काव्य गोष्ठी के रूप में मनाया वरिष्ठ साहित्यकार वशिष्ठ का जन्मदिवस।
वरिष्ठ साहित्यकारों के जन्मदिवस पर हुआ करेगी काव्य गोष्ठी।
शिवपुरी के वरिष्ठ साहित्यकारों के जन्मदिवस पर युवा साहित्यकार काव्य गोष्ठी का आयोजन कर उन्हें सम्मानित किया करेंगे,इसी क्रम में पहली काव्य गोष्ठी शिवपुरी के वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश वशिष्ठ के जन्मदिवस पर काव्य गोष्ठी स्थानीय जल मंदिर मैरिज हाउस में आयोजित की गई,जिसमे शिवपुरी के सभी वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति रही।
सर्वप्रथम जन्मदिवस काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश वशिष्ठ के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए शिवपुरी के वरिष्ठ साहित्यकार व वशिष्ठ के बाल सखा अरुण जी अपेक्षित ने कहा कि अरुण और दिनेश एक दूसरे के पर्याय है,बचपन से ही इनमें काव्य प्रतिभा थी साथ ही रंगमंच के बेहतर कलाकार रहे है,शिवपुरी महाविद्यालय से वाद विवाद प्रतियोगिता में आपने परचम भी लहराया है,शिवपुरी के वरिष्ठ गीतकार डॉ एच पी जैन ने दिनेश जी वशिष्ठ के लेखन कार्य की प्रशंसा करते हुए  सच्चा व अच्छा व्यक्ति बताया,प्रो लखनलाल जी खरे ने बताया कि दिनेश जी मे भारतीय दर्शन इतिहास कलाशिल्प के प्रति गहरी रुचि है जिसके कारण उनका अध्ययन इतना जबरदस्त है कि शिवपुरी के आस पास की ऐतिहासिक महत्व की जानकारियों का भंडार उनके पास है।इसके बाद काव्य गोष्टि का आयोजन किया गया जिसमें सबसे पहले कु दिव्या भागवानी ने माँ तुम्हारे माथे की बिंदी को चंद्रबिंदु बनाकर,पन्ने पे सजे शब्दो से सजाया है कि प्रस्तुति दी।मयंक राठौर ने ये दिन धीरे धीरे गुजर रहे है इन्हें रोको तो जरा,ये हमसे कह रहे है कुछ इन्हें रोको तो जरा, के बाद कु प्रियंका राजपूत ने बुजुर्गों का साथ क्या होता है ये जाना है मेने,इस सुखद एहसास को बड़े प्यार से जाना है मेने सुनाया विकास प्रचंड ने मीरा बनकर भजन सुनाये तब वह खटकी,सीता गीता सावित्री से दिव्य परम्परा चलती सुनाया।हास्य व्यंग्य के वरिष्ठ कवि राजकुमार चौहान ने या खुदा ये मेरे साथ कैसी गद्दारी की,मेरे ही सर की ये उजड़ी फुलवारी कैसे की,जब उजड़ ही गया चमन सारा,बिना बालो के फिर कंघी कैसे की सुनाकर सभी को खूब हंसाया।प्रो लखनलाल जी खरे ने हम शांति चाहते है और कुछ नही,तकरार बढ़ाने वालो हम हुए अभी कमजोर नही सुनाकर तालिया बटोरी।डॉ एच पी जैन ने जुबा पे नाम जो आये जुबा खुशबू दे,में उसको सोचु तो सारा जहांन खुशबू दे गीत सुनाकर वाह वाही पाई।प्रदीप सुकून ने मेरे जज्बात को मिट्टी में मिलाने वाले,कल इसी मिट्टी को चूमेंगे मिट्टी में मिलाने वाले सुनाकर काव्य गोष्ठी को आगे बढ़ाया।विजय भार्गव ने आदर्शो की बात आज के युग मे ठकुर सुहाती है,राम राज्य की याद में उम्र गुजरती जाती है ने सुनाया।अरुण अपेक्षित ने भावना संघर्ष की मन मे प्रबल है,वह नही कमजोर  जिसमे आत्मबल है सुनाकर एक बेहतर संदेश दिया।इशरत ग्वालियरी ने जहाँ को जीत  लेते थे मुहब्बत की जुबा से हम,न जाने बो जुबा उठाकर हमने कहा रख दी तरन्नुम में गाकर सुनाया,हरिश्चंद जी भार्गव ने उलझा के ये चित्र एक एक दिवस कर,मौसम सब बीत गये, पलको की कोष में मोती सब रीत गये,सुनाकर गोष्ठी को पूर्ण किया।इस अवसर पर दिनेश जी वशिष्ठ ने जीवन के कुछ किस्सों को सभी से साझा करते हुए सभी का शुक्रगुजार किया।अंत मे आभार प्रदर्शन कार्यक्रम संयोजक आशुतोष शर्मा व काव्य गोष्टि का सफल संचालन विकास प्रचंड ने किया।


लोकसभा चुनाव के पहले दौर की वोटिंग से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘आजतक’ को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है. सीएम योगी ने इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा सपा, रालोद और बसपा गठबंधन को ‘सराब’ कहे जाने पर, लोकसभा चुनाव, आतंकवाद और न्याय योजना पर खुलकर बात की.


 



मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)


लोकसभा चुनाव के पहले दौर की वोटिंग से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘आजतक’ को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है. सीएम योगी ने इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा सपा, रालोद और बसपा गठबंधन को ‘सराब’ कहे जाने से लेकर आतंकवाद और न्याय योजना तक पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा, ‘‘सराब’ इस गठबंधन की मृगतृष्णा ही नहीं यह इसकी प्रदेश के प्रति जनता की धोखेबाजी की प्रवृत्ति को भी प्रदर्शित करता है. इन्होंने जाति के नाम पर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न किया है.


