Union Budget 2019-20 LIVE: मोदी सरकार का अंतरिम बजट, जानिए मध्यप्रदेश की झोली में क्या मिला
भोपाल। मोदी सरकार के अंतरिम बजट पर मध्यप्रदेश की निगाहें टिक गई है। प्रभारी वित्त मंत्री पीयूष गोयल मोदी सरकार का अंतरिम बजट पेश कर रहे हैं। बजट भाषण में उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।

एक फरवरी को पेश होने वाले अंतरिम बजट को इस बार वित्त मंत्री अरुण जेटली की जगह रेल मंत्री पीयूष गोयल पेश कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले पेश हो रहे इस बजट में मध्यप्रदेश के हर वर्ग की उम्मीदें लग गई हैं। जेटली इलाज के लिए विदेश में हैं, इसलिए रेल मंत्री गोयल को वित्त एवं कार्पोरेट मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

-गांवों में भी शहरो जैसी सुविधा पर जोर दिया।
-ग्राम संपर्क योजना पर 19 हजार करोड़।
-गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिल गई।
-टैक्स और बैंकिंग सेक्टर में सुधार हुआ।
-मनरेगा के लिए 7 हजार करोड़ दिए गए।
-1 लाख 17 हजार करोड़ रुपए गरीबों को अनाज के लिए दिया गया।
-एनपीए कम करने पर जोर दिया गया।
-आरक्षण व्यवस्था में छेड़छाड़ नहीं की।।
-स्वच्छता को लेकर सरकार ने कई प्रयास किए।
-सरकार ने गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिया।
-रेरा से बेनामी संपत्ति में पारदर्शिता आई।
-आर्थिक भगोड़ों के लिए कानून बनाए।
-कर्ज न चुकाने वाले अब पैसे दे रहे हैं।
राज्यों को 42 प्रतिशत शेयर दिया।
-पिछली सरकारों में कई गुना योजनाएं अधूरी रहीं।
बैंकिंग सेक्टर में तेजी से सुधार हुआ।
2022 तक हम नया भारत बनाएंगे।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर चाहते हैं कमी
भोपाल के संतोष नायडू का मानना है कि मोदी सरकार आयकर की सीमा बढ़ाए तो अच्छी बात है, इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी के लिए भी कोई पुख्ता इंतजाम होना चाहिए।
भाजपा शासित केंद्र सरकार का केंद्रीय बजट इसलिए भी खास है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार हाल ही में बनी है। ऐसी स्थिति में व्यापारी, युवा, छात्र, कर्मचारी राहत की उम्मीद कर रहे हैं। भोपाल के लोग कहते हैं कि इस बार बजट कुछ खास होने वाला है। लुभावना न होकर बजट हर वर्ग के लिहाज से संतुलित होना चाहिए।
क्या बोले लोग
भोपाल के राहुल ठाकुर कहते हैं कि केंद्र सरकार के बजट से हर वर्ग को काफी उम्मीदें हैं। बजट में टैक्स स्लैब को और बढ़ाना चाहिए। मध्यप्रदेश में तीसरी लाइन का काम तेज गति से होना चाहिए और तेज रफ्तार वाली ट्रेनें बढ़ाना चाहिए।
जीएसटी में मिले राहत
भोपाल के व्यापारी यह भी चाहते हैं कि उन्हें जीएसटी में राहत मिलना चाहिए। बजट में व्यापारियों के लिए बीमा योजना का लाभ देने के भी प्रावधान होना चाहिए।

www.Manthannews.inआपको बता रहा है कि अंतरिम बजट क्या है और यह कैसे पूर्ण बजट से अलग है।
वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट शुक्रवार को पेश हो रहा है। यह मोदी सरकार के आम बजट की जगह अंतरिम बजट होगा। बरसों से चली आ रही परंपरा के मुताबिक जिस वर्ष लोकसभा के चुनाव होने वाले होते हैं, केंद्र की सरकार पूरे वित्त वर्ष की जगह कुछ माह तक के लिए ही बजट पेश करती है। मोदी सरकार के लिए यह बजट भी अहम है, क्योंकि चंद महिने बाद ही लोकसभा चुनाव आने वाले हैं।
यह है अंतरिम बजट
जब केंद्र सरकार के पास पूर्ण बजट पेश करने के लिए समय नहीं बचता है तब वो सरकार अंतरिम बजट पेश करती है। केंद्र की मोदी सरकार भी अंतरिम बजट पेश कर रही है। यह पूरे साल की बजाय कुछ माह के लिए होता है। हालांकि, सरकार अंतरिम बजट ही पेश करे इसकी बाध्यता नहीं रहती है, लेकिन परंपरा ही है कि इसे अगली सरकार पर छोड़ा जाता है। जब नई सरकार आती है तो वो पूर्ण बजट (आम बजट) पेश करती है।
अंतरिम बजट और आम बजट में अंतर
दोनों ही बजट में सरकारी खर्चों के लिए संसद से मंजूरी लेना पड़ती है, लेकिन अंतरिम बजट आम बजट से अलग रहता है। अंतरिम बजट में सामान्यतः सरकार कोई नीतिगत फैसला नहीं करती। हालांकि, कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं रहती है। चुनाव के बाद गठित सरकार ही नीतिगत फैसले लेती है और नई योजनाओं की घोषणा करती है।
-हालांकि पिछले कुछ वित्त मंत्री टैक्स की दरों में कटौती जैसे नीतिगत फैसले भी ले चुके हैं। इस बार वित्त मंत्री अरुण जेटली के अंतरिम बजट से भी ऐसी ही उम्मीदें की जा रही हैं कि इनकम क्लास को टैक्स में छूट दी जा सकती है।
अंतरिम बजट और लेखानुदान में अंतर
जब केंद्र सरकार कुछ महिने के लिए संसद से जरूरी खर्च के लिए अनुमति मांगती है, तो वे अंतरिम बजट की बजाय वोट ऑन अकाउंट (लेखानुदान)पेश कर सकती है। अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट दोनों ही कुछ ही माह के लिए होते हैं, लेकिन दोनों के प्रस्तुतिकरण में अंतर है। अंतरिम बजट में केंद्र सरकार खर्च के अलावा राजस्व का भी ब्यौरा देती है, जबकि लेखानुदान में सिर्फ खर्च के लिए संसद से मंजूरी मांगी जाती है।
यह हैं चार बड़े तोहफे
मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले किसानों और आम जनता को चार बड़े तोहफे दे सकती है।
-खबरों के मुताबिक किसानों के खातों में सीधे फंड ट्रांसफर की स्कीम को हरी झंडी मिल सकती है।
-किसानों को ब्याजमुक्त ऋण की योजना का ऐलान संभव।
-मध्यम वर्ग को आयकर में राहत मिल सकती है।
-खबरों के मुताबिक आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपए तक किया जा सकता है। फिलहाल यह सीमा 2.5 लाख है।

