Related imageमंथन न्यूज़ - भारत ने एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान से अपने जवान के साथ हुई बर्बरता का बदला ले लिया है। इस बार सर्जिकल स्ट्राइक के लिए जम्मू-कश्मीर के जम्मू और राजौरी जिले के बीच नियंत्रण रेखा पर केरी उप सेक्टर को चुना गया।यह ऑपरेशन भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स और सीमा सुरक्षा बल के विशेष कमांडो ने मिलकर किया। भारतीय टुकड़ी ने पाकिस्तानी क्षेत्र में दाखिल होकर कई बंकर तबाह कर लगभग 15 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया। पाकिस्तान के खिलाफ यह कार्रवाई पहली सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ से ठीक पहले गुरुवार को हुई है।हालांकि इसकी सेना या सीमा सुरक्षा बल ने पुष्टि नहीं की है, लेकिन शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान में यह जरूर स्पष्ट कर दिया था कि भारत ने अपने जवानों की मौत का बदला ले लिया है, लेकिन कहां-यह उन्होंने नहीं बताया था।
जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 19 सितंबर को पाकिस्तान की बैट एक्शन टीम ने हमला करके सीमा सुरक्षा बल के हेड कांस्टेबल नरेंद्र कुमार को शहीद कर दिया था। शहीद के पार्थिव शरीर को देखकर कहा जा सकता था कि उन्हें यातनाएं देकर शहीद किया गया। इसके बाद ही सेना व सीमा सुरक्षा बल को बदला लेने का आदेश मिल गया था।
ऐसे हुई स्ट्राइक सूत्रों के अनुसार, राजौरी जिले की सुंदरबनी तहसील से लगभग 15 किलोमीटर दूर मल्ला क्षेत्र में गुरुवार रात सेना के दो हेलीकॉप्टर कमांडो की टुकड़ी को उतारने के बाद वापस रवाना हो गए। इसी रात्रि ठोस रणनीति बनाकर कमांडो केरी बटल क्षेत्र से पाकिस्तानी क्षेत्र में दाखिल हुए।
एक घंटे से भी कम समय में पाकिस्तानी सेना के कई बंकर तबाह करने व लगभग 15 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर करने के बाद भारतीय जांबाज सुरक्षित अपने क्षेत्र में लौट आए। इस कार्रवाई के बाद सेना, सीमा सुरक्षा बल या सरकार की तरफ से कोई बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन इतना कहा जा रहा है कि हमने कड़ी कार्रवाई की है।सीमा पार हलचल तेज, खाली कराए जा रहे गांव 
भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सीमा पार भी दो दिनों से हलचल काफी बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने सीमा से सटे गांवों में रहने वाले लोगों को अपने घरों को खाली कर दूर हटने को कह दिया है। पाकिस्तानी सेना लोगों के लिए सीमा से दूर स्कूलों व मस्जिदों में रहने का प्रबंध कर रही है।
साथ ही सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों की अतिरिक्त तैनाती की जा रही है। सीमा पार काफी संख्या में पाकिस्तानी सेना के वाहनों को आते-जाते देखा जा रहा है। इससे साफ है कि भारतीय सेना की कार्रवाई से पाकिस्तानी सेना में हड़कंप मचा हुआ है और वह भी किसी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है। 
28 सितंबर, 2016 को हुई थी पहली सर्जिकल स्ट्राइक
पाकिस्तानी आतंकियों ने 18 सितं बर, 2016 को कश्मीर के उड़ी में सैन्य शिविर पर हमला कर करीब 20 सैनिकों को शहीद कर दिया था। उसके बाद 28 सितंबर की रात को भारतीय सेना ने नौशहरा के कलाल सेक्टर के सामने भिंबर सेक्टर व मेंढर के तत्तापानी सेक्टर के सामने सर्जिकल स्ट्राइक कर कई आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके साथ ही कई आतंकी कैंपों को नष्ट कर दिया था। 
 गृहमंत्री ने दो दिन पहले ही दे दिया था संकेत
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सितंबर 2016 में पाकिस्तान में हुए सर्जिकल स्ट्राइक की वर्षगांठ के मौके पर एक बड़ा बयान देकर सभी चौंका दिया था। मुज्जफरनगर में उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हमारा पड़ोसी देश लगातार सीमा पर अशांति फैला रहा है। लोगों ने कुछ दिन पहले ही बीएसएफ के जवान के साथ हुई बर्बरता देखी । उन्होंने कहा मैं आपको दावे के साथ कहना चाहता हूं कि आप अगले कुछ दिनों में कुछ देखेंगे, हमारी सेना ने ऐसा कुछ किया है। मैं आपको अभी नहीं बतांऊगा कि क्या किया गया है। लेकिन जो किया जाना था वो किया जा चुका है। हमारे सैनिकों ने सबकुछ वैसे ही किया है जैसे उन्हें कहा गया था।
उन्होंने आपको मेरी बातों पर भरोसा करना चाहिए क्यों कि दो से तीन दिन पहले ही इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई के बारे में कुछ लोगों को ही पता था। आप आगे देखेंगे कि आखिर हुआ क्या था।