योगी महागठबंधन पर हमला

सीएम योगी ने बीएसपी, एसपी और आरएलडी गठबंधन पर जोरदार हमला बोला. सीएम योगी ने कहा कि यूपी में गठबंधन पूरी तरह से फेल हो गया है. बीजेपी देश में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाएगी. पार्टी यूपी में 74 से ज्यादा सीट जीतेगी. वहीं, SP-BSP सरकारों ने प्रदेश की जनता के लिए कुछ काम नहीं किया. अगर किया होता तो स्वाभाविक रूप से जनता का रुझान इनके प्रति होता, इसलिए इनके साथ आने से भी वोट शिफ्ट नहीं होगा.

उपचुनाव में मिली हार पर योगी

उपचुनावों में मिली हार मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने कहा कि इन चुनावों को जनता आम चुनाव की तरह गम्भीरता से नहीं लेती है. आम चुनाव प्रधानमंत्री को लेकर होते हैं. इसमें जनता का नजरिया अलग होता है. मोदी जी प्रधानमंत्री के रूप में हर व्यक्ति की पसंद हैं. हम विकास, राष्ट्रवाद और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे. बीजेपी फिर एक बार प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी.

आतंकवाद पर कांग्रेस को घेरा

आतंकवाद के मुद्दे पर सीएम योगी ने कांग्रेस को घेरा है. सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारों ने इस मुद्दे पर कोई काम नहीं किया. साल 2004-14 के बीच 100 आंतकी हमले हुए हैं, जिनमें 900 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. हमारे जवान शहीद हुए. पिछले सरकार ने क्या किया? मोदी सरकार के पांच साल में कुल 6 से 7 से ऐसी घटनाएं हुईं. पुलवामा हमले के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और उन्होंने जो कहा वो करके दिखाया. 72 घंटे में पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड को मार गिराया गया.

एयर स्ट्राइक का श्रेय नहीं ले रहे

पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में ‘एयर स्ट्राइक’ पर हो रही सियासत पर सीएम योगी ने कहा कि हम एयर स्ट्राइक का श्रेय नहीं ले रहे हैं बल्कि सेना के जवानों की गौरवगाथा को सामने रख रहे हैं. एयर स्ट्राइक का श्रेय जवानों और लीडरशिप को जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जवानों के पराक्रम के सबूत नहीं मांगे जाते उनकी सराहना होनी चाहिए. भारत को अपने जवानों के शौर्य और पराक्रम पर गौरव की अनुभूति होनी चाहिए.

‘न्याय योजना’ पर बरसे योगी

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ राहुल गांधी की ‘न्याय योजना’ पर जमकर बरसे और कांग्रेस को आड़े हाथ लिया. सीएम योगी का कहना है कि राहुल गांधी ने ‘न्याय योजना’ के कागज को सिर्फ पढ़ा है. इस कागज को हटा लेने पर राहुल बता नहीं पाएंगे ये योजना क्या है और इसे कैसे लागू करेंगे. राहुल खुद न्याय योजना के बारे में नहीं बोल सकते हैं. पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने भी ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया था और 48 साल के बाद राहुल को भी फिर गरीबों की याद आई है. ‘न्याय योजना’ से कांग्रेस सिर्फ जनता को गुमराह कर रही है. यह योजना व्यावहारिक नहीं है.

प्रियंका की एंट्री पर योगी

कांग्रेस महासचिव और पूर्वी यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा पर सीएम योगी ने निशाना साधा है. प्रियंका के आने से बीजेपी को दिक्कत नहीं है. उनका यूपी में कोई असर नहीं है. प्रियंका चाहे जहां से चुनाव लड़ें, बीजेपी को कोई फर्क नहीं पड़ता. चुनाव लड़ने का अधिकार सभी को है. उन्होंने कहा कि जो राम के अस्तित्व को नहीं मानते वो चुनाव के समय मंदिर-मंदिर भटककर क्या करेंगे? अमेठी में राहुल गांधी की हार और बीजेपी की जीत होगी.

निषाद पार्टी से गठबंधन

निषाद पार्टी से गठबंधन के सवाल पर सीएम योगी ने कहा कि गठबंधन किससे होना है किससे नहीं? बीजेपी शीर्ष नेतृत्व विचार करेगा. जनता का रुझान पीएम मोदी की ओर है. लोग पीएम के रूप में मोदीजी को देखना चाहते हैं. मोदीजी के साथ आम जन की भावनाएं जुड़ीं हैं.

पीएम मोदी ने कहा, 'उनके झूठ को समझना होगा। उनका झूठ बहुत सीजनल होता है, जैसे पटाखे और पतंग सीजन आता है। एक बार चुनाव से पहले उन्होंने असहिष्णुता का मुद्दा उठाया। चुनाव खत्म हुआ तो यह भी खत्म। फिर बिहार चुनाव से पहले आरक्षण और संविधान खत्म करने की बात कही।'



हाइलाइट्स

देश के 500 स्थानों पर लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'बालाकोट मैंने नहीं, देश के जवानों ने किया है। हम सभी की तरफ से उनको सल्यूट'


करप्शन से लड़ाई को लेकर पीएम ने कहा, 'मैं भ्रष्टाचार करने वाले बहुत से लोगों को जेल के दरवाजे तक लेकर गया हूं'


पीएम मोदी ने कहा कि पढ़े-लिखे, अनपढ़, किसान, कामगार, नौकरीपेशा से लेकर देश का हर आदमी चौकीदार है। यह एक स्पिरिट है


नई दिल्ली 
पीएम नरेंद्र मोदी  ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 'मैं भी चौकीदार ' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे लिए देश और सवा सौ करोड़ भारतीय सबसे पहले हैं। मुंबई के एक शख्स अजय दवे की ओर से बालाकोट स्ट्राइक को लेकर फैसला लेने के रिस्क पर पूछे गए सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा कि यदि मोदी अपने राजनीतिक भविष्य का सोचता तो फिर मोदी नहीं होता। यही नहीं अरुणाचल की एक छात्रा के जवाब में पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सरकार बनने की स्थिति में अपने 5 साल की योजनाओं का ब्योरा दिया। 