Budget 2019 मोदी सरकार ने किसानों को लेकर बड़ी घोषणा की है. किसानों के मुद्दे पर मोदी सरकार लगातार दबाव में थी. ऐसे में सरकार ने किसानों की नाराजगी दूर करने और उन्हें आर्थिक संकट से बाहर निकालने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है.

Budget: किसानों को हर साल मोदी सरकार देगी 6 हजार रुपये
Budget 2019: किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो-PTI फाइल)

Budget 2019 में मोदी सरकार ने किसानों को लेकर बड़ी घोषणा की है. किसानों के मुद्दे पर मोदी सरकार लगातार दबाव में थी. ऐसे में सरकार ने किसानों की नाराजगी दूर करने और उन्हें आर्थिक संकट से बाहर निकालने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. किसानों को 6 हजार रुपये प्रति वर्ष की दर से मदद करने का ऐलान किया है.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को अंतरिम बजट 2019 पेश करते हुए किसानों को बड़ा तोहफा दिया है. सरकार ने चुनावी साल के चलते इस अंतरिम बजट में किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है. सरकार ने किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक मदद देने का फैसला करते हुए इनकम सपोर्ट प्रोग्राम का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास दो हेक्टयर जमीन हैं उन्हें हर साल 6 हजार रुपए दिया जाएगा.

पीयूष गोयल ने कहा कि ये 'पीएम किसान सम्मान निधि' योजना शुरू की है. इसके तहत कमजोर और छोटे किसान को हर साल  6 हजार  रुपए दिए जाएंगे ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके. ये  तीन किस्त 2 हजार -2 हजार रुपये मिलेंगे.ये पैसे सीधे किसानों के खाते में जाएंगे. इसकी 100 फीसदी सरकार फंडिंग करेगी.

पीयूष गोयल ने कहा कि ये स्कीम एक दिसंबर 2018 से लागू होगी. इससे देश के 12 करोड़ किसान परिवारों को इसका लाभ मिलेगा.  तीन किस्तों में किसानों को मिलेगा योजना का लाभ मिलेगा. इससे सरकार पर कुल 75 हजार करोड़ रुपए का खर्च बढ़ेगा

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को अंतरिम बजट 2019 पेश करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को मजबूत सरकार दी है. हमने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य रखा है. उन्होंने कहा कि फसल से आय को दोगुना करते हुए इतिहास में पहली बार सभी 22 फसलों की लागत का कम से कम 50 फीसदी अधिक निर्धारित किया.

मोदी सरकार ने गाय के लिए भी बजट में विशेष तवज्जो दी है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार ने राष्ट्रीय कामधेनु योजना का ऐलान. इसके साथ ही सरकार ने पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज में 2 प्रतिशत की छूट देने का ऐलान किया है. पीयूष गोयल ने बजट में ऐलान किया कि पशुपालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज मिलेगा

दरअसल विपक्ष खासकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी किसानों के मुद्दे पर मोदी सरकार को लगातार घेरते रहे हैं. कर्ज माफी को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है. इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल के महीनों में दिल्ली ये लेकर यूपी और महाराष्ट्र तक की सरकारें किसान आंदोलन की तपिश झेल चुकी हैं.




बजट 2019


वित्त मंत्री पीयूष गोयल मौजूदा सरकार का आखिरी और अंतरिम बजट शुक्रवार सुबह 11 बजे से पेश करेंगे। लोकसभा चुनाव की घोषणा से महज एक महीने पहले पेश होने वाले अंतरिम बजट के लोक लुभावन होने की पूरी संभावना है। इसमें नौकरीपेशा और किसानों से लेकर व्यापारी वर्ग तक के लिए घोषणाएं होने की संभावना है। 

सबसे ज्यादा उम्मीद आयकर छूट की सीमा बढ़ाने को लेकर है। अभी साल में ढाई लाख रुपये तक की आमदनी पर ही आयकर में छूट मिलती है। सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को दिए आरक्षण में आठ लाख रुपये कमाने वालों को गरीब माना है। ऐसे में लोग चाहते हैं कि आयकर छूट की सीमा आठ लाख रुपये तो कर ही दी जाए। सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारी आयकर छूट सीमा बढ़ाने पर सहमत हैं। सूत्रों का कहना है कि वेतनभोगियों को खुश करने के लिए आयकर कानून की धारा-80 सी के तहत निवेश पर छूट डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाई जा सकती है। 

