राजनैतिक हलचल : ... तो क्या इस दिन गिर जाएगी MP में कांग्रेस की सरकार!

भोपाल। मध्यप्रदेश में नई सरकार के आने के साथ ही कल यानि 7 जनवरी मंगलवार से 15वीं विधानसभा का पहला सत्र शुरु होने जा रहा है। ऐसे में राजनैतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां भाजपा को विधायक दल के नेता यानि नेता प्रतिपक्ष का नाम तय करना है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को अपना बहुमत सिद्ध करना है।


वहीं मंत्रिमंडल गठन के बाद पनपे असंतोष और भाजपा द्वारा स्पीकर का चुनाव लड़ने की खबरों से कांग्रेस सहमी हुई है। मायावती द्वारा भी समर्थन वापसी की धमकी ने कांग्रेस की नींद उड़ा रखी है।


कांग्रेस को भय है कि भाजपा कर्नाटक की तरह उनके विधायकों को प्रलोभन में फंसा सकती है, इसी के चलते राजधानी के होटलों में रुके अपने विधायकों पर कांग्रेस नजर जमाए हुए हैं।


इस मामले में राजनीति के जानकार डीके शर्मा का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष के मामले में नरोत्तम मिश्रा का गणित सरकार बनने की जुगत के गुणाभाग में सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसे में उनका नेता प्रतिपक्ष बनना कोई बड़ी बात नहीं है।


हां कांग्रेस को हटाकर भाजपा द्वारा स्वयं सत्ता में आने की स्थिति के मामले में भी पेंच इतना आसान नहीं है। शर्मा के अनुसार कमलनाथ एक वरिष्ठ नेता हैं, उन्होंने केंद्र में कई मंत्रालय देखे हैं ऐसे में वे जोड़ तोड़ की सारी राजनीति से वाकिफ हैं।


वहीं जहां तक लगता है कांग्रेस कुछ ऐसा जरूर कर सकती है जिससे बसपा, सपा सहित निर्दलीय उनके खेमे में बने रहें। लेकिन यदि कोई स्वीकार्य फॉर्मूला नहीं निकला तो ऐसे में नरोत्तम मिश्रा और अमित शाह का गणित बगावती नेताओं को ओर हवा देकर सरकार को गिराने का काम भी कर सकता है। और बसपा व निर्दलीयों का सहयोग प्राप्त कर भाजपा वापस सरकार में भी आ सकती है।


राजनीति के जानकार शर्मा के अनुसार मुझे नहीं लगता भाजपा अभी सरकार गिराएगी। जहां तक अनुमान की बात है तो ये स्थिति 2019 के चुनावों से ठीक पहले सामने लाई जा सकती है, जिससे लोकसभा चुनावों में भाजपा को मदद ही मिलेगी। वहीं जनता भी कांग्रेस सरकार से कई मामलों में जल्द आशा पूरी नहीं होने से भाजपा की ओर झुकाव बढ़ा सकती है।


नेता प्रतिपक्ष कौन...
सूत्रों के अनुसार भाजपा हाईकमान ने मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता का नाम तय कर लिया है। 06 जनवरी को इस पर विधायक दल की तकरीबन मुहर लग सकती है। जिसके तहत भोपाल के भाजपा कार्यालय में शुरू हुई बैठक में चर्चा शुरू भी हो गई है।




वहीं माना जा रहा है कि यदि कोई बड़ी राजनीतिक साजिश नहीं हुई तो नरोत्तम मिश्रा का नाम खुद गोपाल भार्गव ही प्रस्तावित करेंगे। बता दें कि गोपाल भार्गव इस रेस में दूसरे नंबर पर हैं। गोपाल भार्गव आरएसएस की पसंद हैं जबकि नरोत्तम मिश्रा अमित शाह की पसंद बताए जाते हैं।


