नई दिल्ली। पाकिस्तान के आधिकारिक सूत्र ने भारत की न्यूज ऐजेंसी को बताया है कि पाकिस्तान की सेना ने सरकार के सामने स्पष्ट कर दिया है कि वो जम्मू-कश्मीर सहित राजस्थान या किसी अन्य बॉर्डर पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार नहीं है। पाकिस्तान की सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी क्षमताएं काफी कम हैं और यदि युद्ध हुआ तो एक बार फिर पराजय का मुंह देखना होगा। इसके तत्काल बाद पीएम ऑफिस ने शांति वार्ता की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। 

सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान में बुधवार को सबसे ज्यादा हलचल इस्लामाबाद के रेड जोन एरिया और मुजफ्फराबाद आर्मी सेंटर में थी। रेड जोन एरिया में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का ऑफिस कंस्टीट्यूशन एवेन्यु है। यहां सुबह 8:30 बजे से सैन्य अफसरों और मंत्रियों के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। यहां मंगलवार से भी ज्यादा हलचल थी, जब भारतीय एयरफोर्स ने बालाकोट पर हमला किया था। आवाजाही के बीच विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को छोड़कर बाकी किसी की गाड़ी ज्यादा देर नहीं रुकी। 

पाकिस्तान पीएम पर दवाब, युद्ध की स्थिति को टालें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पर दवाब बन गया है कि वो किसी भी तरह की रणनीति इस्तेमाल करके युद्ध की स्थिति को टाल दें। इसी के चलते पाकिस्तान की तरफ से कहा गया कि पीएम इमरान खान ने भारत के सामने शांति वार्ता का जो प्रस्ताव रखा है, अगर भारत उसे मानता है तो अभिनंदन को छोड़ दिया जाएगा। 

चीन भी पाकिस्तान के साथ नहीं, सबने अकेला छोड़ दिया

मंगलवार को हुई सिक्युरिटी काउंसिल की मीटिंग से पहले पाक पीएम ने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को दूसरे देशों के विदेश मंत्रियों से बात करने को कहा था, ताकि पता चले कि युद्ध की स्थिति में कौन-कौन साथ खड़ा है। इस बातचीत में कुरैशी को किसी देश ने खुलकर सहयोग नहीं करने की बात कही। चीन ने भी खुलकर सहयोग से मना कर दिया। अमेरिका ने भी सख्ती ही दिखाई। सारा अपडेट विदेश मंत्री ने एनएसी मीटिंग से पहले इमरान को दिया। 

सेना प्रमुख बाजवा ने हाई लेवल वॉर से इंकार किया

इन सबके बीच बुधवार को हुई नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) की मीटिंग में सेना प्रमुख बाजवा ने हाई लेवल वॉर टालने की अपील की। इसी मीटिंग में पाकिस्तान की तरफ से शांति प्रस्ताव रखने का फैसला हुआ। इसको लेकर भारत से संपर्क साधने और बाकी देशों को इस बारे में बताने की जिम्मेदारी भी शाह को दी गई है। इसी को देखते हुए शाह ने जापान सहित अपने 3 विदेश दौरे कैंसिल कर दिए हैं। करीब 10 साल बाद ऐसा हुआ है जब एनएसी की मीटिंग रिव्यू से आगे बढ़कर किसी खास मकसद के लिए बुलाया गई।



भोपाल। मध्यप्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट से अपहरण ( Chitrakoot kidnapping ) कर मार दिए गए जुड़वां भाइयों श्रेयांश और प्रियांश ( Shreyansh and Priyesh ) के मामले में उत्तरप्रदेश सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। यूपी सरकार का कहना है कि इस मामले में सीबीआई जांच ( CBI inquiry ) से उन्हे कोई आपत्ति नहीं है, मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ ( CM KAMAL NATH ) से बात करें कि वो इसके लिए प्रक्रिया शुरू करें। बता दें कि अपराधियों ने बच्चों को मध्यप्रदेश से अपहृत किया और उत्तरप्रदेश में ले जाकर मार डाला। 