'करप्शन कसूंगा शिकंजा, दोगुनी होगी किसानों की आय'
पीएम मोदी ने कहा, '2014 से 2019 तक कुछ लोगों को जेल के दरवाजे तक ले गया हूं। आने वाले समय में देश के लोगों को लूटने वालों के प्रति और सख्ती बरतना। देश को 5 ट्रिलियन इकॉनमी बनाने की ओर ले जाना। देश की एजुकेशन को ग्लोबल बेंचमार्क पर ले जाना। मेरे 5 साल गड्ढे भरन में लग गए। अब अगले 5 साल तक देश का रफ्तार पकड़ाने का काम करूंगा।' 

'नफा-नुकसान सोचता तो मोदी फिर मोदी न होता'
पीएम मोदी ने कहा, 'बालाकोट मैंने नहीं बल्कि देश के जवानों ने किया है। हम सभी की तरफ से उनको सल्यूट। जहां तक निर्णय का सवाल है तो यदि मोदी अपने राजनीतिक भविष्य का सोचता तो फिर वह मोदी नहीं होता। अगर यही राजनीतिक पैंतरेबाजी से देश चलाना होता और नफा-नुकसान जोड़कर देश चलाना होता तो मोदी के पीएम बनने की कोई जरूरत नहीं थी। मेरे लिए देश सबसे ऊपर है।' 

आतंक पर हमला वहां किया, जहां से खेल चल रहा था: मोदी 
पीएम मोदी ने कहा, 'मैं यह फैसला इसलिए कर पाया क्योंकि मुझे अपनी सेना पर भरोसा है। उन्हें छूट इसलिए दी क्योंकि मुझे उनके अनुशासन पर भरोसा है।' पीएम ने कहा, 'आतंकी उरी में आएं और मुंबई में आएं लोगों को मारकर चले जाएं। सेना लड़ रही है और आतंकियों से निपट रही है, लेकिन मैंने सोचा कि यह आतंकी कहां से कंट्रोल होते हैं तो फिर वहीं निपटा जाए।' पीएम मोदी ने कहा कि हमने पाकिस्तान में ऐसी जगह पर वार किया है कि पता चल गया कि वहां आतंकी कैंप चलते हैं। उन्हें छिपाना पड़ रहा है। लेकिन दुर्भाग्य है कि हमारे देश में मोदी को गाली देने में उत्साही लोग अपने बयानों से पाक की मदद कर रहे हैं। 

मोदी बोले, चुनाव बाद लौट जाती है अवॉर्ड वापसी गैंग 
आगरा के राजेश वाल्मीकि की ओर से कांग्रेस को लेकर पूछे सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, 'उनके झूठ को समझना होगा। उनका झूठ बहुत सीजनल होता है, जैसे पटाखे और पतंग सीजन आता है। एक बार चुनाव से पहले उन्होंने असहिष्णुता का मुद्दा उठाया। चुनाव खत्म हुआ तो यह भी खत्म। फिर बिहार चुनाव से पहले आरक्षण और संविधान खत्म करने की बात कही।' पीएम मोदी ने कांग्रेस राज में करप्शन पर हमला बोलते हुए कहा कि हम डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर कर रहे हैं और वह डायरेक्ट बिचौलिया ट्रांसफर स्कीम चलाते थे। पीएम मोदी ने कहा, 'एक अवॉर्ड वापसी गैंग आई। मैंने पूछा कि क्या-क्या वापस आया तो कुछ भी नहीं। उन्हें अवॉर्ड के तहत रुपये मिले हैं, लेकिन वापस नहीं आए। चुनाव पूरे होते ही अवॉर्ड वापसी गैंग घर में जाकर सो जाती है। आपने देखा होगा कि उनके झूठ की उम्र ज्यादा नहीं होती है। कुछ तो ऐसे हैं कि उनकी बालमृत्यु हो जाती है।' 

'देश के गरीबों के पैसे पर पंजा नहीं पड़ने दूंगा'
पीएम मोदी ने कहा, देश के लोग टैक्स देते हैं और अलग-अलग तरह से पैसे देते हैं। इस पर गरीबों का हक होता है। मैंने कहा था कि देश के गरीबों के इस धन पर कभी कोई पंजा नहीं पड़ने दूंगा और मैं इसके लिए चौकीदारी करता रहूंगा। देश के 500 स्थानों पर बैठे लोगों को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'देश के लिए कुछ कर गुजरने वाले और राष्ट्र के सम्मान में ही अपना गर्व अनुभव करने वाले लाखों लोगों से टेक्नॉलजी के माध्यम से मुझे मिलने का आज सौभाग्य मिला है। टीवी चैनलों के माध्यम से देश के करोड़ों परिवारों के साथ भी संवाद करने का मुझे सौभाग्य मिला है।' पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोगों की बौद्धिक मर्यादाएं होती हैं। इसलिए वे ज्यादा सोच नहीं पाते हैं और वे यही सोचते हैं कि चौकीदार का मतलब सीटी, टोपी और डंडा से होता है, लेकिन असल में चौकीदार होना एक स्पिरिट है। 

'चौकीदारी एक स्पिरिट है, जो देश के हर शख्स में है'
पीएम मोदी ने कहा कि 'मैं भी चौकीदार' महात्मा गांधी के ट्रस्ट्रीशिप के सिद्धांत पर आधारित है। पीएम मोदी ने कहा कि पढ़े-लिखे, अनपढ़, किसान, कामगार, नौकरीपेशा से लेकर देश का हर आदमी चौकीदार है। अब हर शख्स चौकीदार है तो फिर चोर कहां बचेंगे? जनता मेरे साथ है और मुझे पता है कि देश की जनता को राजा-महाराजाओं की जरूरत नहीं है, वह चौकीदार पसंद करती है। मुझे खुशी है कि चौकीदार के भाव का निरंतर विस्तार हो रहा है।

