मंथन न्युज शिवपुरी-
आज महाविद्यालय के छात्रों ने अपनी दैनिक समस्याओं को लेकर महाविद्यालय में प्रदर्शन किया

छात्र नेता सत्यम नायक ने बताया आज बीकॉम प्रथम वर्ष की परीक्षा थी जिसमें महाविद्यालय घोर लापरवाह रहा सत्यम नायक ने बताया कि आज  वह समस्त छात्रों के साथ विद्यार्थियों की  दैनिक समस्याओं को लेकर महाविद्यालय प्राचार्य कक्ष में पहुंचे तो वहां कोई नहीं था और वहां उन्हें 1 घंटे तक छात्रो को इंतजार करना पड़ा तब जाकर कहीं प्रभारी प्राचार्य वहां उपस्थित हुए सत्यम नायक का कहना था की महाविद्यालय में परीक्षा के उपरांत बीच-बीच में घंटो तक के  लिए लाइट चली जाती है जिससे परीक्षार्थियों को अपनी परीक्षा देने में काफी दिक्कत आती है और एक तरफ आदरणीय प्रधानमंत्री जी स्वच्छ भारत अभियान की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ महाविद्यालय में चारों ओर गंदगी फैली हुई है महाविद्यालय में चारों ओर धूल ही धूल दिखाई देती है परीक्षार्थियों की बेंचो पर अधिक धूल  रहती है जिसे परीक्षार्थी अपने हाथों से साफ करते हैं इन्हीं दैनिक मुद्दों को लेकर आज छात्र नेता सत्यम नायक में अपने समस्त साथियों सहित महाविद्यालय में घोर प्रदर्शन किया


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   दिनांक 29 अप्रैल 2018
सम्भवत: स्वार्थी, लालची शब्दों के अर्थ से अधिकांश मानव, जीव, जगत परिचित रहता है। मगर यहां चोर, पापी का अर्थ वेद अनुसार पृथ्वी के सन्तुलन को नष्ट करने वाला पापी और उसके भौतिक संसाधनों का दोहन करने वाला चोर होता है। चूकि नैसर्गिक, प्रकृति, प्रदत्त व्यवस्था और तत्कालीन अनुभव, ज्ञान कहता है तथा जो हमारे वेदो में दर्ज है।
     ये अलग बात है कि इन महान वेदो में आस्था रखने न रखने वालो में सहमति असहमति मान्यता, उपेक्षा हो सकती है। मगर आज के परिपेक्ष्य में ले, तो आम नागरिक का यह यक्ष सवाल वाजिब है कि मंच पर मेरा स्थान कहां ?
      आज जब हम लोकतांत्रिक व्यवस्था में है और जनतांत्रिक एवं जीवन मूल्यों को लेकर जीते है और जनता के लिये जनता द्वारा स्थापित शासन से जनकल्याण की उम्मीद करते है ऐसे में नैसर्गिक, सामाजिक समरसता, सामाजिक एवं प्राकृतिक सन्तुलन को, निहित स्वार्थ या लालच बस नष्ट करना पाप ही हुआ। वहीं जनभावना एवं जनाकांक्षा सहित प्राकृतिक संपदा और लोगों के नैसर्गिक हकों की लूट को चोरी ही करार दिया जायेगा।
    बरना मंच पर अपना स्थान तलाशती पथराई विद्या, विद्यवान, प्रतिभाओं की आंखे और आशा आकांक्षायें लिये अवसर से पूर्व ही पीडि़त, वंचित लोगों की तरह हताश, मजबूर नजर नहीं आती। जिसकी कि वह नैसर्गिक रुप से हकदार है। सत्ता की हनक में सत्तायें संगठन, संस्थायें शायद यह भूल रही है कि आदर्श राज्य की नींव निहित, स्वार्थ और लालच के ईट गारे से कभी मजबूत नहीं बनती और न ही ऐसी नींवो पर समृद्धि और खुशहाली से सरावोर दिव्य और भव्य भवन, महल खड़े हो पाते।
      कहते है कि आदर्श राज्य वह होते है जहां प्रकृति के स्नेह आर्शीवाद से समय पर ऋतु का लाभ मिले और जिस राज्य की चारो दिशायें निर्मल तथा अधिकांश भू-भाग जल भण्डारों से पटा, भरा हो और ऊर्जा उन्मुखी अन्न का उत्पादन प्रचूरता के साथ हो, जहां लोगों को न तो अकाल मृत्यु का भय, न ही कोई रोग सताता हो, सामाजिक समरसता ऐसी कि समुचा भूभाग आन्नदमयी किलकारियों से गुजायमान हो। और जहां राष्ट्र, जन, आस्था, प्रकृति, कल्याण की बंदनाऐं अन्य बंदनाओं से पूर्व हो, जहां के नागरिक इतने चेतन्य और सजग हो, कि उन्हीं के बीच का कोई स्वार्थी, लालची, चोर, पापी उनका स्वामी, शासक न बन जाये।
          अब इसे हम सुखद ही कह सकते है कुछ लोग आज भी मेहनतकश, प्रतिभाशाली लोगों को स्वयं, संगठन, दल, संस्था का मंच खाली रख स्थान देना चाहते है तो कुछ समान अवसर के नाम पर सतत सत्ता में बने रहने के लिये हर वो प्रयास कर लेना चाहते है। जिससे सत्ता में बने रहने या सत्ता प्राप्ति का मार्ग उन्हें हमेशा सहज सुविधाजनक बना रहे, फिर वह प्रयास, साधन, संसाधन नैतिक हो या फिर अनैतिक।
जय स्वराज

