भोपाल (मंथन न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम में मप्र से भी चार प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें नरेंद्र सिंह तोमर, थावरचंद गेहलोत, वीरेंद्र कुमार एवं प्रहलाद पटेल के नाम की चर्चा है। साथ ही पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की पताका फहराने में मुख्य भूमिका निभाने वाले भाजपा के महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भी कैबिनेट में शामिल किए जाने संभावना जताई जा रही है। हालांकि हाईकमान से किसी ने अधिकृत तौर पर जानकारी भी नहीं दी।

प्रदेश में बड़ी जीत का इनाम 

लोकसभा चुनाव में मप्र ने भाजपा की झोली में 29 में से 28 सीटें डाली हैं, इसलिए मप्र को इस बार बेहतर प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।

पिछली बार भी 4 मंत्री रहे 

अभी तक मोदी के 75 सदस्यीय मंत्रिमंडल में मप्र से चार मंत्री सुषमा स्वराज, नरेंद्र सिंह तोमर, थावरचंद गेहलोत और वीरेंद्र कुमार (राज्यमंत्री) मौजूद रहे, इसलिए संभावना है कि मंत्रियों की संख्या इतनी बनी रहेगी।

इनकी संभावना 

महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी हो सकते हैं शामिल।

इसलिए बन सकते हैं ये 

वरिष्ठता के चलते नरेंद्र सिंह तोमर और जाति समीकरण के चलते थावरचंद गेहलोत की कुर्सी बनी रहेगी। महिला कोटे से सीधी से दूसरी बार जीती रीति पाठक को लेकर भी विचार चल रहा है।


भोपाल। अपने करीबियों पर पड़े आयकर छापों और पूछताछ के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ सामने आए हैं। आज किसानों के साथ हुई बैठक के बाद जब उनसे इस मसले से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि," प्रदेश सरकार जल्द ही कई बड़े घोटालों के खुलासे करने जा रही है। ऐसे में इससे ध्यान भटकाने के लिए आयकर छापे की कार्रवाई की जानकारी को सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने कहा कि छापे में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उन्हें मैं नहीं जानता। इससे जुड़े दस्तावेज कैसे सार्वजनिक हुए, इसकी भी जांच होनी चाहिए।"

वहीं एक बार फिर उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि पिछले रविवार को ही भोपाल में विधायक दल की बैठक हुई थी। जिसमें 120 विधायकों ने लिखित में सरकार को समर्थन देने की बात कही थी। ऐसे में अगर विपक्ष चाहता है तो वो फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गाजियाबाद में बेटे बकुलनाथ की जमीन आवंटन रद्द करने से जुड़े सवाल पर भी सफाई दी, उन्होंने कहा कि, "मौके पर कोई अतिक्रमण नहीं किया गया है। उन्होंने दावा किया है कि गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी ने कोई नोटिस जारी नहीं किया है। मौके पर जो भी निर्माण हुआ है, वो तीन दशक पुराना है। ऐसे में राजनीतिक द्वेष की वजह से इसे तूल दिया जा रहा है।"

ये है पूरा मामला

बता दें कि लोक सभा चुनाव के दौरान आयकर विभाग ने मध्य प्रदेश में 281 करोड़ रुपये के हवाला रैकेट का भंडाफोड़ किया था। सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग जल्द ही इस मामले में कमलनाथ के रिश्तेदारों व सहयोगियों को पेश होने के लिए नोटिस जारी करेगा। ये लोग भोपाल व छिंदवाड़ा में स्थित हैं। पिछले महीने दिल्ली और मध्य प्रदेश में आयकर विभाग ने 52 स्थानों पर छापे मारे थे। इसमें उनके नाम सामने आए थे। इस कार्रवाई की रिपोर्ट विभाग ने चुनाव आयोग को सौंप दी है।

सूत्रों के अनुसार पूर्व ओएसडी प्रवीण कक्कड़ व आर के मिगलानी सहित राज्य सरकार के आधा दर्जन अधिकारी, कांग्रेस नेताओं, कमलनाथ के सहयोगियों व करीबियों और को जांच के लिये तलब किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया है कि छापेमारी के दौरान मिली डायरियों में प्रदेश के कई नेताओं के राज छुपे हैं। इनमें कई व्यक्तियों के नगदी लेन-देन का उल्‍लेख है। एक डायरी में 240 करोड़ रुपये के नगदी लेन-देन का ब्यौरा दर्ज है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों पर छापेमारी के बाद आयकर विभाग ने 281 करोड़ रुपये के हवाला कांड का भंडाफोड़ किया था। विभाग ने पिछले महीने इस मामले में NCR में एक सोलर पावर ग्रुप पर भी छापेमारी करते हुए 1350 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी थी।

भोपाल। भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ने ऐलान किया है कि वो बतौर सांसद मिलने वाला वेतन अपने निजी कार्यों पर खर्च नहीं करेंगी ​बल्कि प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर देंगी और अपना जीवन यापन प्राप्त भिक्षा से ही करेंगी, जैसा कि वो आज तक करती आईं हैं। 