बढ़ सकता है स्वास्थ्य क्षेत्र पर आवंटन

अंतरिम बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ सकता है। वहीं, हर फसल की बुवाई से पहले एक निश्चित रकम सीधे किसानों के खाते में भेजने की व्यवस्था दी जा सकती है। गरीबों के लिए यूनिवर्सल बेसिक स्कीम (यूबीआई) को अमलीजामा पहनाया जा सकता है।

जुलाई में पेश होगा आर्थिक सर्वेक्षण

इस बार अर्थव्यवस्था की हालत को लेकर कोई आर्थिक सर्वेक्षण पेश नहीं किया गया। नई सरकार बनने के बाद जुलाई में आर्थिक सर्वेक्षण के साथ पूर्ण बजट पेश किया जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था किस तरफ जा रही है। 
 


बजट से लोगों की उम्मीदें

साल में आठ लाख रुपये तक आयकर से छूट।


यूनिवर्सल बेसिक इनकम में साल में 12,000 रुपये।


सबसे लिये मुफ्त स्वास्थ्य सेवा।


छोटे कारोबारियों के लिए ब्याज मुक्त कर्ज।


निवेश पर कर छूट की सीमा में बढ़ोतरी।


2005-06 में बंद की गई स्टैंडर्ड डिडक्शन सुविधा शुरू की जाए।


चिकित्सा खर्च की करमुक्त प्रतिपूर्ति की सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाना। अंतिम बार 1998-99 में बढ़ी थी।


कर मुक्त क्रेच अलाउंस शुरू किया जाए।


एनपीएस खाते से कर मुक्त निकासी की सीमा 40 से बढ़ाकर 60 फीसदी करना।


वरिष्ठ नागरिकों को निवेश पर मिले ज्यादा ब्याज।


बजट में संभावित घोषणाएं 

साल में 4-5 लाख रुपये तक आयकर से छूट।


यूबीआई में 4-8 हजार रुपये सालाना।


आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाना।


प्रधानमंत्री आवास योजना की तरह छोटे कारोबारियों के लिए ब्याज में सब्सिडी।


आयकर कानून की धारा-80 सी के तहत 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी।




इंदौर। मध्यप्रदेश शासन ने भले ही पुलिस जवानों का तनाव दूर करने के लिए साप्ताहिक अवकाश ( MP Police Weekly Off) लागू करने का आदेश जारी कर दिया हो, लेकिन इसके बाद भी वीकली प्लान का रोस्टर लागू नहीं हो पा रहा है। अधिकारी लिखित आदेश नहीं मिलने का हवाला दे रहे हैं। बल की कमी होने का रोना तो विभाग सदियों से रो रहा है। कानून और व्यवस्था के लिए भले ही पुलिस लाइन में पर्याप्त बल मौजूद है, लेकिन थानों में बल की कमी की शिकायत कई बार सामने आ चुकी है। पहले रोस्टर सीएम के आदेश के बाद लागू करने की बात कही गई थी। बाद में अधिकृत घोषणा के बाद पुलिस जवानों का साप्ताहिक अवकाश मिलने की बात कही गई।

हाल ही में विभाग के आदेश का पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, लेकिन अब भी वीकली प्लान के लिए कोई पुख्ता तैयारी नहीं हो पाई है। जिले के सभी थानों में साप्ताहिक अवकाश लागू होने की घोषणा सोशल मीडिया और कागजों में भले ही लागू हो गई हो, लेकिन थानों में अब स्टाफ सप्ताह में एक दिन छुट्टी मिलने का इंतजार कर रहा है।

क्राइम ब्रांच ने जरूर पहले आदेश के बाद पालन शुरू कर दिया था। सीएम कमलनाथ के आदेश के बाद सभी थाना प्रभारियों से स्टाफ के वीकली प्लान का खाका तैयार करवाया था। इस सूची को एसपी के पास लागू करने के लिए भेजा गया था। एसपी पश्चिम सूरज वर्मा के अनुसार डीआईजी के आदेश के बाद पश्चिमी क्षेत्र के थानों के स्टाफ को सप्ताह में एक दिन छुट्टी मिलने लगेगी, जबकि एसपी पूर्व अवधेश गोस्वामी ने बताया कि सभी थाना प्रभारियों को रोस्टर लागू करने का निर्देश दे दिया गया था। थाना स्तर पर छुट्टी की व्यवस्था को लागू किया जाएगा। हालांकि की छुट्टी के कारण थानों में बल की कमी जरूर आएगी। लेकिन मैनेज करने के लिए डीआरपी लाइन के बल का प्रयोग किया जाएगा। इस बल का उपयोग जांच या कानून और व्यवस्था को मैनेज करने के लिए किया जाएगा।

बीट सिस्टम या थानों की जिम्मेदारी के लिए एक प्रशिक्षण की जरूरत होती है। लंबे समय से बीट संभाल रहे जवान थाने की जिम्मेदारी बखूबी निभा लेते हैं। शासन की घोषणा के बाद द्वारकापुरी और क्राइम ब्रांच में रोस्टर के अनुसार जवानों को वीकली ऑफ लगातार मिलता रहा है। जानकारी के अनुसार 1 जनवरी को शासन स्तर पर घोषणा की गई थी। अगले दिन सभी थानों में रोस्टर तैयार करवा लिया गया था। 4 जनवरी के बाद कुछ थाना प्रभारियों ने वीकली ऑफ की लिस्ट को ठंडे बस्ते में पटक दिया। कुछ ने आदेश का दो दिनों तक पालन किया था