विपक्षियों पर कसा तंज, कहा- आलोचकों ने की थी मेरी प्रसिद्धि 
पीएम मोदी ने कहा, '2013-14 में जब देश का चुनाव चल रहा था, तब मैं देश के लिए नया था। सीएम के तौर पर ही मेरी थोड़ी बहुत पहचान थी, मेरे आलोचकों ने ही मेरी प्रसिद्धि ज्यादा की थी। मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं क्योंकि उनके चलते ही पूरे देश में मेरे लिए जिज्ञासा पैदा हुई थी।' पीएम ने कहा, 'लोगों में यह जिज्ञासा पैदा हुई थी कि देश में तो अनेकों मुख्यमंत्री हैं, लेकिन यह क्या चीज है। इसके चलते ही बीजेपी ने मुझे यह दायित्व दिया और देश भर के लोगों से मिलने का मौका मिला। मुझे लगा कि मैं लोगों से क्या कहूंगा? तब मैंने कहा कि आप दिल्ली का जो दायित्व मुझे दे रहे हैं तो यह समझिए कि आप चौकीदार बैठा रहे हैं।' 

BJP विधायक दल के पदाधिकारी घोषित, विजय शाह उपनेता व डॉ नरोत्तम मिश्रा मुख्य सचेतक बने

भोपाल। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भाजपा विधायक दल के पदाधिकारियों की घोषणा कर दी है। विजय शाह उपनेता व डॉ नरोत्तम मिश्रा मुख्य सचेतक बनाए गए हैं। भूपेन्द्र सिंह महामंत्री बने हैं। विश्वास सारंग और यशपाल सिंह सिसौदिया सचेतक बने। विधायक शैलेन्द्र जैन जगदीश देवड़ा विधायक दल के मंत्री बने हैं चेतन्य काश्यप को कोषाध्यक्ष बनाया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा, करण सिंह वर्मा, रामपाल सिंह, सुश्री मीना सिंह, कमल पटेल, यशोधराराजे सिंधिया, अजय विश्नोई, नीना वर्मा, मनोहर उंटवाल, ओमप्रकाश सखलेचा को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है।


लोकसभा चुनाव2019: खंडवा से निर्दलीय विधायक के अलावा जयस के नेता भी टिकट की मांग कर रहे हैं।

भोपाल। कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे बुरहानपुर के निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह राणा शेरा भैया हो या जय युवा आदिवासी शक्ति (जयस) नेता व कांग्रेस विधायक डॉ. हीरा अलावा, लोकसभा चुनाव में टिकट को लेकर अड़े हैं। ये लोग अपनी ताकत बताकर तीन सीटों की मांग कर रहे हैं, जिससे कांग्रेस का चुनावी गणित गड़बड़ा सकता है। अगर इन्हें टिकट नहीं मिला तो इन लोगों ने अपने प्रत्याशी उतारने की चेतावनी भी दे रखी है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की विधायक रामबाई अपने पति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज होने के बाद घिर गई हैं और लोकसभा चुनाव में इसका दमोह सीट पर विपरीत असर पड़ सकता है।

निमाड़ की खंडवा सामान्य लोकसभा सीट पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव का पैनल में नाम है, लेकिन उनके घोर विरोधी निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह शेरा भैया कांग्रेस से पत्नी के लिए टिकट मांग रहे हैं। ठाकुर सुरेंद्र सिंह का दावा है कि उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया, पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को पत्नी को टिकट देने की मांग पेश की है। स्थानीय प्रत्याशी को आधार बनाया है। उनके परिवार से दो लोग पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं।

यादव को टिकट दिए जाने की स्थिति में उन्होंने चेतावनी दी कि फिर उनकी पत्नी को वे निर्दलीय चुनाव लड़ाएंगे। गौरतलब है कि ठाकुर सुरेंद्र सिंह कमलनाथ सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं।

जयस नेता करेंगे प्रचार

जयस के नेता और कांग्रेस विधायक डॉ. हीरा अलावा अपने संगठन के लिए चार लोकसभा क्षेत्रों धार, खरगोन, रतलाम-झाबुआ और बैतूल के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन कांग्रेस ने उनके प्रस्ताव पर जवाब नहीं दिया। पहली सूची में बैतूल और रतलाम-झाबुआ सीटों के प्रत्याशियों का एलान कर दिया। डॉ. अलावा धार और खरगोन सीटों के प्रत्याशियों के एलान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डॉ. अलावा ने जयस को सीटें नहीं मिलने पर चेतावनी दी है कि फिर संगठन चारों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगा और वे उनके समर्थन में प्रचार करेंगे।

बसपा विधायक का दबाव

दमोह लोकसभा सीट में आने वाली पथरिया विधानसभा से बसपा विधायक रामबाई विस चुनाव के बाद से ही कमलनाथ सरकार पर दबाव बना रही थीं। अब तक हुए दो विधानसभा सत्रों में उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ और मंत्रियों पर दबाव बनाया। सरकार को बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों का सहयोग होने से अभी तक उस पर संकट नहीं आया है। हाल ही में एक कांग्रेस नेता की हत्या के मामले में उनके पति व परिजनों के आरोपी बनाए जाने के बाद वे और विचलित हुई हैं। हालांकि अभी तक इस मामले में उन्होंने खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ वे प्रचार करेंगी।

पत्नी को तो उतारेंगे

हम पुराने कांग्रेसी हैं। कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पत्नी को टिकट नहीं दिया तो विधानसभा की तरह निर्दलीय चुनाव लड़ाएंगे।

- ठाकुर सुरेंद्र सिंह, निर्दलीय विधायक

निर्दलीय लड़ाएंगे

जयस प्रत्याशियों को कांग्रेस ने धार और खरगोन सीटों पर टिकट नहीं दिया तो संगठन निर्दलीय चुनाव लड़ेगा। वे जयस के प्रत्याशियों का प्रचार भी करेंगे।

- डॉ. हीरा अलावा, कांग्रेस विधायक

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर अनुच्छेद 370 को खत्म किया गया तो जम्मू कश्मीर से भारत का रिश्ता खत्म हो जाएगा. बता दें कि अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता है.


