PM मोदी के बराबर हो जाएंगे शिवराज या बनेगी कांग्रेस की सरकार

भोपाल। मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को वोटिंग के बाद अब विश्लेषण और कयासों का दौर शुरू हो गया है। हर मतदाता इसी उधेड़बुन में है कि मध्यप्रदेश में कोई बदलाव होगा या फिर से शिवराज सरकार सत्ता पर काबिज हो जाएगी।


मध्यप्रदेश का भाग्य ईवीएम में बंद हो गया है। 11 दिसंबर को सुबह भाग्य का पिटारा खुल जाएगा। सुबह 11 बजे तक स्पष्ट संकेत मिलने लग जाएंगे कि मतदाताओं ने किस को चुना है।


 


क्या पीएम मोदी की बराबरी करेंगे शिवराज
इस चुनाव के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बराबरी कर लेंगे या कांग्रेस फिर वनवास खत्म करके सत्ता में आ जाएगी। विश्लेषक कहते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह 2005 में मुख्यमंत्री बने थे। मध्यप्रदेश में तो शिवराज सिंह सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री बने रहने वाले पहले व्यक्ति हो गए हैं। 
-जबकि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी गुजरात के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
-मोदी 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के 11वें मुख्यमंत्री बने थे।
-इसके बाद वे चार बार लगातार मुख्यमंत्री बने रहे।
-7 अक्टूबर 2001 से 22 मई 2014 तक मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने रहे।
-लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री बने रहने का रिकार्ड भी मोदी के नाम पर है।
-यदि शिवराज सिंह चौहान फिर मुख्यमंत्री बन जाते हैं तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बराबरी कर लेंगे।


 


यह है शिवराज का कार्यकाल
-शिवराज सिंह 29 नवंबर 2005 को पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद 2008 में भी भाजपा की वापसी हुई और दोबारा मुख्यमंत्री चुने गए। 12 दिसंबर 2008 को शपथ ली थी।
-2013 में भी शिवराज के नेतृत्व में भाजपा ने तीसरी बार सरकार बनाई। शिवराज ने 13 दिसंबर 2013 को जीत हासिल को शपथ ली थी।


 


तो तीन चौथाई बहुमत मिला था
इधर, विधानसभा चुनाव 2018 में मत प्रतिशत और भी बढ़ गया है। इससे पहले चुनाव में भी शिवराज को जीत मिली थी, तब 7 फीसदी मत ज्यादा मिले थे। इस कारण भाजपा तीन चौथाई बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। इस बार दो प्रतिशत और बढ़ गया है।



यह है 90 प्रतिशत का गेम
इधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के बयान के बाद भाजपा ने बड़ा दांव खेला था। चुनाव वाले दिन जो विज्ञापन प्रकाशित हुआ उसमें 90 प्रतिशत मतदान की अपील की गई थी। यह जानबूझकर दिया गया था, जिससे कमलनाथ के उस बयान की याद दिलाई जा सके, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुसलमान 90 प्रतिशत मतदान नहीं करेंगे तो कांग्रेस को भारी नुकसान होगा।