सत्ता-संगठन होंगे साथ, मंत्री भी संभालेंगे लोकसभा चुनाव का जिम्मा

सत्ता-संगठन होंगे साथ, मंत्री भी संभालेंगे लोकसभा चुनाव का जिम्मा


भोपाल. मिशन 2019 यानी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में सत्ता और संगठन ने मिलकर बिसात बिछाना तय किया गया है। कमलनाथ मुख्यमंत्री होने के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं। इस कारण लोकसभा चुनाव के लिए सत्ता-संगठन में समन्वय की रणनीति तैयार की गई है। इसके चलते मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों का जिम्मा दिया जाएगा। साथ ही उन्हें अपनी विधानसभा सीट के इलाके में भी काम करना होगा। इसके तहत मंत्रियों को गांवों में रात भी बिताना होगा। इसका मकसद जमीनी कार्यकर्ताओं और जनता से सीधी कनेक्टिविटी बनाना है।


दिग्गज नेताओं की भूमिका अलग रहेगी। इसमें मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य नेता शामिल रहेंगे। अजय सिंह, कांतिलाल भूरिया और अरुण यादव खुद लोकसभा चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे हैं। जबकि, सुरेश पचौरी का चुनाव लडऩा तय नहीं है। इसके अलावा पूर्व सांसद सज्जन सिंह वर्मा व विजय लक्ष्मी साधौ अब मंत्री बन चुके हैं। इनकी जिम्मेदारी अपने क्षेत्र के प्रत्याशी को जिताने की रहेगी।


- ऐसी हैं बदली परिस्थितियां
लोकसभा चुनाव के लिए उन इलाकों पर विशेष फोकस किया जाएगा, जहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान हुआ है। विधानसभा चुनाव के परिणामों में कांग्रेस ने पाया है कि वह लोकसभा चुनाव के हिसाब से 29 में से 12 सीटों पर आगे है। इनमें कांग्रेस ने मौजूदा तीन लोकसभा सीट छिंदवाड़ा, रतलाम-झाबुआ और गुना में से केवल गुना में झटका खाया है। ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस का प्रदर्शन विधानसभा चुनाव में बहुत बेहतर रहा है, इसलिए कांग्रेस इन इलाकों में दिग्गज नेताओं के साथ अपने मंत्री और विधायकों की जिम्मेदारी भी तय करेगी। 
- दिग्गज नेताओं की अलग भूमिका
दिग्गज नेताओं की भूमिका अलग रहेगी। इसमें मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य नेता शामिल रहेंगे। अजय सिंह, कांतिलाल भूरिया और अरुण यादव खुद लोकसभा चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे हैं। जबकि, सुरेश पचौरी का चुनाव लडऩा तय नहीं है। इसके अलावा पूर्व सांसद सज्जन सिंह वर्मा व विजय लक्ष्मी साधौ अब मंत्री बन चुके हैं। इनकी जिम्मेदारी अपने क्षेत्र के प्रत्याशी को जिताने की रहेगी।