मतदान आज, तोड़ दो वोट डालने के सारे रिकार्ड

आज त्योहार है। आज मतदान है। सभी को जाना है। अपना वोट देना है। सोझ-समझ कर बटन दबाना है। फिर मौका पांच साल बाद आएगा। खुद तो वोट देने जाना ही, परिवार के सभी सदस्यों को भी ले जाना। जब वोट डालने निकलना तो कुंडी पड़ोसियों के घर की भी बजा देना। फेसबुक की वॉल पर लिखना...व्हाटस ऐप से मैसेज भेजना....वीडियो कॉल भी करना....सबसे कहना वोट जरूर देना। यह एक ऐसा मौका, जिसमें आप किसी से भी बंद बोलचाल शुरू कर सकते हैं। नाराज व्यक्ति से बातचीत का सिलसिला वोट के जरिए शुरू हो सकता है। जो भी आप से नाराज हो, उससे कहना है कि मेरे लिए नहीं, देश और प्रदेश के विकास के लिए आओ चलें, वोट डाल कर आएं।


जिम्मेदारी बस इतनी ही नहीं है कि खुद का वोट डाल आए, इससे बड़ी भी जिम्मेदारी निभानी है, वह जिम्मेदारी दूसरों को वोट डालने के प्रति जागरूक करने की। अगर आपके अंदर विकास न होने का गुस्सा भरा हुआ है, उसे भी आज वोट डाल कर निकाल सकते हैं। अगर आपका कोई काम हुआ है, विकास हुआ है तो उसका धन्यवाद भी वोट देकर कर सकते हैं। जब भी आप अपना मोबाइल उठाना, उस मोबाइल से कम से कम दस उन लोगों को मैसेज जरूर करिएगा, जो जिन्हें आप जानते हैं कि वह वोट देने में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। उन लोगों को तो जरूर फोन करना, जो वोट नहीं देते हैं और विकास न होने की बात पर लंबा-चौड़ा भाषण देते हैं। अगर आप वोट देने जा रहे हैं, रास्ते में कोई बुजुर्ग मिल जाए तो उसे मतदान केंद्र तक के लिए सहारा दे देना और हो सके तो वोट देने के बाद उसे घर तक छोड़ देना। कोई भी दिव्यांग मिल जाए तो उसकी भी पूरी मदद करना। यह बहुत बड़ा मेला है, इस मेले में वोट देना लोग अक्सर भूल जाते हैं। उन लोगों पर नजर जरूर रखना, उन्हें वोट डालने के लिए घरों से जरूर निकालना। जानते हैं कि आपकों वोट डालने के लिए जागरूक करने के लिए बच्चों ने भी बहुत मेहनत की है। तमाम रैलियों में यह बच्चे स्कूल की ड्रेस में नारे लगाते हुए सड़कों पर निकले हैं, उनके पैरों में छाले भी पड़ गए थे चलते-चलते। इनका गला सूख गया था नारे लगाते हुए। जब वह घर पहुंचे थे तो बहुत थके हुए थे, आपने पूछा भी होगा कि क्या हुआ बेटा, इतने थके हुए क्यों लग रहे हो, बच्चों ने बताया भी होगा। इन बच्चों की खातिर सही, लेकिन वोट डालने जरूर जाना। इस बार वोट डालने के सारे रिकार्ड आपकों तोड़ देने हैं। कम से कम अन्य जिले के लोगों को भी पता लगे कि शिवपुरी वाले लोकतंत्र के त्योहार को कितनी उत्सुकता के साथ मनाते हैं।