सरकार ने संविदा भर्ती नीति नियम 2017 में संशोधन करना तय किया


भोपाल। प्रदेश के सरकारी विभागों में नियमित पदों पर संविदा भर्ती का रास्ता खुलने जा रहा है। अभी केवल संविदा पदों पर ही सेवानिवृत्त अफसरों की भर्ती हो पाती है। सरकार ने संविदा भर्ती नीति नियम 2017 में संशोधन करना तय किया है। प्रस्ताव शासन के पास है, जिसे आगामी कैबिनेट बैठक में लाया जा सकता है।

वर्तमान प्रक्रिया में नियमित पदों को सरेंडर कर इन्हें संविदा पदों में बदलना पड़ता है। संशोधित नियमों में सीधे नियमित पदों के विरुद्ध ही संविदा भर्ती हो सकेगी। अभी अधिकतम उम्र सीमा तय नहीं है, लेकिन संशोधित नियमों में 65 साल की उम्र तक ही भर्ती हो पाएगी। 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्ति के बाद अफसर को एक साल की संविदा भर्ती दी जाएगी, जिसे बाद में 65 साल की उम्र तक वृद्धि दी जा सकेगी।

राज्य स्तरीय छानबीन समिति को अधिकार-

संविदा भर्ती के प्रकरण छानबीन समिति के पास जाएंगे। पूर्व में प्रदेश में यह व्यवस्था थी, लेकिन कुछ सालों पूर्व इसे समाप्त कर दिया गया था। अब इसे वापस लागू किया जाएगा। संविदा भर्ती में वृद्धि के प्रकरण भी यही समिति देखेगी।

चुनावी साल में बैकलॉग भर्ती पर भी फोकस

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार का फोकस बैकलॉग भर्ती पर भी है। इसके करीब एक लाख पद विभिन्न विभागों में खाली हैं। सितंबर-अक्टूबर में आचार संहिता लगने के आसार हैं। सरकार इसके पहले ही भर्ती की कोशिश में है। अगले महीने से वापस कवायद शुरू हो सकती है।

पहले बिना नियम होती थी भर्ती

सितंबर 2017 के पहले बिना राज्य स्तरीय नियमों के संविदा भर्ती की जाती थी। इसमें विभाग अपने स्तर पर प्रस्ताव तैयार करके सीनियर सेक्रेट्रिएट और कैबिनेट के जरिए भर्ती कर लेता था। बाद में संविदा भर्ती नीति तैयार की गई। इस नीति से सबसे पहली भर्ती सितंबर 2017 में ही सीएम के प्रमुख सचिव के पद पर हुई थी। इसके बाद इस नीति के आधार पर ही भर्ती करना तय किया गया।

भोपाल

भाजपा ने प्रदेश की ६१ सीटों पर खास फोकस किया है। पार्टी इन सीटों पर पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर आई थी। इनमें से अधिकांश ऐसी सीटें हैं जो पहले भाजपा के पास थीं, लेकिन २०१३ में हार गई थी। भाजपा ने अब इन सीटों की जिम्मेदारी उसी क्षेत्र के मंत्रियों को सौंपी जा रही है। कांग्रेस के गढ़ों पर खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान का फोकस है। इस विशेष प्लान की मॉनिटरिंग संगठन महामंत्री सुहास भगत करेंगे। इन ६१ सीटों में से भाजपा ५७ कांग्रेस से, २ बसपा से और २ सीट निर्दलीय उम्मीदवारों से हारी थी।

- किस क्षेत्र की कितनी सीटें
महाकौशल : पुष्पराजगढ़, पाटन, जबलपुर पश्चिम, डिंडौरी, मंडला, बैहर, लांजी, परसवाड़ा, सिवनी, केवलारी, लखनादौन और अमरवाड़ा। इनका जिम्मा गौरीशंकर बिसेन, ओमप्रकाश धुर्वे, शरद जैन और जालम सिंह पटेल को दिया है।


