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IT की जांच में फंसे मप्र के 30 विधायक, दोषी हुए तो कमलनाथ सरकार पर भी होगा संकट

 
 
 

अगर मौजूदा विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ी तो इसका सीधा असर मध्य प्रदेश विधानसभा में सीटों के समीकरण और कमलनाथ सरकार की सेहत पर पड़ना तय है.

भोपाल: मध्‍य प्रदेश की राजनीति से बड़ी खबर सामने आ रही है. ये खबर कमलनाथ सरकार के लिए खतरे की घंटी है. ये खबर एक ऐसी जांच के बारे में है, जिसमें फंसने वाले विधायकों की सदस्यता भी जा सकती है. अगर मौजूदा विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ी तो इसका सीधा असर मध्य प्रदेश विधानसभा में सीटों के समीकरण और कमलनाथ सरकार की सेहत पर पड़ना तय है.
दरअसल आयकर विभाग की जांच में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले 30 विधायकों के शपथ पत्र में बताई गई आय और उनके पांच साल के इनकम टैक्स रिटर्न में बताई आय में भारी फर्क पाया गया है. इनमें से 16 विधायकों को आयकर विभाग ने समन जारी करते हुए उनसे 15 दिन के अंदर जवाब मांगा है.
इसलिए जा सकती है सदस्‍यता
जिन 30 विधायकों की आय में फर्क पाया गया है उनमें बीजेपी के 5, कांग्रेस के 9 विधायक और एसपी और बीएसपी के एक एक विधायक भी शामिल हैं. इस जांच में फंसे विधायक अगर इस बात का सही जवाब नहीं दे पाए तो उनकी आय और चुनाव के दौरान शपथपत्र में दी गई आय के ब्यौरे में फर्क के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश और इलेक्शन कमीशन की गाइडलाइंस के आधर पर उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द की जा सकती है.
आयकर विभाग की इस जांच में प्रत्याशियों के 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए एफिडेविट यानी शपथपत्र की जांच की गई. इस जांच में प्रत्याशियों द्वारा शपथ पत्र में घोषित संपत्ति का मिलान उनके पांच साल के इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित व्यवसाय, उससे हुई आमदनी और कुल जायदाद से किया गया है.

आयकर विभाग की इस जांच के आधार पर अगर चुनाव आयोग कार्रवाई करता है तो साफ है कि सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस और एसपी और बीएसपी के विधायकों पर पड़ेगा, जिन्होंने कमलनाथ सरकार को समर्थन दिया है. ऐसा होता है तो कमलनाथ सरकार भी संकट में घिर सकती है.

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