मंथन न्यूज़ लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस गोली से मरने वाले विवेक तिवारी के परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया है। इसके बाद परिवारीजन शव के अंतिम संस्कार को लिए तैयार हो गए। उल्लेखनीय है कि कार सवार विवेक को रात लखनऊ पुलिस ने चेकिंग के दौरान गाड़ी न रोकने पर गोली मार दी थी जिससे उनकी मौत हो गई। विवेक के परिवार वाले सीबीआइ जांच, नौकरी और मुआवजा की मांग कर रहे थे। उनकी दो मांगें पूरी हो गईं तीसरी को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जरूरत पड़ने पर सीबीआइ जांच का भी आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग 
परिवारीजन ने न्यू हैदराबाद स्थित आकाश गंगा टॉवर के बाहर शव रखकर आरोपित सिपाहियों को सख्त सजा दिलाने की मांग की। विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी ने मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग की। जब उन्हें अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री शहर में नहीं हैं, तब उन्होंने पत्र लिखकर घटना की सीबीआइ जांच व एक करोड़ के मुआवजे की मांग की। परिवारीजन मांगें पूरी न होने तक शव का अंतिम संस्कार न करने पर अड़े हुए थे और लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। उनके साथ स्थानीय लोगों के साथ कांग्रेस-सपा नेताओं ने भी प्रदर्शन किया।मंत्री आशुतोष टंडन और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने विवेक के परिवारीजन को समझाने का काफी प्रयास किया, पर वे नहीं मानें। हालांकि देर शाम हालात बिगड़ते देख शासन के आदेश पर देर शाम जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा द्वारा मृतक आश्रित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजे और विवेक की पत्नी कल्पना को नगर निगम में अधिकारी की नौकरी देने की घोषणा की गई। जिलाधिकारी ने लिखित में परिवारीजन को पत्र सौंपा। जिसके बाद वह मान गए और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन बंद कर दिया।कितने सवालों का जवाब देती रहूंगीः कल्पना
ध्यान रहे कि विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी ने कहा था कि मामले में लीपापोती हो रही है। ये एनकाउंटर नहीं है पर मेरी जिंदगी खराब हो गई है। मेरे बच्चे पूछेंगे कि पापा को क्या हुआ? मैं क्या जवाब दूंगी कि पुलिस वालों ने गोली मार दी। ऐसा क्या गलत काम किया था? कितने सवालों का जवाब देती रहूंगी। पुलिस वालों ने परिवार उजाड़ दिया। मुख्यमंत्री जवाब दें कि पुलिस इस तरह किसी की हत्या कैसे कर सकती है। जब तक मुख्यमंत्री नहीं आएंगे अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। मुझे सीबीआइ जांच, मुआवजा और नौकरी चाहिए।

मंथन न्यूज दतिया
जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दतिया में  सीतासागर में पर्यटन विकास के लिए नौकायन की शुरूआत  करवाई। डॉ. मिश्र ने खुद भी नौकायन किया।