ग्वालियर चंबल : विजयपुर, अंबाह, अटेर, लहार, भितरवार, डबरा, करैरा, पिछोर, कोलारस, बामोरी, राधौगढ़, चंदेरी और मुंगावली। इनका जिम्मा नरोत्तम मिश्रा, जयभान सिंह पवैया, माया सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया और रुस्तम सिंह को दिया है।


विंध्य : चित्रकूट, रैगांव, नागौद, अमरपाटन, मउगंज, मनगवां, गुढ़, चुरहट, सिहावल, चितरंगी, ब्यौहारी और कोतमा। इनकी जीत का जिम्मा राजेंद्र शुक्ल, कुसुम सिंह मेहदेले और संजय पाठक को दिया है।


मालवा-निमाड़ : भीकनगांव, कसरावद, भगवानपुरा, राजपुर, बड़वानी, गंधवानी, कुक्षी, राउ और सुवासरा। इनका जिम्मा अर्चना चिटनीस, विजय शाह, पारस जैन, दीपक जोशी को दिया है।


मध्य भारत - हरदा, बासौदा, सिरोंज, भोपाल उत्तर, इछावर, सीहोर और नरसिंहगढ़। इनकी जीत का जिम्मा उमाशंकर गुप्ता, गौरीशंकर शेजवार, रामपाल सिंह, सूर्यप्रकाश मीना और विश्वास सारंग को दिया है।


बुंदेलखंड - देवरी, जतारा, खरगापुर, राजनगर, जबेरा और पवई। इनका जिम्मा गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंहऔर जयंत मलैया को दिया है।


- कांग्रेस किले निशाने पर
कांग्रेस की परंपरागत विधानसभा सीटें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की रडार पर हैं। इन सीटों में चुरहट, राधौगढ़, लहार, पिछौर, विजयपुर, डबरा, केवलारी, कसरावद, गंधवानी, कुक्षी, जबेरा, चित्रकूट, अटेर, भोपाल उत्तर, पवई, राजनगर, मुंगावली और कोलारस शामिल हैं।


मध्य प्रदेश में पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती दौरान जात‍ि से जुड़ा एक बेहद अनोखा मामला सामने आया है। यहां पर मेडिकल टेस्ट के दौरान उम्मीदवारों के सीने पर SC-ST ल‍िखने के मामले ने तूल पकड़ा ल‍िया। वहीं मामले की जानकारी होने के बाद राज्‍य के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दिये हैं।

पिछली बार भर्ती के दौरान कुछ गलतियां हुईं
धार/मध्य प्रदेश(मंथन न्युज)।
 मध्य प्रदेश के धार जिले में बीते कुछ द‍िनों से पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती के लिए उम्मीदवारों का मेडिकल टेस्ट चल रहा है। ऐसे में ज‍िला अस्‍पताल में उम्‍मीदवारों की पहचान के ल‍िए उनके सीने पर जाति-एससी (अनुसूचित जाति) और एसटी (अनुसूचित जनजाति) लिख दिया गया। यह उम्‍मीदवारों ने इसका व‍िरोध क‍िया लेक‍िन इस दौरान मेड‍िकल परीक्षण करने वाले नहीं माने। वहीं इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह ने रविवार को आईएएनएस को बताया क‍ि ऐसा लगता है क‍ि यह करने के पीछे कोई बुरी भावना नहीं होगी। पिछली बार भर्ती के दौरान कुछ गलतियां हुईं थीं। 

जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
इसल‍िए हो सकता इस बार ज‍िला अस्‍पताल ने क‍िसी भी गलती को न दोहराने के ल‍िए ऐसा क‍िया हो। हालांक‍ि अब मामले की सच्‍चाई क्‍या है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। बतादें क‍ि उम्‍मीदवारों के सीने पर जाति-एससी और एसटी ल‍िखे जाने के मामले को लेकर काफी हंगामा हुआ। ऐसे में राज्‍य के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने इस मामले को लेकर ट्वीट क‍िया और जांच के आदेश द‍िए। वहीं इस पूरे मामले को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी ने कहा कि यह घटना आपराधिक कृत्य है। पार्टी ने एससी / एसटी (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

चर्चा है कि दिल्ली में कई दिनों तक रूकने के बावजूद दिग्विजय सिंह की मुलाकात राहुल गांधी से नहीं हो सकी.