इन थानों में नहीं लागू हुआ

अन्नापूर्णा, आजाद नगर, गांधी नगर, खजराना, महिला थाना, लसूड़िया और मल्हारगंज

सिर्फ दो दिन लागू रहा

एरोड्रम, भंवरकुआं, एमजी रोड, राजेंद्र नगर

एक दिन मिला स्टाफ को साप्ताहिक अवकाश

बाणगंगा, सेंट्रल कोतवाली, चंदन नगर, छत्रीपुरा, जूनी इंदौर, छोटी ग्वालटोली, हीरा नगर, कनाड़िया, पलासिया, पंढरीनाथ, परदेशीपुरा, रावजी बाजार, सदर बाजार, संयोगितागंज, सराफा, तेजाजी नगर, तुकोगंज और विजय नगर।

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस ने चला कर्जमाफी का मास्टर स्ट्रोक, लोकसभा चुनाव 2019 से पहले राजधानी भोपाल में किसान को संबोधित कर 8 फरवरी को राहुल गांधी करेंगे शंखनाद


भोपाल. तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव 2018 की जीत के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने दूसरे दौरे पर 8 फरवरी को भोपाल आ रहें। इसके पहले राहुल गांधी मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि किसान कर्जमाफी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भोपाल के जंबूरी मैदान में किसान आमसभा को संबोधित कर लोकसभा चुनाव मिशन 2019 का 2019 का शंखनाद करेंगे।


कर्जमाफी का मास्टर स्ट्रोक

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को लंबे समय के बाद मिली जीत से कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं का उत्साह है। कांग्रेस की सरकार बनते ही किसान कर्जमाफी के वादें को पूरा करने की कवायद शुरू हो गयी है। अब लोकसभा चुनाव 2019 नजदीक है ऐसे में कांग्रेस एक बार फिर किसानों के बल पर सत्ता में आने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दी है। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस कर्जमाफी का मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है।



मिशन 2019 : कांग्रेस की रणनीति

मिशन 2019 यानी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में सत्ता और संगठन ने मिलकर बिसात बिछाना तय किया गया है। कमलनाथ मुख्यमंत्री होने के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं। इस कारण लोकसभा चुनाव के लिए सत्ता-संगठन में समन्वय की रणनीति तैयार की गई है। मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों का जिम्मा दिया जाएगा। साथ ही उन्हें अपनी विधानसभा सीट के इलाके में भी काम करना होगा। मंत्रियों को गांवों में रात भी बिताना होगा। इसका मकसद कार्यकर्ताओं और जनता से कनेक्टिविटी बनाना है।

ऐसी हैं बदली परिस्थितियां

लोकसभा चुनाव के लिए उन इलाकों पर विशेष फोकस किया जाएगा, जहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान हुआ है। विधानसभा चुनाव के परिणामों में कांग्रेस ने पाया है कि वह लोकसभा चुनाव के हिसाब से 29 में से 12 सीटों पर आगे है। इनमें कांग्रेस ने मौजूदा तीन लोकसभा सीट छिंदवाड़ा, रतलाम-झाबुआ और गुना में से केवल गुना में झटका खाया है। ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस का प्रदर्शन विधानसभा चुनाव में बहुत बेहतर रहा है, इसलिए कांग्रेस इन इलाकों में दिग्गज नेताओं के साथ अपने मंत्री और विधायकों की जिम्मेदारी भी तय करेगी।

मध्य प्रदेश/ लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा में होगी बड़ी सर्जरी, हटाए जाएंगे जिला अध्यक्ष और बड़े नेता





रामलाल ने राकेश को दिया फ्री हैंड


7 दिन में हटाए जाएंगे पदाधिकारी 

भोपाल। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा प्रदेश संगठन में बड़ी सर्जरी की तैयारी कर ली गई है। 25 से ज्यादा जिला अध्यक्षों और प्रदेश के बड़े नेताओं की जगह नए चेहरों को भाजपा का प्रदेश नेत्तृव नई जिम्मेदारी देने के साथ मैदान में उतरा जाएगा। 

 
भाजपा संगठन में इस बड़ी सर्जरी के लिए पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को फ्री हैंड दे दिया है। गाज उन नेताओं पर गिरेगी जिन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के खिलाफ काम किया है या जिनके क्षेत्र में पार्टी का खराब परफॉर्मेंस रहा है। ऐसे नेताओं को प्रदेश पदाधिकारी और जिलाध्यक्षों को सात दिन में हटा दिया जाएगा। बुधवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने बैठक में आए जिलाध्यक्षों औऱ प्रदेश पदाधिकारियों को इसके संकेत दे दिए हैं और मानसिक रूप से तैयार रहने कहा है। 

गुटबाजी खत्म करना लक्ष्य: लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा जमीनी स्तर तक सामंजस्य बिठाने के साथ-साथ गुटबाजी खत्म करना चाहती है ताकि पार्टी को आम चुनाव में नुकसान न हो। स्पष्ट हैं कि कुछ जिलाध्यक्षों को पार्टी बदल सकती है। रामलाल ने इसी सिलसिले में बुधवार को पार्टी के बड़े नेताओं के साथ चर्चा की। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव अनिल जैन भी मौजूद रहे, जिन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मप्र का जिम्मा सौंपा है। 

