सवर्ण आरक्षण बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

नई दिल्ली। गरीब सवर्णों को शिक्षा और नौकरी में 10 फीसद आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मंगलवार को लोकसभा और बुधवार को राज्यसभा में पास हुए इस संविधान संशोधन बिल के खिलाफ यूथ फॉर इक्वेलिटी संस्थान ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

गौरतलब है कि लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी बुधवार को सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण संबंधी 124वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया था। इसके पक्ष में 165 वोट पड़े थे जबकि विरोध में सिर्फ सात वोट। मतदान के समय सदन में कुल 172 सदस्य मौजूद थे।

संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण दो तिहाई बहुमत से पास होना जरूरी था। इस लिहाज से पक्ष में 163 वोट जरूरी थे। राज्यसभा में इस समय कुल 244 सदस्य हैं। सरकार ने यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत किया है जिसकी वजह से राज्यों की विधानसभाओं से इसे पारित कराने की जरूरत नहीं होगी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 10 फीसद आरक्षण की यह व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।

यह जानना जरूरी है कि सरकार के इस फैसला का फायदा किनको मिलेगा। पढ़िए इससे जुड़ी अहम बातें -

- राजपूत, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को इस श्रेणी में आरक्षण मिलेगा।

- जिन लोगों की सालाना आय 8 लाख रुपए या इससे कम है।

- जिसके पास 5 एकड़ या उससे कम खेती जमीन है।

- जिनके मकान 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर बने हैं, उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा।

- आरक्षण शिक्षा (सरकार या प्राइवेट), सार्वजनिक रोजगार में इसका लाभ मिलेगा