दिल्ली मंथन न्युज-कुछ अलग हटकर काम करने को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इन दिनों फिर चर्चा में हैं. नर्मदा यात्रा के बाद अब दिग्विजय सिंह पार्टी के निर्णय पर काम करने की बात कह रहे हैं. उन्होंने नर्मदा यात्रा के बाद प्रदेश में राजनीति यात्रा निकालने का ऐलान किया था. जब उनसे राजनीति यात्रा को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि राजनीति यात्रा की रूपरेखा पार्टी तय करेगी. पार्टी के तय करने के बाद ही मैं राजनीति यात्रा शुरू करूंगा.


दरअसल, सूत्रों के अनुसार नर्मदा यात्रा के बाद दिग्विजय सिंह राहुल गांधी से मिलने दिल्ली गए थे. चर्चा है कि दिल्ली में कई दिनों तक रूकने के बावजूद उनकी मुलाकात राहुल गांधी से नहीं हो सकी. यह भी बताया जा रहा है कि नर्मदा यात्रा के समापन कार्यक्रम में राहुल गांधी के आने की खबर थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

दिल्ली में हुई कांग्रेस की बैठक, जिसमें कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जीतू पटवारी, विवेक तन्खा, दीपक बाबरिया समेत कांग्रेस के कई नेता मौजूद थे. इस बैठक में भी दिग्विजय सिंह को जगह नहीं मिली. अब नर्मदा यात्रा के बाद दिग्विजय सिंह से हाईकमान की दूरी बनाने के पीछे कई मायने भी निकाले जा रहे हैं.

कमलनाथ को नए प्रदेश अध्यक्ष बनाने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसका पता दिसंबर 2018 में चलेगा. दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह का प्रदेश अध्यक्ष को लेकर किया गया विवादित ट्वीट भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. दिग्विजय सिंह की हाईकमान से चल रही दूरियां और दिल्ली में हुई बैठक में दिग्विजय की अनुपस्थिति से कई राजनीतिक सवाल उठने लगे हैं.

भोपाल.  राज्य सरकार ने लंबे समय से प्रतीक्षित आईएएस अफसरों के ट्रांसफर की सूची सोमवार आधी रात जारी कर दी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा चुनाव के हिसाब से जमावट करते हुए फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी चुनिंदा अफसरों को सौंपी है। इस बारे में सीएम के मुख्य सचिव बीपी सिंह से दिन में ही चर्चा हुई थी। 


 


आईएएस अफसरों के ट्रांसफर में प्रमुख रूप से इंदौर के कमिश्नर संजय दुबे की नई पोस्टिंग श्रम विभाग के प्रमुख के पद पर की गई है। उनके स्थान पर राघवेंद्र कुमार सिंह को इंदौर का नया कमिश्नर बनाया गया है। वे अभी इंदौर में कमिश्नर कमर्शियल टैक्स के पद पर पदस्थ हैं। इंदौर नगर निगम कमिश्नर मनीष सिंह को उज्जैन और श्रीकांत पांडे को देवास कलेक्टर बनाया गया है। 


 


तबादला सूची इस तरह है 
 


अफसर का नामवर्तमान पोस्टिंगनई पोस्टिंग केके सिंहएसीएस, गृहएसीएस, वन संजय बंदोपाध्यायपीएस, तकनीकी शिक्षापीएस, अनुसूचित जाति विभाग अश्विनी कुमार राय पीएस, श्रम विभाग पीएस, मछुआ कल्याण मलय कुमार श्रीवास्तवपीएस, परिवहन पीएस, गृह और परिवहन अशोक बर्णवाल पीएस, सीएम तथा उद्यानिकी पीएस, सीएम के साथ तकनीकी शिक्षा संजय दुबे कमिश्नर, इंदौरपीएस, श्रम राघवेंद्र कुमार सिंह कमिश्नर, कमर्शियल टैक्स, इंदौरकमिश्नर, इंदौर संभाग आकाश त्रिपाठीएमडी, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कमिश्नर, महिला एवं बाल विकास एवं विमानन पवन कुमार शर्मा सचिव, एमपी पीएससी, इंदौरकमिश्नर, कमर्शियल टैक्स, इंदौर रेणू पंतकमिश्नर, सहकारी संस्थाएं सचिव, एमपी पीएससी जेके जैन कलेक्टर, छिंदवाड़ाकमिश्नर, शहडोल संभाग रजनीश श्रीवास्तव कमिश्नर, शहडोल संभागआबकारी आयुक्त, ग्वालियर बी. चंद्रशेखर सचिव, मुख्यमंत्री तथा मिशन संचालन सामाजिक सुरक्षा सचिव मुख्यमंत्री तथा ईडी लोक सेवा प्रबंधन श्रीकांत पांडेअपर प्रबंध संचालक, टूरिज्म बोर्डकलेक्टर, देवास नंदकुमारमउप सचिव, मुख्यमंत्रीएमडी, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर मनीष सिंहकमिश्नर, इंदौरनगर निगम कलेक्टर, उज्जैनतनवी सुन्द्रियालअवकाश से लौटने परएमडी, एमपीएसईडीसी आशीष सिंह कलेक्टर, देवासकमिश्नर, इंदौर नगर निगम