सभी सीटें जीतना लक्ष्य: लोकसभा सीटों के प्रभारियों, सह प्रभारियों व जिलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक में रामलाल ने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा हारी नहीं है। कांग्रेस जीती है, इसलिए निराश होने की जरूरत नहीं है। जब भी सार्वजनिक रूप से बात करें तो अपने सभी नेताओं की प्रशंसा करें। शिकायत अकेले में व लिखकर करें। सभी 29 लोकसभा सीटें जीतना है, इसलिए जमीन पर सकारात्मक वातावरण बनाएं। एकजुटता दिखाएं। हार का ठीकरा कोई अपने ऊपर नहीं बल्कि, दूसरे के ऊपर ही फोड़ता है। 

मध्य वर्ग मतलब देश की रीढ़. पूरे दिन काम करता है. ईमानदारी से टैक्स भरता है. सेस चुकाता है और सोचता है कि कभी सरकार उनकी भी सुनेगी. इस मध्य वर्ग की बहुत पुरानी मांग है कि टैक्स में छूट बढ़नी चाहिए. खुद प्रधानमंत्री इसका जिक्र कर चुके हैं. अब चुनावी बजट से उनकी उम्मीदें आसमान पर हैं.

सुनिए सरकार... अंतरिम बजट से पहले वोटर के 'मन की बात'!
अंतरिम बजट में लोगों को मोदी सरकार से खासी उम्मीदें 

मध्य वर्ग मतलब देश की रीढ़. पूरे दिन काम करता है. ईमानदारी से टैक्स भरता है. सेस चुकाता है और सोचता है कि कभी सरकार उनकी भी सुनेगी. इस मध्य वर्ग की बहुत पुरानी मांग है कि टैक्स में छूट बढ़नी चाहिए. खुद प्रधानमंत्री इसका जिक्र कर चुके हैं. अब चुनावी बजट से उनकी उम्मीदें आसमान पर हैं.

जब भी बजट आता है मध्य वर्ग की आखें चमकने लगती हैं. लगता है अब तो कुछ हो जाएगा. कुछ चीजें सस्ती हो जाएंगी. कुछ टैक्स में राहत मिल जाएगी.

टैक्स में छूट पर राजनीति को समझिए

इस देश में केवल 2 करोड़ 10 लाख लोग रिटर्न भरते हैं.

इसमें भी 93.3 फीसद ढाई लाख से कम कमाई दिखाते हैं.

केवल 6.6 फीसद लोग ढाई लाख से ज्यादा कमाई दिखाते हैं.

केवल 13 लाख 86 हजार लोग सचमुच में टैक्स भरते हैं.

यही वो चौदह लाख लोग हैं, जिनसे सरकार विकास योजनाएं चलाती हैं. लेकिन हर बजट में वो अपने आप को पीछे छूटा हुआ महसूस करते हैं. दरअसल मध्य वर्ग में केवल नौकरी वाले नहीं आते. छोटे कारोबारी भी आते हैं, वो भी वैसे ही जूझते हैं जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए और वैसे ही उम्मीद बांधते हैं बजट से.

इस अंतरिम बजट से नौजवानों को लगता है कि सूरत बदल जाएगी, क्योंकि चुनावी साल है. वहीं एकदम ताजातरीन रिपोर्ट है जो इस देश में डिग्री और नौजवानी के संबंधों को स्थापित करती है.

बजट से ठीक पहले बेरोजगारी का हाल देखिए

2017-18 में बेरोजगारी 45 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.

नोटबंदी के बाद 6.1 फीसद की दर पर बेरोजगारी है.

सरकार ने इसी रिपोर्ट को जारी करने से रोका है.

सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है.

बेरोजगारों की फौज और बजट से उम्मीद

हर साल 30 लाख नए ग्रेजुएट बेरोजगारों में जुड़ रहे हैं.

हर साल 8 लाख इंजीनियर बेरोजगारों में जुड़ रहे हैं.

हर साल 5 लाख से एमबीए बेरोजगारों में जुड़ रहे हैं.

जबकि नौकरी इनमें से आधे लोगों को भी नहीं मिलती है.

बजट से नौजवानों की 5 सबसे बड़ी मांग

पहली मांग- सस्ते में सबके लिए उच्च शिक्षा के अवसर मौजूद हों.

दूसरी मांग- ग्रेजुएशन पूरी होने के सालभर के भीतर नौकरी मिले.

तीसरी मांग- नौकरी न मिलने तक बेरोजागारी भत्ता दिया जाए.

चौथी मांग- गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए ब्याजमुक्त ऋण मिले.

पांचवीं मांग- सबको उसकी योग्यता के हिसाब से रोजगार मिले.

चुनावी साल में उम्मीदें आसमानी हो जाती हैं, किसानों की भी हैं. लेकिन क्या सरकार उनकी उम्मीदों को जमीन दे पाएगी. इस सवाल और जवाब के फासले में फर्क अब भले एक दिन का बचा हो लेकिन असल में ये इंतजार आजादी के पहले दिन से जारी है.



   


शिवराज की घोषणा को कमलनाथ ने किया लागू@Tax Benefit, करीब 40 हज़ार कर्मचारी होंगे लाभांवित!...