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath ) ने बच्चों के पिता से फोन पर बात की। पिता बृजेश रावत ने योगी को बच्चों के अपहरण और एमपी पुलिस की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। बृजेश ने कहा कि एमपी पुलिस ने कुछ आरोपियों को पकड़ा है, लेकिन अभी और पकड़े जाने हैं। पूरे मामले में एमपी पुलिस की मिलीभगत है। यदि सीबीआई जांच हो जाए तो पूरा सच सामने आ जाएगा। बृजेश से बातचीत के दौरान योगी आदित्यनाथ कहा कि हम आपके साथ हैं। उत्तर प्रदेश का शासन आपके साथ है। पूरी मदद की जाएगी। 

बुधवार को उत्तरप्रदेश के चित्रकूट जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने ही फोन से बच्चों के पिता बृजेश रावत की बात यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से कराई। पीड़ित परिवार के घर आए चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस चीज के लिए विवश करें कि वे सीबीआई जांच के आदेश दें। यही दोनों बच्चों के लिए सच्ची श्रद्धाजंलि होगी। 



   


मिशन 2019 : बड़े नेताओं की सिफारिश पर दिए पद
महासचिव से लेकर ब्लॉक तक बनाए पदाधिकारी

अरुण तिवारी, भोपाल. प्रदेश के बाद केंद्र में सरकार बनाने में जुटी कांग्रेस ने नाराज कार्यकर्ताओं को पद से नवाजा है। लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 29 में से 20 से ज्यादा सीटें जीतने के लिए अपनाए गए समन्वय के इस फॉर्मूले के तहत दो माह में 1200 नियुक्तियां की गई हैं। इन्हें महासचिव, सचिव से लेकर जिला और ब्लॉक कमेटी तक में पद दिए गए हैं। ये सभी पद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत अन्य बड़े नेताओं की सिफारिश पर दिए हैं। इस फॉर्मूले ने असर भी दिखाया और कार्यकर्ता लेटरहेड छपवाकर पार्टी के कामकाज में जुट गए हैं।
- किसकी की सिफारिश पर कितने पद
कमलनाथ की सिफारिश पर 300 से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। कमलनाथ के लिए ये लोकसभा चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है, इसलिए वे सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं। सिंधिया ने अपने क्षेत्र ग्वालियर-चंबल से करीब 150 कार्यकर्ताओं को पदाधिकारी बनवाया है। इस अंचल में सफलता का श्रेय भी सिंधिया को जाता है, इसलिए उन्होंने कार्यकर्ताओं को पद दिलाने में कोताही नहीं बरती। समन्वय की कमान संभालने वाले दिग्विजय सिंह ने समन्वय बैठाने के लिए 200 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की सिफारिश की। उनके इस फॉर्मूले ने खूब असर दिखाया और बागी तेवर ठंडे पड़ते गए। प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने पूरे प्रदेश में बैठकें कर कार्यकर्ताओं का मानस टटोला और 200 लोगों को पदाधिकारी बनवा दिया। अजय सिंह ने विंध्य, अरुण यादव ने निमाड़, कांतिलाल भूरिया ने आदिवासी क्षेत्र और सुरेश पचौरी ने मध्य क्षेत्र में संतुलन व समन्वय के लिए 50-50 से ज्यादा समर्थकों को संगठन में पद दिलवाए।


- नाराज विधायकों से भी मांगे नाम
कुछ वरिष्ठ विधायक मंत्री न बन पाने के कारण नाराज हैं। इनमें केपी सिंह, एदल सिंह कंसाना, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, विक्रम सिंह नातीराजा, हीरा अलावा और बिसाहूलाल सिंह के नाम शामिल हैं। संगठन ने इन नेताओं से भी पद देने के लिए उनके समर्थकों के नाम मांगे हैं। लोकसभा चुनाव में सबको साधकर चलने के लिए ये रणनीति अपनाई जा रही है। वहीं, संगठन की ओर से नाराज नेताओं को ये संदेश भी दिया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद निगम-मंडलों की नियुक्तियों में उनको प्राथमिकता दी जाएगी।
- सिर्फ लेटरहेड के लिए नहीं बनाया पदाधिकारी
कमलनाथ ने इन पदाधिकारियों से दो टूक कहा कि उनको सिर्फ लेटरहेड और विजिटिंग कार्ड छपवाने के लिए पदाधिकारी नहीं बनाया है। लोकसभा चुनाव में गुटबाजी छोड़ पूरे मन से काम में जुट जाना है। पदाधिकारी के नाते उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है, इसलिए उनको अपने क्षेत्र के सभी लोगों को साथ लेकर चलना है। अपना बूथ जिताने वाले कार्यकर्ताओं को सरकारी संस्थाओं में जगह दी जाएगी।