 



महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो)


जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर अनुच्छेद 370 को खत्म किया गया तो जम्मू कश्मीर से भारत का रिश्ता खत्म हो जाएगा. बता दें कि अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता है.


पीडीपी प्रमुख ने आगे कहा कि अगर अनुच्छेद 370 को खत्म किया जाता है तो मुस्लिम बहुल राज्य भारत का हिस्सा बनना पसंद नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि यदि आप उस पुल (अनुच्छेद 370) को तोड़ते हैं ... तो आपको भारत-जम्मू और कश्मीर के बीच संबंधों को फिर से संगठित करना होगा, जिसमें कई शर्तें होंगी. क्या मुस्लिम बहुल राज्य, आपके साथ रहना चाहेगा? अगर आप अनुच्छेद 370 को खत्म करते हैं तो जम्मू कश्मीर से आपका रिश्ता खत्म हो जाएगा.

बता दें कि महबूबा मुफ्ती समय-समय पर संविधान के अनुच्छेद 35ए के साथ अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर बयान देती रहती हैं. हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि अनुच्छेद 35ए पर हमला किया गया तो उन्हें नहीं पता कि कश्मीर के लोग तिरंगे के बजाय कौन सा झंडा उठा लेंगे.

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आग से मत खेलें, 35ए का बाजा न बजाएं. अगर ऐसा हुआ तो आप वो देखेंगे जो 1947 से अब तक नहीं हुआ है. अगर इस पर हमला किया जाता है तो मैं नहीं जानती कि जम्मू कश्मीर के लोग तिरंगे की जगह कौन सा झंडा पकड़ने को मजबूर हो जाएंगे.

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35ए की वैधानिक मान्यता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. लेकिन 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद बाद एक बार फिर अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाने की मांग ने जोर पकड़ा. हालांकि जम्मू-कश्मीर प्रशासन साफ कर चुका है कि अनुच्छेद 35ए पर सिर्फ चुनी हुई सरकार ही फैसला ले सकती है.

क्‍या है अनुच्‍छेद-370

1. संविधान का अनुच्छेद 370 अस्‍थायी प्रबंध के जरिए जम्मू और कश्मीर को एक विशेष स्वायत्ता वाले राज्य का दर्जा देता है.

2. संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है. लेकिन अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू कराने के लिए केंद्र को राज्य का अनुमोदन चाहिए.

3. इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर पर संविधान का अनुच्छेद 356 लागू नहीं होता. राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है.

4. भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं. यहां के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है. एक नागरिकता जम्मू-कश्मीर की और दूसरी भारत की होती है.

5. यहां दूसरे राज्य के नागरिक सरकारी नौकरी नहीं कर सकते.

6. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता.

7. अनुच्छेद 370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा और प्रतीक चिन्ह भी है.

विजय माल्या बाएं और नीरव मोदी।


 

 

नीरव की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान जज के सवाल से कोर्ट का माहौल हल्का हुआ


नीरव की अपील पर सुनवाई करने वाली जज ने ही दिया था माल्या के प्रत्यर्पण का फैसला


नीरव कीजमानत अर्जी 9 दिन में दूसरी बार खारिज, 26 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई


लंदन. नीरव मोदी (48) की जमानत अर्जी पर सुनवाई जैसे गंभीर मामले के दौरान शुक्रवार को वेस्टमिंस्टर कोर्ट में कुछ देर के लिए माहौल हल्का हो गया। चीफ मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बथनॉट ने पूछा कि अगर नीरव का भारत प्रत्यर्पण होगा तो क्या उसे भी उसी बैरक में रखा जाएगा जिसमें विजय माल्या को रखा जाना है।Advertisement

मुंबई की आर्थर रोड जेल में माल्या के लिए तैयार हुआ है बैरक


दिसंबर में विजय माल्या के प्रत्यर्पण का फैसला देने वाली जज एम्मा ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि इस मामले में बहुत कुछ जाना-पहचाना सा महसूस हो रहा है। जज ने यह पुष्टि करनी चाही कि नीरव को भारत की किस जेल में रखा जाएगा।

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भारत की ओर से बहस में शामिल क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के वकील ने जज के सवाल पर कहा कि नीरव का प्रत्यर्पण होने पर उसे मुंबई ले जाया जाएगा। वाकई ऐसा भी संभव है कि उसे ऑर्थर रोड जेल में ही रखा जाए जहां विजय माल्या के लिए बैरक तैयार किया गया है।


इसके बाद जज ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि नीरव को भी माल्या वाले बैरक में ही रखा जा सकता है। हमें पता है उसमें जगह है। माल्या के प्रत्यर्पण पर सुनवाई के दौरान हमने भारत की ओर पेश जेल के बैरक का वीडियो देखा था।


नीरव मोदी ने शुक्रवार को दूसरी बार वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की। कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी। अगली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नीरव की पेशी होगी।


13700 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव को लंदन पुलिस ने 19 मार्च को गिरफ्तार किया था। भारत की अपील पर वेस्टमिंस्टर अदालत ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।




   


दिग्विजय की माफी पर सियासत, शिवराज ने कहा-चुनाव है इसलिए मांग रहे माफी; मोदी फिर बनेंगे पीएम

