पीएचडी युवा भी शामिल हुए। इससे साफ पता चल रहा है कि युवाओं को काम-धंधे की कितनी जरूरत है, हर कोई व्यवसाय नहीं कर सकता और इसके लिए उसके पास पूंजी भी नहीं रहती सो केवल नौकरी से ही आस बंधी हुई है।



ऐसे अनेक युवाओं की उम्मीद कुछ हद तक पूरी हो सकती है। मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियां निकली हैं। अच्छी बात तो यह है कि ये कोई सामान्य पदों के लिए नहीं हैं। ये ऐसी नौकरी है जिसमें सेलेरी भी बहुत अच्छी है और पगार के साथ ही मान-सम्मान भी बहुत मिलता है।



सिविल जज के 140 पदों पर होगी भर्ती
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सिविल जज के 140 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। विधि में स्नातक कर चुके उम्मीदवार इनके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आयुसीमा 21 से 35 साल तक की है। आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तारीख 4 सितंबर 2018 है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की वेबसाइट पर भी यह जानकारी देखी जा सकती है। इन पदों पर आवेदन के लिए उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या कॉलेज से कानून की डिग्री होना चाहिए।



आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों और दिव्यांगों के लिए आयु सीमा में 3 साल की छूट
पद का वेतन 27,700 से 44,700 रुपए है। इसके साथ महंगाई भत्ते सहित अन्य भत्ते भी दिए जाएंगे। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों और दिव्यांगों के लिए आयु सीमा में 3 साल की छूट प्रदान की गई है। आवेदन के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 1000 रुपए और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 600 रुपए फीस देनी होगी। परीक्षा की तारीख अभी निर्धारित नहीं है।




भोपाल  एक साल में हुए नगरीय निकाय और विधानसभा उपचुनाव में भाजपा पीछे रही। चुनावी साल में भाजपा को हुआ यह नुकसान बताता है कि तीन बार सत्ता में रहने के कारण उसे एंटी इनकमबेंसी का भी सामना निश्चित तौर पर करना पड़ रहा है। 

2018 में भारतीय जनता पार्टी को तीन बार बड़ा झटका लगा है। साल की शुरआत में ही प्रदेश की 19 नगरीय निकाय में चुनाव हुए थे जिनमें से भाजपा को 9 पर ही विजय मिल पाई थी। कांग्रेस भी 9 निकाय जीती, वहीं एक निकाय पर निर्दलीय ने कब्जा किया था। इसके बाद चित्रकूट, कोलारस और मुंगावली विधानसभा उपचुनावों में भी भाजपा को तगड़ा झटका लगा। ये तीनों उपचुनाव भाजपा हार गई थी। 

तीसरी बार निकाय के वार्ड उपचुनाव में भी परिणाम भाजपा के अनुकूल नहीं रहे। बेलसिंह भूरिया विधायक बेलसिंह भूरिया अपनी सरदारपुर परिषषद को नहीं बचा पाए। यहीं राजग़़ढ परिषषद में भी भाजपा हार गई। कालूसिंह ठाकुर अपनी विधानसभा क्षेत्र की धरमपुरी और धामनौद दोनों परिषषद में हार मिली। रंजना बघेल मनावर विधायक भी अपनी परिषषद में भाजपा को जिताने में असफल रहीं। नीना वर्मा दिग्गज नेता विक्रम वर्मा की पत्नी नीना वर्मा की धार नगर पालिका परिषषद में भी कांग्रेस का कब्जा हो गया। 