साध्वी को मंगलवार को गाजियाबाद के एएलटी सेंटर में वीर सावरकर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में निमंत्रण दिया गया था। वो बतौर मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। साध्वी ने कहा, वह भिक्षा में मिले भोजन और वस्त्र से अपना जीवन यापन करेंगी।
जब उनसे स्कूल में सैन्य प्रशिक्षण और जनसंख्या नियंत्रण कानून पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सैन्य प्रशिक्षण को लेकर जहां भी समर्थन की बात होगी वह अपना समर्थन देंगी और जनसंख्या नियंत्रण कानून को संविधान के अनुसार आगे ले जाया जाएगा। 
जेल के बारे में बात करते हुए साध्वी ने कहा कि मुझे मिले कष्ट देश पर कुर्बान होने वाले वीर-वीरांगनाओं को मिले कष्टों से कम हैं। जेल में उन दिनों मुझे एक गाना याद आता था, 'दुनिया में कितना गम है, मेरा गम कितना कम है।'



   


सरकार से समर्थन वापसी की अटकलें तेज! बसपा सुप्रीमो ने दी विधायकों को हिदायत, आदेश नहीं माने तो विधायक होंगे निलंबित

शादाब अहमद/जयपुर ।


लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद राज्य सरकार के खिलाफ उठा तूफान अभी थम नहीं रहा है। हालांकि बसपा प्रमुख मायावती ( Mayawati ) के राज्य सरकार को समर्थन जारी रखने के निर्णय से कांग्रेस को थोड़ी राहत जरूर मिली है। मायावती ने विधायकों को चेतावनी के साथ हिदायत दी है कि आदेश नहीं मानने पर विधायक को निलंबित भी किया जा सकता है।

 

 

सरकार से समर्थन वापसी की अटकलें

बसपा के पांच विधायकों के सोमवार को बैठक करने और राज्यपाल से मिलने के कार्यक्रम के बीच सरकार से समर्थन वापसी की अटकलें चली थी। इसके बाद बसपा भी सक्रिय हो गई और यह बात बसपा प्रमुख मायावती तक पहुंची। इस पर मायावती ने संज्ञान लिया और साफ कर दिया कि किसी भी सांप्रदायिक और जातिवादी पार्टी के चक्कर में उनकी पार्टी के विधायक नहीं आए। गहलोत सरकार को बाहर से समर्थन दे रखा है, जो जारी रहेगा।

 

 

मायावती ने बसपा विधायकों को दी हिदायत

पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम ने बताया कि मायावती ने बसपा विधायकों को हिदायत दी है कि वह अपना ईमान नहीं बेचें। यदि किसी विधायक ने ऐसा किया और पार्टी विरोधी गतिविधि में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उसको पार्टी से बाहर किया जा सकता है। गौरतलब है कि बसपा के नदबई विधायक जोगिंदर अवाना, संदीप यादव, वाजिब अली, राजेंद्र सिंह गुढा व लाखन सिंह राज्यपाल से मिलने वाले थे। बाद में एक विधायक की तबीयत खराब बताकर यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया था।



   


मध्यप्रदेश में किसी भी सरकार के पास पूर्ण बहुमत नहीं है। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है।

भोपाल. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस की मुश्किलें अब मध्यप्रदेश को लेकर बढ़ गई हैं। मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार में भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान की नजर मध्यप्रदेश की सियासत पर टिकी हुई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ लगातार विधायकों से संपर्क कर रहे हैं तो वहीं, भाजपा की तरफ से कांग्रेस के कई विधायकों के संपर्क में होने का दावा किया गया है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की मध्यप्रदेश में करारी हार हुई है। प्रदेश की 29 सीटों में से 28 सीटों पर भाजपा को जीत मिली है।


कमलनाथ को भोपाल में रहने का आदेश
मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायकों की हार्स ट्रेडिंग की संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपने विधायकों पर पूरी नजर रखने को कहा गया है। यही वजह है कि कमलनाथ दिल्ली नहीं जा रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में हार की समीक्षा के लिए दिल्ली में बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पार्टी के सभी सीनियर नेता मौजूद थे लेकिन कमलनाथ नहीं पहुंचे थे।

 

कांग्रेस को भय
दरअसल, कांग्रेस को भय है कि प्रधआनमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण के बाद भाजपा प्रदेश में सक्रिय होकर कांग्रेस सरकार गिराने की कोशिश करेगी। इसी संभावना को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने कमलनाथ को हर विधायक से संवाद करने को कहा गया है। उधर राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिल्ली में ही रूकने को कहा है। जिस कारण से उनकी गुना-शिवपुरी में होने वाली धन्यवाद सभा को रद्द कर दिया गया है।

कमलनाथ ने हर मंत्री को दिया काम
वहीं, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश के हर मंत्री को अपने-अपने जिलों के विधायकों की निगरानी करने के आदेश दिए गए हैं। कमलनाथ ने कहा है कि हर मंत्री पांच-पांच विधायकों की समस्या का समाधान करें ताकि विधायकों में असंतोष ना हो। जबकि खुद सीएम कमलनाथ निर्दलीय, बसपा और सपा विधायकों से सीधा संपर्क कर रहे हैं।


