कांग्रेस सरकार बगावत आर या पार , MP में कभी भी गिर सकती है कांग्रेस ​की सरकार

भोपाल। भाजपा द्वारा प्रदेश में जल्द ही सत्ता पर वापस काबिज होने की बातों के बीच अब ये भाजपा के बयान सच होते दिख रहे हैं। तमाम तरह की बयान-बाजियों के बीच कांग्रेस द्वारा मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज कांग्रेस के विधायक बगावत पर उतर आए हैं।


वहीं इनके अलावा निर्दलीय व छोटी पार्टियों के विधायक भी जो कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं, बताया जाता है कि वे भी कांग्रेस द्वारा मंत्री पद नहीं दिए जाने से नाराज हो गए हैं। जिसके चलते सूत्रों के अनुसार वे भी सरकार से समर्थन वापसी का विचार कर रहे हैं।


वहीं कुछ दिनों पहले ही केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने प्रदेश मेंं भाजपा की हार की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में संकेत दिए थे कि प्रदेश में जल्द ही भाजपा सत्ता में आ सकती है।


रविवार को स्थानीय उत्सव भवन में सत्ता से जाने के बाद भाजपा का पहला कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया था। ऐसे में अब कांग्रेस के सामने खड़े हुए इस संकट को कई लोग भाजपा की नई रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं।


कांग्रेस में बगावत...
वहीं गुरुवार को सामने आई कांग्रेस में ये बगावत और समर्थकों के विरोध में आने से मध्यप्रदेश में 15 साल बाद वापस सत्ता में आई कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। वहीं विरोध के स्वर सहित इस्तीफे के सामने आने से सरकार में हड़कंप मच गया है।


ऐसे में सूत्रों का कहना है इस आपात स्थिति में कांग्रेस के कई नेता मुश्किल के दौर से निकलने के लिए जल्द ही मिंटिग करने जा रहे हैं।


ये है मामला...
दरअसल मध्यप्रदेश में 2018 में बनी कांग्रेस सरकार के मंत्रियों को विभाग दिए जाने से पहले ही कांग्रेस में दो फाड़ की स्थिति आ गई है। ऐसे में सरकार को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गईं हैं।


वहीं बताया जाता है कि नाराज कांग्रेसी किसी भी स्थिति में बिना अपने क्षेत्र को उपेक्षा को लेकर तैयार नहीं हैं। वे किसी भी स्थिति में अपने क्षेत्र के एक नेता व वरिष्ठ नेताओं को कैबिनेट में जगह दिलवाना चाहते हैं।


सामने आ रही सूचना के अनुसार अपने क्षेत्र को उपेक्षा से बचाने के लिए कांग्रेस विधायकों ने बगावत शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर ये भी सूचना आ रही है कि सपा, बसपा सहित निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार से अपने हाथ पीछे खींच लेने का निर्णय ले लिया हैं।


सूत्रों के अनुसार यदि कल तक इन निर्दलीय विधायकों को सरकार में शामिल नहीं किया जाता है, तो वे सरकार से समर्थन वापस ले सकते हैं। ऐसे में कमलनाथ सरकार के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।


इन्होंने दिया इस्तीफा...
: मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने से नाराज पूर्व मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के समर्थन में सरकार बनने के बाद कांग्रेस पार्टी से पहला इस्तीफा।
: सुमावली विधानसभा से ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मदन शर्मा ने दिया इस्तीफा।

बताया जाता है कि वे मुरैना श्योपुर से 8 में से 7 सीट जीतने के बाद भी कांग्रेस से किसी को भी मंत्री नहीं बनाए जाने से हैं। साथ ही इनकी ओर से सरकार पर मुरैना जिले की उपेक्षा का आरोप भी लगाया गया है। वहीं चर्चा है कि मदन शर्मा के इस्तीफे के बाद मुरैना से और भी कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी छोड़ सकते हैं।



गिर जाएगी सरकार!


दरअसल मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 114 सीटें मिली थी वहीं यहां भाजपा को 109 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा। जबकि अन्य निर्दलीय व छोटे दलों को मिली।


ऐसे में कांग्रेस को बहुमत के लिए इन अन्य से सहयोग लेना पड़ा। वहीं जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस में दो फाड़ होते हैं, या निर्दलीय सहित बसपा व सपा विधायक अपना समर्थन वापस ले लेते हैं, तो सरकार गिरना तय माना जा रहा है।


वहीं इससे पहले शपथ ग्रहण समारोह वाले दिन भी निर्दलीय विधायकों ने कार्यक्रम से दूरी बना ली थी। इसी दिन यानि मंगलवार की सुबह 
सरकार के मंत्रिमंडल की घोषणा के साथ ही मंगलवार को सभी निर्दलीय व छोटे दलों के सदस्यों ने एक साथ मीटिंग की। जो तकरीब 1 घंटे तक चली, इसके बाद सभी एक साथ होटल से निकल गए।


सूत्रों का कहना था कि सरकार के लिए सहयोग देने वाले इन सदस्यों की गुपचुप तरीके से हुई इस मीटिंग के चलते हर कोई सकते में आ गया है। वहीं लोग इसे भाजपा के पूराने बयानों से जोड़ते हुए देख रहे है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि इन सदस्यों ने कोई कड़ा फैसला लिया है तो कांग्रेस को सरकार से हटना पड़ सकता है।