MP के दिग्गज नेताओं के बेटों के लिए खास है यह विधानसभा चुनाव

इस विधानसभा चुनाव में किसको टिकट मिलेगी यह तो भारतीय जनता पार्टी की सर्वे रिपोर्ट तय करेगी. बीजेपी के मुताबिक पार्टी कभी इस आधार पर टिकट नहीं देती कि कोई किसी नेता का बेटा है.

मध्य प्रदेश मे इस बार का विधानसभा चुनाव बीजेपी और कांग्रेस की प्रतिष्ठा की लड़ाई के साथ ही प्रदेश के बड़े नेताओं के बेटों के लिए भी महत्वपूर्ण है. बीजेपी की तरफ से सीएम शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय तो वहीं कांग्रेस की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन और कमल नाथ के बेटे नकुल की राजनीतिक सक्रियता बढ़ती नजर आ रही है. बहरहाल, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन राजनीति में अपनी धाक जमाए हुए हैं.दून स्कूल से पढ़े ज्योतिरादित्य सिंधिया  के 23 वर्षीय बेटे महाआर्यमन फिलहाल अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं. बीते जून में शिवपुरी में हुए युवा संवाद कार्यक्रम में महाआर्यमन के भाषण से लोगों को अहसास हो गया था कि वो जल्द ही वह एक राजनेता के रूप में जनता के सामने होंगे.ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया

 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने पिता के लिए प्रचार करते नजर आए महाआर्यमन सिंधिया ने कहा, 'आजकल लोगों को लगता है कि राजनीति बड़ी आसान चीज है. गाड़ी पर लालबत्ती लगाकर चलते हैं. लोग ऐसा क्यों सोचते हैं. आजकल राजनीति में इतनी नफरत क्यों है.'महाआर्यमन सिंधिया ने कहा, 'आजकल एमपी में राजनीति में बहुत झूठ आ रहा है. हम ये करेंगे वो करेंगे, हम सफल हो जाएंगे. यह सब हमें बदलना है. मध्य प्रदेश की राजनीति का चेहरा बदलना है. लोगों के दिलों को जीतना है. विरोधियों के साथ दुश्मनी मिटानी होगी'शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह
मध्य प्रदेश के मुख्य  शिवराज सिह चौहान   के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने पूणे के सिम्बियोसिस लॉ कॉलेज से पढ़ाई की है और फिलहाल बिजनेस कर रहे हैं. जब भी चुनाव में शिवराज सिंह की साख दांव पर लगती है तो कार्तिकेय भी प्रचार पर निकल जाते हैं. जब वक्त मिलता है कार्तिकेय अपने पिता की बुदनी विधानसभा में जनसंपर्क के लिए निकल जाते हैं. अटकलें लगती रहती हैं कि देर-सबेर बुदनी या विदिशा से ही कार्तिकेय को चुनाव लड़ना है.

कातिकेय से जब राजनीति की महत्वाकांक्षा के बारे में पूछा तो उन्होंने मंजे हुए राजनेता की तरह जवाब दिया कि मेरी मुख्यमंत्री बनने की कोई तमन्ना नहीं है. ना टिकट पाने की और न ही पद की. माननीय मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लिए इतना किया है इसलिए मेरा और यहां के कार्यकर्ताओं का दायित्व बनता है कि माननीय मुख्यमंत्री के लिए लड़ें. आज विपक्ष की राजनीति इतनी निचले स्तर पर आ चुकी है. मेरे माता-पिता पर मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं. क्या ऐसे लोगों को चुनकर लाना चाहिए.कमल नाथ के बेटे नकुल
कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के बेटे  नकुल  कमल नाथ की मसरूफियत में उनके गढ़ छिंदवाड़ा को संवारने का जिम्मा नकुल के हाथ में ही होता है. नकुल अपने पिता की परछाईं की तरह हर वक्त उनके साथ नजर आते हैं.

दिग्विजय सिंह के बेटे जय वर्धन
कांग्रेस के चर्चित राजकुमारों में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जय वर्धन भी हैं. जय वर्धन ने 2013 के विधानसभा चुनाव से दिग्विजय सिंह की राघोगढ़ सीट से विधायक की पारी शुरू की है. जय वर्धन ने कहा, 'मेरा हाईएस्ट एम्बिशन है कि मैं जो भी क्षेत्र रिप्रज़ेन्ट करूं, वो मुझे स्वीकारते रहें. विपक्षी दल भी स्वीकारें कि मैं सही काम कर रहा हूं. पद कोई भी हो उससे मतलब नहीं है. बात ये है कि आम जनता आम वोटर्स मुझे स्वीकार करें, वही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है.नरेन्द्र सिंह तोमर के बेटे देवेन्द्र प्रताप सिंह 
राजनीति में किस्मत आज़माने को तैयार बीजेपी के बड़े नेताओं के बेटों को भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति में जगह दी गई है.नरेद्र सिंह तोमर  के बेटे देवेन्द्र प्रताप सिंह ग्वालियर और मुरैना इलाके में सक्रिय हैं.प्रभात झा के बेटे तुशमुल और जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ मलैया
इसी इलाके में बीजेपी के सांसद प्रभात झा के बेटे तुशमुल में गाहे बगाहे राजनैतिक मंचों पर नज़र आ जाते हैं. दमोह में सूबे के वित्त मंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ मलैया का रुतबा देखने लायक है.कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश और  सुमित्रा महाजन के बेटे मंदार महाजन
इंदौर के राजकुमारों में बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश का भी नाम शामिल है. आकाश अपने लिए सियासी सीट की तलाश में हैं.लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन 75 पार कर चुकी हैं. अगर बीजेपी का 75 पार वाला फार्मूला आगे भी चला तो वो अपने बेटे मंदार महाजन पर विधानसभा चुनाव में ही दांव लगा सकती हैं
गौरी शंकर बेटे मुदित और गोपाल भार्गव  के बेटे अभिषेक
वन मंत्री गौरी शंकर शैजवार ने तो जैसे चुनावी राजनीति से संन्यास लेने का मन ही बना लिया है. उनकी चली तो बेटे मुदित को इस बार सांची से विधानसभा टिकट दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. सागर जिले से गोपाल भार्गव सात बार से विधायक हैं,  बीते 15 साल से मंत्री हैं. उनकी ज़ुबां पर अपने बेटे अभिषेक भार्गव का नाम अकसर होता है. जनता से कनेक्ट कैसे बनाना है यह तो अभिषेक ने अपने पिताजी से सीख लिया है. बस कसर है टिकट मिलने की.एमपी बीजेपी अध्यक्ष राकेश सिंह कहते हैं कि हम सवाल इसलिए उठाते हैं कि कांग्रेस एक परिवार की संपत्ति है. बीजेपी देश के ग्यारह करोड़ कार्यकर्ताओं का परिवार है.बहरहाल, इस विधानसभा चुनाव में किसको टिकट मिलेगी यह तो भारतीय जनता पार्टी की सर्वे रिपोर्ट तय करेगी. बीजेपी के मुताबिक पार्टी कभी इस आधार पर टिकट नहीं देती कि कोई किसी नेता का बेटा है.