मोदी ने जिन क्षेत्रों में की रैली वहां वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, राहुल की रैली वाले पांच क्षेत्रों में कम हुआ मतदान

भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के लिए 75 फीसदी वोटिंग हुई है। कई जिलों में वोटिंग प्रतिशत 80 फीसदी भी रहा। बढ़ा हुआ मतदान सत्ता परिवर्तन करेगा या सत्तापक्ष को फिर से मौका देगा इसका फैसला 11 दिसंबर को होगा। मतदान बढ़ाने के लिए लगातार प्रदेश में कैंपेन चलाए गए। तो सभी दलों ने लोगों से मतदान करने की अपील की थी। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में एक नारा दिया था 'पहले मतदान फिर जलपान।' पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश में 10 रैलियां की और हर रैली में लोगों से अपील करते हुए कहा कि आप पोलिंग बूथ पर जाकर मतदान करें। वहीं, राहुल गांधी ने प्रदेश में कई रैलियां की और लोगों से वोटिंग की अपील की। अगर बात उन क्षेत्रों की जाए जहां पीएम मोदी और राहुल गांधी सरीखे नेताओं ने रैलियां की तो सवाल उठता है उन क्षेत्रों में मतदान बढ़ा या फिर घटा। सबसे पहले बात भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची पहले नंबर के नेता और देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की...


दिन 5 रैलियां 10 : मध्यप्रदेश में भाजपा को चौथी बार सत्ता दिलाने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सियासी रण में उतरे। पीएम मोदी ने 16 नवंबर से प्रदेश में चुनावी कैंपेन शुरू किया। उन्होंने प्रदेश की करीब 200 विधानसभा सीटों को कवर करने के लिए 10 रैलियां कीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 16 नवंबर को ग्वालियर और शहडोल, 18 नवंबर को छिंदवाड़ा-इंदौर, 20 नवंबर को झाबुआ-रीवा, 24 नवंबर को मंदसौर-छतरपुर और 25 नवंबर को विदिशा और जबलपुर में चुनावी रैलियों को संबोधित किया।


मोदी की रैली वाले क्षेत्र में वोटिंग का ग्राफ
पीएम मोदी ने मंदसौर जिले में रैली को संबोधित किया। मंदसौर में 2013 में 80.86% फीसदी वोटिंग हुई थी जबकि इस बार मंदसौर में 81.27% फीसदी वोटिंग हुई। 
रीवा में 2013 में 62.49% फीसदी वोटिंग हुई थी 2018 में 67% फीसदी वोटिंग हुई। 
छिंदवाड़ा में 2013 में 78.10% 2018 में 79% फीसदी वोटिंग हुई। 
झाबुआ में 2013 में 54.41% फीसदी वोटिंग हुई थी 2018 में 74% फीसदी मतदान हुआ। 
विदिशा में 2013 में 71.87% वोटिंग हुई तो इस बार 72% प्रतिशत मतदान हुआ। 
जबलपुर कैंट में भी मोदी ने जनसभा की। 2013 में 63.86% फीसदी वोटिंग हुई थी इस बार यहां 67% प्रतिशत मतदान हुआ।



राहुल गांधी ने भी ताबडतोड़ रैलियां : राहुल गांधी ने भी मध्यप्रदेश में ताबडतोड़ रैलियां की। उन्होंने आचार संहिता लगने से पहले ही मध्यप्रदेश के दौरे शुरू कर दिए थे। आचार संहिता लगने के बाद उन्होंने प्रदेश में कई रैलियों को संबोधित किया। उनके द्वारा की गई रैलियों में कई क्षेत्रों में वोटिंग प्रतिशत बढ़ा तो कई क्षेत्रों में वोटिंग प्रतिशत कम हुआ।


इन क्षेत्रों में बढ़ा वोटिंग प्रतिशत: देवरी विधानसभा सीट पर 2013 में 71.32% फीसदी मतदान हुआ था। इस बार यहां 73% फीसदी मतदान हुआ। 
मंडला में 2013 में 73.78% वोटिंग हुई थी जबकि इस बार यहां 75% मतदान हुआ। 
सागर जिले में 2013 में 64.12% फीसदी वोट पड़े थे जबकि इस बार 65% वोट पड़े हैं। 
दमोह में 71.29% फीसदी मतदान 2013 में हुआ था वहीं, 72% फीसदी वोटिंग 2018 में हुआ।



यहां कम हुई वोटिंग
भोजपुर में 2013 में 71.74% मतदान हुआ था जबकि इस बार 70% वोटिंग हुई है।
बासोदा में 73.51% फीसदी वोटिंग 2013 में हुआ था इस बार यहां कम हुई है इस बार यहां 69% फीसदी वोटिंग हुई है। 
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सीट बुदनी में भी राहुल ने सभा को संबोधित किया था लेकिन 2013 के मुकाबले यहां वोटिंग प्रतिशत गिरा है। 2013 में 79.20% इस बार यहां 71% वोटिंग हुई है। 
टीकमगढ़ में 2013 में 72.19 % जबकि इस बार 68% फीसदी वोटिंग हुई है। 
बरघाट विधानसभा में 79.45% 2013 में हुई थी इस बार यहां 71% वोटिंग हुई है।


 


क्या हैं बड़े हुए मतदान के मायने: राजनीति शास्त्र के रिटायर्ड शिक्षक चंद्रिका प्रसाद दुवेद्धी का कहना है, मतदान का बड़ा हुआ प्रतिशत हमेशा सत्ता पक्ष के खिलाफ आक्रोश का प्रदर्शन करता है, लेकिन मतदान के प्रति लोगों की बढ़ रही जागरूकता भी अब वोटिंग प्रतिशत बढ़ने का एक कारण है। बढ़ा हुआ मतदान सत्ता पक्ष के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है तो विपक्ष को भी बैचन करता है। मध्यप्रदेश में इस बार का बढ़ा हुआ वोटिंग प्रतिशत कहीं ना कहीं भाजपा के लिए चिंता का विषय है। जिस तरह से जनता घरों से निकलकर पोलिंग बूथों तक पहुंची है उससे जाहिर है कि वोट बदलाव के लिए किया गया है। हांलाकि उनका यह भी कहना है कि हर बार जरूरी नहीं की बढ़ा हुआ मतदान सत्ता पक्ष के खिलाफ ही जाए 2008 के मुकाबले 2013 में मतदान बढ़ा था पर फायदा सत्ता पक्ष को ही हुआ था।