जो कार्यकर्ता जिस योग्य है, उसे उस हिसाब से संगठन में पद दिया गया है। ये नियुक्यिां संगठन को मजबूत के लिए की गई हैं।
- चंद्रप्रभाष शेखर, संगठन प्रभारी, प्रदेश कांग्रेस

कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के गिरफ्तारी के बाद केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक अधिसूचना जारी करते हुए अलगाववादी संगठन जमात-इस्लामी को बैन करने के आदेश दिए हैं।



केंद्र सरकार ने अलगाववादी संगठन जमात-ए-इस्लामी को किया बैन


राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और अलगाववाद में शामिल होने का आरोप लगाते हुए किया प्रतिबंधित


गुरुवार शाम केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना, 5 साल तक लागू रहेगा प्रतिबंध


22 फरवरी को गिरफ्तार किए गए थे जमात-ए-इस्लामी के कई कार्यकर्ता


श्रीनगर 
कश्मीर में अलगाववाद पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने अलगाववादी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस संबंध में गुरुवार शाम गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करते हुए जमात-ए-इस्लामी पर पांच साल का प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में यह कहा है कि जमात-ए-इस्लामी ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है जो कि आंतरिक सुरक्षा और लोक व्यवस्था के लिए खतरा हैं। ऐसे में केंद्र सरकार इसे एक विधि विरूद्ध संगठन घोषित करती है। 

केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में जमात-ए-इस्लामी के अलगाववाद और देश विरोधी गतिविधियों में भी शामिल होने की बात कही गई है। इसके अलावा इसको नफरत फैलाने के इरादे से काम करने वाला एक संगठन भी बताया गया है, जिसके बाद मंत्रालय ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिहाज से संगठन को प्रतिबंधित करने के आदेश दिए हैं। बता दें कि हाल ही में एजेंसियों ने कश्मीर घाटी से जमात-ए-इस्लामी के तमाम सदस्यों को गिरफ्तार किया था। 

22 फरवरी को गिरफ्तार हुए थे अलगाववादी नेता 
घाटी में 22 फरवरी को हुई एक बड़ी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जम्मू-कश्मीर  लिब्रेशन फ्रंट और जमात-ए-इस्लामी के 130 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। 22 फरवरी की रात दक्षिण, मध्य और उत्तरी कश्मीर के इलाकों में यह छापेमारी की गई थी, जिसमें जमात संगठन के प्रमुख अब्दुल हामिद फयाज सहित दर्जनों नेताओं को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के बाद महबूबा मुफ्ती  ने जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की थी। इसके अलावा पूर्व राज्यमंत्री सज्जाद लोन ने इस कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाए थे। 

महबूबा ने किया था जमात-ए-इस्लामी का समर्थन 
महबूबा ने इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद अपने ट्वीट में लिखा था कि 'पिछले 24 घंटे में हुर्रियत नेताओं और जमात संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। महबूबा ने कहा कि इस तरह के मनमाने कदम को वह समझ नहीं पा रहीं, जिससे केवल मामला उलझेगा...उनकी गिरफ्तारी किस कानूनी आधार के अंतर्गत की गई है और क्या वह जायज है? आप एक व्यक्ति को जेल में डाल सकते हो लेकिन उसके विचारों को नहीं।' 