संजय दुबे को श्रम विभाग क्यों 


चुनाव से पहले सरकार की डेढ़ करोड़ असंगठित कामगारों पर नजर 
श्रम विभाग के तहत प्रदेश में डेढ़ करोड़ असंगठित कामगारों के रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है। सीएम का मानना है कि यदि असंगठित श्रमिकों तक सरकार अपनी बात पहुंचाती है तो उसे अगले चुनाव में सत्ता में आने से कोई नहीं रोक सकता। इसी के तहत संजय दुबे को श्रम विभाग में लाया गया है। 


 


वर्णवाल को तकनीकी शिक्षा विभाग का दायित्व 
मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल को तकनीकी शिक्षा विभाग का दायित्व सौंपा गया है, जिसके तहत मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना का लाभ विद्यार्थियों को दिया जाना है। 


 


जेके जैन को शहडोल कमिश्नर की जिम्मेदारी 
राज्य सरकार ने 18 आईएएस अफसरों के ट्रांसफर किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शहडोल संभाग के कमिश्नर रजनीश श्रीवास्तव की नई पोस्टिंग आबकारी आयुक्त ग्वालियर के पद पर की गई है, उनके स्थान पर जेके जैन को शहडोल कमिश्नर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री के उप सचिव नंदकुमारम का ट्रांसफर पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर में किया गया है। उनकी पत्नी छवि भारद्वाज को कुछ दिन पहले ही जबलपुर कलेक्टर बनाया गया है। 


 


राजौरा को उद्यानिकी का अतिरिक्त प्रभार 
केके सिंह द्वारा वन विभाग के एसीएस का पदभार ग्रहण करने पर दीपक खांडेकर एसीएस सिर्फ वन विभाग के प्रभार से मुक्त होंगे। खांडेकर आर्थिक एवं सांख्यिकी के अपर मुख्य सचिव तथा अध्यक्ष प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड बने रहेंगे। इसी तरह अश्विनी कुमार राय के प्रमुख सचिव मछुआ कल्याण विभाग का पीएस बनने पर एसीएस वीसी सेमवाल सिर्फ मछुआ कल्याण विभाग के कार्यभार से मुक्त होंगे। राजेश राजौरा प्रमुख सचिव कृषि विभाग के साथ उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। संजय बंदोपाध्याय प्रमुख सचिव के अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का कार्यभार ग्रहण करने पर कल्पना श्रीवास्तव इस विभाग के प्रभार से मुक्त होंगी। केसी गुप्ता प्रमुख सचिव सहकारिता को आयुक्त सहकारी संस्थाएं का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 


salary demo 29 04 2018मंथन न्यूज़ भोपाल -प्रदेश के तीन लाख शिक्षकों को सातवें वेतनमान के एरियर की पहली किस्त मई में नहीं मिल पाएगी। दरअसल, इन शिक्षकों की सर्विस बुक पिछले दो-तीन साल से अपडेट नहीं हुई है। इस कारण एरियर की राशि के फिक्सेशन का सत्यापन मुश्किल हो रहा है। ऐसी स्थिति को देखकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में पदस्थ बाबुओं ने जोड़-तोड़ शुरू कर दी है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने प्रदेश के नियमित कर्मचारियों को एक जनवरी 2016 से सातवें वेतनमान का लाभ दिया है। सरकार सितंबर 2017 तक की राशि एरियर्स के रूप में देगी। इसकी पहली किस्त मई 2018 में दी जाना है। वर्तमान में प्रदेश में तीन लाख से ज्यादा नियमित शिक्षक हैं।
इनमें से ज्यादातर की सर्विस बुक अपडेट नहीं हैं। इस कारण एरियर की राशि के भुगतान को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। वैसे तो सर्विस बुक ऑनलाइन है, लेकिन इसे अपडेट करने की जिम्मेदारी संकुल प्राचार्य की है, जो उन्होंने नहीं की है।
अब सातवें वेतनमान की एरियर राशि के फिक्सेशन का सत्यापन करने के लिए सर्विस बुक कोष एवं लेखा को भेजी जाना है। हालांकि सत्यापन ऑनलाइन हो सकता था, लेकिन सर्विस बुक अपडेट न होने के कारण विभाग को ये काम मैन्युअल करना पड़ेगा। इसमें भी जोड़-तोड़ होगा और सत्यापन में देरी भी होगी। इस कारण एरियर्स राशि खातों में जमा होने में देरी होगी।
यह है प्रक्रिया
सातवें वेतनमान के आदेश जारी होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने नए वेतनमान और एरियर राशि का फिक्सेशन कर दिया है। अब कोष एवं लेखा को फिक्सेशन का सत्यापन करना है। ये भी गलत फिक्सेशन की आशंका के चलते किया जाता है। ऑनलाइन सत्यापन में यह प्रक्रिया आसान हो जाती।
अफसरों की लापरवाही
अधिकारियों की लापरवाही के कारण ये स्थिति निर्मित हो रही है। अफसर खुद का काम समय पर पूरा नहीं करते और शिक्षकों को दोष देते हैं। इससे एरियर राशि खातों में जमा होने में देरी होगी। 
- आशुतोष पाण्डेय, कर्मचारी नेता