भोपाल. मध्यप्रदेश में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सुर्खियों में हैं। दिग्विजय सिंह भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। वहीं, भाजपा दिग्विजय सिंह पर लगातार हमला बोल रही है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिग्विजय सिंह की माफी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव है इसलिए दिग्विजय सिंह को माफी याद आ रही है। शिवराज सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा- दिग्विजय सिंह को कर्मचारियों से माफी मांगने की याद तब आई, जब वह चुनाव लड़ने जा रहे हैं। माफी मांगने की मंशा रहती तो चुनाव लड़ने से पहले क्षमा मांगते। दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश का बंटाधार किया इसलिए सभी लोग उनको 'मिस्टर बंटाधार' कहते हैं। 

क्या कहा शिवराज ने
लोकसभा चुनाव के लिए भोपाल से भाजपा का उम्मीदवार कौन होगा इसको लेकर मंथन चल रहा है। माना जा रहा है कि इस बार भोपाल लोकसभा सीट का फैसला आरएसएस (संघ) की सहमति से होगा। दूसरी तरफ शिवराज सिंह ने कांग्रेस सरकार पर हमला बोला है। शिवराज ने कहा लोकसभा चुनाव में कोई चुनौती नहीं है, हम 29 में से 29 सीटें जीतेंगे। छिंदवाड़ा और गुना में कांग्रेस से ज्यादा वोट विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिल चुका है। पीएम मोदी के समर्थन में सारा हिन्दुस्तान खड़ा है और जिस तरह सूरज का पुनः उदय होना तय है वैसे ही उनका पुनः प्रधानमंत्री बनना तय है।


कांग्रेस नहीं हटा सकती है गरीबी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा- राहुल गांधी ने यह स्वीकार कर लिया है कि कांग्रेस कभी गरीबी नहीं हटा सकी। कांग्रेस ने 1971 में 'गरीबी हटाओ' के नारे के साथ चुनाव लड़ा और आज कह रहे हैं कि हम गरीबी पर सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे। इसका मतलब है कि अब तक गरीबों को छला गया।

दिग्विजय ने मांगी थी माफी
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 16 साल बाद चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस ने उन्हें भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। बुधवार को दिग्विजय सिंह ने भोपाल में होली मिलन समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने 2003 के विधानसभा चुनाव के पहले हुई एक 'सियासी भूल' के लिए माफी मांगी थी। दिग्विजय सिंह ने कहा था- 16 साल पहले हुई भूल-चूक के लिए माफी। 15 साल हो गए, होली का मौका है, कोई भूल-चूक हो गई हो तो माफ करना।



पति ने कोर्ट में लिखकर दिया कि राहुलजी के पीएम बनते बेरोगजगारी भत्ता मिलेगा। उससे पत्नी को पैसे दूंगा।

इंदौर। बेरोजगार हूं, पत्नी-बेटी के भरण-पोषण के लिए कोर्ट ने हर महीने साढ़े चार हजार रुपए देने का आदेश दिया है। मैं यह रकम नहीं दे सकता। राहुल गांधी ने घोषणा पत्र में वादा किया है कि उनकी सरकार बनी तो हर बेरोजगार के खाते में हर महीने छह हजार रुपए आएंगे। मैं पूरे होशोहवास में लिखकर देता हूं कि राहुलजी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जो राशि मुझे दी जाएगी, उसमें से साढ़े चार हजार रुपए हर महीने पत्नी को दे दूंगा। कोर्ट चाहे तो बेरोजगारी भत्ते की रकम में से भरण-पोषण की रकम सीधे पत्नी के खाते में जमा करने का आदेश दे सकती है।

यह मजमून है उस आवेदन का जो भरण-पोषण के एक केस में शुक्रवार को कुटुंब न्यायालय में पेश हुआ। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड में लेते हुए बहस के लिए 29 अप्रैल तय कर दी। आवेदन देने वाले सुखलिया निवासी आनंद शर्मा का पत्नी दीपमाला से पारिवारिक विवाद चल रहा है। गत 12 मार्च को न्यायालय ने आनंद को आदेश दिया कि वे हर महीने पत्नी को तीन हजार रुपए और बेटी आर्या (12) को डेढ़ हजार रुपए भरण-पोषण के लिए अदा करें। प्रधान न्यायाधीश के समक्ष पेश आवेदन में आनंद ने कहा कि उसकी मंशा न्यायालय के आदेश की अवहेलना करना नहीं है, लेकिन बेरोजगारी के कारण उसके लिए भरण-पोषण दे पाना संभव नहीं है।

2006 में हुआ था विवाह

आनंद ने बताया कि उसका विवाह 2006 में हुआ था। शादी के कुछ दिन बाद ही पति-पत्नी में विवाद शुरू हो गया। इस पर दीपमाला ने केस दायर किया है।

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P इससे पहले फूल सिंह बैरया ने भी कांग्रेस ज्वाइन की थी।

भोपाल। लोकसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। शिवराज सरकार में उद्योग मंत्री और मौजूदा विधायक राजेंद्र शुक्ल के भाई विनोद शुक्ल आज कांग्रेस में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री कमलनाथ और अजय सिंह की मौजूदगी में भाजपा विधायक के भाई अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में आए। सतना जिला पंचायत उपाध्यक्ष रश्मि सिंह भी कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। इससे पहले बहुजन संघर्ष दल का कांग्रेस में विलय हुआ था और मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष फूल सिंह बरैया कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए थे।

कांग्रेस में शामिल हुए भाजपा विधायक राजेंद्र शुक्ल के भाई और बाकी नेताओं को लेकर सीएम कमलनाथ ने कहा कि, आज जिन लोगों ने कांग्रेस में प्रवेश लिया है। उन्होंने देश की और प्रदेश की तस्वीर देखी है।आज वो सच्चाई का साथ दे रहे है। कांग्रेस की संस्कृति लोगों को जोड़ने की है।