Govt. Gift in Hindi : केंद्रीय बजट से ठीक पहले कर्मचारियों को मिला ये बड़ा तोहफा


भोपाल। केंद्रीय बजट से ठीक एक दिन पहले राज्य के सरकारी कर्मचारियों को प्रदेश की सरकार Tax Benefits ने बड़ी राहत दी है। इसके तहत सरकार ने कर्मचारियों को प्रोफेशनल टैक्स में राहत देने के आदेश जारी कर दिए हैं।

जिसके अनुसार अब 2 लाख 25 हजार तक की वार्षिक आय पर टैक्स नहीं लगेगा। दरअसल इस संबंध में 2018 की तत्कालीन सरकार ने घोषणा की थी, जिसके आदेश कमलनाथ सरकार ने जारी कर दिए हैं। इसके चलते करीब 40 हज़ार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रोफेशनल टैक्स @Tax Benefit से मुक्त होंगे।

सामने आ रही जानकारी के अनुसार राज्य शासन ने सरकारी कर्मचारियों पर लगने वाले प्रोफेशनल टैक्स को लेकर एक आदेश जारी किया है। इसके तहत 2.25 लाख की सालान आय पर कर्मचारियों को कोई प्रोफेशनल टैक्स नहीं लगेगा।

इससे पहले एक लाख 80 हजार रुपए तक आय वालों को प्रोफेशनल टैक्स देना होता था। इससे अधिक वार्षिक वेतन या मजदूरी वालों को ढाई हजार रुपए देना होता था। अब इन लोगों की प्रोफेशनल टैक्स (वृत्ति कर) की सीमा बढ़ाकर 2 लाख 25 हजार रुपए कर दी गई है।

यानि अब 2 लाख 25 हजार रुपए से कम वार्षिक वेतन वालों को कोई प्रोफेशनल टैक्स नहीं देना होगा। इसी प्रकार दो लाख 25 हजार रुपए से तीन लाख रुपए तक वार्षिक वेतन वालों से डेढ़ हजार रुपए प्रोफेशनल टैक्स लिया जाएगा, यानी सरकार ने सीमा भी बढ़ाई और टैक्स भी कम कर दिया।

इसी प्रकार तीन लाख से चार लाख के बीच वार्षिक वेतन वाले कर्मचारियों को ढाई हजार रुपए से घटाकर दो हजार रुपए प्रोफेशनल टैक्स देना होगा।

 


जबकि चार लाख से अधिक वार्षिक वेतन वालों के लिए वार्षिक प्रोफेशनल टैक्स की दर दो हजार 500 रुपए किया गया है।

शिवराज सरकार की थी घोषणा...
सरकारी कर्मचारियों को प्रोफेशनल टैक्स में राहत देने वाली ये घोषणा पिछली शिवराज सरकार ने की थी। उस समय इसे बजट में भी लाया गया था, लेकिन इसको लागू किए जाने से पहले ही चुनाव आ गए।

इसके बाद इसे कमलनाथ सरकार ने लागू किया है। राज्य शासन के इस सरकार के इस फैसले से करीब 40 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रोफेशनल टैक्स से मुक्त हो गए हैं।

 


इन जगहों की सरकारें लेती हैं प्रोफेशनल टैक्स...
मध्य प्रदेश के अलावा छतीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, मेघालय, उड़ीसा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडू, त्रिपुरा ,आन्ध्र प्रदेश, असम,पश्चिमी बंगाल और अन्य राज्य - हरियाणा, उत्तरप्रदेश केन्द्र शासित राज्य जिसमें दिल्ली व चंड़ीगढ़ भी सम्मिलित है।

ये होता है प्रोफेशनल टैक्स 
प्रोफेशनल टैक्स एक अप्रत्यक्ष कर है, इसे वृत्तिकर भी कहा जाता है। यह विशेष नगरीय निकाय क्षेत्र सरकारी और गैर-सरकारी सेवाओं में कार्यरत व्यक्ति, चार्टेड एकाउंटेंट, डाक्टर, वकील और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में लगे व्यापारियों पर लगाया जाता है। यह टैक्स राज्य सरकारें लेती हैं।


  • पहले आदिवासी और दलित के यहां बना चुके हैं रोटियां


भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का समोसे तलते हुए वीडियो सामने आया है। सिंधिया का ये वीडियो अशोकनगर का है। इससे पहले सिंधिया उमरिया में आदिवासी के यहां रोटी सकते और भिंड जिले के अटेर में रोटी बेलते हुए नजर आए थे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया गुरुवार को अशोकनगर में एक कार्यक्रम में भाग लेने जा रहे थे। गांधी पार्क पर उन्होंने एक समोसे की दुकान पर अपनी कार रुकवाई। कार से उतरकर  उन्होंने पहले दुकानदार से समोसे बनाने का तरीका पूछा, फिर कढ़ाई में समोसे डालकर सेंकने लगे। इससे पहले वे नवंबर 2016 शहडोल संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव के समय उमरिया जिले के बड़वाही गांव में आदिवासी परिवार के यहां रोटियां सेंकी थी। इसके बाद सिंधिया अप्रैल 2017 में भिंड जिले की अटेर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के समय सिंधिया ने दलित के यहां रोटियां बनाई थीं।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।




बोले- वहां पर बच्चे और बेटियों को पीटा गया, राष्ट्रीय पर्व पर ऐसा पहले कभी नहीं हुआ 


भोपाल. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खुजनेर की घटना बेहद चिंताजनक है। भोपाल में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस जैसे कार्यक्रम में अराजक तत्व धारदार हथियार लेकर घुस आएं और बेटियों तक की पिटाई कर दें, ऐसा देश में पहली बार हुआ। उन्होंने कहा कि इस घटना की गहरी जांच होनी चाहिए। ताकि ऐसी घटना दोहराई न जा सके। 

उन्होंने कहा- इस घटना को मैं साम्प्रदायिक नहीं मानता हूं। ये अराजकता का माहौल पैदा करने की कोशिश है, बच्चे और बेटियों को पीट दिया जाए। ऐसा राष्ट्रीय पर्व पर पहले कभी नहीं हुआ। ये कौन लोग थे, जो साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ना चाहते थे। 