peb exam mp news 2018430 73657 29 04 2018मंथन न्यूज़ भोपाल - प्रदेश में करीब 20 साल बाद पटवारी, राजस्व निरीक्षक और लिपिकों को सीधे नायब तहसीलदार बनने का मौका मिलेगा। राजस्व विभाग ने विभागीय परीक्षा लेकर इन्हें नायब तहसीलदार बनाने के लिए प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) को परीक्षा कराने का प्रस्ताव भेजा है। इस प्रक्रिया के जरिए सीधे डेढ़ सौ से ज्यादा पदों पर नायब तहसीलदार के पद भरे जाएंगे।
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने नायब तहसीलदार के पदों को भरने के लिए पटवारी, राजस्व निरीक्षक, कमिश्नर, कलेक्टर, भू-अभिलेख और राजस्व मंडल के लिपिकों को सीधे पदोन्न्त करने का फैसला किया है। इसके लिए विभागीय तौर पर परीक्षा ली जाएगी।
यह परीक्षा विभाग न लेकर पीईबी से कराएगा। इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है। यदि बोर्ड तैयार नहीं होता है तो फिर एमपी ऑनलाइन के जरिए भी परीक्षा कराई जा सकती है। प्रमुख राजस्व आयुक्त ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर अधीनस्थ कर्मचारियों को इसकी जानकारी देने के लिए कहा है।

akhilesh yadav mp 29 04 2018मंथन न्यूज़ भोपाल -मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में सर्वे शुरू करा दिया है। प्रदेश के सभी 51 जिलों में उत्तरप्रदेश के नेताओं को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा जा रहा है। 1 से 7 मई तक ये नेता मैदानी स्तर पर पार्टी की स्थितियों का आकलन करेंगे।
सपा के लखनऊ केन्द्रीय कार्यालय ने मप्र के सभी जिलों में उप्र के नेताओं को प्रभारी बनाया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन सभी प्रभारियों को 1 से 7 मई तक हर जिले के अंतर्गत आने वाली विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की जमीनी हकीकत की रिपोर्ट तलब की है। ये सभी प्रभारी स्थानीय नेताओं और समाज के सभी वर्गों से बातचीत कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे।
सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी सिंह यादव ने बताया कि सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट आने के बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ बैठक में अगली रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बसपा से गठबंधन पर चर्चा चल रही है। कांग्रेस से अभी इस बारे में कोई बात नहीं हुई।
यादव ने बताया कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने सपा समान विचार वाले सभी दलों से गठबंधन का विकल्प खुला रखेगी। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी सभी सीटों पर पूरी ताकत से चुनाव की तैयारी कर रही है। इसके बाद सपा विधानसभा चुनाव की रणनीति पर काम करेगी। 

मंथन न्युज भोपाल-प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती सवालों के घेरे में है। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 76 पदों के लिए हुए साक्षात्कार में आइएएस, विभागाध्यक्षों, प्रोफेसर्स और बड़े चिकित्सकों के बेटा-बेटी तथा बहू का चयन कर लिया गया। प्रदेश के कुछ कॉलेजों में भर्ती कर ली गई है तो कुछ में इसकी तैयारी चल रही है।

एमसीआइ के नियमों के मुताबिक भर्ती में उस संस्थान में काम कर रहे योग्य अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जानी है, लेकिन ज्यादातर कॉलेजों ने खुली भर्ती कर चहेतों के चयन का रास्ता खोज लिया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस राधेश्याम जुलानिया ने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों को भर्ती नियमों की जानकारी दी थी।

इसमें कहा था कि पहले संस्था स्तर पर ही नियुक्ति की जाएगी। न्यूनतम एक साल तक सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य करना अनिवार्य होगा। प्रदेश के ज्यादातर कॉलेजों ने अपने हिसाब से विज्ञापन जारी कर दिए।
गा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे समझे फर्जीवाड़े का फायदा