कोटा. लोकसभा चुनावों के बाद अब सभी की नजरें मध्यप्रदेश और कर्नाटक की ओर थी जहां तख्ता पलटने के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन अचानक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर मचे बवाल के पास राजस्थान की सियासत में तूफान आ गया है। कांग्रेस के मंत्रियों के तीखे तेवर के बाद अब भाजपा ने भी तंज कसना शुरू कर दिया है। मंगलवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत ने कहा कि जल्द ही कांग्रेस सरकार अल्पमत में आकर गिर सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा को कांग्रेस की अंदरूनी कलह से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन कांग्रेस के ही नेता अपनी सरकार को गिराने में लगे है। ऐसे में जल्द कोई उलटफेर हो जाए तो चौंकने वाली बात नहीं होगी। वहीं मध्यप्रदेश में भी भाजपा के कई नेताओं ने कमलनाथ सरकार को शक्ति परीक्षण की चेतावनी दे डाली है।



शक्ति परीक्षण में जब जब गिर गईं थी भाजपा सरकार
शक्ति परीक्षण में सरकार गिरने का ताजा उदाहरण कर्नाटक का है। विधानसभा की 222 सीटों के आए परिणामों में भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन दे दिया था लेकिन राज्यपाल वजूभाई वाला ने सबसे अधिक सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी यानी भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी भूमिका रही, येदियुरप्पा के शपथग्रहण के बाद भाजपा बहुमत साबित नहीं कर सकी और सरकार गिर गई।


प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान को छोड़ पड़ोसी देशों को दिया बुलावा


नई दिल्ली। पीएम मोदी का शपथ ग्रहण समारोह 30 मई को आयोजित किया जाएगा। इसमें शिरकत करने के लिए कुछ विशेष देशों को आमंत्रित किया गया है। इसमें भारत के पाकिस्तान के साथ रिश्तों का भी साफ संकेत दिया गया है। प्रधानमंत्री और कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह में भारत ने बिम्सटेक के सदस्य देशों (भारत के अलावा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाइलैंड और म्यांमार) को आमंत्रित किया है।

पिछली बार मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सभी सदस्य देशों को आमंत्रित किया गया था। तब पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इसमें हिस्सा लिया था। लेकिन 2016 से भारत सार्क की जगह बिम्सटेक को बढ़ावा दे रहा है और इस बार के आमंत्रण से यह स्पष्ट है कि नई सरकार के कार्यकाल में भी यही नीति जारी रहेगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया, ''भारत सरकार ने शपथ ग्रहण समारोह के लिए बिम्सटेक के सदस्य देशों को आमंत्रित किया है। सरकार की 'पड़ोसी पहले' की नीति के तहत आमंत्रण भेजा गया है। इसके अलावा किरगिस्तान के राष्ट्रपति और मॉरीशस के प्रधानमंत्री को भी आमंत्रित किया गया है।'' किरगिस्तान के राष्ट्रपति को आमंत्रण इसलिए दिया गया है क्योंकि वह अभी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के अध्यक्ष हैं। एससीओ के शीर्ष नेताओं की बैठक 14-15 जून, 2019 को होनी है और उसमें प्रधानमंत्री मोदी भाग लेने जाने वाले हैं।

अफगान राष्ट्रपति को भी आमंत्रित किया जा सकता है

बिम्सटेक में सार्क के अफगानिस्तान, पाकिस्तान और मालदीव के अलावा अन्य सभी सदस्य देश हैं। मालदीव के बारे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद मोदी सबसे पहले वहां की यात्रा करेंगे। जब से वहां नई सरकार सत्ता में आई है तब से भारत के प्रधानमंत्री ने वहां की यात्रा नहीं की है। जानकारों का मानना है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को भी बुलाया जा सकता है। जानकारों की मानें तो आम चुनाव से पहले तक पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ रिश्तों को देखते हुए उसके प्रधानमंत्री इमरान खान को शपथ ग्रहण में बुलाने से अच्छा संदेश नहीं जाता।

शेख हसीना नहीं होगी शपथ ग्रहण समारोह में

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना इस बार भी मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा नहीं ले सकेंगी। वह मंगलवार से जापान, सऊदी अरब और फिनलैंड की यात्रा पर जा रही हैं। 2014 में भी वह विदेश में होने की वजह से नहीं आ सकी थीं। उनकी जगह उनके वरिष्ठ मंत्री एकेएम मोजम्मल हक बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

कमल हसन और रजनीकांत को भी आमंत्रण

शपथ ग्रहण समारोह के लिए अभिनेता से नेता बने कमल हासन (मक्कल नीधि मय्यम पार्टी के प्रमुख) और अभिनेता रजनीकांत को भी न्योता दिया गया है। दोनों के करीबी सूत्रों ने आमंत्रण मिलने की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि दोनों समारोह में हिस्सा लेंगे अथवा नहीं।

मध्‍यप्रदेश में बड़े पैमाने पर आईएएस अफसरों के तबादले, शहडोल कमिश्‍नर को हटाया

सामान्‍य प्रशासन विभाग ने अधिकारियों की तबादला सूची जारी की है।

भोपाल। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्‍त होने ही मध्‍यप्रदेश सरकार ने सोमवार रात बड़े पैमाने पर आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए।

