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छात्र-छात्राओं द्वारा मनाया गया कारगिल विजय दिवस

शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिवपुरी में आज कारगिल विजय दिवस मनाया गया! इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य  प्रों. महेंद्र कुमार के साथ स्टाफ के अन्य सदस्य एवं अनेकों छात्र छात्राएं उपस्थित रहे! संदीप शर्मा ने बताया कि हमारी सेना ने पहाड़ी के नीचे होने के बावजूद विजय प्राप्त की ! कल्पित श्रीवास्तव ने बताया प्रतिवर्ष सेना के दिल्ली हेड क्वार्टर पर वीर शहीदों को याद किया जाता है! विक्की जैन ने बताया हमें शहीद दिवस को इस तरीके से याद रखना चाहिए जैसे हम अपने जन्मदिवस को याद रखते हैं! शिवानी राठौर ने बताया कि हमें सैनिकों को अपने परिवार के सदस्यों की तरह मानना चाहिए और हमारे अंदर उनके प्रति वही भावनाएं होना चाहिए जैसा कि हम अपने परिवार के सदस्यों के प्रति रखते हैं! उनके त्याग समर्पण हो हमें याद रखते हुए राष्ट्र सेवा करनी चाहिए!”अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं, सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते हैं नहीं!”
कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में सभी छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए डॉ. रामजी दास राठौर ने बताया कि कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के लिये एक महत्वपूर्ण दिवस है। इसे हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है। कारगिल युद्ध लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई को उसका अंत हुआ। इसमें भारत की विजय हुई। इस दिन कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों के सम्मान हेतु यह दिवस मनाया जाता है।भारत और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे हो गए हैं। दोनों देशों के बीच लड़ी गई यह लड़ाई 3 मई से 26 जुलाई 1999 तक चली थी। कारगिल युद्ध को ‘ऑपरेशन विजय’ के नाम से भी जाना जाता है। कारगिल सेक्टर को मुक्त कराने के लिए यह नाम दिया गया था। 1999 के बाद से हर साल यह दिन भारत में कारगिल विजय दिवस के नाम से मनाया जाता है। इस युद्ध में हमारे लगभग 527 से अधिक वीर योद्धा शहीद व 1300 से ज्यादा घायल हो गए, जिनमें से अधिकांश अपने जीवन के 30 वसंत भी नही’ देख पाए थे। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया, जिसकी सौगन्ध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है। इन रणबाँकुरों ने भी अपने परिजनों से वापस लौटकर आने का वादा किया था, जो उन्होंने निभाया भी, मगर उनके आने का अन्दाज निराला था। वे लौटे, मगर लकड़ी के ताबूत में। उसी तिरंगे मे लिपटे हुए, जिसकी रक्षा की सौगन्ध उन्होंने उठाई थी। जिस राष्ट्रध्वज के आगे कभी उनका माथा सम्मान से झुका होता था, वही तिरंगा मातृभूमि के इन बलिदानी जाँबाजों से लिपटकर उनकी गौरव गाथा का बखान कर रहा था। कोई भी युद्ध हथियारों के बल पर नहीं लड़ा जाता है, युद्ध लड़े जाते हैं साहस, बलिदान, राष्ट्रप्रेम व कर्त्तव्य की भावना से और हमारे भारत में इन जज्बों से भरे युवाओं की कोई कमी नहीं है।
  “शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा।”
आज हम कारगिल विजय दिवस मनाते हुए उन शहीद सैनिकों को याद करते हैं जिन्होंने अपने जीवन का समर्पण देश के लिए हंसते-हंसते किया! हमारे देश की माटी की यह मिसाल रही है कि हमारे देश में एक से एक वीर सपूत योद्धा जन्मे हैं,जिन्होंने मातृभूमि के खातिर अपना सब कुछ न्यौछावर किया है! धन्य हैं ऐसे वीर योद्धा और उनके माता-पिता, भारत भूमि ऐसे वीरों से भरी पड़ी है! हमको आज इस कारगिल विजय दिवस पर अपने मन से यह संकल्प करना चाहिए यदि देश की सीमा पर सैनिक सर्वस्व न्योछावर कर कर सकते है’, तो हम सब भी अपने कर्तव्य को देश के अंदर निभा सकते हैं ! देश बाहर से सुरक्षित सैनिकों के द्वारा रहेगा तो देश अंदर से सुरक्षित हम जैसे अच्छे नागरिकों के द्वारा रहेगा! कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान एवं वंदे मातरम का गायन किया गया!

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