भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तारी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, सुनवाई थोड़ी देर में

नई दिल्‍ली,। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्‍या की साजिश में गिरफ्तार माओवादी कार्यकर्ताओं का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। रोमिला थापर, प्रभात पटनाइक, सतीश देशपांडे, माया दरनाल और एक अन्य व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में सुधा भारद्वाज और गौतम नवलेखा की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्‍वीकार कर ली है और मामले की सुनवाई थोड़ी देर में



सुधा भारद्वाज को गुरुवार को हाईकोर्ट में किया जाएगा पेश
भीमा-कोरेगांव हिंसा के मामले में घर में ही नज़रबंद की गईं मानवाधिकार वकील सुधा भारद्वाज के बारे में हरियाणा में एनआइटी फरीदाबाद की डीसीपी ने बताया कि उन्हें कल यानि गुरुवार को हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा। तब तक वह पुलिस की निगरानी में रहेंगी। कोर्ट में पेश होने तक मीडिया को उनसे बात नहीं करने दी जाएगी, लेकिन वह अपने वकीलों से मुलाकात कर सकती हैं।

अगर सरकार पेश नहीं कर पाई साक्ष्‍य...
जेडीयू नेता पवन वर्मा ने भीमा कोरेगांव हिंसा में वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर कहा कि सरकार को इन माओवादी एक्टिविस्ट के खिलाफ सूबूत पेश करने ही होगें। अगर सरकार मजबूत साक्ष्‍य पेश करने में असफल रहती है, तो यह साफ तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी लिया संज्ञान
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुलिस द्वारा विभिन्न शहरों से पांच वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि इन गिरफ्तारी के संबंध में पुलिस अधिकारियों द्वारा मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन ठीक से नहीं किया गया है, जो उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन कर सकता है।

वरवर राव की बेटी सुजाता ने कहा 
इस बीच गिरफ्तार किए गए एक्टिविस्ट पी वरवर राव की बेटी सुजाता ने कहा, 'सारे घर की तालाशी ली गई। इस दौरान पेपर्स, हार्ड डिस्क और यहां तक की हमारे पुराने फोन भी पुलिस अपने साथ ले गई।'

पीएम मोदी की हत्या की साजिश के सिलसिले में पुणे पुलिस ने मंगलवार को देश के छह राज्यों में छापे मारकर पांच माओवादी कार्यकर्ताओं को पकड़ा है। इन सभी को इसी साल जून में गिरफ्तार किए जा चुके पांच माओवादियों से पूछताछ के आधार पर पकड़ा गया है। पुणे पुलिस के मुताबिक, सभी पर प्रतिबंधित माओवादी संगठन से लिंक होने का आरोप है, जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे सरकार के विरोध में उठने वाली आवाज को दबाने की दमनकारी कार्रवाई बता रहे हैं। रांची से फादर स्टेन स्वामी, हैदराबाद से वामपंथी विचारक और कवि वरवरा राव, फरीदाबाद से सुधा भारद्धाज, ठाणे से अरुण परेरा और दिल्ली से सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलाख की गिरफ्तारी हुई है।

इसी वर्ष एक जनवरी को पुणे के समीप भीमा कोरेगांव दंगे की पूर्व संध्या 31 दिसंबर को शनिवारवाड़ा के बाहर अजा-जजा कार्यकर्ताओं द्वारा यलगार परिषद का आयोजन किया गया था। इसी दौरान मुंबई और कल्याण से कई माओवादी कार्यकर्ता पकड़े गए थे। जिनसे पूछताछ में भीमा कोरेगांव दंगे में माओवादी साजिश का पता चला था।

भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच के दौरान पुणे पुलिस ने इसी साल जून में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इन पर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से संबंध रखने का आरोप है। तब सुधीर धवले, वकील सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राउत, शोमा सेन और रोना विल्सन को मुंबई, नागपुर एवं दिल्ली से गिरफ्तार किया था।