भाजपा में नेता प्रतिपक्ष को लेकर मशक्कत, शिवराज, गोपाल और नरोत्तम के नाम दौड़ में

भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। डेढ़ दशक तक सत्ता में रहने के बाद भाजपा अब विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभाएगी। मतदाताओं ने पहली बार सशक्त विपक्ष के रूप में भाजपा के 109 विधायकों को चुनकर भेजा है। नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गोपाल भार्गव और डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है।

पार्टी हाईकमान ने फिलहाल इस मुद्दे पर 'वेट एंड वाच" वाली मुद्रा अपना ली है। नेता प्रतिपक्ष कौन बनेगा, इसका फैसला भाजपा संसदीय दल की बैठक में होता है। इसलिए इस बात की संभावना कम है कि जल्दी ही पार्टी कोई नाम तय करे। पार्टी के अंदरखानों में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गोपाल भार्गव और डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम दावेदारों के रूप में लिया जा रहा है।

इसके अलावा विधानसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को दिए जाने की परंपरा है। इसलिए इस पद के लिए भी भाजपा विधायक दल में सुगबुगाहट का दौर चल पड़ा है। भाजपा शासनकाल में यह पद विंध्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. राजेंद्र सिंह के पास था। विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा को विंध्य अंचल से उम्मीद से ज्यादा सीटें मिली हैं, इसलिए इस बात की संभावना है कि उपाध्यक्ष की ताजपोशी के लिए पार्टी के वरिष्ठ विधायक केदार शुक्ला अथवा राजेंद्र शुक्ला का नाम आगे बढ़ा दिया जाए। इनके अलावा बुंदेलखंड अंचल से पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह के नाम की चर्चा भी चल पड़ी है।
7 जनवरी को नई विधानसभा का सत्र शुरू होगा, उस दिन सभी विधायकों की शपथ होगी। उसके अगले दिन राज्यपाल का अभिभाषण होगा। भाजपा में यदि तब तक नेता प्रतिपक्ष के नाम का फैसला नहीं हो पाता है तो कार्यवाहक के रूप में किसी वरिष्ठ सदस्य को मनोनीत किया जा सकता है। भाजपा राष्ट्रीय परिषद की बैठक जनवरी में आयोजित की जा रही है। इसलिए इस बात की संभावना भी है कि इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष का निर्णय किया जाए।

अभी कोई सूचना नहीं

यह विषय विधायक दल, भाजपा पार्लियामेंट बोर्ड और प्रदेश नेतृत्व के अधिकार क्षेत्र का है। अधिकृत तौर पर अभी तक इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई है- रजनीश अग्रवाल, प्रवक्ता मप्र भाजपा