MP में पेंशन बंद करने की तैयारी! विधानसभा में आएगा विधेयक, ड्राफ्ट तैयार

भोपाल। भाजपा को सत्ता से बाहर करने के बाद कमलनाथ सरकार मीसाबंदी सम्मान निधि से मिलने वाली पेंशन बंद करने जा रही है। सरकार ने विस्तृत अध्ययन करने के बाद मीसाबंदी सम्मान निधि विधेयक को निरस्त करने के लिए मसौदा तैयार कर लिया है।


यह मसौदा फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय में है। इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में निरसन विधेयक के रूप में पहले सत्र में ही प्रस्तुत किया जाएगा। इस पेंशन का फायदा संघ पृष्ठभूमि के बड़े नेताओं को मिल रहा है। कांग्रेस सरकार ने इसे फिजूलखर्ची बताकर कानून निरस्त करने की तैयारी की है।


यह पेंशन आपातकाल के दौरान मीसा कानून के तहत जेल गए लोगों को दी जाती है। प्रदेश में फिलहाल दो हजार से ज्यादा मीसाबंदी हैं। इन्हें वर्तमान में 25 हजार रुपए मासिक राशि मिल रही है। इस पर करीब 70 करोड़ रुपए सालाना खर्च होते हैं।


सरकार के इस कदम से प्रदेश में नया सियासी बवाल खड़ा हो सकता है। मीसाबंदियों के संगठन लोकतंत्र सेनानी संघ ने कांग्रेस सरकार को चेतावनी दी है कि पेंशन बंद हुई तो संगठन प्रदेश सरकार के निर्णय के खिलाफ हाइकोर्ट में जाएगा।


भाजपा के दिग्गज नेता भी फायदा लेने वालों में... 
प्रदेश में मीसाबंदी पेंशन का फायदा लेने वालों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पृष्ठभूमि के बड़े नेताओं के नाम भी हैं। प्रदेश में फिलहाल दो हजार से अधिक मीसाबंदी इस योजना का लाभ ले रहे हैं।


इनमें कुछ नेता मुख्यमंत्री जैसे ओहदे तक भी पहुंच चुके हैं। पेंशन का फायदा लेने वाले प्रमुख लोगों में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, शरद जैन, नागेन्द्र नागौद, रामकृष्ण कुसमरिया, राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी, उप लोकायुक्त यूसी माहेश्वरी और पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी भी हैं।


चुनाव से पहले बना लिया था कानून
भा जपा सरकार को अंदेशा था कि कांग्रेस सरकार आने पर यह सम्मान निधि बंद की जा सकती है। ऐसे में मीसाबंदियों को पेंशन देने के लिए 20 जून 2008 को बनाए गए लोक नायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि नियम को चुनाव से पहले जून 2018 में लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम के रूप में विधानसभा से विधेयक मंजूर करवा लिया।


इसे खत्म करने के लिए नई सरकार को भाजपा की आलोचना सहन करनी होगी। सरकार जैसे ही विधानसभा में कानून निरस्त का विधेयक लाएगी, भाजपा इसका पुरजोर विरोध करेगी।


प्रदेश में ऐसे बढ़ती गई मीसाबंदी पेंशन
- जून 2008 में शिवराज सरकार ने 6 माह से कम जेल में रहने वालों को 3 हजार और 6 माह से अधिक जेल में रहे मीसाबंदियों को 6 हजार की पेंशन देने की योजना लागू की थी।


- 2012 में मीसाबंदियों ने सरकार पर दबाव बनाया कि पेंशन राशि में बढ़ोतरी की जाए। इसके बाद सरकार ने पेंशन राशि बढ़ाकर 10 हजार और 15 हजार रुपए कर दी।


- 2016 में सरकार ने सभी मीसाबंदियों को 25 हजार पेंशन देने के नियम जारी किए। इसमें जेल में एक माह से अधिक समय तक रहने वालों को भी सरकार ने पेंशन का पात्र बनाया।


- 2017 में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत के महज 13 दिन जेल में रहने पर पेंशन पाने का विवाद उठा। तब नियम बदले और एक दिन भी जेल गए लोगों को इसका पात्र बनाया।


- जून 2018 में सरकार ने पेंशन को सुरक्षित रखने के लिए विधेयक तैयार किया और विधानसभा से लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2018 पारित करवा लिया।


अपनों को रेवड़ी बांटने का जरिया
भाजपा सरकारों ने अपनों को रेवड़ी बांटने के लिए ऐसी फिजूलखर्ची की है। सरकार मीसाबंदी पेंशन बंद करेगी। उन संस्थाओं पर भी ताला लगेगा, जो संघ का एजेंडा लागू करने के लिए बनाई गई थीं।
- शोभा ओझा, कांग्रेस मीडिया प्रभारी


पेंशन बंद हुई तो कोर्ट जाएंगे
सरकार ने पेंशन बंद की तो कोर्ट जाएंगे। उत्तर प्रदेश और राजस्थान हाइकोर्ट के आदेश हमारे पास हैं। मीसाबंदी पेंशन बंद करने पर मायावती सरकार चली गई थी। राजस्थान में भी ऐसा ही हुआ। 
- तपन भौमिक, अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी


नई सरकार के कदम: योजनाओं से दीनदयाल का नाम हटाएगी सरकार...
कांग्रेस सरकार प्रदेश में ऐसी योजनाओं का नामकरण बदलने की तैयारी कर रही है, जिनका नाम दीनदयाल उपाध्याय से जुड़ा है। फिलहाल प्रदेश में एक दर्जन योजनाएं दीनदयाल के नाम पर चल रही हैं।


इनमें दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, दीनदयाल रसोई योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना, दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना, दीनदयाल मोबाइल हॉस्पिटल योजना, दीनदयाल उपाध्याय स्वास्थ्य सेवा योजना, दीनदयाल अंत्योदय कार्ड, दीनदयाल समर्थ योजना और दीनदयाल स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन प्रमुख हैं।


कांग्रेस का मानना है कि दीनदयाल के नाम पर योजनाएं चलाकर पुरानी भाजपा सरकार ने प्रदेश में संघ का एजेंडा लागू करने की कोशिश की है।


नई सरकार प्रदेश में नर्मदा सेवा यात्रा और आदि शंकराचार्य एकात्म यात्रा का संचालन करने वाली जन अभियान परिषद को भी बंद करने पर विचार कर रही है।


सरकार से जुड़े लोगों का कहना है कि परिषद को भाजपा शासन ने इन्हें संघ का कार्यक्रम कराने वाली एजेंसी बना दिया था। इसमें संघ से जुड़े लोगों की नियुक्ति कर आर्थिक अनियमितताएं की गई हैं। सरकार इनकी जांच कर संघ से जुड़े लोगों की नियुक्तियां रद्द करेगी।