भोपाल/शिवपुरी-भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्र शर्मा ने कोलारस के काँग्रेस विधायक महेंद्र सिंह यादव पर विधायक निधि के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुये कहा कि विधायक ने "अंधा बांटे रेबड़ी-चीन्ह चीन्ह के देय"की तर्ज पर केवल अपने रिश्तेदारों या ख़ास लोगों में बांट दी जबकि विधायक निधि पर क्षेत्र की जनता का समान अधिकार होता है।
सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि विधायक जी को जनता को बताना चाहिये कि उन्होंने विधायक निधि खतौरा,रामगढ़ एवं तुड़यावद के अलावा और किस किस ग्राम पंचायत को दी।
सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि मेरा प्रवास कोलारस विधानसभा क्षेत्र के 250 से ज्यादा गाँवों में हुआ है लेकिन किसी भी गाँव में विधायक निधि से हुये कार्य दिखाई नहीं दिये, हो सकता है विधायक जी ने कुछ गाँवों को निधि दी हो लेकिन उसका उपयोग केवल विधायक जी के नजदीकी लोग या उनके रिश्तेदार कर रहे हैं जनता को उसका लाभ मिलता दिखाई नहीं देता।
सुरेन्द्र शर्मा ने कोलारस विधायक को चुनोती देते हुये कहा कि वह पत्रकार वार्ता बुलाकर जनता को बतायें कि उन्होंने अब तक कितनी-कितनी विधायक निधि किस किस कार्य हेतु दी और उसकी धरातल पर स्थिति क्या है अगर हैंडपम्प लगा है तो सार्वजनिक जगह पर लगा है या उनके किसी रिश्तेदार के घर के सामने लगा है इसका ज़वाब भी विधायक महोदय को जनता को देना चाहिये।
सुरेन्द्र शर्मा ने कोलारस विधायक को चेताबनी देते हुये कहा कि या तो वह स्वयं अपनी विधायक निधि के व्योरे को एक हफ़्ते के अंदर  सार्वजनिक करें नहीं तो वह स्वयं सूचना के अधिकार के तहत जानकारी प्राप्त कर जनता को उसका ब्यौरा उसके भौतिक सत्यापन के साथ सार्वजनिक करेंगे।
प्रकाशन हेतु सादर
सुरेन्द्र शर्मा
प्रदेश कार्यसमिति सदस्य
भारतीय जनता पार्टी(म.प्र)
Mo.9074600001

भोपाल/शिवपुरी-भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्र शर्मा ने भोपाल में लोकनिर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह से मुलाक़ात की एवं उनसे कोलारस क्षेत्र के ग्राम बारई से ग्राम गुढाल तक पक्की सड़क बनवाने की माँग की।
लोकनिर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह को सौंपे माँगपत्र में सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि शिवपुरी जिले की बदरवास तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ोखरा के अंतर्गत ग्राम गुढाल में प्रसिद्ध हनुमानजी का मंदिर है जिसे क्षेत्र में गुढाल सरकार के नाम से जाना जाता है,यह मंदिर इस क्षेत्र के आसपास के सैंकड़ों गाँवों के लोगों के लिये आस्था का केंद्र है परंतु इस मंदिर तक पहुंचने के लिये पक्का मार्ग ग्राम बारई तक ही है एवं श्रद्धालुओं को लागभग 1.50(डेढ़) किलोमीटर कच्चे मार्ग से  चलना पड़ता है,बरसात के दिनों में कच्चे मार्ग के कारण श्रद्धालुओं को अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है जबकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन सैंकड़ों में है।
सुरेन्द्र शर्मा की माँग पर सहमति जताते हुये लोकनिर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह ने आगामी  कार्यवाही हेतु विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये।।
प्रकाशन हेतु सादर
सुरेन्द्र शर्मा
प्रदेश कार्यसमिति सदस्य
भारतीय जनता पार्टी(म. प्र.)
mo.9074600001



नई दिल्ली। एससी-एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रोन्नति में आरक्षण की जरूरी नहीं। इस मामले में 2006 में एन नागराजन द्वारा दिए फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रमोशन पर फैसला राज्य सरकार ले।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में एससी/एसटी आरक्षण के लिए कोई डेटा जमा करने की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण मामले में बेहद अहम फैसला दिया है। प्रमोशन में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नागराज जजमेंट में दी व्यवस्था को बैड इन लॉ कहा जिसमें आरक्षण से पहले पिछड़ेपन का डेटा सरकार से एकत्र करने को कहा गया था। 2006 में नागराज से संबंधित वाद में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने कहा था कि सरकार एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण दे सकती है, लेकिन शर्त लगाई थी कि प्रमोशन में आरक्षण से पहले यह देखना होगा कि अपर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं।

सरकार और आरक्षण समर्थकों ने 2006 के एम. नागराज के फैसले को पुनर्विचार के लिए सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजे जाने की मांग की थी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मांग पर सभी पक्षों की बहस सुनकर गत 30 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सरकार और आरक्षण समर्थकों का कहना है कि एम. नागराज फैसले में दी गई व्यवस्था सही नहीं है। एससी-एसटी अपने आप में पिछड़े माने जाते हैं। राष्ट्रपति द्वारा जारी सूची में शामिल होने के बाद उनके पिछड़ेपन के अलग से आंकड़े जुटाने की जरूरत नहीं है। जबकि आरक्षण विरोधियों ने एम. नागराज फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि उस फैसले में पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी गई व्यवस्था कानून सम्मत है।

