कमलनाथ की बस एक चूक और गिर जाएगी प्रदेश में सरकार, अब बगावत पर उतरे मंत्री..

भोपाल. कमलनाथ के मंत्री को पंसदीदा विभाग न मिलने से एक बार फिर कांग्रेस में बगावत की हलचलें तेज हो गयी है। जिसको लेकर हर दिन नयी सरकार में खीचातान चल रही। गोविंद सिंह कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ मंत्री हैं। पसंद के विपरित उन्हें सहकारिता और संसदीय कार्य जैसे हल्के विभाग दिए गए हैं।


विभाग बंटवारे के समय भी सिंह ने मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से अपनी वरिष्ठता के हिसाब से गृह, जेल और परिवहन विभाग मांगे थे। सूत्रों की मानें तो मनपसंद विभाग न मिलने से खफा मंत्री ने इस्तीफा देने की धमकी तक दी है। ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ को कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी होगी, नहीं तो कमलनाथ के एक चूक से कांग्रेस की सरकार खतरे में आ सकती है।



अखिल भारतीय सेवा नियमों के अनुसार भले ही सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री को मिल जाए, लेकिन उनसे जुड़े मसलों के फैसले मुख्यमंत्री की मर्जी से ही होंगे। ऐसे में विभागीय मंत्री आइएएस के तबादले और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुशंसा कर मुख्यमंत्री समन्वय में फाइल भेज सकते हैं। जीएडी मंत्री को राज्य प्रशासनिक अफसरों के तबादले, जांच और पदोन्नति की फाइलें करने का पूरा अधिकार रहता है।


हालांकि निर्वाचन क्षेत्र लहार में बैठे डॉ. गोविंद सिंह के इस नाराजगी पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनके पंसदीदा महत्वपूर्ण विभाग को सौंपने की तैयारी कर ली है। उन्हें सहकारिता के साथ जीएडी दिया जा सकता है। राजभवन के सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को इसकी फाइल राज्यपाल आनंदी बेन को भेजी है। संभावना है कि बुधवार को नेाटिफिकेशन जारी हो सकता है।


 


मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नाराज मंत्री डॉ. गोविंद सिंह को मनाने की जिम्मेदारी दिग्विजय सिंह को सौंपी। दिग्विजय फिलहाल दिल्ली में हैं। गोविंद सिंह के एक करीबी समर्थक ने बताया कि दिग्विजय सिंह ने फोन पर ही गोविंद सिंह से बात कर उन्हें सहकारिता और संसदीय कार्य विभाग का प्रभार लेने को कहा। इस पर सिंह ने इंकार कर दिया। लंबी चर्चा के बाद दिग्विजय सिंह ने उन्हें जीएडी जैसे महत्वपूर्ण विभाग देने का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर वे माने। बताया जा रहा है कि सिंह 4 जनवरी की सुबह भोपाल पहुंच रहे हैं। इस पूरे मामले में डॉ. गोविंद सिंह से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।


मुख्यमंत्री के पास ही रहता है जीएडी


सामान्यतौर पर जीएडी मुख्यमंत्री के पास रहता है और इसमें एक राज्यमंत्री बनाया जाता है। दिग्विजय सिंह ने अपने पहले कार्यकाल में एक बार राजेन्द्र शुक्ला को जीएडी का कैबिनेट मंत्री बनाया था। वे अविभाजित मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ़ अंचल से आते थे। दिग्विजय के दूसरे कार्यकाल और भाजपा के 15 साल के कार्यकाल में सामान्य प्रशासन विभाग मुख्यमंत्री के पास ही रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस विभाग के अधीन सारे आइएएस, राज्य प्रशासनिक सेवा के साथ सभी कर्मचारी आते हैं। इनकी पदस्थापना, तबादले, पदोन्नति, विभागीय जांच आदि जीएडी के जरिए होती है।