सज्जाद लोन ने भी उठाए थे सवाल 
वहीं सज्जाद लोन ने कहा था कि सरकार गिरफ्तारी की होड़ में दिखाई दे रही है। चेतावनी सिर्फ एक शब्द है। 1990 में बड़ी संख्या में गिरफ्तारी हुई थी। कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लोन ने कहा, ‘नेताओं को जोधपुर और देश भर की अलग-अलग जेलों में ले जाया गया। चीजें और बिगड़ गई हैं। यह एक आजमाया हुआ और विफल मॉडल है। यह काम नहीं करेगा। चीजें और बिगड़ेंगी।’ 

इमरान खान ने पाक संसद को संबोधित करते हुए कहा कि, 'हमें डर था कि पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद भारत कहीं मिसाइल हमला ना कर दे इसलिए पूरा देश अलर्ट पर रखा गया था. हवाई सेवाएं रोक दी थी और सेना को किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार रहने कहा था.'


 


भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव का असर पाकिस्तान पर साफ़ दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाक संसद को संबोधित करते हुए कहा कि, 'हमें डर था कि पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद भारत कहीं मिसाइल हमला ना कर दे इसलिए पूरा देश अलर्ट पर रखा गया था. हवाई सेवाएं रोक दी थी और सेना को किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार रहने कहा था.'


इमरान खान ने कहा कि भारतीय एक्शन से हम खुश नहीं थे. जैसे वो हमारे सीमा में घुसे उसी तरह हम भी भारतीय सीमा में अंदर आए. उनके दो विमान भी हमने मार गिराए. लेकिन हम शांति चाहते हैं. हम केवल यह दिखाना चाहते थे कि हम भी हमला कर सकते हैं. भारत ने आज पाकिस्तान को जैश-ए-मोहम्मद पर डोजियर सौंपा है. यदि भारत हमले के पहले डोजियर देता तो हम कार्रवाई करते, लेकिन उन्होंने डोजियर देने से पहले ही हम पर हमला कर दिया.

उन्होंने आगे कहा कि हम कोई लड़ाई नहीं चाहते हैं और इसके लिए मैंने कल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात करने की कोशिश की है. लेकिन हम जो ये कोशिश कर रहे हैं, उसे कमजोरी न समझा जाए.

सेना, एनएसए और प्रधानमंत्री की मीटिंग ने बढ़ाई पाकिस्तान की चिंता....

पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायु सेना द्वारा की गई बमबारी के जवाब में बुधवार सुबह पाकिस्तानी विमान भी भारतीय सीमा में घुस आए थे और नौशेरा सेक्टर में बमबारी की. इसके जवाब में भारतीय विमानों ने पाकिस्तान के विमानों को खदेड़ दिया और उनका एक F 16 लड़ाकू विमान भी मार गिराया. लेकिन दुर्भाग्यवश भारत का एक मिग विमान पाकिस्तानी सीमा में क्रैश हो गया और पायलट अभिनंदन वर्तमान को गिरफ्तार कर लिया गया.

इस घटना के बाद भारत ने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की. लेकिन प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुख और एनएसए की लम्बी बैठक चली जो पाकिस्तान के लिए चिंता बन गई. पूरा पाकिस्तान अलर्ट पर था. यहां तक कि इमरान खान ने यह भी कहा कि उन्हें डर था कि भारत मिसाइल हमला ना कर दे. 



अभी-अभी एक पायलट प्रोजेक्ट हुआ है, अब रियल करना है: पीएम मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही है. उनका यह बयान उस वक्त आया है, जबकि पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भारतीय वायुसेना के पायलट को शुक्रवार को रिहा करने का फैसला किया है.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मौके पर दिल्ली के विज्ञान भवन में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्रदान किए. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने दुनिया को हर बार आश्चर्यचकित किया है, फिर चाहे मंगलयान की बात हो या फिर अन्य तकनीक के क्षेत्र की बात. साथ ही उन्होंने यहां यह भी कह दिया कि अभी-अभी एक 'पायलट प्रोजेक्ट' पूरा हो गया. अभी रियल करना है.

