क्या जरूरत पड़ी की रात को 1 बजे सेठ जी को कांग्रेस प्रत्याशी से मिलना पड़ा*

*सेठ जी से हुई कोलारस एमएलए की शिवपुरी में गुप्त मीटिंग*

*देर रात हुई मीटिंग, मीटिंग बनी चर्चा का विषय*

*क्या जरूरत पड़ी की रात को 1 बजे सेठ जी को कांग्रेस प्रत्याशी से मिलना पड़ा*

*शिवपुरी* -चुनाव में विजय पाने के लिए साम दाम दंड भेद सभी काम होते है और जरूरी भी है क्योंकि चुनाव जो जीतना है राजनीति में सब जायज़ है, और आज देर रात कोलारस विधायक एक बंद कमरे में भाजपा नेता से चर्चा करते देखे गए और यह चर्चा चुनावी मौसम क्यों हुई ये भी सब जानते है।

*टिकट दावेदार थे दोनों सेठ जी*

विधायक द्वारा जिस नेता से बात की है वह दोनों भाई चुनावी मैदान में उतरने के लिए टिकट की दावेदारी भी कर रहे थे किंतु टिकट किसी और को मिला अब यह भी कहा जा सकता है कि टिकट नही मिलने से मैदान में उतरने वाले प्रत्याशी के विरुद्ध रणनीति बनाई जा रही हो।

*अगर भाजपा में भीतरघात हुआ तो भी प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि दिलायेगी विजयश्री*

पिछले 15 साल से काँग्रेस सत्ता सुख भोगने के लिये प्रयास कर रही है किंतु गुटबाजी के चलते सरकार बनाने से पीछे है और अब यह भाजपा में होगा तो शायद इनको भी चौथी बार सत्ता पाने में विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़े, किन्तु कुछ जगह यह देखना होगा कि पार्टी के प्रत्याशी अपनी व्यक्तिगत छवि के चलते सीट निकाल सकते है,चुनाव जीतने के लिए किसी भी पार्टी का चाहे वह छोटा कार्यकर्ता हो या बड़ा कार्यकर्ता सभी एक जुट हो जाते है किंतु अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए पार्टी के कुछ लोग मैदान में उतरे प्रत्याशी को मुँह की खिलाने के लिए पार्टी के लोग ही भीतरघात करेंगे तो कैसे काम होगा क्योंकि पार्टी को सत्ता में लाने के लिए प्रत्येक सीट की अहमियत होती है।

*सबसे बड़ा सवाल*

ऐसे क्या कारण थे कि सेठ जी को देर रात एक बजे काँग्रेस प्रत्याशी से गुप्त बैठक करनी पड़ी क्योंकि सेठ जी तो भाजपा से ताल्लुक रखते है यही बात इस गुप्त बैठक पर सवाल खड़े करती है क्योंकि अब चुनावी मौसम पूरे यौवन पर है।

*क्या कार्यवाही होगी सेठ जी पर ?*

कद्दावर नेता शिवपुरी चुनाव लड़े या कोई और नेता कही ओर से चुनाव लड़ते है तो ये सेठ बंधु विरोध करते है और पार्टी के आला नेता इन पर कोई कार्यवाही क्यो नही करते है क्या पार्टी इनके धनबल के आगे नतमस्तक है, और देखना ये होगा कि पार्टी स्तर पर इन पर क्या कार्यवाही होती है।

*जब पोल खुली दोनों नेताओ की* 

जैसे ही या बात लीक हुई तो मीडिया के एक ग्रुप ने जाकर दोनों नेताओ को रंगेहाथों पकड़ लिया,मीडिया के एक ग्रुप के पहुंचने के बाद सेठ जी तो दुम दबाकर भाग गए लेकिन प्रत्याशी साहब इस मीडिया के ग्रुप के लपेटे में आ गए, इस ग्रुप को देखकर नेताजी के चेहरे की हवाइयां उड़ गई,जब उनसे सवाल किया कि रात को 1 बजे विरोधी नेता से बैठक करने की क्या आवश्यकता आन पड़ी और अपना सारा काम छोड़कर किस लिए मिलने आये हो जिस पर उन्होंने स्वीकार भी किया कि हाँ हमारी बैठक चल रही थी, और कहा कि राजनीति में सब जायज़ है, एक विधानसभा सीट पर भाजपा के समर्थन में और दूरी विधानसभा सीट पर भाजपा को कैसे हराया जाये यह बहुत अच्छे से सेठ जी जानते है और राजनीति क्या होती है यह भी सेठ जी भलीभांति जानते है आज आप जिनके समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे है पहले तो आप उनके घुर विरोधी थे विरोध करना या समर्थन करना ये आप लोगो की राजनीति है हमारा काम तो लोगो को जागरूक करना है जल्द ही दोनों की मुलाकात का रोचक वीडियो भी जारी किया जाएगा ।