सामान्‍य प्रशासन विभाग ने अधिकारियों की तबादला सूची जारी की है। सरकार ने शहडोल कमिश्नर शोभित जैन को हटा दिया है। शोभित जैन ने शहडोल कलेक्टर ललित दाहिमा के खिलाफ रिपोर्ट दी थी जिसके चलते चुनाव आयोग ने उन्हें हटा दिया था

वहीं जबलपुर कलेक्टर छवि भारद्वाज को भी हटा दिया गया है। छिंदवाड़ा कलेक्टर भरत यादव को जबलपुर का नया कलेक्टर बनाया गया है। पन्ना के कलेक्टर मनोज खत्री को हटाकर मंत्रालय में उप सचिव बनाया है जबकि ग्वालियर के कमिश्नर महेश चंद्र चौधरी को राजस्व मंडल भेजा गया है। चंबल संभाग के कमिश्नर एमके अग्रवाल को आयुक्त सहकारी संस्थाएं बनाया है।

आईजी शापू की एसएएफ में पदस्थापना

पुलिस मुख्यालय ने आईजी साजिद फरीद शापू के अध्ययन अवकाश से लौटने के बाद उन्हें कार्य आवंटित कर दिया है। शापू को आईजी एसएएफ (मध्य क्षेत्र) की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें इसके साथ अतिरिक्त कार्यभार के रूप में आईजी साइबर इंटेलीजेंस डेवलपमेंट की जिम्मेदारी भी दी है। वहीं, डीएसपी ईओडब्ल्यू राजेश गुरु की सेवाएं सामान्य प्रशासन विभाग से वापस ले ली हैं। उन्हें एसएएफ की नौवीं वाहिनी में सहायक सेनानी बनाया है।



नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) में भारी सफलता के बाद बीजेपी नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास अगले साल के आखिर तक राज्यसभा में बहुमत हो जाएगा. इसके बाद मोदी सरकार के लिए अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में आसानी हो जाएगी. फिलहाा एनडीएल के पास राज्यसभा में 102 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यपीए) के पास 66 और दोनों गठबंनों से बाहर की पार्टियों के पास 66 सदस्य हैं. 


एनडीए के खेमे में अगले साल नवंबर तक लगभग 18 सीटें और जुड़ जाएंगी. एनडीए को कुछ नामित, निर्दलीय और असंबद्ध सदस्यों का भी समर्थन मिल सकता है. राज्यसभा में आधी संख्या 123 है, और ऊपरी सदन के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभा के सदस्य करते हैं. अगले साल नवंबर में उत्तर प्रदेश में खाली होने वाली राज्यसभा की 10 में से अधिकांश सीटें बीजेपी जीतेगी. इनमें से नौ सीटें विपक्षी दलों के पास हैं. इनमें से छह समाजवादी पार्टी (सपा) के पास, दो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और एक कांग्रेस के पास है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बीजेपी के 309 सदस्य हैं. सपा के 48, बसपा के 19 और कांग्रेस के सात सदस्य हैं. अगले साल तक बीजेपी को असम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश में सीटें मिलेंगी. बीजेपी राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सीटें गंवाएगी. महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के परिणामों का भी राजग की सीट संख्या पर असर होगा. हालांकि असम की दो सीटों के चुनाव की घोषणा हो चुकी है, जबकि तीन अन्य सीटें राज्य में अगले साल तक खाली हो जाएंगी. बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास राज्य विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत है. ऊपरी सदन की लगभग एक-तिहाई सीटें इस साल जून और अगले साल नवंबर में खाली हो जाएंगी.

दो सीटें अगले महीने असम में खाली हो जाएंगी और छह सीटें इस साल जुलाई में तमिलनाडु में खाली हो जाएंगी. उसके बाद अगले साल अप्रैल में 55 सीटें खाली होंगी, पांच जून में, एक जुलाई में और 11 नवंबर में खाली होंगी.

बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार का प्रयास अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का होगा, जो पिछले पांच सालों के दौरान विपक्ष के विरोध के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं. सरकार तीन तलाक विधेयक को पास नहीं करा सकी, जबकि यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है. नागरिकता संशोधन विधेयक भी पास नहीं हो पाया है.

बीजू जनता दल और तेलंगाना राष्ट्र समिति दोनों ने हालांकि बीजेपी और कांग्रेस से समान रूप से दूरी बना रखी है, लेकिन दोनों दलों ने पिछले साल राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए हरिवंश का समर्थन किया था. 

दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने एक ट्वीट में लिखा, बीएस येदियुरप्पा बहुमत न होने के बावजूद सरकार बनाने की बात कर रहे हैं. यह कोई नया नाटक नहीं है बल्कि लोगों को भ्रमित करने की पुरानी चाल है.

कर्नाटक सरकार के बारे में अटकलों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा. कई कांग्रेस विधायकों के बीजेपी के पाले में जाने और जल्द सरकार गिरने की अफवाहें उड़ी हैं. इस बीच प्रदेश के कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक के एन रंजना ने कहा कि कर्नाटक सरकार तभी तक है जब तक नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ नहीं ली है, नरेंद्र मोदी के शपथ लेते ही सरकार गिर जाएगी.