नया नाम पेश कर सकते हैं शिवराज सिंह!...
सूत्रों का कहना है कि भले ही किसी तरह की गुटबाजी की कोई संभावना नहीं है, परंतु संदेह है कि शिवराज सिंह समर्थक विधायक थोड़ा बवाल कर सकते हैं। चर्चा है कि शिवराज सिंह चौहान नहीं चाहते कि नरोत्तम मिश्रा और गोपाल भार्गव में से कोई भी नेता प्रतिपक्ष बने। लास्ट मिनट पर वो कोई नया नाम सामने ला सकते हैं।



वहीं विधायक दल की मीटिंग के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह भोपाल आ रहे हैं। वो अमित शाह की मंशा के अनुरूप विधायक दल से उनके नेता का चुनाव करवाएंगे। तैयारियां पूरी कर लीं गईं हैं।



नरोत्तम मिश्रा का गणित...
मध्यप्रदेश में सत्ता की नाव से भाजपा सिर्फ 7 कदम की दूरी पर है। ऐसे में चर्चा है कि कमलनाथ की कुर्सी को कभी भी खींचा जा सकता है। जिसके संबंध में भाजपा के कई नेता जल्द ही सत्ता में वापसी की बात कह चुके हैं, लेकिन यह बसपा और सपा के समर्थन के बिना भी संभव है।


इन सारे गुणाभागों में नरोत्तम मिश्रा का गणित सबसे अच्छा माना जाता है। वहीं गोपाल भार्गव संगठन के आदमी हैं। संघ उन्हे पसंद करता है परंतु वो तोड़फोड़ की राजनीति नहीं करते। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा गोपाल भार्गव को भी फ्रंट में लाएगी और उनका पूरा उपयोग किया जाएगा।



इधर, कांग्रेस विधायक दल की बैठक : हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर भी होगी चर्चा!:-
वहीं विधानसभा का पहला सत्र शुरु होने से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई है। विधायक दल की बैठक के बाद सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया है। बैठक में उपस्थिति के लिए सभी कांग्रेस विधायकों को व्हिप जारी किया जाएगा।


माना जा रहा है कि यहां बैठक में विधानसभा सत्र को लेकर चर्चा होगी। साथ ही हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर भी विधायकों से चर्चा हो सकती है। चुंकी शनिवार को विधानसभा सत्र के दो दिन पहले हॉर्स ट्रेडिंग की खबरों से सियासी गलियारों में खलबली मची हुई है।


गौरतलब है कि विधानसभा सत्र के पहले राजनीति के गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि मध्य प्रदेश में भी कर्नाटक की तरह ही बीजेपी विधायकोंं की खरीद फरोख्त करने के प्रयास कर रही है। 15 साल का लंबा वनवास काटने के बाद सत्ता में आई कांग्रेस अब हर कदम फूंक फूंक कर रखना चाहती है।


दरअसल, मंत्रिमंडल गठन के बाद पनपे असंतोष और भाजपा द्वारा स्पीकर का चुनाव लड़ने की खबरों से कांग्रेस सहमी हुई है। वहीं इस बैठक में सपा और बसपा के साथ निर्दलीय विधायकों को भी शामिल होने का न्यौता दिया गया है।


बताया जा रहा है कि दिग्गज नेता उन विधायकों से संपर्क में जुटे हैं। जिन पर आशंका है कि वो विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।


ऐसे में कांग्रेस अपने सभी विधायकों के साथ साथ निर्दलीय और सपा-बसपा के विधायकों को भी एकजुट रखने की कोशिश कर रही है।


वहीं, सूत्रों के मुताबिक पार्टी हर विधायकों की गतिविधि पर भी नजर रख रही है। कौन किस से मिल रहा है इस बात की सूचना प्रदेश हाईकमान को दी जा रही है।


शनिवार को मची खलबली के बाद कांग्रेस अपने विधायकों से लगातार संपर्क में हैं। पार्टी महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह खुद शनिवार को सुबह से लेकर शाम तक कई बार इन होटलों में विधायकों से मिलने पहुंचे थे।


बताया जा रहा है कि देर रात कांग्रेस का दो निर्दलीय विधायकों के साथ संपर्क नहीं हो पाया है, हालांकि उनसे संपर्क करने की लगातार कोशिश की जा रही है।