बच्चों को बचाने वालों पर हटे मुकदमा 
शिवराज ने कहा कोई आश्वस्त है कि अब प्रदेश में दूसरी सरकार आ गई है, अब हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि सिमी जैसे तत्व तो फिर से एक्टिव होने लगे हों, जो आतंक और अराजकता का माहौल बनाना चाहते हों। सरकार को इन पर सख्त कार्रवाई की जाए, बच्चों को बचाने आए लोगों पर मुकदमा दर्ज करने की जरूरत नहीं है। 

 

गाय आस्था और श्रद्धा का विषय 
गाय आस्था और श्रद्धा का विषय है। कमलनाथ जी गाय को राजनीतिक मुद्दा न बनाएं। मैं उनके गोशाला खोलने के कदम का स्वागत करता हूं, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि गायों के दाने, पानी, भूसे का समुचित इंतजाम हो। वरना गो माता की असमय मौत हो जाती है।

ये हुआ था खुजनेर में 
राजगढ़ जिले के खुजनेर में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान दो समूहों में झड़प हो गई थी। प्रशासन ने पूरे शहर में धारा 144 लागू कर दी थी। असल में हुआ ये कि गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में स्कूली बच्चे गदर फिल्म के एक गाने पर डांस कर रहे थे, डांस के दौरान कुछ लोगों ने देश विरोधी नारे लगा दिए। इसके बाद देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और कार्यक्रम स्थल पर भगदड़ मच गई। कुछ उपद्रवियों ने कार्यक्रम में कुर्सियों की तोड़फोड़ कर दी। इसी बीच एक विशेष संप्रदाय के लोग हथियार लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए और डांस कर रहे बच्चों पर हमला कर दिया। कई बच्चों को चोट आई हैं।



भोपाल। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने प्रोफेशनल टैक्स में राहत दी है जिससे करीब 40 हजार चतुर्थ श्रेणी सरकारी कर्मचारी प्रोफेशनल टैक्स के दायरे से मुक्त हो गए हैं।

जानकारी के मुताबिक राज्य शासन ने सरकारी कर्मचारियों पर लगने वाले प्रोफेशनल टैक्स को लेकर आदेश जारी किया है। इसके तहत 2.25 लाख की सालान आय पर कर्मचारियों को कोई प्रोफेशनल टैक्स नहीं लगेगा। वहीं 2.25 से 3 लाख रुपए की सालाना आय वाले कर्मचारियों को 1500 रुपए टैक्स देना होगा। इसके अलावा 3 से 4 लाख की सालाना आय पर 2000 रुपए टैक्स और 4 लाख से ऊपर की सालाना आय वाले कर्मचारी को 2500 रुपए प्रोफेशनल टैक्स चुकाना होगा।

आपको बता दें कि सरकारी कर्मचारियों को प्रोफेशनल टैक्स में राहत देने वाली ये घोषणा पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने की थी, लेकिन इसे कमलनाथ सरकार ने लागू किया है। राज्य शासन के इस फैसले का कर्मचारियों ने स्वागत किया है। सरकार के इस फैसले से करीब 40 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रोफेशनल टैक्स से मुक्त हो गए हैं।



   


जानिये कैसे हुआ इस पूरी रणनीति का खुलासा...

जल्द बदल जाएगी MP की सरकार!संकेतों में सामने आई भाजपा की रणनीति, पढ़ें पूरी खबर


मध्यप्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में वापस हुई कांग्रेस सरकार इन दिनों परेशानी में है। एक तो उसके पास पूर्ण बहुमत नहीं है, वहीं जिनसे उन्होंने समर्थन ले रखा है वे भी लगातार उन्हें चेतावनी देते दिख रहे हैं। ऐसे में सरकार को तमाम तरह की दिक्कतें पेश आ रही हैं।

वहीं अब जो सूचना सामने आ रही है उसके अनुसार MP में जल्द ही सत्ता परिवर्तन हो सकता है! जिसके लिए भाजपा ने एक बार फिर सत्ता में वापसी के लिए गणित गणना शुरू कर दिया है।

 

दरअसल ये मामला तब सामने आया जब नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने पार्टी की एक बैठक में इसका कुछ हद तक खुलासा कर दिया। जिसमें उन्होंने लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का भी इशारा कर दिया।

दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झौंकने की तैयारी कर ली है। इसके तहत लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को बैठकें कीं।

करीब आठ घंटे चली इन बैठकों में सिर्फ एक संदेश साफ तौर पर दिया गया कि आप निराश मत होइए, प्रदेश की सभी 29 सीट जीतकर पहले मोदी सरकार की वापसी की तैयारी करो। फिर प्रदेश में भी भाजपा की सरकार बनाएंगे।

 


दरअसल बैठक के दौरान गोपाल भार्गव ने कहा कि यदि लोकसभा में अच्छे परिणाम आए तो इसके बाद हम प्रदेश में भी आसानी से सरकार बना लेंगे। उनके इस बात को जानकार कहीं न कहीं भाजपा के सरकार में वापसी के जोड़तोड़ से जुड़ा मान रहे हैं।

बैठक में यह भी कहा गया कि विधानसभा चुनाव की पराजय भूलकर अब कांग्रेस की कर्जमाफी पर नजर रखने का लक्ष्य भी सभी नेताओं को दिया गया। साथ ही कहा कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार पूर्ण कर्जमाफी नहीं कर पाएगी और इस पर हमें कमलनाथ सरकार को घेरना है।

लोकसभा जीतने की तैयारी...
वहीं बैठक में रामलाल भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद मैं पहली बार आ रहा हूं। हार का ठीकरा कोई अपने ऊपर नहीं लेता, बल्कि दूसरे के ऊपर ही फोड़ता है। जीत का श्रेय हम कार्यकर्ता को देते हैं। मप्र में हम हारे नहीं हैं, कांग्रेस जीती है।

