अनुकंपा नियुक्ति के आदेश पर 3 माह में नहीं किया विचार तो होगा ऐसा

जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने अवमानना याचिका का निराकरण करते हुए 3 माह के भीतर अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर विचार करने निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों को चेताया भी है कि यदि तय समय पर ऐसा नहीं होता है तो उनसे कॉस्ट की वसूली की जाएगी।

दमोह बटियागढ़ निवासी गुड्डू लाल चक्रवर्ती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि दमोह में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत उसके पिता पूरनलाल चक्रवर्ती की कार्य के दौरान एक अगस्त 2017 को मृत्यु हो गई थी। शासन के नियमों के तहत उसने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया,लेकिन उसे अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी गई।

इसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई जिस पर कोर्ट ने 7 फरवरी 2018 को निर्देश दिया कि 3 माह के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार किया जाए। लेकिन आदेश के बाद भी उसे किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली।

इसी वजह से इस मामले में दमोह कलेक्टर डॉ. जे विजय कुमार और जिला शिक्षा अधिकारी एसएन हसन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध पांडे ने तर्क दिया कि आदेश के बाद भी अनावेदक याचिकाकर्ता के अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन पर विचार नहीं कर रहे हैं।

सुनवाई के बाद एकल पीठ ने जिम्मेदार अधिकारियों को चेतावनी के साथ 3 माह में अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन पर विचार करने का आदेश दिया है।