इस दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लोकसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का दावा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बार मध्य प्रदेश में 22 से 23 सीटें जीतेगी। वहीं उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया के दूसरी सीट से चुनाव लड़ने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वो जिस सीट से सांसद है। इस बार भी उसी से ही चुनाव लड़ेंगे।

वहीं भाजपा में उम्मीदवारों के नाम के ऐलान में हो रही देरी पर चुटकी लेते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि, भाजपा को विज्ञापन देना चाहिए। उससे उन्हें बाकी बची सीटों पर प्रत्याशी जरूर मिल जाएंगे। वहीं आगे कौन कांग्रेस में शामिल होगा, इसे लेकर उन्होंने पत्ते तो नहीं खोले। बस ये कहा कि, मत पूछिए कौन आ रहा है। ये पूछिए कि हम किसे लेंगे। 

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अब तक कांग्रेस एमपी में नौ सीटों पर अपने प्रत्याशी तय कर पाई है। अभी 20 सीटों पर फैसला नहीं हो सका।

रवींद्र कैलासिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के दखल वाली कांग्रेस की सात सीटों पर प्रत्याशी चयन को लेकर हाईकमान असमंजस में है। सिंधिया का नाम गुना के साथ इंदौर-विदिशा सीट के लिए भी चल रहा है। साथ ही उनकी पत्नी प्रियदर्शनी राजे का नाम भी ग्वालियर सीट से विचाराधीन है। सिंधिया की राय पर भिंड-मुरैना और धार की सीटों के प्रत्याशियों का भी फैसला होना है। इस प्रकार सात सीटों पर कांग्रेस असमंजस में है और फैसला सिंधिया पर टिका है।

प्रदेश में अब तक कांग्रेस नौ सीटों पर अपने प्रत्याशी तय कर पाई है। अभी 20 सीटों पर फैसला नहीं हो सका है। 20 में से सात सीटें गुना, ग्वालियर, इंदौर, विदिशा, धार, भिंड और मुरैना के प्रत्याशी चयन में सिंधिया की भूमिका महत्वपूर्ण है। गुना में कांग्रेस की स्थिति विधानसभा चुनाव में कुछ कमजोर थी जिससे मुख्यमंत्री कमलनाथ भी सिंधिया को दूसरी सीट पर जाने की सलाह दे चुके हैं। हालांकि उन्हें दूसरी सीटों में इंदौर या विदिशा जैसी सीटों पर भेजे जाने की चर्चाएं चल रही हैं। सांसद सिंधिया को इस बारे में फैसला लेना है।

प्रियदर्शनी राजे पर असमंजस

सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ग्वालियर जिला कांग्रेस कमेटी ने उनकी ग्वालियर से उम्मीदवारी का प्रस्ताव पारित कर राहुल गांधी को भेज दिया है, मगर वे जिस ढंग से गुना क्षेत्र में सक्रिय हैं, उससे यह संभावना भी है कि वे सिंधिया के गुना से शिफ्ट होने पर इस सीट से प्रत्याशी बनाई जाएं। प्रियदर्शनी को प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ भी कह चुके हैं कि सिंधिया इस पर अपनी सहमति दें। इसी के बाद सिंधिया ने तुरत-फुरत ग्वालियर का दौरा कर स्थानीय नेताओं से मुलाकात की थी। उनके जाते ही जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रत्याशी को लेकर प्रस्ताव पारित कर भेजा था।

भिंड, मुरैना व धार भी सिंधिया के खाते में

सांसद सिंधिया की राय भिंड, मुरैना ही नहीं धार लोकसभा सीट को लेकर भी महत्वपूर्ण मानी जाएगी। भिंड को लेकर भाजपा के पूर्व सांसद अशोक अर्गल से सिंधिया की लगातार बातचीत हो रही है। मंत्री डॉ. गोविंद सिंह से भी सिंधिया और अन्य नेताओं की चर्चा हुई है। अभी तक भिंड सीट से रामनारायण हिंडोनिया का नाम चर्चा में था, जो डॉ. गोविंद सिंह समर्थक माने जाते हैं। रामनारायण हिंडोनिया लोकसभा सीट पर कमजोर प्रत्याशी के रूप में बताए जा रहे थे और अर्गल का नाम सामने आने पर उनकी दावेदारी कमजोर हो गई। अर्गल को लेकर अभी हाईकमान को फैसला लेना है। वे कांग्रेस की सदस्यता लेते हैं तो उन्हें प्रत्याशी बनाया जाना तय है।

इसी तरह मुरैना सीट पर सिंधिया अपने विश्वस्त साथी पूर्व विधायक रामनिवास रावत को टिकट दिलाएंगे। वहीं, धार सीट पर गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी का नाम लगभग फाइनल है, वे सिंधिया समर्थक माने जाते हैं। इस सीट पर जयस भी अपने प्रत्याशी के लिए दबाव बनाए हुए है और कांग्रेस विधायक डॉ. हीरा अलावा ने जयस को सीट नहीं देने पर उनके निर्दलीय प्रत्याशी का प्रचार करने की चेतावनी दे रखी है। इससे राजूखेड़ी के नाम पर संशय की स्थिति है। बताया जा रहा है कि तीनों सीटों पर हाईकमान सिंधिया से पूछकर ही कोई फैसला लेगा।

टिकट वितरण में सिंधिया की महत्वपूर्ण भूमिका

सांसद सिंधिया प्रदेश ही नहीं देश के प्रमुख कांग्रेस नेता हैं। मध्य प्रदेश में चुनावी रणनीति ही नहीं, लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों के चयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रियदर्शनी राजे के टिकट का फैसला हाईकमान को करना है और वह सर्वमान्य होगा।