फैसले के एक भाग पर नहीं, बल्कि फैसला आने की पूरी परिस्थितियों पर विचार होना चाहिए। उनका कहना था कि आरक्षण हमेशा के लिए नहीं है। ऐसे में पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाए बगैर यह कैसे पता चलेगा कि सरकारी नौकरियों में एससी-एसटी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और इसलिए इन्हें प्रोन्नति में आरक्षण देने की जरूरत है।

चाँद का टुकड़ा प्लेटफ़ॉर्म तले आगमन संस्था शिवपुरी द्वारा आज इवेंट पर्यटक स्वागत केन्द्र मे किया गया जिसमे कु़.वैशाली पाल सरस्वती वदंना कर कार्यक्रम कि शुरू वाद कि गयी कार्यक्रम का संचालन राकेश    जी ने किया कवियत्री.वैशाली पाल कि कविता ने सभी का दिल जीत लिया वैशाली पाल कि
देश के उपर उनकी लिखी कु
वैशाली कि कविता- प्रणाम ऐसे वीरो को,प्रणाम उनकी वीरता  ऐसे सपूत पाकर धन्य धन्य हो उठी भारत की माटी हर घाटी को प्रमाण ऐसी देश के उपर छोटी सी बच्ची वैशाली कि कविता को सुनकर सभी युवा को देश कि याद आ गयी
इसके साथ ही कवियत्री रिया माथुर कि कविता चाय सी मौहोएबत है मेरी इस जिंदगी से क्योकि गर्म भी हो तो बहोत लुभाती है कविता के माध्यम से कवि ने अपनी जिंदगी को चाय जैसी गर्म बताया
कवि कपिल जी ने आजाद कि याद दिलाई कि किस प्रकार महात्मा गाॅधी ने भरत सिंह चंद्रशेखर जैसे वीरो का कुई मोल नही जाना कविता के मध्यम से बताया कि तुमने मोल नही जाना था चद्रशेखर कि तकदीक का साथ ही जिन्ना जैसे गद्दारो को तुमने बना रखा था खास ,सदेह किया था तुमने नेताजी कि खुद्दारी पर कविता के मध्यम से कवि कपिल जी ने जवाहर लाल नेहरू पर सवाल किया कि गद्दारो को तुम खास बना कर रखे थे देश भक्त पर सदेह किया करते थे
कवियत्री दिव्या ने अटल जी कि कविता के साथ अपनी प्रस्तुती दी   वो अटल है अटल है अटल ही रहेगे
अपने माँ पिता को फरिदे बताया ओर कवि कहती है कि इन फरिस्तो का दिल कभी न दुखना जो इन्हे पसंद हो वो काम कर जाना अब तो मै यही कहूँगी इन फरिस्ते तुम बन जाना  कवि लोगो को यही सिख देना चाह रही थी की तुम अपने माँ पिता के पसंद का ही काम करना उनको कभी दुख न पहुचँना, कु. अपूर्वा श्रीवास्तव ने बेटियों के उपर बहोत ही सुंदर कविता सुनाई..बेटी आज हो गयी है बडी बिन असरत से प्यार करती है बेटी लोगो बेटीयो का महत्व समझाया पर्यटक केन्द्र मे कविताओ से लोगो को अपने ओर ऐसे अकसर किया कि लोगो के इनकी कविता सुनकर अपने आप ही लोग कविता सुनने पर्यटक केन्द्र मे आ गये

Petrol Diesel Under GST- जीएसटी की दरें तय,अब बस तारीख का ऐलान बाकी


भोपाल। तेल की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी बदस्तूर जारी है। 1 अगस्त से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा होने का यह सिलसिला शुरू हुआ था। उसके बाद से रोजाना इसके दाम बढ़ते जा रहे हैं। यदि चंद दिन छोड़ दे तो यह इजाफा लगातार जारी है।


इस बीच पेट्रोल डीजल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी से परेशान लोगों के लिए एक अच्छी खबर सामने आ रही है। जिसके अनुसार आगामी कुछ समय में पेट्रोल-डीजल को सस्ता करने के लिए GST तय किया जा सकता है। यह सूचना सामने आते ही मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित विभिन्न जिलों में लोगों के बीच यह चर्चा विषय बना हुआ है।


ये बोले जीएसटी पर मंत्रीसमूह के चेयरपर्सन... 
दरअसल तेल की ऊंची कीमतों के बीच जीएसटी पर मंत्रीसमूह के चेयरपर्सन और बिहार के उपमुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि पेट्रो उत्‍पादों पर जीएसटी की दरें तय की जा चुकी हैं। इसके लिए अब बस, तारीख का ऐलान बाकी है जब से यह लागू होगा।


उन्‍होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक 28 सितंबर को होगी, लेकिन इसमें पेट्रोल को जीएसटी दायरे में लाने पर कोई चर्चा नहीं होगी। यह सरकार को तय करना है कि वह कब से पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी दरें लागू करती है।


