सिंधिया के अध्यक्ष पद की राह में ये नेता बने रोड़ा! MP में ऐसे फंसा कांग्रेस अध्यक्ष का पेंच



   


भोपाल में राज्य के वरिष्ठ नेताओं की कोर कमेटी की बैठक...

भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा को करीब 15 साल सत्ता से बेदखल करने के बाद पुन: सत्ता में काबिज हुई कांग्रेस ने कमलनाथ को मध्यप्रदेश की बागडोर सौंपी, तभी से प्रदेश में कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। दरअसल चुनाव के पहले से कमलनाथ ही कांग्रेस के अध्यक्ष बने जो अब तक इस सीट पर भी काबिज हैं।


लेकिन कमलनाथ के हाथ सत्ता की डोर आते है अध्यक्ष पद को लेकर तमाम तरह की अटकलें कांग्रेस के अंदर व बाहर शुरू हो गईं। वहीं इसके कुछ ही समय बाद मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनावों के दौरान मिली करारी हार ने एक बार फिर मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में बदलाव की चर्चा को तेज कर दिया।


ऐसे में पार्टी में चिंतन-मंथन, बैठकों का दौर शुरू हो गया। यहां तक की हार के कारणों के लिए राहुल गांधी ने सब मुख्यमंत्रियों से दिल्ली में चर्चा भी की और वे वापस भी लौट आए, लेकिन इस दौरान राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिल्ली में ही रोक लिया, जिसके बाद सिंधिया के अध्यक्ष बनने की चर्चाएं तेज हो गईं।

सूत्रों के मुताबिक शनिवार को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक होने से पहले ही एक बार फिर संभावित अध्यक्ष को लेकर तकरार तेज हो गई है। वहीं प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष व सीएम कमलनाथ इन दिनों दिल्ली प्रवास पर हैं और उनके इस प्रवास को लोकसभा चुनाव के नतीजों और नए प्रदेश अध्यक्ष की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर अब पार्टी में नया अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा जोरों पर है। ऐसे में अध्यक्ष पद के दावेदारों में जो नाम सामने आ रहे हैं, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरुण यादव, राज्य सरकार के मंत्री बाला बच्चन, जीतू पटवारी शामिल बताए जाते हैं।


किस मंत्री ने किसे अध्यक्ष बनाने की रखी मांग...
वहीं इससे पहले मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री प्रद्युम्न सिंह और इमरती देवी नए अध्यक्ष के तौर पर सिंधिया को पार्टी की कमान सौंपे जाने की मांग कर चुके हैं। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई और विधायक लक्ष्मण सिंह ने सिंधिया को पार्टी की कमान न दिए जाने की बात कही है।

उनका मानना है कि सिंधिया के पास समय की कमी है, क्योंकि वह उत्तर प्रदेश में पार्टी का काम देख रहे हैं, इसलिए उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। ऐसे में एक तरफ जहां सिंधिया का दबे स्वर में विरोध हो रहा है, वहीं पार्टी के भीतर से आदिवासी को संगठन की कमान सौंपे जाने की आवाज जोर पकड़ रही है।

दूसरी ओर मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने खुले तौर पर मंत्री बाला बच्चन को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की पैरवी की है। वर्मा के अनुसार राज्य में 22 प्रतिशत आबादी जनजातीय वर्ग से है। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनाने में इस वर्ग का योगदान है। साथ ही बाला बच्चन सक्षम और अनुभवी नेता हैं, इसलिए उन्हें यह जिम्मेदार सौंपी जानी चाहिए।


कोर कमेटी की बैठक आज...
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार के चलते राज्य की 29 सीटों में से सिर्फ एक सीट में ही जीत मिली है। ऐसे में राज्य के वरिष्ठ नेताओं की कोर कमेटी की शनिवार को भोपाल में बैठक होने वाली है। इस बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ के अलावा प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हिस्सा लेंगे। बैठक में नए अध्यक्ष, लोकसभा चुनाव में हार के कारणों सहित अन्य मसलों पर चर्चा संभावित है।

वहीं जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के लिए नए प्रदेश अध्यक्ष का चयन आसान नहीं होगा, क्योंकि भले ही गुटबाजी दिखाई न दे, लेकिन इस समय वह राज्य में चरम पर है। इन स्थितियों में एक सर्वमान्य अध्यक्ष आसानी से चुना जा सकेगा, इसमें संदेह बना है।


जानकारों का यह भी मानना है कि जब कमलनाथ अध्यक्ष चुने गए थे, तब पार्टी में विरोध इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि अधिकतर नेता उनसे उपकृत थे वहीं इस दौरान सिंधिया को मुख्यमंत्री पद की आस थी, जिसके चलते वे भी मैदान मे नहीं आए। इसके अलावा कमलनाथ समन्वय में खास महारत रखते हैं।

वहीं अब सिंधिया की हार जहां उनके अध्यक्ष पद के लिए रोड़ा बन रही है, वहीं सिंधिया के कुछ समर्थक सिंधिया की हार के लिए कांग्रेस के ही कुछ बड़े नेताओं को जिम्मेदार मानते हैं। जिसके चलते अब वे उन्हें हर कीमत पर अध्यक्ष पद पर बैठाना चाहते हैं।