यूपी में साथ आए 'बुआ-भतीजा', एमपी की कमलनाथ सरकार पर पड़ेगा असर?

उत्तर प्रदेश में एसपी और बीएसपी के गठबंधन के बाद कांग्रेस अकेली पड़ गई है। हालांकि, यूपी में हुए इस गठबंधन का असर मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर नहीं पड़ेगा।

भोपाल 
उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी (  एसपी  ) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी ) के गठबंधन का असर यूपी में भले ही  कांग्रेस पर पड़े लेकिन मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। कमलनाथ की सरकार को मायावती और अखिलेश की पार्टी बिना मांगे ही समर्थन दे रही है। अगर वे समर्थन वापस ले भी लेते हैं, तब भी कमलनाथ की सरकार चलती रहेगी। 

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कुल 230 सदस्योंवाली विधानसभा में कांग्रेस के 114 सदस्य हैं जबकि एसपी का एक और बीएसपी के दो सदस्य हैं। इनके अलावा चार सदस्य निर्दलीय जीते हैं। बाकी 109 विधायक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के हैं। 

कमलनाथ मध्य प्रदेश में सात गैर-बीजेपी सदस्यों की मदद से सरकार चला रहे हैं। उन्हें एसपी और बीएसपी ने बिना शर्त समर्थन दिया था। कमलनाथ ने अपने मंत्रिमंडल में एक निर्दलीय विधायक को तो लिया है लेकिन एसपी-बीएसपी के विधायकों को जगह नहीं मिली है। बीएसपी विधायक मंत्री बनाए जाने के लिए कांग्रेस पर लगाता दवाब भी बना रहे हैं। 

उत्तरप्रदेश में हुए एसपी-बीएसपी गठबंधन की वजह से हालात बदल गए हैं। यह सम्भव है कि ये दोनों दल एमपी में कांग्रेस का साथ छोड़ दें। ऐसा होता है, तब भी कमलनाथ की सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उनके साथ 4 निर्दलीय विधायक हैं। उन्हें मिलाकर कुल संख्या 118 बनती है, जो बहुमत से जो ज्यादा है। जो निर्दलीय हैं, वे भी पुराने कांग्रेसी हैं ऐसे में उन्हें सत्ता में शामिल करना कोई बड़ा काम नहीं है। 


ऐसे में यह साफ है कि उत्तरप्रदेश में हुए गठबंधन का असर मध्य प्रदेश पर नहीं पड़ेगा। बीजेपी यदि इन तीनों को अपनी ओर कर भी ले, तब भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कमलनाथ की दृष्टि से यदि देखा जाए तो इस नए बदलाव ने उनकी मुश्किल आसान कर दी है। अब वह निर्दलीयों के भरोसे सरकार चलाएंगे।