वहीं पूर्व में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी राज्यसभा में कहा था कि 'संविधान के अनुच्छेद 297A(5) में साफ किया गया है कि ये जीएसटी परिषद को तय करना होगा क‍ि किस तारीख से पेट्रोलियम क्रूड, हाइस्पीड डीजल, मोटर स्पीरिट, प्राकृतिक गैस, जेट फ्यूल पर जीएसटी टैक्स लागू किया जाएगा।'


यहां प्रधान ने ये भी कहा था कि इस तरह पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी के तहत संवैधान‍िक स्तर पर शामिल हो चुके हैं। लेक‍िन इन पर जीएसटी रेट कब से लगेगा, यह फैसला जीएसटी परिषद को लेना है।


वहीं पेट्रोल-डीजल में जीएसटी पर मंत्रीसमूह के चेयरपर्सन के इस बयान के सामने आने के बाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई जिलों में लोगों में खुशी देखने को मिली।


पेट्रोल-डीजल में यदि GST लगती है तो इससे इनके दामों में काफी कमी आएगी। जिससे प्रदेश ही नहीं पूरा देश प्रभावित होगा। मध्यप्रदेश में पेट्रोल की कीमतें सबसे ज्यादा हैं, जीएसटी आने से लोगों को काफी लाभ मिलेगा।
- संजय शर्मा, डायरेक्टर निजी फर्म


पेट्रोल-डीजल में GST आने से इसके दाम कम होंगे, जिससे लोगों को राहत मिलेगी। वहीं खर्चों में कमी आने से लोगों अपनी कई जरूरतें पूरी कर सकेंगे। वहीं इससे महंगाई में भी कमी आएगी।
- राजेश आर्य, निजी कंपनी में कार्यरत, भोपाल


जीएसटी से रेट कम होने से जहां एक ओर पेट्रोल पर खर्चे में कमी आएगी। वहीं बाजार में भी कई चीजों के दामों में परिवर्तन होगा। इससे घर का बजट भी प्रभावित होगा। और कई चीजेें जो अब तक लोग महंगाई के कारण उपयोग में नहीं ले पा रहे हैं। इस बचत से वे अपनी उन जरूरतों को भी पूरा कर सकेंगे।
- हरप्रीत व्यास, ग्रहणी


पेट्रोल-डीजल में जीएसटी से इसके रेट कम होगें। जिससे काफी हद तक बचत होगी। साथ ही महंगाई पर भी रोक लगेगी।
- अशोक जैन, दुकानदार, भोपाल


पेट्रोल-डीजल में जीएसटी केवल गाड़ियों को ही प्रभावित नहीं करेगी, ये हमारी किचन पर भी प्रभाव डालेगी। बाजार में भी कई चीजें इसके कारण सस्ती होंगी। जिससे घर का बजट तो प्रभावित होगा ही कुछ बचत भी हो सकेगी।
- शिल्पी झा पाराशर, ग्रहणी


ये भ्रम की स्थिति है...
एक ओर जहां इस सूचना के सामने आने से खुश महसूस कर रहे हैं। वहीं कई जानकारों का यह भी कहना है कि अभी राज्‍यों और केंद्र सरकार का फोकस अभी राजस्‍व बढ़ाने पर है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी लागू करने की तारीख बाद में तय होगी।


वहीं कुछ जानकार जीएसटी से पेट्रोल डीजल सस्ता होने की बात को जानबूझकर फैलाया जा रहा भ्रम बता रहे हैं। इसके पीछे उनका कहना है कि जीएसटी में आने के बाद भी केंद्र या राज्‍य सरकारें क्‍या कर लगाएंगी, यह अभी तक तय नहीं है।


जबकि मौजूदा कर व्‍यवस्‍था में जीएसटी के साथ अन्‍य कर लगाने का भी प्रावधान है। ऐसा विश्व स्‍तर पर हो रहा है और तमाम देश जीएसटी के साथ अतिरिक्‍त कर भी लगा रहे हैं।


28 पर्सेंट के पीक टैक्स रेट के साथ...
अब तक सामने आ रही जानकारी के अनुसार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाया जा सकता है। ऐसा होने पर दोनों फ्यूल्स पर 28 पर्सेंट के पीक टैक्स रेट के साथ राज्यों की ओर से कुछ लोकल सेल्स टैक्स या वैट लगाया जा सकता है।


वर्तमान में केंद्र सरकार मौजूदा समय में पेट्रोल पर प्रति लीटर 19.48 रुपये और डीजल पर 15.33 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूलती है। जबकि राज्यों द्वारा वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट) वसूला जाता है।