पीएम नरेंद्र मोदी का यह बयान पाकिस्तान के बालाकोट में भारत की एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान द्वारा भारतीय वायुसेना के पायलट को रिहा करने के ऐलान के बीच आया है. इस कार्यक्रम के आरंभ में पीएम मोदी ने कहा, 'आप तो लेबोरेटरी में जिंदगी गुजारने वाले लोग हैं, आपके अदंर पायलट प्रोजेक्ट करने की परंपरा होती है, उसके बाद आगे बढ़ते हैं. अभी-अभी एक पायलट प्रोजेक्ट हो गया है. अभी रियल करना है, पहले तो प्रैक्टिस थी.'

पीएम मोदी के इस बयान पर जमकर तालियां बजाई गईं. पीएम मोदी ने इस बीच कहा कि रियल ये है कि आज के विजेताओं को खड़े होकर तालियां बजाकर, पहले वाला प्रैक्टिस था, ये रियल था.

बता दें कि पीएम मोदी ने यहां जो पुरस्कार वितरित किए, वह भारतीय विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के संस्‍थापक निदेशक डॉ. शांति स्‍वरूप भटनागर के नाम से दिया जाता है. विज्ञान भवन में पुरस्कार वितरण के बाद पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने हमेशा मानवता की भलाई के लिए अपना योगदान दिया है. विज्ञान से जुड़े हमारे संस्थानों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने आपको गढ़ना होगा.

पीएम मोदी ने कहा, 'हमें अपनी मौलिक शक्ति को बनाए रखते हुए भविष्य के समाज और इकोनॉमी के हिसाब से ढालना होगा. अब हमारे फार्मा सेक्टर और बायोटेक सेक्टर को ज्यादा गति देने का समय आ गया है. आज भारत में बनी दवाएं दुनिया के 200 से ज्यादा देशों में निर्यात की जा रही हैं.'

उन्होंने यह भी कहा कि जब इच्छा शक्ति हो तो सीमित संसाधनों में भी कैसे अद्भुत परिणाम दिए जा सकते हैं, इसका उदाहरण हमारा स्पेस प्रोग्राम है. उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बायो फ्यूल के मामले में भी CSIR बड़ी भूमिका निभा रहा है. CSIR ने जो एविएशन बायो फ्यूल बनाया है, उसका ट्रायल भी 27 अगस्त 2018 को हो चुका है. इससे संचालित होने वाले हवाई जहाज को देहरादून से दिल्ली तक उड़ाया जा चुका है.

कोलारस आस्पताल में चल रही है चपरासी की मनमानी

आप को बता दें की कोलारस अस्पताल में pm कराने आए  परिजनों से चपरासी ने मांगी 1000 रु

मामला कोलारस के इमलाबाद गांव में कल शाम को मंगल सिंह पुत्र साहब सिंह गुर्जर ने अज्ञात कारणों के चलते अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली जिसके बाद उसे कोलारस अस्पताल में pm के लिए लेकर आये और सुबह उसका pm हुआ pm के बाद चपरासी गुरुचरण ने परिजनों से 1000 रु मांगे चपरासी गुरुचरण का कहना था की आप जब 1000 रुपए दोगे तब डेड बॉडी को ले जाने देंगे जब परिजनों ने उसकी सूचना डॉ आनन्द जैन को दी उसके बाद डॉ ने डेड बॉडी को वहाँ से रवाना किया और उसके बाद परिजन डेड बॉडी को ट्रेक्टर से लेकर गए
ऐसे में सवाल ही उठता है की सरकारी अस्पतालों में ही चपरासी अपनी मनमानी कर रहे हैं यहां तक की इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारी व डॉक्टरों को भी नहीं है जब इसकी जानकारी अधिकारियों को या डॉक्टरों को मिलती है तो उसके बाद भी चपरासियों पर कोई कार्यवाही नहीं होती

परिजन

परिजनों का कहना है कि हमसे 1000 रु की मांग की ओर बोला की जब तक 1000 रु नही दोगे तब तक डेड बॉडी नही ले जाने दूंगा

