बलात्कारियों के लिए काल बना मध्यप्रदेश का कानून, हैवानियत पर सजा-ए-मौत को लेकर विशेष प्रयत्न

नाबालिग बच्चियों के साथ रेप के मामले में मध्यप्रदेश के आंकड़ें कुछ भी कहते हों लेकिन सरकार इन आंकड़ों को कम करने के लिए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाना चाहती है। इसके लिए वह हर पैंतरा अपना रही है।  नाबालिग बच्चियों के साथ बढ़ते रेप के मामलों को रोकने और राज्य की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए  एमपी सरकार ने नई शुरुआत की है। इसके अंतर्गत नन्ही बच्चियों से अगर बलात्कार होता है और जो अभियोजन पक्ष आरोपी को मौत की सजा दिलाने में सफल होता है सरकार उसे सम्मानित करेगी। यही नहीं अगर अभियोजन पक्ष बलात्कारी को आजीवन कारावास की सजा या अधिकतम सजा दिलाता है तब भी सरकार अभियोजन पक्ष को सम्मानित करने की योजना बना रही है। 

वैसे तो नाबालिग बच्चियों से रेप के आरोपी को मौत की सजा देने का प्रदेश को विशेषाधिकार प्राप्त है और इसके लिए अभियोजन पक्ष भी जी-तोड़ मेहनत कर रहा है। ऐसे में मध्यप्रदेश का रेप के लिए बनाया गया कानून बलात्कारियों के लिए काल बनने लगा है। और इसकी वजह है शिवराज सरकार से मिलने वाले प्वाइंट्स। बता दें कि नाबालिग बच्चियों से रेप के आरोपी को मौत की सजा दिलाने के लिए अभियोजन पक्ष को 1000 प्वाइंट्स, आजीवन कारावास के लिए 500 प्वाइंट्स और ज्यादा से ज्यादा सजा दिलाने के लिए 100-200 प्वाइंट दिए जाएंगे।

मध्यप्रदेश सरकार की इस नई पहल से छोटी उम्र की बच्चियों के साथ हुए दुष्कर्म पर आरोपी को जितनी ज्यादा सजा मिलेगी अभियोजन पक्ष को उतने ही प्वाइंट्स मिलेंगे। जिसका फायदा उन्हें वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में मिलेगा। इसी से आगे चलकर वकीलों का भविष्य भी तय होगा।

आंकड़ों पर गौर करें तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 में देशभर में रेप के कुल 38,947 मामले दर्ज हुए। इनमें से 4,882 मामले सिर्फ मध्यप्रदेश के थे। राज्य में नाबालिग बच्चियों से रेप के कुल 2,479 केस दर्ज हुए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र (2,310 केस) और उत्तर प्रदेश (2,115) का नंबर है।

याद दिला दें कि पिछले 8 महीनों में मध्य प्रदेश की अलग-अलग अदालतें बच्चियों से रेप के मामले में 13 दोषियों को मौत की सजा सुना चुकी हैं। कुछ मामलों में तो रेप के बाद बच्ची की हत्या तक कर दी गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी तक सजा-ए-मौत के एक केस को ही अपनी मंजूरी दी है। इसी को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार ने नई पहल की है, ताकि इन मामलों में पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।