बताया जाता है कि जीएसटी के तहत किसी वस्तु या सेवा पर लगने वाला कुल टैक्स इस तरह रखा जाएगा कि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने से पहले उस पर लगने वाले कुल सेंट्रल और स्टेट लेवी के बराबर ही आंकड़ा रहे। यह काम जीएसटी के 5,12, 18 और 28 पर्सेंट के चार स्लैब्स में किसी एक में रखकर किया जाएगा।


कुल टैक्स पहले ही पीक रेट से ज्यादा...
जानकारों के अनुसार पेट्रोल और डीजल पर अभी कुल टैक्स पहले ही पीक रेट से ज्यादा है और टैक्स रेट को केवल 28 पर्सेंट रखा जाए तो केंद्र और राज्यों को राजस्व का बड़ा नुकसान होगा। वहीं बताया जाता है कि केंद्र के पास राज्यों को होने वाले रेवेन्यू के नुकसान की भरपाई करने के लिए पैसा नहीं है।


वहीं जानकारों की माने तो यदि कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाया जाता है, ऐसी स्थिति में पेट्रोल-डीजल पर GST लोगों को काफी फायदा देगा। लेकिन वहीं यह सरकार को राजस्व के हिसाब से काफी नुकसान देने वाला साबित हो सकता है।


मंथन न्यूज दिल्ली
अपनी कार्यप्रणाली और बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले राजस्थान कैडर के आईपीएस पंकज चौधरी की दूसरी पत्नी मुकुल चौधरी ने आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव लड़ने का एलान किया है.

मुकुल चौधरी ने aajtak.in से बातचीत में कहा है कि वो मुख्यमंत्री के खिलाफ झालरापाटन से चुनाव लड़ेंगी. मुकुल का कहना है कि वो राजस्थान की बेटी हैं. पिछले कुछ सालों से अमूमन शांत रहने वाले प्रदेश राजस्थान में सांप्रदायिक तनाव, महिलाओं के खिलाफ अपराध, भष्टाचार और कानून व्यवस्था की हालत खराब है.

मुकुल चौधरी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार में भ्रष्टाचार का बोलबाला है. भ्रष्ट अधिकारियों की सुनी जाती है जबकि ईमानदार अधिकारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है. अपने पति और आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी के बारे मुकुल चौधरी का कहना है कि पंकज एक सोच हैं, उन्होंने राजस्थान में ईमानदारी की मिसाल कायम की है और बेईमानों के खिलाफ हमेशा आवाज उठाई है. फिर भी सरकार की तरफ से सात मामलों में चार्जशीट का सामना कर रहे हैं. मुकुल का कहना है कि रानी को उनके कर्म हराएंगे.

बता दें कि आईपीएस पंकज चौधरी की पत्नी मुकुल की मां शशि दत्ता भैरोंसिंह शेखावत सरकार में विधि एवं कानून मंत्री थीं, लेकिन बाद में वह बसपा में चली गई थीं.

कौन हैं आईपीएस पंकज चौधरी?


2009 बैच के आईपीएस पंकज चौधरी सबसे पहले जैसलमेर में कांग्रेस से जुड़े गाजी फकीर की हिस्ट्री शीट खोलने के मामले में चर्चा में आए थें. जिसके बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जैसलमेर से किशनगढ़ ट्रांसफर कर दिया था.

इसके बाद वसुंधरा सरकार में बूंदी जिले के नैनवा में साप्रदायिक हिंसा के बाद राज्य सरकार ने आईपीएस पंकज चौधरी को एपीओ कर दिया था. नैनवा में नगर पंचायत चुनावों में भड़के सांप्रदायिक दंगों में हिंदुवादी संगठनों से जुड़े लोगों पर कार्रवाई करने से स्थानीय नेतृत्व नाराज था. लिहाजा पंकज चौधरी पर लापरवाही बरतने का इल्जाम लगाते हुए उन्हे एपीओ कर दिया.  

पंकज चौधरी जब राजस्थान स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में तैनात थें तब उन्होंने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रमुख सचिव तन्मय कुमार पर पद का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता से संबंधित गंभीर आरोप लगाए थें. सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय पंकज चौधरी कई बार मुख्यमंत्री के खिलाफ भी लिख चुके हैं.