*(मुझे कार्यकर्ताओं को आमजन के बीच लेकर जाना )*

*(पहले आतंकवादी हमला होने पर पाकिस्तान में खुशियां मना करती थी अब भय का वातावरण है - डॉ नरोत्तम मिश्र)*

*(पहले महंगाई पर गाना बना करते थे जैसे महगाई डायन खाये जात है पर इन 5 वर्षों में कोई भी गाना महंगाई पर नहीं बना)*

*(कानपुर)*

आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मेरा बूथ सबसे मजबूत कार्यक्रम के अंतर्गत देश के 15000 स्थानों पर कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संवाद  किया गया इसी कार्यक्रम में आज कानपुर में  सम्मिलित  होने पहुंचे मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव सह प्रभारी डॉ नरोत्तम मिश्र  ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए  कहा जो लोग पांच वर्ष पूर्व हिंदुओं को आतंकवादी घोषित करने में लगे थे वह लोग अब 5 साल में अपने को हिंदू साबित करने में लगे हैं यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भारतीय जनता पार्टी की बहुत बड़ी उपलब्धि है।
डॉ श्री मिश्र ने कहां 5 साल पहले मुंबई में ताज पर आक्रमण हुआ था  तब पाकिस्तान के अंदर खुशी का माहौल था। आज जब पुलवामा में आतंकवादी हमला हुआ तो पाकिस्तान के अंदर भय का वातावरण है मोदी कार्यकाल का 5 साल का अंतर है
श्री मिश्र बोले पहले महंगाई पर गाने बना करते थे " महंगाई डायन खाए जात है हाय महंगाई महंगाई महंगाई"
पर इन 5 सालों में कोई भी गाना महंगाई पर नहीं बना प्रधानमंत्री मोदी के इन 5 साल के कार्यकाल में महंगाई की लगाम कस कर पकड़ी है यह 5 साल का अंतर है मुझे कार्यकर्ताओं को आमजन के बीच लेकर जाना।
डॉ श्री मिश्रा ने मेरा बूथ सबसे मजबूत  कार्यक्रम में शामिल होने आये कार्यकर्ताओं का आभार भी व्यक्त किया
इस दौरान कानपुर क्षेत्र के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी एवं अध्यक्ष बाबूराम निषाद राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास भी उपस्थित रहे



    


जयपुर। दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने हाईकोर्ट एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की अपील को खारिज कर दी है। एकलपीठ ने एजेएल को हेराल्ड हाउस खाली करने के आदेश दिए थे। इस आदेश को कंपनी ने डबल बैंच में अपील करके चुनौती दी थी। आज बुधवार को हाईकोर्ट डबल बैंच ने भी इस अपील को खारिज कर दिया है। कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे हाईकोर्ट ने नामंजूर कर दिया। एजेएल को अब 56 साल पुराने हेराल्ड हाउस को खाली करना होगा। वहीं कंपनी सुप्रीम कोर्ट में आदेश को चुनौती देगी। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि अखबार चलाने के लिए नेशनल हेराल्ड हाउस की जमीन का सही उपयोग नहीं हो रहा है।



प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद में ऐलान किया है कि अभिनंदन को कल रिहा कर देगा।

इस्लामाबाद। भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच बड़ी खबर है कि पाकिस्तान भारतीय पायलट विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा करने के लिए तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद में ऐलान किया कि हम शांति की पहल के तहत अभिनंदन को कल रिहा देंगे। अभिनंदर वाघा बॉर्डर के जरिए कल लौट आएगा।

अभिनंदन की रिहाई को भारत की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी माना जा रहा है। भारत सरकार ने आज ही साफ शब्दों में कहा था कि अभिनंदन को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए और इसको लेकर पाकिस्तान से कोई सौदेबाजी नहीं की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद पूर्व सैन्यकर्मी जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि पाकिस्तान भारत से डर गया है और इमरान खान ने भारत के आगे घुटने टेक दिए हैं।