निकायों के अलावा तीन नगर परिषषद में मौजूदा अध्यक्ष को पद से वापस बुलाए जाने का भी चुनाव ([खाली कुर्सी--भरी कुर्सी)] भी जनवरी में ही हुआ था। इसमें भी भाजपा पीछे रही। दीपक जोशी हाटपीपल्या विधानसभा क्षेत्र की करनावद नगर परिषषद अध्यक्ष कांताबाई पाटीदार भाजपा की थीं। जिन्हें दीपक जोशी पद पर बरकरार नहीं रख पाए। हजारी लाल दांगी खिलचीपुर विधायक दांगी अपनी नगर परिषषद को नहीं बचा पाए। वहां के अध्यक्ष दीपक नागर को हार का सामना करना पड़ा था। ठाकुरदास नागवंशी पिपरिया विधायक नागवंशी पचमड़ी केंट के चुनाव में पार्टी समर्थित पाषर्षद और अध्यक्ष को नहीं जिता पाए। रामलाल रौतेल अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र की जैतहरी परिषषद पर विधायक रौतेल भाजपा को नहीं जिता पाए। यहां निर्दलीय की जीत हुई। 

स्थानीय विधायक के प्रति एंटी-इनकमबेंसी 
जाहिर है जहां भाजपा का जनाधार घटा है वे ज्यादातर क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य हैं। स्वाभाविक है कि कहीं न कहीं स्थानीय विधायक के प्रति एंटी-इनकमबेंसी भी इस हार के लिए जिम्मेदार है। चौंकाने वाली बात ये है कि इन क्षेत्रों में जीत के लिए कांग्रेस ने कोई खास मेहनत नहीं की थी। समग्र आकलन जरूरी पिछले पांच साल में हुए उपचुनाव में भी हमें मिलने वाले मत प्रतिशत में वृद्धि हुई है। 

हमारे जनाधार का आकलन करते समय अगर स्थानीय निकाय के चुनाव को भी आधार बनाना है तो प्रदेश के सभी नगरनिगमों, सभी नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों का विश्लेषषण जरूरी है। समग्र आकलन पर पाएंगे कि हमारा जनाधार 2013 के बाद भी लगातार ब़़ढा है।- डॉ. दीपक विजयवर्गीय, मुख्य प्रवक्ता, मप्र भाजपा


भोपाल। मध्यप्रदेश सहित तीन राज्यों में होने वाले चुनावों के ठीक बाद लोकसभा के चुनाव होने हैं। लोकसभा के इन 2019 में होने वाले चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के डीए में वृद्धि कर दी है।


इसी के चलते एक दिन पहले आर्थिक मामलों की केंद्रीय समिति ने केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्‍ता (डीए) दो फीसदी बढ़ाने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी थी।


वहीं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित ग्वालियर, जबलपुर सहित विभिन्न जिलों में रहने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों में इसे लेकर कुछ हद तक खुशी का माहौल है।


केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्‍ता बढ़ना हमारे लिए कुछ हद तक खुशी की बात जरूर है। लेकिन जिस स्थिति में महंगाई बढ़ रही है उसके हिसाब से ये कम है। फिर भी सरकार की ओर से लिया गया फैसला कहीं न कहीं अच्छा ही है।
- एमके शर्मा, केंद्र सरकार के कर्मचारी

लगातार बढ़ रही महंगाई में केवल दो फीसदी डीए उंट के मुंह में जीरे के समान है। सरकार को इसे तकरीबन 5 से 6 फीसदी बढ़ाना चाहिए था।
- जीके शर्मा,केंद्र सरकार के कर्मचारी


सरकार द्वारा डीए बढ़ाया जाना अच्छा निर्णय है। इसका लाभ हर केंद्रीय कर्मचारी को मिलेगा। लेकिन कई कर्मचारियों के हिसाब से ये काफी कम है।
- रेखा मिश्रा, केंद्र सरकार के कर्मचारी


ये है मामला...
दरअसल केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्‍ता (डीए) दो फीसदी बढ़ाने के प्रस्‍ताव को मंजूरी के चलते अब यह 7 फीसदी से बढ़कर 9 फीसदी हो गया है।


इसके चलते अब केंद्रीय कर्मचारियों को प्रति माह दो फीसदी अधिक डीए मिलेगा। बताया जा रहा है कि केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में डीए बढ़ने से प्रति माह 360 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक की बढ़ोतरी होगी।


