वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने गिनाईं राफेल की खूबियां, सौदे को बताया सही

नई दिल्ली। राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर मची सियासी रार के बीच भारतीय वायुसेना प्रमुख ने राफेल सौदे का बचाव करते हुए इसे हिंद महाद्वीप में भारत के लिए 'गेम चेंजर' और वायुसेना के लिए 'बूस्टर डोज' बताया है। राफेल सौदे को लेकर सवालों की बौछार झेलते हुए एयर चीफ मार्शल धनोआ ने सरकार के फैसले के बचाव में कहा कि दासो एवियेशन ने आफसेट पार्टनर का चुनाव किया है और इसमें सरकार या भारतीय वायुसेना की कोई भूमिका नही है।

उन्होंने कहा कि राफेल एक बढि़या विमान है और राफेल सौदे में कई लाभप्रद बाते हैं।वायुसेना की स्थापना की 86वी सालगिरह पर मीडिया को सम्बोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख धनोआ ने एचएएल को दरकिनार करने के सवाल पर कहा कि 'हिंदुस्तान ऐयरोनाटिक्स लि. को जो ठेके पहले दिये गए थे वे आज तक देरी से ही मिल रहे हैं।' 'सुखोई-30 को सौंपने में तीन साल, जगुआर को सौंपने में छह साल, एलसीए तेजस को सौंपने में पांच साल और मिराज- 2000 को सौंपने में दो साल की देरी चल रही है।'


वायुसेना प्रमुख ने बताया कि वायुसेना के पास इस मामले मे तीन विकल्प थे, पहला या तो हम कुछ होने के इंतजार में रहते या लड़ाकू विमानों का टेंडर (आरएफपी) वापस ले लेते या कोई आपात खरीद करते। हमने आपात खरीद का फैसला किया।वही रूस से एस-400 एंटी मिसाइल सौदे के बारे में पूछे जाने पर एयर चीफ मार्शल धनोआ ने कहा कि राफेल के साथ एस-400 का सौदा वायुसेना की ताकत में भारी इजाफा करेगा। वायुसेना प्रमुख से तिब्बत के इलाके में चीनी वायुसेना द्वारा लड़ाकू विमानों की तैनाती के लिये ढांचागत विकास के बारे में पूछे जाने पर एयर चीफ मार्शल ने कहा कि हम चीन की इन गतिविधियों पर ध्यान दे रहे हैं। हम इन सबसे निबटने के लिये तैयार हैं। इस चुनौती का मुकाबला करने के लिये हमारे पास योजना तैयार है।


तिब्बत के इलाके में 50 विमानों की तैनाती के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह हमारे लिये चिंता की बात नही है।वायुसेना प्रमुख धनोआ ने बताया कि वायुसेना की ताकत में इजाफा करने के लिए वायुसेना ने एलसीए तेजस पर अपना भरोसा जाहिर किया है, एलसीए मार्क -2 के विकास पर काम चल रहा है। वायुसेना ने 239 विमानों के 12 स्क्वाड्रन हासिल करने का फैसला किया है।


110 और लड़ाकू विमानों को हासिल करने की प्रक्रिया के बारे में पूछे जाने पर एयर चीफ मार्शल ने कहा कि छह कम्पनियों ने इसके लिये जवाब भेजा है। इसका रिक्वेस्ट फार प्रपोजल (आरएफपी) यानी टेंडर जारी करने की औपचारिकता पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस सौदे में भाग लेने वाले विमानों के अधिकतम परीक्षण पहले ही पूरे हो चुके है। केवल नए प्रस्ताव के तहत कुछ बातों पर ध्यान दिया जाएगा।