ट्रंप ने कहा था, जल्द आएगी अच्छी खबर

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए थे कि जल्द भारत और पाकिस्तान की तरफ से एक बड़ी अच्छी खबर आने वाली है। दोनों इस तरफ बढ़ रहे हैं।

ट्रंप ने कहा था, , 'जल्द भारत और पाकिस्तान की तरफ से अच्छी खबर आने वाली है। वो दोनों इस तरफ आगे बढ़ रहे हैं और हम इसमें शामिल हैं, हमने उन्हें रोका है। हमारे पास संभवतः कुछ अच्छी खबर आने वाली है। उम्मीद है कि यह सब एक अंत की तरफ बढ़ेगा। यह लंबे समय से चला आ रहा है, दशकों से। '


इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि अभिनंदन की रिहाई के मुद्दे पर प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात करने को तैयार हैं। कुरैशी ने कहा था कि वे अभिनंदन को रिहा करने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले दोनों देशों के बीच हालात सामान्य होने चाहिए।

मालूम हो, बुधवार को पाकिस्तान के विमानों ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की, जिन्हें सफलतापूर्वक खदेड़ दिया गया। पाकिस्तान के एफ-16 विमान को पीछा करने वालों में भारत का मिग-21 भी था, जिसे वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन उड़ा रहे थे। पाक विमान का पीछा करने के चक्कर में अभिनंदर पीओके में चले गए, जहां उनके विमान पर मिसाइल दागी गई। उनका मिग-21 क्रैश हो गया और वे पैराशूट से बाहर निकल आए, जिसके बाद पाक सेना ने उन्हें पकड़ लिया।

इसके बाद पाकिस्तान की ओर से अभिनंदन का एक वीडियो भी जारी किया गया था। कुछ तस्वीरें भी सामने आई थीं, जो भारत में सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इसके बाद भारतीय सैन्य अफसरों ने इंटरनेट पर भारतीय लोगों से अपील की कि वह पाकिस्तानी सेना की ओर से बंदी बनाए गए पायलट अभिनंदन वर्तमान के वीडियो साझा न करें। चूंकि पाकिस्तानी सेना ने उनके पांच वीडियो भारत के खिलाफ मनोवैज्ञानिक जंग जीतने के लिए बनाकर जारी किए हैं।

भारत की पाक को दी थी सख्त हिदायत, पायलट को न पहुंचाए हानि

भारत के लापता पायलट के पाक की हिरासत में होने की खबर के बाद भारत ने पाक को आगाह किया था कि वह पायलट अभिनंदन को किसी भी तरह की हानि न पहुंचाए। साथ ही कुछ तस्वीरें वायरल करने पर भी नाराजगी जताई थी। भारत ने इस मामले में पाक को डोजियर सौंपते हुए कहा है कि वह जल्द हिरासत में लिए गए पायलट को रिहा करें।



   


कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस : लोकसभा चुनाव के पहले मैदानी अमले को दी नसीहत, मुख्यमंत्री के बाद मुख्य सचिव ने ली अफसरों की क्लास

भोपाल. लोकसभा चुनाव के दो महीने पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बुधवार को मैदानी अमले से अपने पहले सीधे संवाद में तीखे तेवर दिखाए। कमलनाथ ने कहा, अंग्रेजों के जमाने के सिस्टम से काम नहीं चलेगा। इसे बदलें। कलेक्टर-कमिश्नर मुख्यालय में बैठे रहने की बजाए मैदान में जाकर काम करें। अपनी भूमिका नए सिरे से तय करें और प्रो-एक्टिव होकर काम करें।


कमलनाथ ने मंत्रालय में कॉन्फ्रेंस में कहा कि कलेक्टर-कमिश्नर सरकार का चेहरा होते हैं। आप सरकार और जनता के बीच का सेतु हो। दोनों के बीच तालमेल की जिम्मेदारी आप लोगों की है, इसलिए आपका काम महत्त्वपूर्ण है। हम तक वही समस्याएं आना चाहिए, जो हमारे स्तर की हों।