- पंकज चतुर्वेदी, प्रवक्ता, मप्र कांग्रेस कमेटी



भोपाल। भाजपा नेता राकेश सिंह को BJP का प्रदेश अध्यक्ष इसलिए बनाया गया क्योंकि वो जबलपुर के सांसद भी थे, परंतु 2019 के चुनाव में उसकी रियासत खतरे में जाती नजर आ रही है। सीएम कमलनाथ भोपाल के बाद इंदौर और जबलपुर में भाजपा को तगड़ी चुनौती देने के मूड में हैं। इसके लिए उन्होंने विवेक तन्खा को जबलपुर से लड़ने के लिए राजी कर लिया है। अब जब तन्खा लड़ेंगे तो यह चुनाव सामान्य तो कतई नहीं रह जाएगा। 

कमलनाथ ने सूची जारी होने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम भोपाल से प्रस्तावित कर सबको चौंका दिया था। नाथ ने कहा था कि प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को उन सीटों से चुनाव लड़ना चाहिए जहां से पार्टी 30-35 साल से चुनाव नहीं जीती है। मुख्यमंत्री ने दिग्विजय सिंह को भोपाल के इतर जबलपुर या इंदौर सीट से चुनाव लड़ने की सलाह भी दी थी। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कमलनाथ को धन्यवाद देते हुए उन्हें "कहां से चुनाव लड़ना है" का फैसला राहुल गांधी पर छोड़ दिया था। भोपाल में मिंटो हाॅल में होली मिलन समारोह में उन्होंने दिग्विजय सिंह के नाम की घोषणा भी कर दी थी। 

2014 में जबलपुर में राकेश सिंह के सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं थी। कांग्रेस में गुटबाजी का भी उन्हे फायदा मिला परंतु अब समीकरण बदल गए हैं। अब भाजपा में गुटबाजी है। भाजपा का एक बड़ा वर्ग नहीं चाहता कि राकेश सिंह शक्तिशाली हो जाएं। इधर विवेक तन्खा केवल सुप्रीम कोर्ट के वकील नहीं हैं बल्कि विधानसभा चुनावों में मध्यप्रदेश भर के युवा उनसे जुड़ गए हैं। उन्होंने वकालत के अलावा भी कई काम किए हैं। कांग्रेस में इस समय विवेक तन्खा की अपनी टीम है। विधानसभा चुनाव की सक्रियता उन्हे लोकसभा चुनाव में फायदा पहुंचाएगी



भोपाल। शुक्रवार को बॉलीवुड एक्टर गोविंदा अचानक सीएम कमलनाथ से मिलने आए। गोविंदा से मीडिया को बताया कि वो कमलनाथ को बधाई देने आए थे। गोविंदा और कमलनाथ की दोस्ती तलाशने की काफी कोशिश की परंतु इंटरनेट पर ऐसा कुछ नहीं मिला जो बताता हो कि दोनों के बीच ऐसी दोस्ती है जो गोविंदा बधाई देने के लिए भोपाल तक चले आएं। 

शनिवार सुबह पता चला कि सीएम कमलनाथ ने गोविंदा को एक खास मीटिंग के लिए आमंत्रित किया था। कमलनाथ ने गोविंदा के साथ करीब आधे घंटे तक बात की। कमलनाथ चाहते थे कि गोविंदा इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ें। उन्होंने काफी समझाने की कोशिश की परंतु बात बन नहीं पाई। बता दें कि गोविंदा 2004 में लोकसभा चुनाव लड़कर सांसद बन चुके हैं परंतु अब उन्होंने राजनीति से तौबा कर ली है। 

कमलनाथ को मिला है 14 सीटों का टारगेट

बता दें कि मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 26 पर भाजपा का कब्जा है। इस बार राहुल गांधी ने कमलनाथ को कम से कम 14 सीटों का टारगेट दिया है। इसी के चलते उन्हे फ्रीहेंड भी दिया गया है। कमलनाथ ने भोपाल से दिग्विजय सिंह को उतारकर रणनीतिक जीत तो हासिल कर ली परंतु जबलपुर और इंदौर बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा शहडोल से उनकी प्रत्याशी हिमाद्री सिंह भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। कांग्रेस के पास जिताऊ प्रत्याशियों का टोटा बरकरार है। 



रांची, राज्य ब्यूरो।  - लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान के दिन संबंधित संसदीय क्षेत्रों में अवकाश रहेगा। उक्त दिन संबंधित क्षेत्र के सभी सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। इसी के तरह 29 अप्रैल को चतरा, लोहरदगा तथा पलामू, 6 मई को कोडरमा, रांची, खूंटी तथा हजारीबाग संसदीय क्षेत्र में स्थित तमाम सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहेगा।


12 मई को गिरिडीह, धनबाद, जमशेदपुर तथा सिंहभूम संसदीय क्षेत्र तथा 19 मई को राजमहल, दुमका तथा गोड्डा संसदीय क्षेत्र में मतदान होना है। दोनों तिथि को रविवार है और इस दिन अवकाश रहता ही है। हालांकि कार्मिक विभाग ने शुक्रवार को इन चारों तिथियों को अवकाश घोषित करने की अधिसूचना जारी कर दी। 


इधर, एक अन्य आदेश के तहत सभी निजी प्रतिष्ठानों, दुकानों, औद्योगिक उपक्रमों आदि को अपने कामगारों को मतदान के दिन अवकाश देना होगा ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। इसके लिए वे उनका वेतन भी नहीं काट सकेंगे। यदि कोई कामगार इस आधार पर नियोजित है कि उसे सामान्यतया किसी ऐसे दिन के लिए वेतन नहीं मिलेगा तो भी उसे इस अवकाश के दिन का वेतन देना होगा।


इस प्रावधान का अनुपालन नहीं करने पर संबंधित प्रतिष्ठानों को पांच सौ रुपये तक का जुर्माना देना होगा तथा यह दंडनीय भी होगा। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में भी शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर दी।


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