भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मंच पर शिवराज सिंह चौहान को अपने हाथों से पीछे रहने को कहां

नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को उस समय असहज हो गए, जब उन्हें बेइज्जती का सामना करना पड़ गया। वाकया दिल्ली का है, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर चल रहे इस वीडियो में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मंच पर शिवराज सिंह चौहान को अपने हाथों से पीछे रहने को कहते नजर आ रहे हैं।


मध्यप्रदेश में भाजपा की हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्र की राजनीति में एंट्री दी गई है। चौहान को एक दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर केंद्र की राजनीति में लाया गया है।


 


क्या हुआ दिल्ली में
शुक्रवार को दिल्ली में राष्ट्रीय अधिवेशन चल रहा था। इस दौरान मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्मान किया जा रहा था। उन्हें हार पहनाने के लिए भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी मंच पर मौजूद थे। इस दौरान जब माला पहनाने के लिए सभी नेता मौजूद थे, तभी शिवराज सिंह चौहान भीड़ में से आगे निकले और मोदी को पहनाने के लिए आगे आ गए, उन्होंने माला को भी थाम लिया था, लेकिन अमित शाह ने अन्य नेताओं को अपनी ओर आने को कहा। इस दौरान शाह दो-तीन बार पीछे खड़े शिवराज सिंह चौहान को हटाते हुए नजर आए।


 


गफलत के कारण हुआ ये सब
हालांकि कुछ नेताओं ने अपने प्रतिक्रिया में कहा कि अमित शाह सामने खड़े केंद्रीय मंत्री व अन्य नेताओं को फोटो खिंचवाने के लिए अपने पास बुला रहे थे, वे शिवराज सिंह चौहान को पीछे नहीं हटा रहे थे। वे अपने हाथों से इस तरफ आने का कह रहे थे, तो शिवराज ने समझ लिया होगा कि वे उन्हें पीछे जाने का कह रहे हैं। वीडियो में शिवराज पीछे खिसकते हुए भी नजर आ रहे हैं।


 


बुधनी से विधायक हैं शिवराज
शिवराज सिंह चौहान हाल ही भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए हैं।
चौहान फिलहाल अभी सीहोर ज़िले की बुधनी सीट से विधायक हैं। उनका जन्म 5 मार्च 1959 को बुधनी में हुआ था। शिवराज सिंह चौहान 29 नवंबर 2005 को पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने बाबूलाल गौर की जगह ली थी। छात्र जीवन से ही उन्होंने राजनीति शुरू कर दी थी। शिवराज सिंह चौहान 1990 में पहली बार बुधनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पहली बार सांसद चुने गए। 1992 से 1994 तक बीजेपी के प्रदेश महासचिव रहे। 11वीं लोकसभा में 1996 में वे विदिशा संसदीय क्षेत्र से फिर सांसद चुने गए। 1998 में विदिशा से ही तीसरी बार और 1999 में चौथी बार सांसद बने। 2004 में वे लगातार पांचवी बार सांसद चुने गए थे। उसके बाद 29 नवंबर 2005 को पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने और दिंसबर 2018 तक प्रदेश के सीएम रहे।