आप लोगों के स्तर की समस्याएं हम तक आती हैं तो इसका मतलब है कि आप लोग ठीक से काम नहीं कर रहे। ऐसा होता है तो सख्त कार्रवाई करूंगा। सीएम हेल्पलाइन और समाधान जैसी योजनाएं कैसे चल रही थी, सब जानता हूं, लेकिन अब ये दिखावे के लिए नहीं होना चाहिए। योजनाओं डिलीवरी सिस्टम सही हो।

जहां ज्यादा आवेदन, वहां गड़बड़ी ज्यादा

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा अनुभव है कि जिस जिले में सुशासन नहीं है, वहां समस्याओं के सबसे अधिक आवेदन आते हैं। समस्याओं को पैदा होने के पहले ही रोकें। यदि कलेक्टर के स्तर से लापरवाही होती है, तो सख्त एक्शन लिया जाएगा।से बताकर मैदानी काम करने के लिए भी कहा।

मोहंती बोले - चुनाव में बिजली-पानी पर नेतागीरी होगी, अभी से संभल जाओ

कॉन्फ्रेंस में लोकसभा चुनाव का असर भी दिखा। मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने मैदानी अमले स कहा कि चुनाव आने वाले हैं। गर्मी भी आ गई है। ऐसे में नेता बिजली और पानी पर आक्रामक होंगे। नेतागीरी से निपटने अभी से मैदानी हालात संभाल लो। हमारे पास बिजली सरप्लस है। कटौती की नौबत नहीं आनी चाहिए।

उन्होंने कहा, स्कूल और अस्पताल को सुधार के लिए अपने स्तर पर नवाचार में शामिल कर सकते हो। लोगों को लगे तो सही कि नई सरकार आई है। उन्होंने बताया इलैया राजा ने भिंड का अस्पताल सुधारा है। प्रियंका दास जहां जाती हैं वहां का अस्पताल सुधारती हैं। अब अनुराग ने सीधी का जिम्मा लिया है। देखते हैं कि इस कॉम्पीटिशन में कौन-कौन आता है। कॉन्फ्रेंस से मुख्यमंत्री के रवाना होने के बाद मोहंती ने दिनभर मोर्चा संभाला।

103 शहरों में रोज पानी नहीं

नगरीय विकास व आवास विभाग के अफसरों ने बताया कि 378 नगरीय निकाय में से 103 में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। इसे सीएस ने बेहद गंभीर हालात बताया। उन्होंने कहा कि ग्वालियर-चंबल में पहले बंदूक का लाइसेंस होना प्रतिष्ठा की बात थी, लेकिन अब जिस घर के आगे हैंडपंप है वो सम्मान की बात है। पानी के बिगड़ते हालात संभालो।

कैसे कलेक्टर हो...

मोहंती ने जबलपुर के लिए कहा मास्टर प्लान की सडक़ों पर निर्माण हो गया और कलेक्टर को पता ही नहीं चला। कै से कलेक्टर हो। सीएस ने राजस्व के 1200 करोड़ में से सिर्फ 295 करोड़ की वसूली नाराज होकर कहा, ऐसे काम नहीं चलेगा।

गोलगप्पे में एसिड

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने कहा कि एसिड की खुलेआम बिक्री होती है। कलेक्टरों को रोक लगानी चाहिए। मोहंती ने कहा- बिलकुल सही है। कई जगह तो गोलगप्पे में स्वाद बढ़ाने के लिए एसिड मिलाया जा रहा है। इसे रोको।

हत्याकांड हुआ और सीएस ने की अफसरों की तारीफ

सतना के चित्रकूट में दो बच्चों का अपहरण और हत्या होने के प्रकरण में सीएस ने रीवा संभागायुक्त और सतना कलेक्टर की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि आप लोगों ने लॉ एंड ऑर्डर को लेकर बेहतर तरीके से हालात संभाले। सीएस की इस तारीफ की अफसरों में खूब चर्चा रही, क्योंकि इस मामले में सतना पुलिस के साथ जिला प्रशासन पर भी लापरवाही व नाराजगी के आरोप लगते रहे हैं।

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