वहीं राजनीति के कई जानकारों का यह भी मानना है कि चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से सरकारी कर्मचारियों को अपने पाले में लाने के चलते सरकार की ओर से कार्य शुरू कर दिया गया है। उसमें भी ये सारे काम लोकसभा के चुनावों को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं।


वहीं डीए की गणना को लेकर पूर्व केंद्रीय कर्मचारी एमएल वर्मा का कहना है कि डीए बढ़ना केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अच्‍छी खबर है। ऐसे में डीए अब फिर छह माह बाद रिवाइज किया जाएगा। इसकी घोषणा मार्च 2019 में संभव है।


उन्होंने बताया कि दो फीसदी डीए बढ़ने के आधार पर 360 रुपए की बढ़ोतरी न्‍यूनतम है, लेकिन जो लोग प्रमोशन पा चुके हैं उनकी बेसिक पे भी बढ़ चुकी है। उनकी डीए राशि अलग होगी। जैसे यदि किसी की सर्विस लेंथ 40 साल है तो माना जाता है कि उसे पूरी नौकरी में 40 इंक्रीमेंट मिले होंगे।


इस आधार पर उनका डीए उनकी मौजूदा बेसिक सैलरी के आधार बनेगा। इस दौरान पे कमिशन भी बदल जाता है तो बेसिक सैलरी भी बढ़ जाती है। इसके अलावा जिन कर्मचारियों की सर्विस 5 साल की हो चुकी है उनका बेसिक करीब 20300 रुपए होगा। इस आधार पर उन्‍हें 406 रुपए होगा। ऐसे में कर्मचारी बेसिक पे के आधार पर अपने डीए की गणना खुद भी कर सकते हैं।


ऐसे समझें लेवल न्‍यूनतम बेसिक पे बढ़ोतरी (2% डीए वृद्धि के साथ-रु. में)...


लेवल — न्‍यूनतम बेसिक पे (रु. में) — बढ़ोतरी (2% डीए वृद्धि के साथ) 
लेवल 1 — 18000 — 360रु. 
लेवल 2 — 19900 — 398रु. 
लेवल 3 — 21700 — 434 रु.
लेवल 4 — 25500 — 510 रु.
लेवल 5 — 29200 — 584 रु.
लेवल 6 — 35400 — 708 रु.
लेवल 7 — 44900 — 898 रु.
लेवल 8 — 47600 — 952 रु.
लेवल 9 — 53100 — 1062 रु.
लेवल 10 — 56100 — 1122 रु.
लेवल 11 — 67700 — 1354 रु.
लेवल 12 — 78800 — 1576 रु.
लेवल 13 — 118500 — 2370 रु.
लेवल 13ए — 131100 — 2622 रु.
लेवल 14 — 144200 — 2884 रु.
लेवल 15 — 182200 — 3644 रु.
लेवल 16 — 205400 — 4108रु.
लेवल 17 — 225000 — 4500 रु.
लेवल 18 — 250000 — 5000 रु.


भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के दिग्गज नेता बाबूलाल गौर शुक्रवार को फिर सुर्खियों में आ गए, जब वे कांग्रेस के एक सम्मेलन में शामिल होने पहुंच गए। चुनावी सरगर्मियों के बीच बीजेपी के दिग्गज नेता का कांग्रेस खेमे में जाने को काफी अहम माना जा रहा है। इसके साथ ही कांग्रेस नेता कमलनाथ की तारीफ करके उन्होंने सियासत भी गर्मा दी है। बीजेपी खेमे में अंदरुनी बातें शुरू हो गई, वहीं उनकी बहू ने भी कहा है कि बाबूलालजी को ऐसा नहीं करना था।


अपने ससुर पर दिया बहू ने बयान
इधर, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर ने अपने ससुर के कांग्रेस के कार्यक्रम में शिरकत करने पर बड़ा बयान दिया है। पूर्व महापौर कृष्णा गौर ने कहा कि बाबूलालजी ने यह गलत किया है। महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ पर सिखों के नरसंहार के मामले दर्ज हैं। सिखों के नरसंहार के आरोपी हैं कमलनाथजी। ऐसे में उनकी तारीफ करना गलत है।