कांग्रेस नेता के एन रंजना ने कहा, 'प्रधानमंत्री के शपथ लेने तक ही जी. परमेश्वर डिप्टी सीएम हैं. प्रधानमंत्री के शपथ लेते ही परमेश्वर मंत्री नहीं रह पाएंगे और न ही यह सरकार चलेगी. अगले महीने 10 जून को कर्नाटक सरकार गिर जाएगी.'  इसके विपरीत कर्नाटक के मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि गठबंधन का कोई विधायक बीजेपी में नहीं जा रहा है. बीजेपी ने पूर्व में भी सरकार गिराने की कोशिश की है, भविष्य में भी कोशिश करेंगे लेकिन मौजूदा सरकार अपनी मियाद पूरी करेगी.


इससे पहले कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने एक ट्वीट में लिखा, 'बीएस येदियुरप्पा बहुमत न होने के बावजूद सरकार बनाने की बात कर रहे हैं. यह कोई नया नाटक नहीं है बल्कि लोगों को भ्रमित करने की पुरानी चाल है. श्री नरेंद्र मोदी संविधान के सामने माथा झुकाते हैं लेकिन संविधान की किस धारा ने बीजेपी को सरकार अस्थिर करने का अधिकार दिया.'


उधर जी परमेश्वर लोगों को भरोसा दिलाते रहे हैं कि कर्नाटक सरकार पर किसी प्रकार का खतरा नहीं है. परमेश्वर ने शुक्रवार को कहा कि लोकसभा चुनाव में राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के उलट रिजल्ट आए हैं, इसके बावजूद एक साल पुरानी जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन की सरकार सुरक्षित और स्थिर है. उन्होंने कहा, "हमारी सरकार को कोई खतरा नहीं है. मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी हमारा नेतृत्व करते रहेंगे, क्योंकि गठबंधन में शामिल दोनों पार्टियों के विधायक सरकार गिराने की विपक्षी भारतीय जनता पार्टी की कोशिशों को रोकने के लिए एकजुट हैं."

सरकार की तरफ से यह सफाई सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दलों के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद दिया गया है. राज्य की 28 लोकसभा सीटों में से बीजेपी को 25 सीटें मिली हैं. जेडीएस और कांग्रेस को एक-एक सीट मिली है. बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुमालता अंबरीश ने भी एक सीट पर जीत दर्ज कराई है.


भोपाल। लोकसभा चुनाव हो गए हैं। अब मुख्यमंत्री कमलनाथ मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर पर नए सिरे से जमावट करेंगे। इसकी शुरुआत इसी हफ्ते मंत्रालय से हो सकती है। इसमें कृषि विभाग की जिम्मेदारी पूर्ण रूप से नए अधिकारी को सौंपी जा सकती है। इसके लिए प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी का नाम चर्चा में है। वहीं, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में पदस्थ पंकज अग्रवाल की मुख्यधारा में वापसी के आसार भी हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय में बदलाव प्रस्तावित है। हालांकि, यहां के लिए अभी किसी अधिकारी का नाम तय नहीं है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का पूरा फोकस प्रशासनिक कसावट और डिलीवरी पर है।

मंत्रालय और मैदानी स्तर पर कुछ बदलाव काफी समय से प्रस्तावित हैं। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण यह काम ठंडे बस्ते में था। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश कुमार राजौरा को उद्योग विभाग का अतिरिक्त प्रभाग दिया गया है।

सरकार की मंशा उन्हें अब कृषि विभाग से निकालकर उद्योग विभाग में ही पूरी तरह जमाने की है। दरअसल, उद्योग मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाला विभाग है। सरकार इसके भरोसे ही प्रदेश में रोजगार के अवसर पैदा करना चाहती है। इसके लिए मुख्यमंत्री मौजूदा उद्योग प्रोत्साहन योजनाओं में संशोधन के निर्देश भी दे चुके हैं। वहीं, कृषि विभाग कर्जमाफी जैसी बड़ी योजना का क्रियान्वयन कर रहा है।

इसके लिए पूर्णकालिक अधिकारी की जरूरत होगी। इसके मद्देनजर प्रमुख सचिव अजीत केसरी को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वहीं, प्रमुख सचिव पंकज अग्रवाल की मुख्यधारा में वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा ऊर्जा विभाग में बदलाव के संकेत चुनाव के दौरान ही दिए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय में भी बदलाव प्रस्तावित है। गेहूं खरीदी की परेशानियों के मद्देनजर प्रमुख सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति नीलम शमी राव को बदले जाने की चर्चा है।

सामान्य प्रशासन विभाग का प्रभार अभी अपर मुख्य सचिव पीसी मीना के पास है। यहां स्थाई व्यवस्था की जा सकती है। इसके अलावा मैदानी स्तर पर कुछ कमिश्नर और कलेक्टरों के तबादले भी किए जाने हैं। शहडोल में ललित कुमार दाहिमा की वापसी हो सकती है। दाहिमा को मंत्री ओमकार सिंह मरकाम के देर रात कलेक्टोरेट पहुंचने की वजह से चुनाव आयोग के निर्देश पर हटाना पड़ा था। यह कार्रवाई शहडोल कमिश्नर शोभित जैन की रिपोर्ट के आधार पर हुई थी। उधर, कुछ अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की कोशिश में भी लगे हैं।

