चुनाव प्रचार सामग्री पहले से खरीदी, तो भी जुड़ेगी प्रत्याशी के खाते में राशि

भोपाल-


नामांकन भरने से पहले अगर उम्मीदवार एडवांस में झंडे-बैनर सहित अन्य चुनाव प्रचार सामग्रियां खरीदा है तो भी यह राशि उसके चुनावी खर्च में जोड़ी जाएगी। प्रत्याशी को यह बताना पड़ेगा कि नामांकन भरने से पहले उसने कितनी चुनाव सामग्री पहले से खरीदी है और अब कितनी और कहां से चुनाव प्रचार समग्री खरीदी जा रही है।


वहीं प्रिंटिंग प्रेसों को भी प्रिंट की गई समग्री की जानकारी आयोग को देना पड़ेगा। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जितने होर्डिंग हैं और उनके रेट कार्ड की भी जानकारी आयोग ने नगरीय प्रशासन एवं पंचायत विभाग से बुलावाई है।


इधर आयोग अब टेंट, बाजा और कैटरिंग कारोबारियों पर भी सख्ती करने जा रहा है। इन्हें भी चुनाव के दौरान राजनैतिक दलों को उपलब्ध कराई गई सुविधाओं की जानकारी आयोग को देनी पड़ेगी। आयोग यह मान रहा है कि चुनाव के दौरान प्रचार सामग्री के बाद सबसे ज्यादा खर्च उम्मीदवारों द्वारा वाहनों और कैटरिंग में किया जाता है।


नामांकन भरने के बाद उम्मीदवारों को हर दिन के चुनावी खर्च की जानकारी आयोग को देनी पड़ेगी और आखिरी में उन्हें पूरे खर्च की जानकारी बिलों के साथ देनी पड़ेगी। चुनाव में उम्मीदवार के खर्च की तीन तरह से रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें केन्द्रीय और राज्य व्यय निगरानी समिति तथा जिला निगरानी व्यय समिति शामिल है।


इधर, अमित शाह की नजर किसानों पर, राहुल गांधी धर्म की राह पर...
मध्यप्रदेश में चुनावी रणभेरी बजने में कुछ ही दिन शेष हैं। इसके चलते भाजपा और कांग्रेस के अध्यक्षों का फोकस प्रदेश पर है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह छह अक्टूबर को मालवा अंचल के दौरे पर रहेंगे। उनकी नजर प्रदेश के नाराज किसानों पर है। उनके मालवा दौरे में जावरा में किसान सम्मेलन को शामिल किया है। वे इसके पहले इंदौर के राजवाड़ा में भाजपा के महासंपर्क अभियान की शुरुआत करेंगे।


कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों जहां भी जा रहे हैं वहां किसी न किसी मंदिर में पूजा-अर्चना जरूर कर रहे हैं। वे छह अक्टूबर को पहले मुरैना में एकता परिषद के कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद वे जबलपुर में नर्मदा पूजा के साथ ही रामपुर चौक से रोड शो करेंगे।