दूषित पानी से आधा दर्जन आदिवासी आईसीयू में,लगभग पूरी बस्ती अस्पताल में पीएचई और स्वास्थ्य अमला बेपरवाह

दूषित पानी से आधा दर्जन आदिवासी आईसीयू में,लगभग पूरी बस्ती अस्पताल में
पीएचई और स्वास्थ्य अमला बेपरवाह
शिवपुरी
इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण  क्या होगा कि तमाम दावों के बाद आज भी आदिवासियों को पीने का स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा जी हां गिरमोरा की सहरिया  बस्ती में हैण्डपम्प के दूषित पानी से आंत्रशोथ फैल जाने के चलते आधा सैंकड़ा से अधिक आदिवासी परिवार प्रभावित हुए हैं। उल्टी और दस्त की शिकायत के चलते इन आदिवासियों को गम्भीर हालत में अल सुबह तक  अस्पताल लाया जाता रहा मगर यहाँ भी हालात काबू में नहीं हैं। आधा दर्जन आदिवासियों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इस पूरे मामले में पीएचई और स्वास्थ्य विभाग की अतिशय लापरवाही सामने आ रही है। उल्टी दस्त की शिकायत तीन दिन पूर्व से शुरू हो गई थी तब से अब स्वास्थ्य विभाग यदि संजीदा होता तो हालात इस हद तक न बिगड़ते। सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन एवं उनकी युवाओं की पूरी टीम रात भर सहायता में लगे रहे 
ग्राम गिरमौरा के रामदास आदिवासी ने बताया कि आदिवासी बस्ती में जो हैण्डपम्प लगा हुआ है उस हैण्डपम्प के इर्द गिर्द कच्ची भूमि होने और प्लेटफॉर्म टूटा होने के चलते गंदगी युक्त बारिश का पानी पेयजल के रूप में हैण्डपम्प निकल रहा था जिसकी शिकायत पिछले 4-5 दिन से आदिवासी परिवारों द्वारा की जा रही थी मगर पीएचई द्वारा इस ओर कोई ध्यान न दिया जाने के चलते बीती रात आदिवासी बस्ती के तमाम परिवार उल्टी दस्त के प्रकोप की जकड़ में आ गए। दूषित पानी से आंत्रशोथ फैल गया और इस बस्ती में अफरा तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। कल रात हालात ये बने कि आदिवासी परिवारों के इन सदस्यों को जैसे तैसे आदिवासी समुदाय के लोग ही जिला अस्पताल और आसपास के प्राइवेट अस्पतालों में लेकर पहुंचे। उल्टी दस्त से परेशान इन आदिवासियों में कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिला अस्पताल में जिन आदिवासियों को भर्ती कराया गया, उनमें कुपाती पत्नि रामकिशन उम्र 40 वर्ष, शनि पुत्र रामकिशन उम्र 10 वर्ष, रामेती पत्नि लाखन 25 वर्ष, शकुन पत्नि हरिओम आदिवासी, अंगूरी पत्नि अमरसिंह 25 साल और राधा पत्नि रामहेत उम्र 30 साल की हालत गम्भीर होने के चलते इन सभी 6 लोगों को आईसीयू में भर्ती कराए गए हैं। इनके अलावा जो अन्य आदिवासी आंत्रशोथ की जकड़ में आकर अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं उनमें वती आदिवासी पत्नि रामदयाल उम्र 50 साल लता पुत्री केशव उम्र 19 साल बाबू आदिवासी पुत्र अमरचंद्र उम्र 40 साल, लाखन पुत्र हल्के आदिवासी उम्र 20 साल, देवसिंह पुत्र जीवनलाल उम्र 15 साल, नखराली पुत्री किशन 5 साल, रानी पुत्र किशन 10 साल, रामकुंवर पत्नि विशुनलाल 60 साल, रणवीर पुत्र संजय आदिवासी 10 साल, मीना 16 साल, फूलसिंह पुत्र बलवीर 12 वर्ष, अजय पुत्र मस्तराम 17 साल जिला अस्पताल में उपचाररत हैं इसके अलावा कई आदिवासी परिवार प्राइवेट चिकित्सकों से भी उपचार ले रहे हैं। इस गांव में आंत्रशोथ की जानकारी मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और पीएचई द्वारा कोई एहतियाती उपाय तत्काल नहीं किए जाने की जानकारी जब प्रशासन को लगी तो प्रशासन के आला अधिकारियों के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की एक टीम आज टोंगरा के ग्राम गिरमौरा में स्वास्थ्य कैम्प के लिए पहुंची और वहाँ मौजूद अन्य पीडि़तों का उपचार शुरू किया गया, ग्रामीणों का कहना है कि उल्टी दस्त की शुरूआत तीन दिन पहले से से ही हो गई थी मगर सामूहिक रूप से आंत्रशोथ कल रात से फैला और देखते ही देखते दर्जनों परिवार इसकी चपेट में आते चले गए। गाँव में अभी भी पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था पीएचई द्वारा नहीं की जा सकी है। आज जिला अस्पताल में पीएचई के अधिकारी भी आदिवासियों से चर्चारत देखे गए। सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन ने मुख्यमंत्री से मांग कि है कि सरकारी अमले को गांवों में तैनात करें और संक्रामक बीमारियों से बचाब के लिए इंतजामात करें