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कैंसर बिमारी से हार नही मानना है बल्कि यह कहना हैं कि ”मैं हूं और मैं रहूंगी” . श्रीमती आस्मा अहमद

कैंसर बिमारी से हार नही मानना है बल्कि यह कहना हैं कि ”मैं हूं और मैं रहूंगी” . श्रीमती आस्मा अहमद
शक्तिशाली महिला संगठन ने विश्व कैंसर दिवस पर कैंसर को मात देने वाली श्रीमती आस्मा अहमद को शाॅल श्रीफल एवं गुलाबी पौधा देकर किया सम्मानित
शिवपुरी । विश्व भर में 04 फरवरी को हर साल विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। तीन साल के लिए विश्व कैंसर दिवस का विषय रखा गया है ‘ मैं हूं और मैं रहूंगा’ है। जिसका मतलब है कि हर किसी में क्षमता है कि वह कैंसर से लड़ सकता है। इसी थीम के अनुसार आज शक्तिशाली महिला संगठन शिवपुरी ने कैंसर से 20 साल पहले मात देने वाली श्रीमती आस्मा अहमद का सम्मान किया एवं उनके साथ अपनी जीत के अनुभव वर्तमान मे कैंसर से जंग लड़ रही सुश्री पूनम पुरोहित के साथ साझा किए एवं उनको मेडम अहमद के माध्यम से जंग जीतने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम संयोजक रवि गोयल ने कहा कि दुनिया की सभी जानलेवा बीमारियों में कैंसर सबसे ख़तरनाक है क्योंकि कई बार इसके लक्षणों का पता ही नहीं चलता। जब इस बिमारी के होने का खुलासा होता है तब तक काफी देर हो चुकी है और कैंसर पूरे शरीर में फैल चुका होता है। इसी वजह से कई लोगों को उचित इलाज का समय ही नहीं मिल पाता और उनकी मौत हो जाती है। अगर वक्त पर कैंसर की बीमारी का पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। साल 2018 में कैंसर की बीमारी की वजह से दुनियाभर में 96 लाख से ज़्यादा मौतें हुई थीं। आज विश्व कैंसर दिवस पर आयोजित सम्मान कार्यक्रम में श्रीमती आस्मा अहमद ने कहा कि मुझे 20 साल पहले स्तन कैंसर का पता चला तो मै घबरा गई कुछ समझ नही आ रहा था कि ये मेरे साथ ही क्यो हुआ पर मेरे पति डा निसार अहमद एवं सही डाक्टर से सही समय पर ईलाज कराने से मेने कैंसर से न केवल जंग जीती वल्कि यह दृढ़ सकंल्प किया था कि मुझे कैंसर से हार नही मानना है बल्कि मै हर बक्त यह कहती थी कि मै हूं और में रहूगीं । कार्यक्रम में कैंसर से जंग लड़ रही सुश्री पूनम पुरोहित ने कहा कि कैंसर की पहचान या रोकथाम के लिए कैंसर से बचाव के उपाय और ख़तरों के बारे में आम लोगों को जागरुक करने के लिए विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। लोगों को लगता है कि यह बीमारी छूने से फैलती है इसलिए कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को समाज में घृणा और अछूत के रूप में देखा जाता है। आम लोगों में कैंसर से संबंधित विभिन्न प्रकार के सामाजिक मिथक हैं जैसे कि कैंसर पीड़ित के साथ रहने या स्पर्श से उन्हें भी ये घातक बीमारी हो सकती है। इस तरह के मिथक को ख़त्म करने के लिए भी ये दिन मनाया जाता है। इसके होने के कारण लक्षण और उपचार आदि जैसे कैंसर की सभी वास्तविकता के बारे में सामान्य जागरुकता बनाने के लिए इसे मनाया जाता है। लोगों को जागरुक करने के लिए इस दिन संस्था ने यह सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया जिससे कि कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को अलग से उपचारित न किया जाए उन्हें समाज में एक आम इंसान की तरह जीने का अधिकार होना चाहिए और कोई भी रिश्ता उनके लिए बदलना नहीं चाहिए। अपने रिश्तेदारों के द्वारा उनकी हर इच्छाओं को पूरा करना चाहिए भले ही उनके जीने की उम्मीद कम क्यों न हों। ये बहुत ज़रूरी है कि उन्हें एक आम इंसान की तरह अच्छा महसूस कराना चाहिए और ऐसा प्रतीत नहीं कराना चाहिए जैसे उनको कुछ उपचार दिया जा रहा है क्योंकि वो मरने वाले हैं। उन्हें आत्म सम्मान को महसूस करने की ज़रूरत है और अपने समाज और घर में एक सामान्य वातावरण की ज़रूरत है। कार्यक्रम में उपस्थित डाक्टर निसाह अहमद ने कहा कि कैंसर की उपस्थिति के ख़तरे को घटाने के लिए अपनी अच्छी जीवनशैली, नियंत्रित आहार, नियमित वर्कआउट के बारे में इस कार्यक्रम के दौरान लोगों को अच्छे से बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्हें अपने शराब की लत,अस्वास्थ्यकर आहार और शारीरिक स्थिरता से मुक्त कराने के लिए बढ़ावा देना चाहिए। सम्मान कार्यकम में कैंसर को मात देने वाली श्रीमती आस्मा अहमद , कैंसर से जंग लड़ रही पूनम पुरोहित, शक्तिशाली महिला संगठन के रवि गोयल, सुपोषण सखी श्रीमती नीलम प्रजापति उपस्थित थी।

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