विधायकों को मिला नया काम, चुनाव के लिए खुद ही जुटाना होगा फंड

भोपालः मध्य प्रदेश में साल के अंत तक चुनाव होने हैं। लेकिन चुनावी फंड का अभाव ढेल रही बीजेपी पार्टी के जिम्मेदारों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। प्रदेश में कई जगहों के लिए तो पर्याप्त चंदा इकट्ठा हो गया है, लेकिन अब भी कई एऐसे विधानसभा क्षेत्र बाकि हैं, जहां पार्टी फंड का अभाव है। कुछ दिनों पहले चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि, फंड की कमी को विधायक ही दूर कर सकते हैं। इसलिए इस बार मेदान में उतरने वाले विधायकों पर ही भाजपा ने उनपर टारगेट सेट कर दिया है। इसके अलावा भैठक में घोषणा पत्र में हो रहे विलंब पर भी चिंता व्यक्त की।


अटल जी के निधन से टले काम


बता दें कि, वैसे तो भाजपा अपने दम खम के साथ प्रदेश में चुनावी तैयारियां कर रही है। लेकिन पार्टी के घोषणा पत्र का काम काफी धीमा चल रहा है। दरअसल, भाजपा की घोषणा पत्र समिति को गुज़रे 20 अगस्त तक पूरे प्रदेश में 25 जगह विभिन्न् वर्गों के साथ बैठक कर घोषणा पत्र में शामिल होने वाले मुद्दों पर चर्चा करनी थी, लेकिन अभी तक समिति सिर्फ 14 जगहों पर ही विभिन्न् वर्गों से चर्चा हो पाई है। अब समिति ने 5 सितंबर तक घोषणा पत्र के लिए लोगों के सुझाव लेने का कार्यक्रम तय किया है। समिति के समन्वयक डॉ. दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की वजह से पार्टी के सभी कामकाज रुक गए थे। इसी वजह से घोषणा पत्र समिति का कार्यक्रम भी टल गया। उन्होंने बताया कि 25 सितंबर तक रायशुमारी कर दृष्टि पत्र का ड्राफ्ट तैयार कर प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को सौंप दिया जाएगा।


इस दिन होगी विधायकों की बैठक


चुनावी खर्च के लिए चंदा इकठ्ठा करने का अभियान भी दो दिन के बाद रफ्तार नहीं पकड़ पाया। इसे लेकर अब पार्टी ने नई रणनीति तैयार की है। चुनावी चंदा इकठ्ठा करने के लिए भाजपा ने 6 सितंबर को पूर्व व वर्तमान विधायकों की एक बैठक बुलाई है। सूत्रों के मुताबिक इन्हें धन संग्रह का टारगेट दिया जाएगा। बैठक में इन विधायकों को चंदा इकठ्ठा करने के लिए कूपन भी दिए जाएंगे। भाजपा ने अगस्त में हर विस से चंदा इकठ्ठा करने का अभियान शुरू किया था।