एमजीएम मेडिकल कॉलेज में शनिवार तक चले साक्षात्कार के बाद बनी चयन सूची में कॉलेज और शहर के लगभग सभी प्रमुख चिकित्सकों के रिश्तेदारों के नाम हैं। कॉलेज डीन डॉ. शरद थोरा के बेटे अंकित का हड्डी रोग और बहू आकांक्षा का महिला रोग एवं प्रसूति विभाग में चयन किया गया है।


आईएएस अफसरों के बच्चों में मिताक्षरा शर्मा और प्रियंका कियावत का नाम है। दंपती डॉक्टर डॉ. राजकुमार माथुर और डॉ. पूनम माथुर के बेटे राहत का मानसिक रोग विभाग और बेटी पूजा माथुर का महिला रोग व प्रसूति विभाग में चयन हुआ है। डॉ. अशोक वाजपेयी, डॉ. आरके मूंदड़ा, डॉ. प्रदीप भार्गव के बेटा-बेटी और बहू का नाम भी चयन सूची में है।रा जधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापकों के 51 और डेमोंस्ट्रेटर के 16 पदों पर नियुक्ति की जानी है।


यहां मेडिकल कॉलेजों में पहले से कार्यरत प्राध्यापकों और वरिष्ठ अधिकारियों के रिश्तेदारों को नियुक्त करने की कवायद चल रही है। बाहरी लोगों के लिए भी पात्रता होने से निजी मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे अभ्यर्थियों को नियुक्त करने की तैयारी है। ऐसे में सीटों की खरीदी बिक्र ी होने के भी आरोप लगने शुरू हो गए हैं। शिवपुरी और दतिया मेडिकल कॉलेजों में भर्ती के दौरान जमकर गड़बडिय़ां हुई हैं।


शिवपुरी में अभी तक 54 पदों पर नियुक्ति हो चुकी है। इनमें ग्वालियर और इटावा के अलावा झारखंड और अन्य राज्यों के डॉक्टरों की भी भर्ती कर दी गई। नियुक्त हुए ज्यादातर अभ्यार्थियों में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के हैं।  इनमें 8 लोग बाहर के हैं, जो बड़े अधिकारियों के रिश्तेदार हैं।राज्यमंत्री शरद जैन ने कहा, भर्ती के लिए नियमों में बदलाव की जानकारी नहीं है। अगर किसी मेडिकल कॉलेज में ऐसा हुआ है, तो जो भी दोषी हो।


मंथन न्युज मध्यप्रदेश के धार जिला अस्पताल में आरक्षकों के चयन के मामले में एक बहुत ही गंभीर मामला सामने आया है. यह मामला जिला अस्पताल का है, जहां नवआरक्षकों की भर्ती के लिेए आए अभ्यर्थी मेडिकल टेस्ट के लिए पहुंचे थे.

नई दिल्लीः मध्यप्रदेश के धार जिला अस्पताल में आरक्षकों के चयन के मामले में एक बहुत ही गंभीर मामला सामने आया है. यह मामला जिला अस्पताल का है, जहां नवआरक्षकों की भर्ती के लिए आए अभ्यार्थियों मेडिकल टेस्ट के लिए पहुंचे थे. इस दौरान धार के जिला अस्पताल के अधिकारी और पुलिस विभाग के कर्मचारी भी मौजूद थे. इस परीक्षण के दौरान सभी अभ्यर्थियों के सीने पर उनकी जातियों को उल्लेखित कर दिया गया. इस मामले के सामने आते ही हर कोई हैरान है कि मेडिकल परीक्षण के दौरान ऐसा करने की क्या जरूरत आन पड़ी.


महिला आरक्षकों के मेडिकल टेस्ट के दौरान हुई थी गलती
दरअसल, धार जिले में पिछले दिनों कॉन्सेटबल के पद के लिए भर्ती के लिए आए अभ्यार्थियों की पहचान के लिए जिला अस्पताल ने अभ्यार्थियों के सीने पर एससी-एसटी लिख दिया और जैसे ही ये खबर फैली प्राशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है. अधिकारी अब इस मामले की जांच और दोषियों पर कार्यवाई करने की बात कह रहे हैं. दरअसल, अस्पताल प्रबंधन ने ऐसा, कुछ समय पहले महिला आरक्षक की ऊंचाई नापने में हुई गड़बड़ी को ध्यान में रखते हुए किया है. आरक्षित वर्ग की ऊंचाई नापने में कोई गड़बड़ न हो इसलिए अलग-अलग वर्ग के अभ्यर्थियों के सीने पर उनकी जाती उल्लेखित कर दी गई.