आईपीएस चौधरी की दूसरी पत्नी हैं मुकुल


यूपी के बलिया के रहने वाले आईपीएस पंकज चौधरी की पहली शादी 2005 में वाराणसी में सुधा गुप्ता से हुई थी. 2008 में सुधा गुप्ता से एक बेटी भी थी. लेकिन साल 2009 में आईपीएस में सेलेक्शन के बाद पहली पत्नी से पंकज चौधरी की दूरी बढ़ गई.  इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में चार साल तक केस चला, जिसमें 8 मई 2018 को हाई कोर्ट ने पंकज चौधरी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पहली पत्नी से पंकज चौधरी का तलाक सुनिश्चित किया. हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राजस्थान सरकार द्वारा पंकज चौधरी के खिलाफ इस मामले में दायर चार्जशीट अप्रासंगिक हो गई.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा दो अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं। पिछले दो दशकों में जस्टिस मिश्रा सबसे अधिक संवैधानिक पीठों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्‍य न्‍यायाधीश हैं। पीठ में कई ऐसे संवेदनशील मामले आए जो देश की सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तानेबाने के लिहाज से काफी अहम रहे। इसमें राम-जन्म भूमि मामला, सबरीमाला मंदिर मामला, आधार नंबर और दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर बैन का मामला आदि शामिल हैं। इनमें से कई मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और कभी भी फैसले आ सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ बड़े मामलों के बारे में, जिन पर सीजेआइ को फैसला देना है।


1- आधार कार्ड मामला: सुप्रीम कोर्ट में 38 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने आधार मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। आधार की अनिवार्यता का मामला 10 मई को सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ में सुनवाई पूरी हुई थी। निजता को मौलिक अधिकार बताने का फैसला आने के बाद अब इस बारे में फैसला आएगा कि क्या आधार के लिए लिया जाने वाला डाटा निजता का उल्लंघन है या नहीं ? फैसला आने तक सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के अलावा बाकी सभी केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं में आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाई गई है। इनमें मोबाइल सिम व बैंक खाते भी शामिल हैं। बता दें कि इस मामले की सुनवाई 38 दिनों तक चली। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया था कि यह शीर्ष अदालत में चली दूसरी सबसे लंबी सुनवाई है। पहला मामला जिसमें सबसे ज्यादा दिनों तक सुनवाई चली वो केशवानंद भारती मामला था, जिसमें  68 दिन तक सुनवाई हुई थी।


2- अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट इस बात का निर्णय करेगी कि क्या 1994 के एम इस्मायल फ़ारुक़ी बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया में पांच जजों की संवैधानिक पीठ के आदेश को दोबारा परखेगी या नहीं। इस मामले पर सुनवाई होनी है। अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान ये संकेत जरूर मिल जाएंगे कि इस केस में अंतिम फैसला आने में अभी और कितना वक्त लगेगा। कोर्ट में चल रहे अयोध्या केस से संबंधित एक पहलू को संवैधानिक बेंच भेजा जाय या नहीं, इस पर 28 सितंबर को फैसला आ सकता है। शीर्ष अदालत इस पर फैसला सुना सकता है कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का आंतरिक हिस्सा है या नहीं। अयोध्या का राममंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अयोध्या की जमीन किसकी है, इस पर अभी सुनवाई की जानी है।


3- एससी/एसटी पदोन्नति में आरक्षण: मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुआई वाली वर्तमान संविधान पीठ को इस बात का निर्णय देना है कि क्या इन मानदंडों पर पुनः विचार करना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा अक्टूबर के पहले हफ्ते में रिटायर हो रहे हैं, इस वजह से उनकी अगुआई में सरकारी नौकरियों में ‘पदोन्नति में आरक्षण’ मामले में हुई संविधान पीठ की सुनवाई का फैसला जल्द ही आ सकता है। शीर्ष अदालत यह फैसला देगी कि 2006 एम नागराज बनाम भारत सरकार मामले में संविधान पीठ के दिए हुए फैसले को पुनर्विचार करने की आवश्यकता है या नहीं, अर्थात इस पर बड़ी पीठ को फिर से विचार करने की जरूरत है या नहीं। नागराज मामले पांच जजों की ही एक संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) वर्गों को संविधान के अनुच्छेद 16 (4) और 16 (4ख) के अंतर्गत आरक्षण दिया जा सकता है, पर इसके लिए किसी भी सरकार को कुछ मानदंडों को पूरा करना होगा।