भोपाल (मप्र)। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद पहली बार मध्य प्रदेश कमलनाथ कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक मंत्रालय में रविवार को छुट्टी के दिन हुई। बैठक में मंत्रियों ने एक सुर में मुख्यमंत्री कमलनाथ से कहा कि विशेष सत्र बुलाकर एक बार बहुमत साबित कर दें। ताकि भाजपा का मुंह बंद हो जाए। भाजपा की ओर से लगातार सरकार के गिरने की बात उठाई जा रही है। बैठक में मंत्रियों ने माना कि पार्टी की हार राष्ट्रवाद की लहर के चलते हुई। हमारी कोई भी योजना उसके आगे टिक नहीं पाई।

मंत्रालय में सुबह 11 बजे से शुरू हुई अनौपचारिक कैबिनेट करीब ढाई घंटे चली। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को चुनाव को लेकर अपने-अपने अनुभव रखने की खुली छूट दी। मंत्रियों ने कहा कि हमने वचन पत्र को निभाया। कन्यादान की राशि 25 से बढ़ाकर 51 हजार रुपए की, हजारों करोड़ रुपए की कर्ज माफी, बिजली बिल माफी, युवा स्वाभिमान योजना जैसे कई कदम उठाए, लेकिन चुनाव में यह टिक नहीं पाए। राष्ट्रवाद हावी रहा। भाजपा ने ऐसा ताना-बाना बुना कि मतदाता भ्रमित हो गया। मुद्दों को हम पकड़ भी नहीं पाए। ऐसे में किसी का दोष नहीं ठहराया जा सकता है। इसी दौरान एक मंत्री ने कहा कि तीन मतदान केंद्रों पर भाजपा के एजेंट तक नहीं बैठे। इसके बाद भी यहां हम 60 वोट से हार गए। मतदाताओं में एक तरह का उन्माद था, जो परिणामों में साफ नजर भी आया।

कमलनाथ ने कहा - सरकार को कोई खतरा नहीं

बैठक में सभी मंत्रियों ने एक सुर में मुख्यमंत्री से कहा कि भाजपा बार-बार सरकार गिराने की बात फैलाकर लोगों को भ्रमित कर रही है। इसके लिए विशेष सत्र बुलाएं और बहुमत साबित करके भाजपा का मुंह बंद कर दें। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को आश्वस्त किया कि सरकार को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। बहुमत हमारे साथ है। बैठक में सरकार के आगामी कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई। पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्तियों पर कार्रवाई करने की बात उठाई। उन्होंने कहा कि इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं देना चाहिए। ब्यूरोक्रेसी में भी कसावट लाई जाए। सिंहस्थ, व्यापमं सहित जितने भी पुराने मामले हैं, उनकी जांच होनी चाहिए।

किसी ने नहीं निकाली भड़ास, मंत्रिमंडल को लेकर भी चुप्पी

उम्मीद की जा रही थी कि चुनाव में करारी हार मिलने के बाद अनौपचारिक कैबिनेट में मंत्री भड़ास निकालेंगे। आरोप-प्रत्यारोप भी हो सकते हैं पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर भी चुप्पी ही रही।


पूर्व मंत्री एवं दतिया विधायक डॉ नरोत्तम मिश्रा 27 को दतिया में।

दतिया
मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं दतिया विधायक डॉ नरोत्तम मिश्रा 27 मई को एक दिवसीय दतिया प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान श्री मिश्रा दतिया विधानसभा के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेगें। 

*प्राचीन जल स्त्रोत ही हमारे जल को मुख्य रूप से संग्रहित कर सकते हैं जिसे हमें पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है*
आज विकासार्थ विद्यार्थी (SFD)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और वसुंधरा कुटुंबकम शिक्षा प्रसार एवं जन कल्याण समिति द्वारा सम्मिलित प्रयास में विलुप्त हो चुके जल स्रोतों  के  जीर्णोद्धार  का कार्य प्रारंभ  किया गया जिसमें मयंक राठौर ने बताया की विष्णु मंदिर के सामने स्थित प्राचीन कुएं के जीर्णोद्धार का दायित्व लिया है। जिसमें आज शहर के कई समाजसेवी , छात्र एवं बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता प्रदान की। जो कुआं बहुत समय पहले कचरे से बंद कर दिया गया था आज जनसामान्य की पहल एवं सभी के सहयोग से उस कुएं के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ किया गया जिसमें सर्वप्रथम उसकी साफ सफाई की गई ।
समिति द्वारा दो अन्य पार्कों को संभालने की जिम्मेदारी भी ली गई है , उन पार्कों का जाकर निरीक्षण किया जिनका कार्य कल से प्रारंभ कर लिया जाएगा इसमें सभी जागरूक  व्यक्ति एवं वे व्यक्ति जो अपने नगर को सूखाग्रस्त होने से बचाने के लिए जल संरक्षण करना चाहते हैं वे  संपर्क कर इस मुहिम में साथ दे सकते हैं एवं इस मुहिम को जनअभियान बनाकर शहर के प्रत्येक नागरिक को इससे जोड़ सकते हैं ।
इस मुहिम में श्री विजय भार्गव जी ,श्री भानु दुबे जी, श्री अभिनंदन जैन जी, श्री शिवा पाराशर जी,  डॉ अभिषेक द्विवेदी जी,  वसुंधरा की अध्यक्ष समीक्षा भार्गव जी, कोषाध्यक्ष अरविंद धाकड़ जी,  सह सचिव तेजस्वी भार्गव जी, सेल्फ डिफेंस ट्रेनर  पूनम यादव एवं विद्यार्थी परिषद के जिला एस एफ डी प्रमुख मयंक राठौर,  नगर उपाध्यक्ष कौशल यादव जी, शिक्षक देवेश धानुक, हरिओम राठौर आदि लोग मौजूद थे।