 


लोकसभा चुनाव जीतने की तैयारी करो। चुनाव दो दलों या महागठबंधन के बीच का न होकर देश के भविष्य का फैसला करने वाला है। इस महायुद्ध में जीत के लिए हमें अपनी सर्वश्रेष्ठ आहूति देनी होगी। एकजुट होकर सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सभी 29 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए चुनाव मैदान में उतरना है।

ऐसा बनाओ माहौल...
इस बैठक को भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के अलावा नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भी संबोधित किया।

बैठक में सभी नेताओं से कहा गया कि जिन कार्यकर्ताओं ने विधानसभा चुनाव में छोटी-मोटी गलती की हो, उन्हें मनाकर वापस लाएं। जो कार्यकर्ता टिकट की नाराजगी में घर बैठ गए थे, उन्हें मनाओ और काम पर लगाओ। माहौल सकारात्मक है।

इस बयान के मायने...
बैठक में लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश मे सरकार बनाने की बात सामने आते ही राजनीति के जानकारों के कान खड़े हो गए हैं। इस संबंध में जानकारों का मत है कि भाजपा शुरू से ही प्रदेश में सरकार बनाना चाहती है।

लेकिन शासन के दौरान रह गई कमियों को भी जनता के जहन से निकालना चाहती है, ताकि इसका खामियाजा लोकसभा चुनावों में नहीं उठाना पड़े। इसी के चलते लोकसभा चुनावों तक कांग्रेस की सरकार को ही बने रहने देना चाहती है।

इस संबंध में राजनीति के जानकार डीके शर्मा का कहना है कि दरअसल ऐसा लगता है कि भाजपा चुनाव के ठीक बाद भी सरकार बना सकती थी, लेकिन जानबुझकर एक रणनीति के तहत उसने ये काम नहीं किया। वहीं वर्तमान सरकार पर लगातार गिरा देने की बात कहते हुए प्रेशर बनाती दिख रही है।

शर्मा कहते है ऐसा लगता है कि भाजपा ये मानती है कि कांग्रेस की राज्य की सरकार लोकसभा चुनाव से पहले तक अपने सारे वादे पूरे नहीं कर सकेगी। वहीं कई तरह की गलतियां भी करेगी।

ऐसे में जहां इसका नुकसान कांग्रेस को लोकसभा में होगा वहीं इसका फायदा सीधे भाजपा के खाते में आएगा। इसके अलावा भी लोकसभा के बाद राज्य में सत्ता को लेकर कई तरह की कोशिशें हों, तो ये कोई बढ़ी बात नहीं होगी।

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1 feb


1 फरवरी से बहुत कुछ बदलने वाला है। जहां केंद्र सरकार इस दिन अंतरिम बजट पेश करेगी, वहीं लोगों को जिंदगी में बहुत तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। इसमें बैंक खातों से लेकर के ऑनलाइन पोर्टल से सामान खरीदना व आरक्षण तक शामिल हैं। इसके अलावा बजट पेश करने के साथ ही कुछ सामान उसके बाद से ही महंगा हो सकता है। आइये जानते हैं कि शुक्रवार से आपकी जिंदगी में क्या और कौन से महत्वपूर्ण बदलाव हो जाएंगे....।


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महंगा होगा ऑनलाइन सामान खरीदना

अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट से सामान खरीदना महंगा हो जाएगा। शुक्रवार से इन कंपनियों पर सामान खरीदने पर बड़ी छूट या फिर कैशबैक नहीं मिलेगा। वहीं छोटे खुदरा व्यापारियों को अपना सामान ऑनलाइन बेचना थोड़ा आसान हो जाएगा। सरकार द्वारा ई-कॉमर्स कंपनियों पर लागू होने वाले नये नियम शुक्रवार से लागू हो जाएंगे। 

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बचत खाते में जमा रखने होंगे इतने रुपये

अगर आप बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहक हैं तो फिर शुक्रवार से बचत खाते में हर तिमाही 2000 रुपये रखने होंगे। इस सीमा में दोगुने की बढ़ोतरी की गई है। इस संबंध में बैंक एसएमएस भेजकर अपने ग्राहकों को जानकारी दे रहा है।  अर्द्धशहरी क्षेत्रों में इस सीमा को 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है। जबकि, ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए कोई सीमा नहीं है।
 

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लागू होगी गरीबों के लिए आरक्षण व्यवस्था

केंद्र सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में गरीबों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था भी शुक्रवार से लागू हो जाएगी। केंद्र के अलावा देश के कई राज्यों में भी इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। फिलहाल इसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में लागू किया जाएगा।

यह आरक्षण इन कंपनियों की ओर से की जाने वाली सीधी भर्तियों में लागू होगा। इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। इस समय देश में केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक क्षेत्र की 339 कंपनियों का संचालन किया जाता है जिनमें मार्च 2018 तक 10.88 लाख लोग काम कर रहे थे।



बजट में बढ़ सकता है सेस

तंबाकू, पेट्रोल व डीजल पर सरकार सेस को बजट में बढ़ा सकती है। अगर ऐसा होता है तो फिर यह वस्तुएं भी तत्काल प्रभाव से महंगी हो सकती हैं। हालांकि जानकारों का मानना है कि चूंकि सरकार इस बार अंतरिम बजट को पेश कर रही है, ऐसे में हो सकता है कि वो इसके बारे में घोषणा न करे। ऐसे में लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है।

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