4- व्याभिचार का मामलाः अगर कोई विवाहित पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ उसकी सहमति से संबंध बनाता है, तो संबंध बनाने वाले पुरुष के खिलाफ महिला का पति व्याभिचार का केस दर्ज करा सकता है। मगर, संबंध बनाने वाली महिला के खिलाफ मामला नहीं बनता। यह नियम भेदभाव वाला है या नहीं, इस पर फैसला आएगा। कोर्ट ने कहा विवाहित महिला अगर किसी विवाहित पुरुष से संबंध बनाती है तो सिर्फ़ पुरुष ही दोषी क्यों? जबकि महिला भी अपराध की जिम्मेदार है. कोर्ट ने कहा धारा 497 के तहत सिर्फ पुरुष को ही दोषी माना जाना IPC का एक ऐसा अनोखा प्रावधान है कि जिसमें केवल एक पक्ष को ही दोषी माना जाता है।


5- कोर्ट में सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग : सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि कोर्ट कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और सीधा प्रसारण होना चाहिए या नहीं। 24 अगस्त को राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने कहा कि अदालती कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और ये ओपन कोर्ट का सही सिद्धांत होगा।


6- दागियों के चुनाव लड़ने पर रोक: शीर्ष अदालत इस बात को तय करेगा कि जिन नेताओं के खिलाफ गंभीर मामले में आरोप तय हो गए हैं, उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए या नहीं ? पांच जजों के संविधान पीठ ने केंद्र से पूछा था कि क्या चुनाव आयोग को ये शक्ति दी जा सकती है कि वो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को चुनाव में उतारें तो उसे उस उम्मीदवार को चुनाव चिह्न देने से इनकार कर दे ?


7- सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश: केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर लगी उम्र संबंधी पाबंदियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। अगस्त में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के खिलाफ याचिका पर संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा महिलाओं को उम्र के हिसाब प्रवेश देना संविधान के मुताबिक है ? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्‍छेद 25 प्रावधान सभी वर्गों के लिए बराबर है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मंदिर हर वर्ग के लिए है किसी खास के लिए नहीं है।


8- नेताओं की बतौर वकील प्रैक्टिस: नेताओं के बतौर वकील प्रैक्टिस करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। फैसला इसी महीने आएगा। सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने इस मामले में कोर्ट में याचिका लगाई थी।


दिल्ली
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष और चारा घोटाला के कई मामलों में सजाकाट रहे लालू प्रसाद सोमवार को राफेल सौदे में कथित घपले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा.  लालू ने ट्वीट कर अपने अंदाज में लिखा, "जहजवा ही चुराकर खाने लग गए, वो भी लड़ाकू.  गजबे बा. " फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का साक्षात्कार दुनिया के कई टीवी चैनलों पर प्रसारित होने के बाद राफेल सौदे को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों की तरफ से प्रतिदिन आरोप-प्रत्यारोप जारी है. भ्रष्टाचार के मामले में सजायाफ्ता लालू भी अब राफेल के मुद्दे पर सरकार को घेरने वालों में शामिल हो गए हैं. लालू ने इससे पहले भी ट्वीट कर राफेल मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा था.  

 
लालू ने शुक्रवार को अपने ट्वीट में लिखा था, "मित्रों, राफेल सौदे के घालमेल और तालमेल की सही जानकारी 125 करोड़ देशवासियों को मिलनी चाहिए कि नहीं? अगर पूंजीपति मिलनसार प्रधानमंत्री गुनाहगार व भागीदार नहीं है और ईमानदार चौकीदार है तो सच बताने में डर काहे का?"  सजा काट रहे लालू अपनी बीमारी के इलाज के क्रम में इन दिनों रांची के एक अस्पताल में भर्ती हैं.  
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी दौरे के दौरान राफेल सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश के ‘चौकीदार’ (मोदी) ने गरीब से पैसा छीनकर उसे उद्योगपति अनिल अंबानी को सौंप दिया. गांधी ने इसके साथ ही प्रधानमंत्री से कहा कि वह राफेल लड़ाकू विमान सौदे से जुड़े कई मुद्दों का जवाब दें और यह भी स्पष्ट करें कि क्यों फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कथित रूप से उन्हें ‘चोर’ कहा.
राहुल गांधी ने जायस में एक जनसभा में राफेल सौदे का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि देश के ‘चौकीदार’ ने हिन्दुस्तान के जवानों और शहीदों की जेब से 20 हजार करोड़ रूपये निकालकर अनिल अंबानी की जेब में डाला है. उन्होंने कहा कि एचएएल से कांट्रैक्ट छीनकर अनिल अंबानी को क्यों दे दिया गया? भारत की जनता राफेल सौदे की कीमत जानना चाहती है.' कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी इस बारे में सफाई नहीं दे सकते हैं क्योंकि उनमें सफाई देने का दम नहीं है. नरेंद्र मोदी भाषण देते हैं लेकिन जवाब नहीं दे पाते हैं.'' 

MARI themes

Blogger द्वारा संचालित.