लोकसभा चुनाव जब हो रहे थे तभी जानकर बता रहे थे की अगर फिर से मोदी जीते तो फिर 2 बड़े राज्यों में कांग्रेस की सरकार जाएगी, वो राज्य थे कर्णाटक और मध्य प्रदेश
और अब ऐसा ही होता दिखाई दे रहा है, कर्नाटका और मध्य प्रदेश में विधायक गायब बताये जा रहे है
कर्णाटक में कांग्रेस के 5 और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के 10 विधायक गायब बताये जा रहे है, जानकारी के अनुसार अमित शाह ने दोनों राज्यों में राजनितिक खलबली मचाई हुई है
सबसे ज्यादा चर्चा कर्णाटक को लेकर है जहाँ पर बीजेपी के एक नए निर्वाचित सांसद ने ये बयान दिया की वो जल्द ही येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनायेंगे और उनको 5-6 कांग्रेस विधायक गिफ्ट करेंगे
कर्नाटक में 5 और मध्यप्रदेश में 10 कांग्रेस के MLA लापता बता रहे हैं !!
अमित शाह ने तो चारों तरफ भसड़ मचा रखी है !! :
कर्णाटक के अलावा मध्य प्रदेश में भी स्तिथि ये ही है
कुछ ही समय पहले बीजेपी के बड़े नेता और महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था की कमलनाथ अब सिर्फ 20-22 दिन ही मुख्यमंत्री रहेंगे, उसके बाद वो मुख्यमंत्री रहेंगे या नहीं इसपर बड़ा प्रश्नचिन्ह है
आने वाले कुछ दिनों में इन दोनों ही राज्यों में नयी सरकार बन सकती है और अभी से राजनितिक तौर पर दोनों ही राज्यों में अमित शाह ने खलबली सी मचाई हुई है



लोकसभा चुनाव में हार का असर

भोपाल .लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिली करारी हार के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ पार्टी में उठ रहे बगावती तेवरों को शांत करने के लिए कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। इस बारे में रविवार को होने वाली विधायक दल की बैठक में चर्चा होने के आसार हैं। पांच महीने पहले मंत्रिमंडल के गठन के बाद से ही सरकार में जगह न पाने वाले पार्टी के वरिष्ठ विधायक और बाहर से सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों की नाराजगी समय-समय पर सामने आती रही है।
मंत्रिमंडल में वरिष्ठ विधायकों में छह बार के विधायक केपी सिंह समेत अन्य विधायकों में बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना और राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव को जगह नहीं मिल पाई थी।

ये सभी सरकार से नाराजगी भी जता चुके हैं। निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह ठाकुर और केदार सिंह डाबर भी उम्मीद जता रहे हैं कि उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान मिलेगा। इसके साथ ही बसपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह और सपा से राजेश शुक्ला को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है। इन विधायकों को कैबिनेट में शामिल न किए जाने की वजह उनके पहली बार विधायक चुना जाना बताया गया था। हालाकि मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा, यह अभी तय नहीं है। फिलहाल कमलनाथ कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत अन्य 28 मंत्री हैं। इसलिए मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरे ही शामिल किए जा सकते हैं, जबकि मंत्रिमंडल में स्थान न पाने वालों की लंबी फेहरिस्त है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार न होने तक पार्टी के विधायकों और निर्दलियों को खाली पड़े निगम मंडलों में एडजेस्ट किया जा सकता है।



   


कमलनाथ ने प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफे की पेशकश की है

भोपाल. लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस कार्य समिति की बैठक दिल्ली में चल रही है। इस बैठक में कार्य समिति के सारे सदस्यों के साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद हैं। लेकिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ इस बैठक में नहीं गए हैं।


 

इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार में होने बावजूद भी इस बार सिर्फ एक सीट जीती है। छिंदवाड़ा सीट से कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ चुनाव जीते हैं। बैठक में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के भूपेल बघेल और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह गए हैं। लेकिन कमलनाथ कहीं नहीं दिख रहे हैं।

 

मध्यप्रदेश के कांग्रेस महासचिव और पश्चिम उत्तर प्रदेश के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया वहां मौजूद हैं। सिंधिया भी इस बार गुना से चुनाव हार गए हैं। वहीं, सोमवार को कमलनाथ ने कैबिनेट की बैठक बुलाई है। इसके साथ ही वह जल्द ही मंत्रिमंडल का भी विस्तार कर सकते हैं।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले दो दिनों से सीएम कमलनाथ भोपाल में घर पर ही हैं। उन्होंने शुक्रवार को दिग्विजय सिंह से मुलाकात की थी। हार की समीक्षा के लिए कमलनाथ ने विधायकों की बैठक बुलाई है। जिस में वे हार के कारणों की समीक्षा करेंगे।