अभ्यार्थियों की पहचान के लिए लिख दी जाति
बता दें कि सामान्य और दूसरे पिछड़ा वर्ग के लिए 168 सेमी और एससी-एसटी के लिए 165 सेमी की ऊंचाई निर्धारित की गई है. ऐसे में भीड़ के चलते ऊंचाई मापने में कोई गलती न हो इसलिए मेडिकल टेस्ट करने वाली टीम ने अभ्यार्थियों के सीने पर जाती सूचक निशान बना दिया. इस निशान को बनाने का कारण ये भी था कि सभी अभ्यार्थियों कि उनकी जाति के आधार पर उनकी पहचान हो सके और इसी के आधार पर उनका मेडिकल टेस्ट किया जा सके.
जल्द की जाएगी कार्यवाई
मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और वहीं जिला एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने भी मामले में दोषी लोगों पर कार्यवाई करने की बात कही है. स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि मामले में जो भी लोग दोषी हैं उन पर कड़ी कार्यवाई की जाएगी.


मंथन न्युज भोपाल-

भोपाल। सुनिश्चित किया गया है कि अब मध्यप्रदेश के मंत्री विधानसभा में प्रश्नों या चर्चा के जवाब में आश्वासन नहीं देंगे। फिलहाल 2500 आश्वासन लंबित हैं। इनमें सबसे ज्यादा सीएम शिवराज सिंह के हैं। चुनावी साल में मंत्रियों को सिखाया जा रहा है कि प्रश्नों के जवाब में किस तरह के शब्दों का उपयोग करें कि वो आश्वासन ना बन जाएं। मंत्रियों को सलाह दी गई है कि वो आश्वासन देने से बचें। संसदीय कार्य विभाग की प्रमुख सचिव वीरा राणा की ओर से सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों/प्रमुख सचिवों/सचिवों को भेजे गए इस नए फरमान में कहा गया है कि विभागीय अधिकारी सवालों को ध्यान से पढ़ें तो आश्वासनों की संख्या में काफी कमी आ सकती है। फरमान में समझाया है कि विधानसभा को भेजे जाने वाले उत्तर या जानकारी को तैयार करते समय 34 प्रकार की शब्दावली से बचें जिससे आश्वासन देने से बचा जा सकता है

ये विषय विचारणीय है.. 

मैं उनकी छानबीन करूंगा... 

पूछताछ की जा रही है.... 

मैं केन्द्र सरकार को लिखूंगा... 

रियायतें दी जाएंगी..

विधिवत कार्रवाई की जाएगी... 

प्रारंभिक जांच करवा ली जाएगी... 

मैं समझता हूं, ये किया जा सकता है... 

हमें इसका पता लगाना होगा... 

सरकार को इस विषय पर पत्र लिखा जाएगा.... 

मध्यप्रदेश विधानसभा में अब मंत्री ऐसे 10 नहीं बल्कि 34 वाक्यों से तौबा करेंगे। सरकार ने उन्हें पाठ दिया है कि विधायकों के सवाल के जवाब कैसे देंगे।

हालांकि सरकार का कहना है कि कंप्यूटर प्रणाली में जाने और लिखित जवाब में भ्रम की स्थिति की वजह से ये खत भेजा गया है। संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा पहले जो मंत्री सदन में आश्वासन देता था वो आश्वासन की श्रेणी में आता था। अब जब कंप्यूटर प्रणाली आ गई तो जो जवाब लिखित हैं, तारांकित, चर्चा में नहीं आते, वे भी आश्वासन में लिए गए, तब उसे दूर करने पत्र लिखा गया है।

यह तो लोकतंत्र की हत्या है 

कांग्रेस इसे लोकतंत्र की हत्या बता रही है। नेता विपक्ष अजय सिंह का कहना है कि लोकतंत्र पर हमला नहीं, हत्या होने वाली है ... मैं निजी तौर पर इसका विरोध कर रहा हूं। उम्मीद है सरकार ये सर्कुलर वापस लेगी। जवाब में नरोत्तम मिश्रा ने कहा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं रोकी गई है। बीजेपी है ये इमरजेंसी लगाने की सोच नहीं सकती। जिस पार्टी ने इमरजेंसी लगाई, वो ऐसा कह रही है।

       

कुछ महीने पहले मध्यप्रदेश विधानसभा के फैसले पर खूब विवाद हुआ था जिसमें कहा गया था कि अधिसूचना के जारी होने के बाद विधायक अब उस मामले में सवाल नहीं पूछ सकेंगे। इसके लिए सरकार ने कोई कमेटी गठित कर दी है.. विरोध के बाद उसे वापस ले लिया गया था। बताया जा रहा है कि सदन के अंदर सरकार के 2500 से ज्यादा आश्वासन लंबित हैं, जिसमें सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हैं।

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