 




कृष्णा गौर ने यह भी कहा कि गौर साहब वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें पार्टी लाइन से हटकर कोई काम नहीं करना चाहिए। कृष्णा गौर अपने निवास पर मीडिया के सवालों के जवाब दे रही थीं।


साइडलाइन हो चुके हैं गौर
गौरतलब है कि गोविंदपुरा विधानसभा सीट से विधायक बाबूलाल गौर अक्सर बड़बोलेपन के कारण विवादों में रहते हैं। वे पिछले कुछ समय से पार्टी से किनारे कर लिए गए हैं। क्योंकि उस समय 80 की उम्र पार करने वाले दो मंत्रियों को साइडलाइन कर दिया गया था।


गौर की उत्तराधिकारी हो सकती हैं कृष्णा
भोपाल की गोविंदपुरा सीट हाईप्रोफाइल सीट मानी जाती है। इस पर कई दावेदारों के बीच मारामारी रहती है। यहां से बाबूलाल गौर विधायक हैं। मंत्री पद खो चुके हैं, लेकिन गौर आज भी चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। इसके अलावा उनकी बहू कृष्णागौर भी दावेदारों में शामिल हैं। उन्हें ही बाबूलाल गौर का उत्तराधिकारी माना जाता है। इससे पहले कृष्णागौर के समर्थन में सोशल मीडिया पर भी जोर-शोर से कैंपेन चल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इसी सीट से महापौर आलोक शर्मा भी टिकट की दावेदारी कर सकते हैं। हालांकि इस सीट के लिए बातों ही बातों में प्रचार चल रहा है।




भोपाल। SC/ST ACT में संशोधन का विरोध पूरे प्रदेश में फैल गया है। अशोकनगर में सिंधिया का घेराव, खरगोन में सांसद ​दिलीप गुप्ता से सवाल, मुरैना में भाजपा सांसद प्रभात झा को चूड़ियां के बाद गुना में विरोध प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया जब प्रदर्शनकारियों पर कांग्रेसी नेताओं ने हमला कर दिया। गुटीय संघर्ष को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस के साए में सांसद सिंधिया की सभा आयोजित हुई। कुछ समय के लिए बाजार बंद हो गया। इधर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मैराथन रेस में भाग लिया और अपनी फिटनेस प्रमाणित की। 

गुना के आरोन में प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पोस्टर फाड़ दिए। पोस्टर फाड़े जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता भी भड़क गए और उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हमला बोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने भी जवाबी हमला किया। एक वक्त तो स्थिति इतनी नाजुक हो गई, कि पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस तक का सहारा लेना पड़ गया। पुलिस ने इस मामले में कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया है। 

आरोन कस्बे में आयोजित होने वाली मैराथन दौड़ का शुभारंभ करने के लिए मध्यप्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन पहुंचे थे। दोनों नेताओं से पहुंचने से ठीक 15 मिनिट पहले एसटी/एससी एक्ट का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी सड़क पर उतर आए और रास्ते में लगे कांग्रेस नेताओं के र्होडिंग-बैनर फाड़ने लगे। इसी के बाद सारा हंगामा हुआ। बाद में पुलिस के साए में कांग्रेस की यहां सभा हो सकी


शिवपुरी

पूर्व जिला पंचायत सदस्य विभा रघुवंशी ने पढ़ाया बच्चों को शिक्षा का पाठ

मिल बांचे कार्यक्रम में पहुंची विभा रघुवंशी तो स्कूल में पंखे की कमी को देखते हुए उनकी तरफ नौ  पंखे वितरण का आश्वासन दिया!

पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाली पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी की पत्नी श्री मति विभा रघुवंशी ने शासकीय  प्राथमिक माध्यमिक विद्यालय पचावली पहुंचकर मिल बांचे कार्यक्रम में वालंटियर के र तौर पर हिस्सा लिया एवं बच्चों को शिक्षा का नैतिक पाठ पढ़ाया श्रीमती रघुवंशी ने स्कूली बच्चों को स्वयं के स्कूली समय के बारे में भी बताया कि किस तरह उनके समय पर सुविधाएं ना होने के बाद भी शिक्षा ग्रहण की गई! इस दौरान श्रीमती रघुवंशी ने बच्चों को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लागू की गई योजनाएं जो बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बनाई गई है उसके बारे में भी परिचित करवाया श्रीमती रघुवंशी ने पचावली विद्यालय में पहुंचकर मौजूदा स्कूली बच्चों को कॉपी पेन वितरण किए एवं कार्य साला मैं पंखे की कमी को देखते हुए उनके द्वारा 9 पंखे स्कूल में वितरण  करने का अश्वासन स्कूल के प्रधानाध्यापक को दिया गया

भोपाल। मध्यप्रदेश में चुनाव से पहले दमदार नेताओं की किलेबंदी शुरु हो गई है। सत्ताधारी दल बीजेपी हो या विपक्ष में बैठी कांग्रेस, दोनों की निगाहें एक दूसरे के मजबूत स्तंभों को ढहाने में लगी हुई हैं। बीजेपी ने जहां कांग्रेस के दस मजबूत विधायकों की विधानसभा घेरने की रणनीति बनानी शुरु कर दी है, तो वहीं, कांग्रेस भी सीएम सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को उनके विधानसभा क्षेत्र में उलझाने की दिशा में काम कर रही है।


मध्य प्रदेश में चुनावी बिसात लगभग बिछ सी गई है। कांग्रेस और भाजपा अपने-अपने तरह से किलेबंदी भी कर रही है। कांग्रेस और बीजेपी इस बार एक दूसरे के उन नेताओं को पटकनी देने की रणनीति बना रहे हैं, जो चुनावी मैदान में जीत का कई बार परचम लहरा चुके हैं। इसके लिए कांग्रेस ने ऐसे दस दमदार नेताओं को चिन्हित कर उन्हें मैदान में उतारने की तैयारी कर ली है जो बीजेपी के 10 दमदार नेताओं को पटकनी दे सकते हैं।


कांग्रेस के 10 दमदार नेता-


कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष - रामनिवास रावत


वरिष्ठ विधायक - डा. गोविन्द सिंह


वरिष्ठ विधायक - केपी सिहं


वरिष्ठ विधायक - मुकेश नायक


नेता प्रतिपक्ष - अजय सिहं


उपनेता प्रतिपक्ष - बाला बच्चन


वरिष्ठ विधायक - आरिफ अकील


कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष - जीतू पटवारी


विधायक - जयवर्धन सिंह


विधायक - ओमकार मरकाम


कांग्रेस दावा कर रही है कि ये दस चेहरे बीजेपी के दस चेहरों को सियासत की चौसर पर मात दे सकते हैं। जबकि हकीकत ये भी है कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी समस्या इस बात की भी है, कि ये वो चेहरे नहीं हैं, जो राज्य सरकार के मौजूदा मंत्रियों और बीजेपी के नेताओं के सामने दहाड़ कर उनकी हवा खराब करने में सक्षम हो और जो चेहरे इन चेहरों को सामने हैं, जरा उन्हें भी एक नजर आप देख लीजिए।


बीजेपी के 10 दमदार चेहरे-


मुख्यंत्री - शिवराज सिंह चौहान


वरिष्ठ मंत्री - उमाशंकर गुप्ता


गृहमंत्री - भूपेन्द्र सिंह


हेल्थ मिनिस्टर - रुस्तम सिंह


उच्च शिक्षा मंत्री - जयभान सिंह पवैया


स्कूल शिक्षा - विजय शाह


जनसंपर्क मंत्री- नरोत्तम मिश्र


उद्योग मंत्री - राजेन्द्र शु्क्ला


शिक्षा राज्यमंत्री - दीपक जोशी


पंचायत मंत्री - गोपाल भार्गव


ये बीजेपी के वो 10 चेहरे हैं जो किसी तारूफ के मोहताज तो हरगिज नहीं हैं और ना ही ऐसे चेहरे हैं जिनके आगे कांग्रेस के 10 दमदार चेहरे टिकते ही नजर आते हों, लेकिन, कहते हैं सियासत की चौसर पर गलतफहमी लंबे समय तक बनी रहती है और जब गलतफहमी इस हद तक हो कि जीत का दावा किया जा सकता हो तो उसका इलाज महज वो फैसला ही है जो जनता करती है।


भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों को कुछ ही महीने शेष हैं। बीजेपी की ओर से मध्य प्रदेश का अगला सीएम का चेहरा भी शिवराज सिंह चौहान ही होंगे। लेकिन, कांग्रेस से सीएम पद का दावेदार कौन है इसपर कांग्रेस के भीतर ही आंतरिक फूट देखने को मिल रही है और ये हम नहीं कह रहे हैं ये कहना है सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान का।


ये स्थिति कांग्रेस की मध्य प्रदेश में है, क्योंकि सूबे में कहीं,'अबकी बार सिंधिया सरकार' सुनने को मिल रहा है तो कहीं 'अब की बार कमलनाथ सरकार' चल रहा है और तो और हद तो तब हो जाती है जब अब की बार 'कांतिलाल भूरिया सरकार' के नारे लगाए जाते हैं। गलफहमी का आलाम ये है कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओं से लेकर आलाकमान तक किसी को पता नहीं है कि उनका मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन है। वहीं, सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि कांग्रेस किसी भी तरह से शिवराज सिंह चौहान को हटाना चाहती है, जिसके लिए कांग्रेस सारी मर्यादाएं पार कर रही हैं।


फिलहाल कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी राजनीति कर रही है और उसके पास जीत का दावा करने के लिए पूरा जनसमर्थन है। वहीं, बीजेपी कांग्रेस पर अब भी किसी भी तरह का मौका नहीं छोड़ रही है और मध्य प्रदेश के चुनावी मैदान से पहले ही मैदान पर हर बाजी में पटखनी दे रही है।


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान   ने  शिक्षक भर्ती में लड़कियों को 50 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि यह शिक्षक भर्ती अगले महीने सितंबर में की जाएगी। 

शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान टीकमगढ़ जिले में पहुंचे थे। यहां उन्होंने पृथ्वीपुर में 21 करोड़ से भी अधिक के निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन किया और जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संबल योजना प्रदेश में गरीबों की जिंदगी बदलने का अभियान है। 

राज्य सरकार ने गरीबों की जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए अपना खजाना खोल दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। सरकार जो कहती है, वह करती है। राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती सरकारों की तरह गरीबी हटाने का सिर्फ नारा ही नहीं दिया है, बल्कि गरीबों के साथ न्याय किया है। 

उन्होंने विकास और जन-कल्याण की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पृथ्वीपुर क्षेत्र में 173 करोड़ रुपये लागत की समूह नल-जल योजना पूरी हो गई है। अब इस योजना से क्षेत्र के सभी 150 गांवों में नल के माध्यम से घर-घर पानी पहुंचाया जाएगा। कहा कि बान-सुजारा सिंचाई परियोजना से बुंदेलखंड के इस अंचल में हरियाली, खुशहाली और समृद्धि आएगी। 

सीएम ने केन-बेतवा परियोजना की चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश के हिस्से के पानी के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार से बातचीत चल रही है। राज्य को अपने हिस्से का पानी मिलेगा, जिससे इस क्षेत्र की सिंचाई की तस्वीर ही बदल जाएगी। 

शिवराज ने कहा कि संबल योजना में गरीब परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए राज्य सरकार हर तरह की सुविधाएं और सहायता मुहैया करवा रही है। उन्होंने इन परिवारों का आह्वान किया कि बच्चों की उच्च शिक्षा के खर्चे की चिंता छोड़ उन्हें खूब पढ़ाएं, आगे बढ़ाएं, पूरी व्यवस्था राज्य सरकार करेगी। 

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