 

वहीं, कमलनाथ ने प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया के सामने इस्तीफे की पेशकश की है। बताया जा रहा है कि दीपक बाबरिया इस मामले में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ विचार -विमर्श करेंगे। दीपक बाबरिया ने कमलनाथ को राहुल गांधी से विचार-विमर्श करने की सलाह दी है।

 

कमलनाथ विधानसभा चुनाव के बाद ही कमलनाथ अध्यक्ष पद छोड़ना चाहते थे। कमलनाथ ने कहा- विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी प्रदेश अध्यक्ष छोड़ने के लिए राहुल गांधी से आग्रह किया था लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। कमलनाथ ने कहा था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद अध्यक्ष पद के साथ न्याय नहीं हो पाएगा ऐसे में पार्टी को नए प्रदेश अध्यक्ष की जरूरत है। जिससे की रसकार और संगठन सुचारू रबप से काम कर सकें।



भोपाल। लोकसभा चुनावनतीजों ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी को भीतर तक हिला दिया है। नरेन्द्र मोदी की सुनामी ने छह माह पहले सत्ता में आई कांग्रेस को ऐसा झटका दिया है कि उससे उबरने में उसे लंबा वक्त लग सकता है। पार्टी के बड़े-बड़े दिग्गज इस सुनामी के आगे टिक नहीं पाए।

इन नतीजों ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी चिंंता में डाल दिया है। चिंता सरकार के अस्तित्व को लेकर है। कांग्रेस सरकार के गठन के साथ उसके भविष्य को लेकर बयानबाजी करने वाले भाजपा नेताओं के हौंसले सूबे की 29 में से 28 सीट जीतने के बाद और भी ज्यादा बुलंद हो गए हैं। कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने की गरज से मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 26 मई को भोपाल में विधायकों की बैठक भी बुलाई है।

नवंबर 2018 में हुए मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिल पाया था। 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को 114 जबकि भाजपा को 109 सीटें मिल पायी थी। बहुमत के लिए आवश्यक 116 के आंकड़े को दोनों ही दल नहीं छू पाए थे। तब चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन देने की चिठ्ठी सौंपकर उसकी सरकार बनाने की राह आसान कर दी। कमलनाथ ने चार निर्दलीय विधायकों में से एक को मंत्री बनाया।

बाकी के विधायक मंत्री बनने के भरोसे बैठे हैं। बचे हुए तीन निर्दलीय में से एक ने अपनी पत्नी को लोकसभा चुनाव लड़ाने का एलान किया तो नाथ ने उसे बुलाकर समझाया और वचन दिया कि लोकसभा चुनाव निपटते ही उसे मंत्री बना दिया जाएगा। सपा और बसपा के लखनऊ में बैठे नेता भी इस मुद्दे पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार से नाराज चल रहे हैं। राजनीतिक इस समय जो विधायक आंखें तरेर लेगा उसे मंत्री पद मिल पाएगा।

कांग्रेस को भय यह है कि भाजपा एक दो माह में उसका गेम बिगाड़ सकती हैं। इस भय की बानगी शुक्रवार को उस समय देखने को मिली जब नीमच के एक कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह डंग के इस्तीफे की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रदेश कांग्रेस एक्टिव हुई और तत्काल उससे संपर्क स्थापित कर खंडन भी वायरल किया गया कि डंग ने इस्तीफा नहीं दिया।

डंग इकलौते सिख विधायक है, इस नाते मंत्री बनने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। चूंकि वे नाराज हैं इसलिए जैसे ही उनके इस्तीफे की खबर वायरल हुई कांग्रेस का डैमेज कंट्रोल दस्ता सक्रिय हो गया।

लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी हर सभा में लोगों से यह अपील की थी कि वे एक वोट देकर दो सरकार बनाएं। दूसरी सरकार से उनका आशय मप्र में सरकार बनाने को लेकर था। जाहिर है कि सरकार तभी बनेगी जब मौजूदा सरकार गिरेगी। मौजूदा सरकार तब तक नहीं गिर सकती जब तक कि समर्थन देने वाले दलों के तीन विधायकों के अलावा निर्दलीय और कुछ कांग्रेस विधायक नहीं टूटते है।

हालांकि सब कुछ इतना आसान नहीं है। पर भाजपा के तमाम नेता आए दिन सरकार गिराने की बातें जरूर कर रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मतदान वाले दिन कहा था कि कमलनाथ सरकार ज्यादा दिनों की मेहमान नहीं है।

मप्र विधानसभा में नेता विपक्ष गोपाल भार्गव ने तो राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार के फ्लोर टेस्ट की मांग कर डाली थी। तब खुद मुख्यमंत्री नाथ को सामने आकर यह कहना पड़ा कि वे अब तक चार बार बहुमत साबित कर चुके हैं। एक बार और बहुमत साबित करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी।

राज्य भाजपा के अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए नैतिकता के आधार पर कमलनाथ को खुद इस्तीफा दे देना चाहिए।

जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा कहते हैं कि बात कर भाजपा राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल पैदा कर रही है। कांग्रेस सरकार को किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। सारे निर्दलीय, समर्थक दल के विधायक और कांग्रेस विधायक एकजुट है।

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